Home  »  Hindi   »   क्या झड़े हुए बाल वापस आ सकते हैं?

क्या झड़े हुए बाल वापस आ सकते हैं?

Is it possible to regrow hair

जब बाल झड़ने लगते हैं तब झड़े हुए बालों को देखकर सबसे पहला सवाल जो हमारे दिमाग में आता है, वह ये है कि क्या झड़े हुए बाल वापस आ सकते है?  इसके लिए सबसे पहले ये बात जानना जरूरी होता है कि बाल क्यों झड़ रहे हैं? क्योंकि बाल बहुत सारे कारणों से झड़ते हैं, जैसे- बीमारियां , ब्यूटी ट्रीटमेंट ,आनुवांशिकता (हेरेडिटरी), डायट, तरह-तरह के घरेलू नुस्खें आजमाना आदि।

बाल संबंधी ऐसे ही सारे सवालों का जवाब डॉ. साक्षी श्रीवास्तव, डर्माटोलॉजिस्ट दे रही हैं। वैसे तो बालों को स्वस्थ रखने के लिए उनका देखभाल करना बहुत जरूरी होता है। थोड़ी-सी भी लापरवाही बालों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

सही डायट लेने से फिर से क्या नए बाल आ सकते हैं

संतुलित और पौष्टिक आहार बालों के लिए बहुत जरूरी होता है। क्योंकि समय की कमी के वजह से आजकल फास्ट फूड, तेलयुक्त खाना, मसालेदार खाना लोग ज्यादा खाते हैं। जिनका सीधा असर बालों पर पड़ता है। पौष्टिकता की कमी बालों की संरचना और विकास दोनों को प्रभावित करता है। इसके अलावा सब लोग वेट लॉस करने के पीछे दौड़ रहे हैं, इसके लिए बिना डॉक्टर के सलाह के लोग खुद से अपना डायट निर्धारित करते हैं, जिसका फल बालों को भुगतना पड़ता है। साथ ही प्रोटीन की कमी से टेलोजेन एफ्लूभियम होने की संभावना रहती है, जो बालों के झड़ने का मूल कारण होता है। उसी तरह नियासिन की कमी से एलोपेशिया के आसार भी नजर आने लगते हैं। क्योंकि डायट में  विटामिन ई, विटामिन ए, विटामिन डी, सेलेनियम, आयरन, जिंक, नियासिन, फैटी एसिड्स, बायोटिन, एन्टीऑक्सिडेंट आदि की कमी बाल झड़ने के मुख्य कारण होते हैं [1]।

बालों को पौष्टिकता देने के लिए अपने रोज के आहार में चना, राजमा, अंडा, मीट, फल, सब्जी, दाल, अखरोट, आलमंड, ओट्स, ब्रोक्ली, गाजर आदि शामिल करना चाहिए। यानि डॉक्टर ने अगर बाल झड़ने का कारण डायट में पौष्टिकता की कमी बताया है तो आहार में ये सब शामिल करने से बाल का झड़ना कम हो जाता है और बालों की स्थिति बेहतर होती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि संतुलित आहार लेने से पतले बाल के रेशे मोटे हो जायेंगे या घने हो जायेंगे। सिर्फ बालों के सेहत में सुधार आ जायेगा।

उचित दामों में अच्छी क्वालिटी वाले विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट अब 1mg से खरीदें। खरीदने के लिए यहां क्लिक करें।

-ब्यूटी ट्रीटमेंट या हेयर स्टाइल

आजकल बालों को हमेशा नया लुक देने की होड़ सी लगी रहती है। बालों में तरह-तरह का कलर लगाना, हेयर ट्रेसिंग, हेयर स्ट्रेटनिंग, हेयर सेटिंग, जैसे चीजों का इस्तेमाल करने से भी वह झड़ने लगते हैं। यहां तक कि कुछ लोग हर दिन विज्ञापन देखकर नये-नये शैंपू का इस्तेमाल करते हैं, उससे भी केश कूप (हेयर फॉलिकल्स) को नुकसान पहुँचता है। शायद आपको पता नहीं कि हेयर ड्रायर के रोजाना इस्तेमाल से भी बालों को नुकसान पहुँचता है और उनका हेयर के क्वालिटी पर असर पड़ता है। इसलिए इन चीजों से जितना दूर रहेंगे उससे बालों को कम नुकसान पहुँचेगा। बालों का झड़ना कम करने के लिए सिरम या कंडीशनर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

लेकिन इनके इस्तेमाल से अगर बालों के भीतरी संरचना जो मूल होता है, उसको नुकसान पहुँचा है तो फिर से बाल अपने पुराने अवस्था में नहीं आ सकते हैं या नए बाल नहीं उगेंगे।

-ज्यादा देर धूप में रहना

शायद आपको पता नहीं कि सूर्य के किरणों में जो अल्ट्रावायलट रे  होता है वह बालों को बहुत नुकसान पहुँचाते हैं। क्योंकि ये बालों के केराटिन जो प्रोटीन होता है उसको नुकसान पहुँचाते है। इसके लिए बाहर निकलने के समय स्कार्फ बांध सकते हैं या छाता का इस्तेमाल कर सकते हैं इससे बालों को धूप से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। लेकिन बालों के विकास के आखिरी चरण टेलोजेन को अगर नुकसान पहुँच गया तो फिर से नए बाल आना मुश्किल होता है। प्रोटीन युक्त डायट और कंडीशनर लगाने से बालों को जो नुकसान हुआ है उससे कुछ हद तक बालों को बचाया जा सकता है।

-प्रसव के बाद (पोस्ट प्रेगनेंसी)  बालों का झड़ना

प्रेगनेंसी के दौरान बालों के उगने से लेकर झड़ने तक जो विकास की प्रक्रिया होती है उसमें बदलाव आता है। यानि इस दौरान बाल गिरते नहीं है इसलिए घने नजर आते हैं। लेकिन डिलीवरी के बाद जब शरीर में हार्मोन्स का बदलाव होता है तब ये बाल जो प्रेगनेंसी के दौरान गिरे नहीं थे वे गिरने लगते हैं। इसके लिए चिंता करने की जरूरत नहीं कुछ महीनों के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है और बालों के उगने की प्रक्रिया पहले की तरह होने लगती है। लेकिन इसके लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेनी बहुत जरूरी होती है।

-बीमारियां

कभी-कभी अचानक बाल बहुत झड़ने लगते हैं और वजह समझ में नहीं आता। क्योंकि कुछ बीमारियां ऐसी होती है जिनका सीधा असर बालों पर पड़ता है जैसे-  उच्च रक्तचाप, मधुमेह(डायबिटीज), अवटुग्रंथी (थॉयरायड) , डेंगू, मलेरिया, ऑटो इम्युन डिजीज,तनाव (स्ट्रेस), अवसाद (डिप्रेशन) आदि। इसलिए इनके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर की सलाह लेकर उनको नियंत्रण में लाने से बालों का झड़ना कम किया जा सकता है और स्थिति बेहतर होने पर धीरे-धीरे नए बाल उग सकते हैं।

-आनुवांशिकता

आनुवांशिकता भी प्रमुख कारणों में से आता है। क्योंकि अगर परिवार में किसी को गंजापन या बालों की समस्या है तो उसका प्रभाव बालों पर भी पड़ता है जो बाद में बालों के झड़ने या गंजेपन का कारण बनता है। इसलिए जैसे बाल अधिक झड़ने लगे तुरन्त उसका कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। इससे कुछ हद तक बालों का गिरना रोका जा सकता है, लेकिन नए बालों का आना संभव नहीं होता है।

-प्याज के रस का घरेलू नुस्खा

प्याज के रस से बालों का झड़ना कम होता है या नए बाल उगते हैं इसके पीछे अब तक कोई प्रामाणिक तथ्य सामने नहीं आया है। क्योंकि बाल के झड़ने के पीछे बहुत सारे कारण होते हैं और हर वजह के लिए प्याज का रस काम करेगा, इस बात पर जोर नहीं दे सकते। इसलिए इसका कुछ दिनों का इस्तेमाल करके देख लें कि ये फायदेमंद हैं या बालों को नुकसान पहुँचा रहा है, तभी इसका इस्तेमाल करें।

-नारियल तेल से चंपी करने का घरेलू नुस्खा

ये मान्यता तो बरसों से चली आ रही है कि नारियल तेल से मसाज करने से बालों को बहुत फायदा पहुँचता है,जैसे बालों का झड़ना कम हो जाता है, नए बाल आ जाते हैं, बालों की खोई हुई रौनक लौट आती है आदि आदि। लेकिन डॉ. साक्षी की सलाह है कि हर किसी के लिए नारियल तेल फायदेमंद नहीं होता है। अगर आपके बाल तैलिय है तो नारियल तेल से और भी नुकसान पहुँचेगा। नारियल तेल सिर्फ शुष्क त्वचा वालों के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि ये बालों की खोई हुई नमी को लौटाता है लेकिन नए बालों के विकास में मदद करता है ऐसा कोई प्रामाणिक तथ्य अभी तक सामने नहीं आया है।

बाल झड़कर अगर गंजेपन की नौबत आ गई है तो घरेलू नुस्खों के पीछे समय बरबाद न करके डर्माटोलॉजिस्ट के पास जायें। वह आपके बाल और स्कैल्प को देखकर उसके हिसाब से दवा और ट्रीटमेंट बतायेंगे।

(इस लेख की समीक्षा डॉ. साक्षी श्रीवास्तव, डर्माटोलॉजिस्ट ने की है।)

संदर्भ

1-Guo EL, Katta R. Diet and hair loss: effects of nutrient deficiency and supplement use. Dermatol Pract Concept. 2017 Jan 31;7(1):1-10.

Facebook Comments

Related Articles