
कॉफी पीना हमेशा से सुबह की दिनचर्या का हिस्सा रहा है, लेकिन हाल के दिनों में एक नया इंग्रीडिएंट कॉफी के कप में अपनी जगह बना रहा है—मशरूम (Mushroom Coffee explained in hindi)। लायंस मेन, रीशी, चागा और कॉर्डिसेप्स जैसे मशरूम अब सिर्फ खास तरह के वेलनेस ड्रिंक तक सीमित नहीं हैं। मशरूम कॉफी सोशल मीडिया से लेकर सुपरमार्केट की शेल्फ तक आसानी से नजर आने लगी है। इसे लेकर किए जाने वाले दावे भी काफी आकर्षक हैं—बेहतर फोकस, ज्यादा एनर्जी, कम स्ट्रेस और कई हेल्थ बेनिफिट्स, वो भी आपकी रोजाना की कॉफी की आदत को बदले बिना। लेकिन अपनी रोज की कॉफी की जगह मशरूम पाउडर वाली कॉफी लेने से पहले कुछ सवाल पूछना जरूरी है। आखिर एक कप में आपको वास्तव में क्या मिल रहा है? क्या कॉफी में मिलाने और प्रोसेस करने के बाद भी ये मशरूम वही फायदे देते हैं? और इन सभी हेल्थ क्लेम्स को लेकर रिसर्च क्या कहती है?
मशरूम कॉफी क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है?

मशरूम कॉफी सुनने में जितनी अजीब लगती है, असल में यह उतनी अलग नहीं है। आप अपनी सुबह की कॉफी में ताजे मशरूम नहीं डाल रहे होते हैं। इसके बजाय, इसे आमतौर पर रेगुलर कॉफी में मेडिसिनल मशरूम के पाउडर या एक्सट्रैक्ट मिलाकर बनाया जाता है। इसमें आमतौर पर लायंस मेन, रीशी, चागा, कॉर्डिसेप्स और टर्की टेल जैसे मशरूम इस्तेमाल किए जाते हैं, हालांकि अलग-अलग प्रोडक्ट्स में इनका मिश्रण अलग हो सकता है।
आमतौर पर मशरूम को सुखाकर और प्रोसेस करके उनमें मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स निकाले जाते हैं। इसके बाद इन्हें बारीक पाउडर में बदल दिया जाता है। फिर इस पाउडर को ग्राउंड कॉफी के साथ मिलाया जाता है। कई प्रोडक्ट्स में कॉफी और मशरूम पाउडर लगभग बराबर मात्रा में होते हैं, लेकिन हर ब्रांड के लिए कोई एक तय फॉर्मूला नहीं है। ये ब्लेंड इंस्टेंट कॉफी सैशे, ग्राउंड कॉफी या पॉड्स के रूप में मिल सकते हैं और इन्हें भी आम कॉफी की तरह ही तैयार किया जा सकता है।
इसका स्वाद भी आमतौर पर बहुत ज्यादा अलग नहीं होता। इस्तेमाल किए गए मशरूम के आधार पर आपको इसमें हल्का नट्स जैसा स्वाद महसूस हो सकता है, लेकिन कॉफी का स्वाद ही मुख्य रूप से बना रहता है। सबसे जरूरी बात यह है कि मशरूम कॉफी अभी भी मुख्य रूप से कॉफी ही होती है, जिसमें मशरूम के एक्सट्रैक्ट मिलाए जाते हैं।
कितनी कैफीन मिलती है?

मशरूम कॉफी को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि इसमें बिल्कुल कैफीन नहीं होती। ऐसा नहीं है। क्योंकि इसका बेस अभी भी रेगुलर कॉफी बीन्स होती हैं, इसलिए इसमें कैफीन मौजूद होती है। हालांकि, कॉफी ग्राउंड्स को लगभग 50:50 अनुपात में मशरूम पाउडर के साथ मिलाया जाता है, इसलिए आपके सुबह के एक कप में आम कॉफी की तुलना में लगभग आधी कैफीन होती है।
जहां एक सामान्य मग कॉफी में 100 मिलीग्राम से ज्यादा कैफीन हो सकती है, वहीं ज्यादातर मशरूम कॉफी ब्लेंड्स में लगभग 50 मिलीग्राम कैफीन होती है। ऐसे लोगों के लिए, जिन्हें सुबह गर्म कॉफी पीने की आदत तो पसंद है, लेकिन तेज धड़कन, दिन में घबराहट या दोपहर बाद होने वाली थकान पसंद नहीं है, उनके लिए कैफीन की यह कम मात्रा सही हो सकती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सप्लीमेंट इंडस्ट्री पर बहुत सख्त नियम लागू नहीं होते। इसलिए कई ब्रांड पैकेज पर कैफीन की सटीक मात्रा नहीं बताते। अगर आपको कैफीन से जल्दी असर होता है, तो कॉफी बनाने से पहले लेबल को ध्यान से जरूर पढ़ें।
मशरूम कॉफी के संभावित फायदे क्या हैं?
मशरूम कॉफी में दिलचस्पी की एक बड़ी वजह इसमें मिलाए जाने वाले मशरूम के कंपाउंड्स हैं। इस्तेमाल किए गए ब्लेंड के आधार पर इनमें बीटा-ग्लूकेन्स, पॉलीफेनॉल्स, कॉर्डिसेपिन और दूसरे बायोएक्टिव कंपाउंड्स हो सकते हैं। इन कंपाउंड्स पर इनके एंटीऑक्सीडेंट और शरीर पर होने वाले जैविक प्रभावों को लेकर रिसर्च की गई है। लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए—मशरूम कॉफी में इन कंपाउंड्स का मौजूद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि इसे पीने से आपकी सेहत बेहतर होगी। खुद मशरूम कॉफी को लेकर इंसानों पर की गई रिसर्च अभी सीमित है [1,2]।
2020 की एक स्टडी में कॉर्डिसेप्स, फेलिनस और चागा एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल करके एक तरह की कॉफी तैयार की गई। इसमें पॉलीफेनॉल्स, बीटा-ग्लूकेन्स और कॉर्डिसेपिन मौजूद पाए गए। लैब टेस्ट में इसमें एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी भी देखी गई, जिससे पता चलता है कि मशरूम एक्सट्रैक्ट कॉफी में बायोएक्टिव कंपाउंड्स जोड़ सकते हैं [1]। एक अन्य स्टडी में पाया गया कि कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस और लायंस मेन को कॉफी में मिलाने से कई कंपाउंड्स का लेवल बढ़ गया, जिसमें कुछ खास फेनोलिक एसिड्स और मिनरल्स भी शामिल थे [2]।
इस सब से एक अच्छी उम्मीद तो मिलती है, लेकिन यह साबित नहीं होता कि मशरूम कॉफी इम्यूनिटी, ब्रेन फंक्शन, एनर्जी या लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में मदद करती है। इन दावों का आधार मुख्य रूप से अलग-अलग मशरूम या उनके एक्सट्रैक्ट पर की गई रिसर्च है, न कि उस कॉफी पर की गई क्लिनिकल स्टडी जिसे लोग वास्तव में पीते हैं [1,2]। फिलहाल, मशरूम कॉफी को एक्स्ट्रा बायोएक्टिव कंपाउंड्स का संभावित स्रोत कहना ज्यादा सही होगा, न कि इसे एक साबित हो चुका हेल्थ ड्रिंक मानना।
मशरूम कॉफी के संभावित नुकसान और किन लोगों को इसे नहीं लेना चाहिए?

मशरूम कॉफी आमतौर पर आसानी से पच जाती है और ज्यादातर लोगों को इससे कोई खास परेशानी नहीं होती। लेकिन डाइट में कॉन्संट्रेटेड मशरूम एक्सट्रैक्ट शामिल करना पूरी तरह संभावित जोखिम से मुक्त भी नहीं है। एक चिंता इस्तेमाल किए जाने वाले मशरूम के प्रकार और उसकी मात्रा को लेकर भी है। उदाहरण के लिए, चागा में ऑक्सलेट्स की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। कुछ प्रकाशित केस रिपोर्ट्स में ऐसे लोगों के मामले सामने आए हैं, जिन्हें कई महीनों या सालों तक नियमित रूप से ज्यादा मात्रा में चागा पाउडर लेने के बाद किडनी को गंभीर नुकसान हुआ। इसका मतलब यह नहीं है कि कभी-कभार चागा वाली कॉफी पीने से किडनी की समस्या हो जाएगी, लेकिन किडनी की बीमारी या किडनी स्टोन की हिस्ट्री वाले लोगों के लिए सावधानी बरतने की यह एक वजह जरूर है।
दूसरी बात कैफीन को लेकर है। मशरूम कॉफी में अभी भी कैफीन होती है, इसलिए अगर कॉफी पीने से आपको पहले से नींद खराब होने, एंग्जायटी या दिल की धड़कन तेज होने जैसी परेशानियां होती हैं, तो यह आपके लिए सही विकल्प नहीं हो सकती। अलग-अलग प्रोडक्ट्स में कैफीन की मात्रा भी काफी अलग हो सकती है।
अगर आप कोई रेगुलर दवा लेते हैं या आपको पहले से कोई मेडिकल कंडीशन है, तो मशरूम एक्सट्रैक्ट को रोजाना अपनी डाइट का हिस्सा बनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। और अगर आप इसे ट्राई करते हैं, तो यह मानने के बजाय कि ज्यादा मात्रा से ज्यादा फायदे मिलेंगे, शुरुआत कम मात्रा से करें।
निष्कर्ष

मशरूम कॉफी को वेलनेस ट्रेंड और डाइट में होने वाले संभावित बदलाव, दोनों के बीच रखा जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस दावे को देख रहे हैं। लायंस मेन और कॉर्डिसेप्स को लेकर कुछ शुरुआती रिसर्च मौजूद हैं। वहीं, चागा और रीशी के मामले में अभी उपलब्ध सबूत मुख्य रूप से लैब और शुरुआती स्तर की रिसर्च तक सीमित हैं, न कि इंसानों में साबित हुए नतीजों तक। एक बात साफ है कि इनमें से किसी भी मशरूम का खास तौर पर कॉफी के रूप में टेस्ट नहीं किया गया है। इसलिए जिन फायदों की आप उम्मीद कर रहे हैं, जरूरी नहीं कि कॉफी बनाने की प्रक्रिया के बाद भी वे उसी तरह बने रहें। अगर आपका मुख्य उद्देश्य कम कैफीन और एक नया स्वाद आजमाना है, तो इसे ट्राई किया जा सकता है। लेकिन अगर आप इससे किसी बीमारी के इलाज की उम्मीद कर रहे हैं, तो साबुत मशरूम ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मशरूम कॉफी में वास्तव में मशरूम होते हैं?
हां। ज्यादातर मशरूम कॉफी ब्लेंड्स में लायंस मेन, रीशी, चागा या कॉर्डिसेप्स जैसे मेडिसिनल मशरूम के पाउडर या एक्सट्रैक्ट होते हैं।
क्या मशरूम कॉफी कैफीन-फ्री होती है?
नहीं। मशरूम कॉफी में आमतौर पर कैफीन होती है, क्योंकि इसे मशरूम एक्सट्रैक्ट को रेगुलर कॉफी के साथ मिलाकर बनाया जाता है।
क्या मशरूम कॉफी में रेगुलर कॉफी से कम कैफीन होती है?
अक्सर हां। कई मशरूम कॉफी ब्लेंड्स में कैफीन की मात्रा कम होती है, लेकिन इसकी सटीक मात्रा अलग-अलग प्रोडक्ट्स में अलग हो सकती है।
क्या मशरूम कॉफी से किडनी स्टोन हो सकता है?
हां, चागा वाले कुछ ब्लेंड्स में ऑक्सलेट्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो किडनी स्टोन के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
किन लोगों को मशरूम कॉफी से बचना चाहिए?
जिन लोगों को किडनी से जुड़ी समस्या है, किडनी स्टोन का खतरा है, किसी तरह की एलर्जी है या कोई खास मेडिकल कंडीशन है, उन्हें मशरूम कॉफी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
References
1-Song HN. Functional Cordyceps Coffee Containing Cordycepin and β-Glucan. Prev Nutr Food Sci. 2020;25(2):184-193. doi:10.3746/pnf.2020.25.2.184.
2- Kała K, Cicha-Jeleń M, Hnatyk K, et al. Coffee with Cordyceps militaris and Hericium erinaceus Fruiting Bodies as a Source of Essential Bioactive Substances. Pharmaceuticals (Basel). 2024;17(7):955. doi:10.3390/ph17070955.\
(यह लेख दीक्षित राजपूत , Executive (Ayurveda and Multilingual Content) द्वारा लिखा गया है और इसकी समीक्षा डॉ. स्वाति मिश्रा, मेडिकल एडिटर ने की है)
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