
ऑफिस में काम के बिजी शेड्यूल के दौरान डायबिटीज को मैनेज करना अक्सर बहुत मुश्किल हो जाता है। मीटिंग्स लंबी चलती हैं, लंच समय पर नहीं मिल पाता और काम का स्ट्रेस बढ़ जाता है। ऐसे में सही समय पर सही स्नैक चुनना और भी ज़रूरी हो जाता है।
डायबिटीज कंट्रोल के लिए न तो महंगे सुपरफूड्स की जरूरत होती है और न ही बेस्वाद डाइट स्नैक्स की। ज़रूरत ऐसे स्नैक्स की होती है जो ब्लड-शुगर को स्थिर रखें, खाने में अच्छे हों और ऑफिस की डेली लाइफ में आसानी से शामिल किए जा सकें। अच्छी बात यह है कि ऐसे स्नैक्स आसानी से उपलब्ध हैं और रिसर्च भी इनके फायदों को सपोर्ट करती है।
आइए जानते हैं ऐसे 8 डायबिटीज-फ्रेंडली ऑफिस स्नैक्स के बारे में (Diabetes friendly office snacks in hindi), जो सच में ब्लड-शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करते हैं।
1. भुने हुए चने, थोड़े से मसाले के साथ

भुने हुए चने प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह कॉम्बिनेशन (प्रोटीन और फाइबर का) शुगर को खून में तेजी से जाने से रोकता है। स्टडी बताती है कि हाई-फाइबर और हाई-प्रोटीन स्नैक्स, भोजन के बाद ब्लड-ग्लूकोज को अचानक तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं, और चना भी यह काम बहुत आसानी से कर देता है।
यह क्रंची होता है, पेट को भरा रखता है और सही मात्रा में खाने पर शुगर लेवल को भी कंट्रोल में रखता है।
ज्यादा फायदे और स्वाद के लिए आप इसमें थोड़ा जीरा-पाउडर या काली-मिर्च मिला सकते हैं। बाजार में मिलने वाले मीठे या शुगर कोटेड पैकेज़्ड चनों से बचें। सूखा भुना हुआ चना ही ज्यादा फायदेमंद होता है। एक मुट्ठी चने आपकी भूख को काबू में रखने और पेस्ट्री की क्रेविंग से बचाने के लिए काफी होते हैं।
इसके अलावा यह स्नैक हमें एक और फायदा पहुँचाता है, जिसके बारे में हम लोग अक्सर कम बात करते हैं। इन्हें धीरे-धीरे चबाना पड़ता है, और यह आदत अपने-आप में फायदेमंद है।
2. ग्रीक योगर्ट या घर की बनी गाढ़ी दही

घर की बनी दही या ग्रीक योगर्ट में प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स होते हैं। प्रोटीन ब्लड-शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है और प्रोबायोटिक्स गट-हेल्थ को सपोर्ट करते हैं, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी भी बेहतर होती है।
नियमित रूप से बिना शुगर वाली दही खाने से ग्लूकोज कंट्रोल बेहतर होता है।
अगर थोड़ा टेक्सचर चाहिए तो आप इसमें कटे हुए नट्स या बीज मिला सकते हैं। लेकिन फ्रूट फ्लेवर वाली रेडीमेड दही खाने से बचें। क्योंकि ये शुगर से भरपूर होती हैं।
यह स्नैक मिड-मॉर्निंग या लेट आफ्टरनून में अच्छा काम करता है। यह पेट को भरा रखता है, शुगर क्रेविंग को शांत करता है और इससे आपको खाने जैसे संतुष्टि भी मिलती है।
3. नमक और काली मिर्च के साथ उबला हुआ अंडा

अंडों में प्रोटीन भरपूर होता है और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लगभग नहीं के बराबर होती है। यही वजह है कि ये डायबिटीज के लिए एक बेहतरीन स्नैक हैं। संतुलित डाइट में अंडे भूख कम करने और इंसुलिन रेस्पोंस को बेहतर करने में मदद करते हैं।
घर से उबले हुए अंडे ले कर जाएं। ऑफिस में भूख लगने पर थोड़ा नमक और काली मिर्च डालकर धीरे-धीरे खाएं।
हो सकता है इसकी खुशबू की वजह से कोई आपसे थोड़ा मजाक करे, लेकिन आप मुस्कुराइए और खाइए 😁। आपकी ब्लड शुगर आपको धन्यवाद देगी।
यह स्नैक खासकर तब अच्छा रहता है, जब आपको चिड़चिड़ापन या कमजोरी महसूस होती है।
4. नट्स, लेकिन सीमित मात्रा में।

नट्स फायदेमंद हैं, लेकिन मात्रा का ध्यान जरूरी है।
बादाम, अखरोट, पिस्ता और मूंगफली में हेल्दी फैट, प्रोटीन और फाइबर होता है। रिसर्च से पता चलता है कि सीमित मात्रा में नट्स खाने से ग्लाइसेमिक कंट्रोल बेहतर होता है।
गलती तब होती है, जब लोग बिना सोचे-समझे खाते हैं। डेस्क पर नट्स की पूरी कटोरी भरकर रखना स्नैक्स नहीं, समस्या है।
एक बंद मुट्ठी जितनी मात्रा में नट्स रखें। कच्चे या सूखे भुने हुए। उनमें शुगर सिरप या चॉकलेट बिल्कुल न मिलाएं।
नट्स पाचन को धीमा करते हैं, जिससे शुगर स्पाइक नहीं होता और पेट देर तक भरा रहता है।
5. हम्मस के साथ वेजिटेबल स्टिक्स
सुनने में थोड़ा फैंसी लगता है, लेकिन इसे बनाने में पाँच मिनट भी नहीं लगते।
गाजर, खीरा और शिमला मिर्च के टुकड़े लें और साथ में हम्मस रखें। चने और तिल से बना हम्मस प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट से भरपूर होता है।
लो-ग्लाइसेमिक, फाइबर और फैट से भरपूर यह स्नैक ब्लड-शुगर को कंट्रोल में रखने में मदद करता है।
सब्ज़ियाँ पेट भरती हैं और हम्मस संतुष्टि देता है। इससे यह एहसास नहीं होता कि आप कुछ छोड़ रहे हैं।
हम्मस की मात्रा सीमित रखें—लगभग दो चम्मच हम्मस एक वयस्क व्यक्ति के लिए काफी है।
6. फल, लेकिन सही तरीके से
यूँ तो फल हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन खाली पेट सिर्फ फल खाना डायबिटीज वाले लोगों के लिए कभी-कभी परेशानी बन सकता है।
सेब, नाशपाती, बेरीज़ और अमरूद में फाइबर होता है, जो पेट के लिए अच्छा है। लेकिन इनमें नेचुरल शुगर भी होती है। फल को प्रोटीन या फैट के साथ खाने से शुगर धीरे-धीरे ब्लड में जाती है।
जैसे—सेब के टुकड़े पीनट बटर के साथ, अमरूद कुछ नट्स के साथ, या बेरीज दही के साथ।
फलों का जूस, चाहे ताज़ा ही क्यों न हो, अवॉयड करें। क्योंकि इसमें फाइबर नहीं रहता और इससे ब्लड-शुगर जल्दी बढ़ती है।
यह स्नैक काफी हेल्दी और संतुलित होता है, जो लंबे समय तक डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए ज़रूरी है।
7. मसाले के साथ पनीर के क्यूब्स
पनीर को स्नैक के तौर पर अक्सर कम आंका जाता है।
यह प्रोटीन से भरपूर और कार्ब्स में कम होता है। यही वजह है कि यह ब्लड-शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है।
पनीर को छोटे क्यूब्स में काटें। ऊपर से चाट-मसाला या काली-मिर्च डालें। धीरे-धीरे खाएं।
यह स्नैक तब सबसे अच्छा काम करता है, जब आप सच में भूखे हों। यह डिनर तक आपको संभाल कर रखता है, वो भी बिना शुगर क्रैश के।
अगर आपको लैक्टोज से परेशानी है, तो इसे रोजाना न खाएं। लेकिन कई लोगों के लिए यह डेली डाइट का एक बेहतरीन विकल्प है।
8. डार्क चॉकलेट, जी हाँ, सचमुच।
हम सभी का कभी-कभी चॉकलेट खाने का मन करता है। लेकिन उसे दबाने से इच्छा खत्म नहीं होती, बल्कि और बढ़ जाती है।
कम से कम 70% कोको वाली डार्क चॉकलेट में शुगर कम और फ्लेवोनॉयड्स ज़्यादा होते हैं। रिसर्च बताती है कि सीमित मात्रा में ये इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
यहाँ “सीमित” शब्द बहुत जरुरी है। एक या दो छोटे टुकड़े पर्याप्त हैं। पूरी चॉकलेट नहीं। धीरे-धीरे खाएं और बिना गिल्ट के एंजॉय करें।
यह स्नैक खाना खाने के बाद या नट्स के साथ ज्यादा बेहतर रहता है।
क्योंकि हमें परवाह है आपकी 😊!

पहली बात, टाइमिंग मायने रखती है। भूख से बेहाल होने तक इंतजार न करें, ज्यादातर गलत फैसले तभी होते हैं।
दूसरी बात, रोज़ नया स्नैक ज़रूरी नहीं। दो-तीन पसंदीदा स्नैक्स को रिपीट करके खाएं।
तीसरी बात, अपने शरीर की सुनें। अगर कोई स्नैक खाने के 30 मिनट बाद आपको फिर से भूख या सुस्ती महसूस हो, तो वह आपके लिए सही नहीं है, चाहे वह कितना भी “हेल्दी” क्यों न हो।
ऑफिस लाइफ अनप्रेडिक्टेबल होती है। ब्लड-शुगर को सरप्राइज पसंद नहीं। ये स्नैक्स (Diabetes friendly office snacks in hindi) आपके ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखते हैं।
आप ऐसे स्नैक्स डिज़र्व करते हैं जो हेल्दी और स्वादिष्ट दोनों हो। समझदारी से खाएं और खुश रहें!
(इस लेख की समीक्षा डॉ. स्वाति मिश्रा, मेडिकल एडिटर ने की है)
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