दूध नहीं है पसंद? इन पौष्टिक फूड्स से करें कैल्शियम की पूर्ती

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हमारे बचपन से ही दूध को सेहत के लिए सबसे बेहतरीन ड्रिंक बताया जाता रहा है, जो मजबूत हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी माना जाता है। इसमें कोई शक नहीं कि दूध कैल्शियम से भरपूर होता है और इसके कई फायदे हैं, लेकिन यह आपकी कैल्शियम जरूरतों को पूरा करने का अकेला जरिया नहीं है। आपकी रोज़ की कैल्शियम की खुराक सिर्फ एक गिलास दूध तक सीमित नहीं होती।

जो लोग दूध पचा नहीं पाते, वीगन डाइट फॉलो करते हैं या बस दूध पीना पसंद नहीं करते, उनके लिए भी कैल्शियम पाने के कई प्राकृतिक विकल्प मौजूद हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कुछ चीज़ें आप रोज़ खाते होंगे, लेकिन शायद आपको पता नहीं कि वे कैल्शियम से कितनी भरपूर हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ कैल्शियम-रिच फूड्स (Calcium rich foods without milk in hindi) के बारे में।

कैल्शियम इतना जरुरी क्यों है?

कैल्शियम शरीर के सबसे महत्वपूर्ण मिनरल्स में से एक है। यह सिर्फ हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर की कई जरूरी क्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। शरीर का अधिकतर कैल्शियम हड्डियों में जमा रहता है, जो उन्हें मजबूती और स्ट्रक्चर देता है। वहीं इसकी थोड़ी मात्रा मांसपेशियों की गतिविधि, नर्व कम्युनिकेशन, खून के थक्के बनने और दिल की धड़कन को नियमित रखने में मदद करती है।

अगर आपकी डाइट में पर्याप्त कैल्शियम नहीं होता, तो शरीर इसकी भरपाई हड्डियों से करने लगता है। इससे समय के साथ हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

कैल्शियम नर्व कम्युनिकेशन, मांसपेशियों के संकुचन (muscular contractions) और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इसकी कमी होने पर थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, नाखूनों का कमजोर होना और हार्मोनल असंतुलन के कारण मूड में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बचपन, गर्भावस्था और बढ़ती उम्र में पर्याप्त कैल्शियम लेना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इन चरणों में हड्डियों की मजबूती पर विशेष असर पड़ता है। कैल्शियम विटामिन डी और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों के साथ मिलकर बेहतर तरीके से काम करता है, इसलिए रोजाना कैल्शियम-रिच फूड्स को डाइट में शामिल करना जरूरी है।

डाइट में शामिल करें ये कैल्शियम रिच फूड्स 

साबुत बादाम

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स्वाद और पोषण दोनों ही मामलों में बादाम बेहद खास होते हैं। इनमें प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट्स और विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्युनिटी, पाचन और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है। साथ ही,अगर तुलना करें तो एक कप बादाम में गाय के दूध से भी ज्यादा कैल्शियम होता है।

आप बादाम को कई तरीकों से खा सकते हैं। भीगे हुए बादाम नाश्ते के लिए बेहतरीन होते हैं। इन्हें भूनकर, ट्रेल मिक्स में मिलाकर या बेक्ड चीज़ों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

चिया सीड्स

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चिया सीड्स फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो वजन कम करने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करते हैं। इसके साथ ही, ये कैल्शियम का भी शानदार स्रोत हैं। सिर्फ चार चम्मच चिया सीड्स में लगभग 333 mg कैल्शियम होता है।

इनमें मौजूद बोरॉन शरीर में कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और हड्डियों की ग्रोथ को सपोर्ट करता है। अपने न्यूट्रल टेस्ट और हल्की क्रंचीनेस के कारण चिया सीड्स कई रेसिपीज़ में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं।

टोफू

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टोफू को आमतौर पर प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, विटामिन B और आयरन के लिए जाना जाता है, लेकिन यह कैल्शियम का भी बेहतरीन स्रोत है। एक कप टोफू में करीब 500 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है।

टोफू बनाने की प्रक्रिया में अक्सर कैल्शियम सल्फेट का उपयोग किया जाता है, जिससे इसमें कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है। इसका हल्का स्वाद और मुलायम बनावट इसे कई तरह की रेसिपीज़ में इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त बनाती है। यह पनीर का एक शानदार वीगन विकल्प भी है।

रागी

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कैल्शियम के प्राकृतिक स्रोतों की बात करें तो रागी का स्थान सबसे ऊपर आता है। भले ही इसे गेहूं या चावल के मुकाबले कम महत्व दिया जाता हो, लेकिन रागी पोषक तत्वों का खजाना है और दक्षिण भारत में इसका खूब इस्तेमाल होता है।

100 ग्राम रागी में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम होता है, जो दूध की समान मात्रा से लगभग तीन गुना ज्यादा है। रागी ग्लूटेन-फ्री होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है, इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों और वजन कंट्रोल करने वालों के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए रागी खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है।

तिल

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तिल के छोटे-से दानों को देखकर धोखा मत खाइए। ये आपके किचन में मौजूद सबसे बेहतरीन कैल्शियम स्रोतों में से एक हैं। 100 ग्राम तिल में लगभग 900 से 1200 मिलीग्राम तक कैल्शियम पाया जा सकता है।

इसके अलावा, तिल में मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भी होते हैं, जो कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। भुने हुए तिल या ताहिनी (भुने हुए तिल के बीजों से बना एक पेस्ट या मक्खन) के रूप में इनका कैल्शियम शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाता है। इनमें मौजूद जिंक और कॉपर कोलेजन के निर्माण में मदद करते हैं, जिससे हड्डियां सिर्फ मजबूत ही नहीं बल्कि लचीली भी बनती हैं। लड्डू, चटनी या सलाद पर छिड़ककर तिल को डाइट में शामिल करना बेहद आसान है।

निष्कर्ष

कैल्शियम लाइफ की हर स्टेज में बेहद जरूरी है, लेकिन शरीर की रोजाना की जरूरत पूरी करने के लिए सिर्फ दूध पर निर्भर रहना जरूरी नहीं। दूध कैल्शियम का जाना-पहचाना स्रोत जरूर है, लेकिन इसके अलावा भी कई और खाद्य पदार्थ हैं, जो आपको उसके बराबर या उससे ज्यादा कैल्शियम दे सकते हैं और साथ ही कई दूसरे पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं।

जो लोग पाचन संबंधी समस्याओं या अन्य व्यक्तिगत कारणों से दूध नहीं लेते, उनके लिए ये विकल्प बिना किसी समझौते के शरीर में कैल्शियम का स्तर बनाए रखने का एक आसान तरीका हैं। यह भी याद रखें कि कैल्शियम का सही फायदा तभी मिलता है जब शरीर इसे अच्छे से अवशोषित कर पाए। विटामिन डी, मैग्नीशियम और बोरॉन जैसे पोषक तत्व कैल्शियम के अवशोषण में मदद करते हैं। दिनभर में कैल्शियम-रिच फूड्स (Calcium rich foods without milk in hindi) को अलग-अलग समय पर शामिल करना भी फायदेमंद होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ’s)

1. कैल्शियम शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है, मांसपेशियों की गतिविधि, नर्व फंक्शन, खून के थक्के बनने और दिल की धड़कन को सही रखने में मदद करता है।

2. क्या दूध ही कैल्शियम का एकमात्र अच्छा स्रोत है?

नहीं, दूध कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, लेकिन एकमात्र स्रोत नहीं!  बादाम, तिल, केल और टोफू जैसे कई अन्य खाद्य पदार्थ भी रोज़ की कैल्शियम जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।

3. रोजाना कितने कैल्शियम की जरूरत होती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों को रोजाना करीब 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है। गर्भवती महिलाओं और 50 साल से ऊपर की महिलाओं को लगभग 1200 मिलीग्राम कैल्शियम रोज़ लेना चाहिए।

4. अगर शरीर को पर्याप्त कैल्शियम न मिले तो क्या होता है?

कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, नाखून भंगुर (जल्दी टूटने वाले) हो जाते हैं, मांसपेशियों में ऐंठन, थकान के अलावा समय के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ सकता है।

5. कैल्शियम के साथ विटामिन डी क्यों जरूरी है?

विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के सही अवशोषण में मदद करता है, जिससे इसके फायदे पूरी तरह मिल पाते हैं।

(इस लेख की समीक्षा डॉ. स्वाति मिश्रा, मेडिकल एडिटर ने की है)

Image Source: Freepik

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