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Cauliflower: बेहद गुणकारी है गोभी – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

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गोभी का परिचय (Introduction of Cauliflower)

गोभी (gobi) तीन तरह के होते हैं, फूलगोभी, बंदगोभी या पत्रगोभी और गांठगोभी। गोभी के स्वास्थ्यवर्द्धक (benefits of cauliflower) गुणों के कारण आयुर्वेद में इसको औषधि के रुप में प्रयोग किया जाता है। गोभी एक ऐसा सब्जी है जिसको न सिर्फ शाकाहारी बल्कि मांसाहारी लोग भी बड़े मजे से खाते हैं। इसको सिर्फ सब्जी के रूप में ही नहीं कई तरह के व्यंजन के रूप में पकाकर खाया जाता है। आम तौर पर गोभी जाड़े के मौसम में पाया जाता है। जाड़े के मौसम में इसका सेवन करने से जोड़ो के दर्द से आराम मिलने के साथ-साथ कई तरह के बीमारियों से राहत मिलती है। चलिये इनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आगे पढ़ते हैं।

गोभी क्या है? (What is Gobhi in hindi?)

गोभी के बारे में पहले ही बताया जा चुका है कि ये तीन तरह के होते हैं इसलिए इसके गुण और फायदे भी भिन्न भिन्न होते हैं। गुण के आधार पर आयुर्वेद में भिन्न-भिन्न बीमारियों के लिए फूलगोभी, बंधागोभी और गांठगोभी का प्रयोग औषधि के रुप में किया जाता है।

इसकी तीन प्रजातियां होती हैं। 1. पुष्प गोभी (Brassica oleracea Linn. var. botrytis Linn.), 2. पत्र गोभी (Brassica oleracea (Linn.) var.capitata Linn. f.) तथा 3. गांठ गोभी (Brassica oleracea (Linn.) var. gongylodesLinn.)

  1. पुष्पगोभी (Brassica oleracea Linn. var. botrytis Linn.)-
  2. पत्रगोभी (Brassica oleracea (Linn.) var. capitata Linn. f.)-
  3. गांठगोभी (Brassica oleracea (Linn.) var. gongylodes Linn.)-यह लगभग 60 सेमी लम्बा, ऊपरी गोलाकार गांठ के समान कंद (bulb)   युक्त, छोटा शाकीय पौधा होता है। इसके पत्र साधारण, स्भिंक, मूलीय तथा वीणाकार, दीर्घवृंतयुक्त होते हैं। इसके पुष्प पीले तथा अंतस्थ पुष्प गुच्छों में होते हैं। इसकी फली छोटी होती है तथा बीज अनेक सूक्ष्म, कृष्ण वर्ण के होते हैं।

पुष्प गोभी  मधुर, उष्ण, गुरु, कफवात कम करने वाला, ग्राही, बल बढ़ाने वाला, देर से हजम करने वाला, स्तम्भक, अग्निमांद्यकारक तथा सूजन कम करने वाली होती है। इसके पत्ते मधुर, शीत, मूत्रल, कृमिनाशक, अनॉक्सीकारक तथा मृदुकारी होते हैं।

बंधा गोभी खाने में रूची बढ़ाने के साथ-साथ , वातकारक, मधुर, गुरु, शीतपित्तशामक, मूत्रल, हृद्य, कृमिनाशक, आध्मानकारक, मृदुकारी तथा दीपन होती है। इसके बीज मूत्रल, विरेचक, आमशयोत्तेजक तथा कृमिरोधी होते हैं। इसके पत्र तिक्त, आमशयोत्तेजक, शीत, पाचक, हृद्य तथा शीतादरोधी (Anti-scarbutic) होते हैं।

यह जीवाणुनाशक, पूयरोधी, व्रणनाशक, शीतादरोधी, मृदुकारी, कवकनाशी तथा अल्परक्तशर्कराकारक क्रियाशीलता प्रदर्शित करता है।

गांठ गोभी मधुर, शीत, गुरु, बलकारक, रुचिकर, दुर्जर (देर से पचने वाली), ग्राही तथा शीतल होती है। इसको कम मात्रा में उबालकर खाने से यह भेदक तथा अधिक उबालकर खाने से ग्राही होती है। यह कफ, कास, प्रमेह व श्वास में लाभप्रद तथा वात व पित्त प्रकोपक होती है।

अन्य भाषाओं में गोभी के नाम (Name of Gobhi in Different Languages)

फूलगोभी वानास्पतिक नाम Brassica oleracea Linn. var. botrytis Linn.(ब्रैसिका ओलेरेसिया) Syn-Brassica oleracea Linn. Subsp. botrytis (Linn.) Metzg. है। फूलगोभी Brassicaceae (ब्रैसिकेसी) कुल का होता है। भारत के अन्य प्रांतों में फूलगोभी को भिन्न भिन्न नामों से पुकारा जाता है।

Cauliflower (फूलगोभी) in-

  • Sanskrit-पुष्पगोभी, स्वादुशाका, मध्यपुष्पा, बृहद्दला, पीतपुष्पा;
  • Hindi-फूलगोभी, गोभी;
  • Urdu-फूल गोभी (Phuul Gobhii);
  • Odia-फूलाकोबी (Fulakobi);
  • Kannada-हूविना-कोसू (Hoovina-kosu);
  • Gujrati-फूलकोबी (Phulkobi), कोबिआ (Kobia);
  • Tamil-गोस्पूवु (Gospoovu), पूरोबी (Pooraobi), गोस (Gos);
  • Telugu-कौलीफ्लावर (Cauliflower), गोस (Gos);
  • Bengali-फूलकापी (Fulcopi), कोपी (Kopi);
  • Nepali-काउली (Cauli);
  • Malayalam-कौलीफ्लोवर (Cauliflovar);
  • Marathi-फूलावर (Fulavar), फूलकोबी (Fulkobi), नोलखोल (Knolkhol।
  • English-कालबेसे (Calabrese)।

बंधागोभी का वानास्पतिक नाम Brassica oleracea (Linn.) var. capitata Linn. f. है। भारत के अन्य प्रांतों में फूलगोभी को भिन्न भिन्न नामों से पुकारा जाता है। जैसे-

Cabbage (बंधा गोभी)  in-

  • Sanskrit-पत्रगोभी, दलमालिनी; हिन्दी-पत्तागोभी, बन्दगोभी;
  • Urdu-बन्द गोभी (Band Gobhii);
  • Odia-बंधकोबी (Bandhakobi);
  • Kannada-येलेकोसु (Yelekosu);
  • Gujrati-कोबिया (Kobiya);
  • Tamil-मुट्टाइ कौस (Muttai kose), कोस (Kose);
  • Telugu-गोस (Gos);
  • Bengali-कोपी (Kopy);
  • Nepali-बन्दा (Banda);
  • Marathi-कोबी (Kobi)।
  • English-कोलवॉर्ट (Colewart), सी कैबेज (Sea cabbage), हैड कैबेज (Head cabbage), Cabbage (कैबेज)।

गांठ गोभी का वानास्पतिक नाम Brassica oleracea (Linn.) var. gonogylodes Linn.) है। भारत के अन्य प्रांतों में फूलगोभी को भिन्न भिन्न नामों से पुकारा जाता है। जैसे-

  • Sanskrit-ग्रन्थिगोभी;
  • Hindi-गांठ गोभी;
  • Assamese-ओलकोबी (Olkobi);
  • Odia-गन्थीकोबी (Ganthikobi);
  • Kashmir-मोन्ज (Monj);
  • Kannada-गेड्डे कोसू (Gedde kosu);
  • Gujrati-नोलकौल (Nolkol);
  • Tamil-नूलकौल (Noolkhol);
  • Telugu-गड्डागोबी (Gaddagobi);
  • Bengali-ओलकपि (Olkapi);
  • Panjabi-गन्द गोबी (Gand gobi);
  • Marathi-नवलकौल (Nawal kol)
  • English-कोलराबी (Kohlrabi), स्टेम टर्निप (Stem turnip), कोलेवॉर्ट (Colewort), कॉलेट (Collet), नॉल-नॉल (Knol-knol), जर्मन टर्निप (German turnip), टरनिप कैबज (Turnip cabbage)

गोभी के फायदे (Benefits of Gobhi in hindi)

फूलगोभी, बंदगोभी और गांठगोभी खाते तो सब लोग हैं लेकिन आयुर्वेद में कैसे इन गोभियों का प्रयोग बीमारियों के उपचार स्वरुप प्रयोग किया जाता है चलिये आगे जानते हैं-

गले की सूजन को करे कम फूलगोभी ( Benefits of Phool Gobhi in Throat Swelling in Hindi)

अक्सर मौसम के बदलने के समय तापमान के बार-बार गिरने और चढ़ने के कारण लोगों को गले में दर्द या सूजन की शिकायत हो जाती है। फूलगोभी का काढ़ा गले के सूजन को कम करने में बहुत मदद करते हैं। फूलगोभी (Cauliflower) की जड़ का काढ़ा बनाकर गरारा करने से गले के दर्द तथा गले के घाव में लाभ होता है तथा 15-20 मिली काढ़ा पिलाने से बुखार में लाभ होता है।

और पढ़े: गले के दर्द को दूर करे सेम की फली

पेट के दर्द में फायदेमंद फूलगोभी (Cauliflower Beneficial for Stomach Pain in Hindi)

लगातार मसालेदार खाना, पैकेज़्ड फूड खाने कारण लोगों को पेट में दर्द होने की शिकायत होने लगती है। इससे राहत पाने के लिए पुष्पगोभी (Cauliflower) का शाक बनाकर खाने से भूख बढ़ती है, पेट दर्द तथा दस्त से राहत मिलती है।

और पढ़ें: पेट दर्द में मूली फायदेमंद

दस्त रोके फूलगोभी ( Phool Gobhi to Fight Diarrhoea in Hindi)

आजकल लोग समय की कमी के कारण सबसे ज्यादा बाहर का खाना खाते हैं। जिसके कारण दस्त, एसिडिटी, पेट दर्द की समस्या आम हो गई है।  पुष्पगोभी के पत्ते का शाक बनाकर खाने से अतिसार या दस्त में लाभ होता है तथा पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।

और पढ़ें: कालमेघ के सेवन से एसिडिटी में लाभ

अर्श या पाइल्स के दर्द से दिलाये राहत फूलगोभी (Phool gobhi or Cauliflower for Piles in Hindi)

जो लोग बहुत ज्यादा मसालेदार खाना खाते हैं या कब्ज से लंबे समय तक परेशान रहते हैं उनको बवासीर या पाइल्स की समस्या ज्यादा होती है।  फूलगोभी (Cauliflower) को घी में भूनकर थोड़ा सेंधानमक मिलाकर खिलाने से अर्श में लाभ होता है।

और पढ़ें: कब्ज में टिंडा के फायदे

आँख की बीमारी में फायदेमंद बंदगोभी (Benefit of Cabbage for Eye disease in Hindi)

अगर दिन भर कंप्यूटर पर काम करने से दिन के अंत में आँखों में दर्द या समस्या होती है तो बंदगोभी का ऐसा इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। यहां तक आँख संबंधी दूसरे बीमारियों में भी बंदगोभी का सेवन लाभकारी होता है। इसके पत्ते के रस को आंखों में लगाने से आँखों में दर्द जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

खांसी से दिलाये राहत बंदगोभी (Cabbage Beneficial in Cough in Hindi)

अगर लंबे समय से खांसी ठीक नहीं हो रही है तो बंदगोभी के 5-10 मिली पत्ते के रस को पीने से पुरानी खांसी तथा खून वाली उल्टी से राहत मिलती है।

और पढ़े: पुरानी खाँसी में आलू के फायदे

मूत्र संबंधी समस्या में लाभकारी बंदगोभी (Benefit of Cabbage to Treat Dysuria in Hindi)

मूत्र संबंधी रोगों में सामान्यतः पेशाब करते वक्त जलन और दर्द, रुक-रुक कर पेशाब आना, कम पेशाब होना आदि। पत्रगोभी के 10-15 मिली पत्ते के काढ़े  में मिश्री मिलाकर पिलाने से मूत्र संबंधी समस्या में लाभ होता है।

और पढ़े: मूत्र संबंधी समस्या में बेर के फायदे

डायबिटीज को करे नियंत्रण बंदगोभी (Cabbage to Control Diabetes in Hindi)

आजकल की असंतुलित जीवनशैली के कारण मधुमेह अपना पैर पसार रही है।  इसके 10-15 मिली पत्ते के रस में हल्दी चूर्ण तथा मधु मिलाकर पिलाने से प्रमेह या मधुमेह में लाभ होता है।

और पढ़ेंमधुमेह में विधारा के फायदे

गठिया या संधिवात में फायदेमंद बंदगोभी (Cabbage Beneficial in Gout in Hindi)

उम्र के साथ गठिया के दर्द सभी परेशान रहते हैं। संधिवात से आराम पाने के लिए  पत्तागोभी के पत्तों को पीसकर लेप करने से आमवात या गठिता तथा त्वचा संबंधी बीमारियों में आराम मिलता है।

मदात्यय या नशा छोड़ने में लाभकारी बंदगोभी (Cabbage Fight for Intoxication in Hindi)

अगर कोई नशा करने की आदत से बाहर निकलना चाहता है तो इसके पत्तों को पानी में उबालकर पिलाने से मदात्यय में लाभ होता है।

भूख बढ़ाने में करे मदद गांठगोभी (Kohlrabi or Gobhi to Treat Dyspepsia in Hindi)

अगर किसी बीमारी के कारण खाने की इच्छा मर गई है तो भूख ही नहीं लगती तो  गांठगोभी का शाक (सब्जी) बनाकर खिलाने से खाने की इच्छा बढ़ती है।

और पढ़ें: भूख बढ़ाने में धनिया के फायदे

बवासीर या पाइल्स में फायदेमंद गांठगोभी (Kohlrabi or Gobhi Beneficial in Piles in Hindi)

अगर आप बवासीर के दर्द से राहत नहीं पा रहे हैं तो  गांठगोभी के पत्तों का शाक बनाकर खाने से अर्श (बवासीर) में लाभ होता है।

और पढ़ेपाइल्स के दर्द में सिंघाड़े के फायदे

गोभी का उपयोगी भाग (Useful Parts of Gobhi)

गोभी के पत्ते और फूल को औषधि के रुप में ज्यादा प्रयोग किया जाता है।

गोभी का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? (How to Use Gobhi in Hindi?)

बीमारी के लिए गोभी के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए गोभी का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

गोभी का सेवन ज्यादा करने के साइड इफेक्ट (Side effects of the Gobi )

गोभी में ग्लूकोसाइनोलेट, आइसोथायोसायनेट पाया जाता है; अत: इसका ज्यादा सेवन करने से यह अवटुग्रंथि (Thyroid gland) के काम में बाधा उत्पन्न करता है। साथ ही इसमें इन्डोल-3-कार्बिनोल पाया जाता है, जो स्तन-कैंसर होने का कारण बन सकता है।

और पढ़े- थायरॉइड रोग का घरेलू इलाज

इसके अत्यधिक सेवन से पेट में गैस, खाने में  अरुचि,  पथरी, पेट फूलना, कान में दर्द एवं किडनी की बीमारी आदि रोगों का कारण बन सकती  हैं।

पत्र गोभी का सेवन अत्यधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। इसको अत्यधिक मात्रा में खाने से यह पेट फूलने तथा पेट दर्द की समस्या हो सकती है।

नोट : साधारणतया गोभी के विभिन्न प्रकार मुख्यत पत्तागोभी, फूलगोभी, हरी फूलगोभी, करमकल्ला, गांठगोभी एवं चोकीगोभी (Brussels) अलग-अलग मानी जाती हैं, जबकि वास्तविक रूप से यह सभी प्रकार एक ही Brassica oleracea Linn. (ब्रैसिका ओलेरिसया नामक) प्रजाति के हैं।

गोभी कहां पाई और उगाई जाती है (Where is Gobi Found or Grown in Hindi)

गोभी मूलत भूमध्यसागरीय क्षेत्रों के अतिरिक्त विश्व में रूस तथा हॉलैण्ड में पाया जाता है एवं उपजाया जाता है। भारत में विस्तृत रूप से सभी क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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