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Gular: गूलर में हैं अनेक बेहरतरीन गुण- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

Contents

गूलर का परिचय (Introduction of Gular)

कहते हैं कि जिसने गूलर का फूल (Gular ka Flower) देखा उसका भाग्य खुल जाता है। गूलर के पेड़ (Gular Tree) पर फूल क्यों नहीं दिखते यह तो हम आगे जानेंगे, लेकिन यदि आप गूलर के गुणों को जान लेंगे तो निश्चित रूप से जीवनभर स्वस्थ रह सकेंगे। कहा जाता है कि गूलर का सेवन करने वाला वृद्ध भी युवा हो जाता है। अथर्व वेद में गूलर (gular tree in hindi) शरीर को पुष्ट करने वाले पदार्थों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। आइये जानते हैं बूढ़े को भी जवान बना देने वाले इस अनोखे वृक्ष के बारे में।

 

गूलर (gular tree in hindi) की छाल एवं कच्चे फल रक्त का बहाव रोकने वाले, मूत्र रोग, डायबिटीज तथा जलन में उपयोगी होते हैं। छाल एवं पत्ते का काढ़ा बाहर से लगाए जाने पर सूजन  और दर्द दूर करता है। यह मुश्किल से मुश्किल घाव को भी ठीक करता है। पके हुए फल का सेवन कफ निकालने वाला, मन को प्रसन्न करने वाला, खून के विकार दूर करने वाला और बेहोशी को दूर करने वाला होता है। इसी प्रकार गूलर (guller) का दूध यौन शक्ति बढ़ाने वाला, घावों में पस बनने से रोकने वाला होता है।

 

गूलर क्या है? (What is Gular?)

गूलर का पेड़ (Gular ka Ped) संस्कृत ग्रंथों में हेमदुग्धक, जन्तुफल, सदाफल आदि नामों से  प्रसिद्ध है। इसके तने या डाल आदि में किसी भी स्थान पर चीरा लगाने से सफेद दूध निकलता है, जो थोड़ी देर रखने पर पीला हो जाता है, इसलिए इसे हेमदुग्धक, फलों में ढेर सारे कीड़े होने के कारण जन्तुफल तथा बारह महीने फल देने के कारण सदाफल कहते हैं।

गूलर का पेड़ (Gular Ka Ped) विशाल और घना होता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 10 से 15 मीटर तक हो सकती है। इसके फल अंजीर के समान दिखाई देते हैं। कच्चे होने पर हल्के हरे रंग के और पकने पर लाल हो जाते हैं। पके हुए फल चमकदार होते है। फलों को काटने पर उसमें कीड़े पाए जाते हैं। वास्तव में इसके फल के अंदर ही फूल भी होता है। इसी में नर और मादा पुष्प ऊपर-नीचे स्थित होते हैं। चरक और सुश्रुत दोनों ने ही अपने ग्रंथों में गूलर (guller) के प्रयोगों का वर्णन किया है।

 

अनेक भाषाओं में गूलर के नाम (Gular Called in Different Languages)

गूलर (gular tree in hindi) का वानस्पतिक यानी लैटिन नाम फाइकस रेसीमोसा (Ficus racemosa Linn.) तथा Syn-Ficus glomerata Roxb. है। यह मोरेसी (Moraceae) कुल का पौधा है। इसका अंग्रेजी नाम क्लस्टर फिग (Cluster fig), गूलर फिग (Gular fig) और कन्ट्री फिग (Country fig) है। अन्य भारतीय भाषाओं में इसके नाम निम्नानुसार हैं।

Gular in –

  • Sanskrit – उदुम्बर, जन्तुफल, यज्ञांग, हेमदुग्ध, श्वेतवल्कल, सदाफल, अपुष्प, काकोदुम्बरिका, शाखाफल, मशकी, Gridhranakhi
  • Hindi – गूलर, उमरि, उमर, तुई गुल्लर
  • Urdu – गूलर (Gular)
  • Oriya – डिम्री (Dimri)
  • Kannada – अत्थिमरा (Atthimara), काठगूलर (Kathgular)
  • Gujarati – उम्बरो (Umbaro), उमर (Umar), उम्बर (Umbar), ऊमरडो (Umrado)
  • Telugu – अत्थि चेट्टु (Atthi chettu), अत्ति (Atti)
  • Tamil – अत्तिमरम् (Attimaram), उदुम्बरम (Udumbaram)
  • Bengali – दुमुर (Dumur), ओदुम्बर (Odumbar), याज्ञदुम्बर (Yajna – dumbar)
  • Nepali – दुम्री (Dumri)
  • Punjabi – बटबर (Batbar), दधूरी (Dadhuri)
  • Marathi – उम्बरी (Umbari), उम्बराचे झाड़ (Umbarache jhad)
  • Malayalam – अत्ति (Atti), जन्तुफलम (Jantuphalam)
  • Manipur – हैबोन्ग (Heibong)
  • Arabic – जमीजा (Jamiza)
  • Persian – अञ्जरे आदम (Anjre aadam), तमरपीशाह (Tamarpishah)

 

 

गूलर के फायदे (Gular Benefits and Uses in Hindi)

गूलर की छाल, कच्चे और पके फल तथा उसके दूध के प्रयोग से अनेक रोगों का इलाज किया जा सकता है। यह रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर को कम करता है, बैक्टीरिया को नष्ट करता है, मधुमेह यानि डायबिटीज को नियंत्रित करता है। लिवर को बल प्रदान करता है, मल को बांधता है और शरीर को पुष्ट करता है। विभिन्न रोगों में गूलर (guller) का प्रयोग करने के तरीके यहाँ दिए जा रहे हैं।

 

मुंह के रोगों में लाभकारी है गूलर का उपयोग (Gular Benefits to Cure Mouth Ulcers in Hindi)

गूलर की छाल से बने 250 मिली काढ़े में 3 ग्राम कत्था व 1 ग्राम फिटकरी मिला लें। इसका कुल्ला करने से मुंह के रोगों में लाभ होता है।

गूलर (Gridhranakhi) के पत्तों  के ऊपर के दानों को मिश्री के साथ पीस लें। इसका सेवन करने से गर्मी के कारण होने वाले मुँह के छाले ठीक हो जाते हैं।

 

गंडमाला/ग्वायटर ठीक करे गूलर के पत्ते (Benefits of Gular Leaf in Goiter Treatment in Hindi)

गूलर के पत्तों (Gular ke patte) के ऊपर के दानें को दही (चीनी मिलाकर) में पीस लें। इसे रोज एक बार मधु के साथ पिलाने से गले की सूजन के रोग जैसे- गंडमाला (Goiter) में लाभ होता है।

 

लूज मोशन (दस्त) में गूलर के सेवन से लाभ (Gular Stops Loose Motions in Hindi)

4-5 बूंद गूलर दूध (आक्षीर) को बताशे में डाल लें।  इसे दिन में तीन बार सेवन करने से दस्त में लाभ होता है।

गूलरमूल चूर्ण को गूलर फल के साथ सेवन करने से दस्त और पेचिश ठीक होता है।

3 ग्राम गूलर पत्तों (gular ka patta) के चूर्ण व 2 काली मिर्च को थोड़े चावल के धोवन के साथ महीन पीस लें। इसमें काला नमक और छाछ मिलाकर छान लें। इसे सुबह और शाम सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।

 

पेट दर्द में गूलर का प्रयोग लाभदायक (Gular Relieves from Stomach Pain in Hindi)

गूलर का फल खाने से पेट का दर्द और गैस समाप्त होते हैं।

 

बवासीर में फायदेमंद गूलर के दूध का सेवन (Gular Milk Cures Piles in Hindi)

गूलर के दूध की 10-20 बूंदों को जल में मिलाकर पिलाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) और रक्त विकारों में लाभ होता है।

गूलर के दूध का लेप मस्सों पर भी करना चाहिए। उपचार के दौरान घी का अधिक सेवन करें।

गूलर के दूध में रूई का फाहा भिगोकर भगन्दर (Fistula) के अंदर रखें। इसे रोज बदलते रहने से भगन्दर अच्छा हो जाता है।

 

गूलर के प्रयोग से मूत्र रोग का इलाज (Benefits of Gular in Urine Problem Treatment in Hindi)

रोज सवेरे गूलर (Gridhranakhi) के 2-2 पके फल रोगी को सेवन कराने से पेशाब खुल कर आने लगता है।

4-5 बूंद गूलर दूध (आक्षीर) को बताशे में डाल लें।  इसे दिन में तीन बार सेवन करने से मूत्र विकारों में लाभ होता है।

 

डायबिटीज में गूलर के उपयोग से फायदा (Gular Benefits for Controlling Diabetes in Hindi)

फलों के सूखे छिल्कों को (बीज रहित) महीन पीस लें। इसमें बराबर भाग में मिश्री मिला लें। इसे 6-6 ग्राम सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से डायबिटीज में लाभ होता है।

 

ल्यूकोरिया (प्रदर) रोग में गूलर के सेवन से लाभ (Gular Uses to Cure Leucorrhoea in Hindi)

5-10 ग्राम गूलर (Gridhranakhi) के रस को मिश्री के साथ मिलाकर सुबह शाम पिएं। इससे सफेद प्रदर या ल्यूकोरिया (स्त्रियों की योनी से सफेद पानी निकलना) में लाभ होता है। इसमें मधु मिलाकर पीने से मासिक धर्म विकार ठीक होता है।

10-15 ग्राम ताजी छाल को कूटकर, 250 मिली पानी में पकाएं। जब यह थोड़ा रह जाए तो छान कर इच्छा अनुसार मिश्री व डेढ़ ग्राम सफेद जीरा का चूर्ण मिला लें। इसे सुबह शाम पिलाएं तथा भोजन में इसके कच्चे फलों का रायता बनाकर खिलाएं। इस प्रयोग से मासिक धर्म विकार में लाभ होता है।

 

घाव सुखाता है गूलर का प्रयोग (Gular Heals Wound in Hindi)

  • गूलर में कठिन से कठिन घाव को ठीक करने की क्षमता है। गूलर दूध में रूई का फाहा भिगोकर नासूर यानी पुराने तथा असाध्य घाव पर रखें। इससे घाव ठीक हो जाता है।
  • घाव पर गूलर की छाल बाँधने और कैंसर की गाँठ पर गूलर के पत्तों (gular leaf) को घिसने से लाभ होता है।
  • गूलर (Gridhranakhi) के कच्चे फलों के महीन चूर्ण में बराबर भाग खांड़ मिलायें। इस चूर्ण को 2 से 6 ग्राम (या 10 ग्राम) की मात्रा में, कच्चे दूध में या मिश्री मिली हुई लस्सी के साथ सेवन करें। इससे सूजाक यानी पुरुष के लिंग पर होने वाले घाव की शुरुआती अवस्था में विशेष लाभ होता है।
  • गूलर के फल के काढ़े में 3 ग्राम कत्था व 1 ग्राम कपूर मिला लें। इस गुनगुने काढ़ा से पुरुष के लिंग को धोने से जख्म के अंदर के मवाद का आना बंद हो जाता है।
  • गूलर के दूध में बावची के बीज भिगो लें। इसे पीसकर 1-2 चम्मच की मात्रा में नियमित लेप करने से सभी प्रकार की फुंसियाँ और घाव मिट जाते हैं।
  • गूलर की छाल को गौमूत्र से पीसकर घी में भून लें। नासूर पर इसका लेप करने से लाभ होता है।
  • गूलर के दूध को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है।
  • गूलर की छाल का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से घाव जल्दी भर जाता है।
  • गूलर (Gridhranakhi) की छाल की राख को घी के साथ मिलाकर लगाने से बिवाइयां, मुँहासे, बलतोड़ तथा प्रमेह के कारण हुई फुंसियां ठीक होती हैं।

 

गूलर के इस्तेमाल से कंधे के दर्द में लाभ (Gular Relieves Shoulder Pain in Hindi)

गूलर के दूध में केवाच की जड़ के चूर्ण को भिगोकर सुखा लें। इसमें केवाच की जड़ के बराबर भाग जिंगनि रस तथा हींग मिला लें। इसे 1-2 बूंद नाक में डालने से कंधे के दर्द में लाभ होता है।

 

चेचक में लाभकारी है गूलर का प्रयोग (Gular Uses to Treat Chicken Pox in Hindi)

गूलर के पत्तों (gular leaf) पर जो फफोले या श्यामे रंग के दाने होते हैं, उन्हें पत्तों से निकालकर गाय के दूध में पीस-छान लें। इसमें मधु मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से चेचक में लाभ होता है।

 

खून के विकार में गूलर का उपयोग फायदेमंद (Benefits of Gular in Blood Problems in Hindi)

  • शरीर के किसी अंग से खून बहता हो और सूजन हो तो ऐसे रोगों में गूलर एक उत्तम औषधि है। नाक से खून बहना, पेशाब के साथ खून आना, मासिकधर्म अधिक होना, गर्भपात आदि रोगों में गूलर का इस्तेमाल लाभदायक होता है। इसके 2-3 पके फलों को चीनी या खांड़ के साथ दिन में तीन बार देने से तुरन्त आराम हो जाता है।
  • गूलर (Gridhranakhi) के सूखे कच्चे फलों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसे 5 से 10 ग्राम तक की मात्रा में ताजे जल के साथ सुबह-शाम 21 दिन तक सेवन करें। इससे मासिक धर्म विकार, रक्तस्राव, गर्भपात, खूनी पेचिश में लाभ होता है।
  • गूलर के 5 ग्राम सूखे हरे फलों के चूर्ण को पानी में पीस लें। इसे मिश्री के साथ पिलाने से भी खून की गर्मी में लाभ होता है।
  • 5 मिली गूलर के पत्तों (gular leaf) के रस में शहद मिलाकर पिलाने से खून की गर्मी तथा खूनी पेचिश में लाभ होता है।
  • कमलगट्टे और गूलर के फलों के 5 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ दिन में तीन बार देने से उलटी के साथ खून का आना बन्द हो जाता है।
  • 20-30 ग्राम गूलर की छाल को पानी में पीसकर तालु पर लगाने से नकसीर (नाक से खून आना) बंद हो जाती है।
  • 5 मिली गूलर पत्तों के रस में बराबर भाग मिश्री मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। कुछ समय तक सेवन करने से उलटी में खून आना बंद होगा।

 

गर्भपात रोके गूलर का प्रयोग (Gular Stops Miscarriages in Hindi)

गूलर गर्भ को स्थिर करने में काफी प्रभावी है। 30 ग्राम गूलर की जड़ को कूटकर या सूखी हुई जड़ के छिलके का काढ़ा बनाकर नियमित रूप से तीन महीने तक सुबह और शाम पिलाने से गर्भपात नहीं होता है।

गर्भपात न होने के लिए सुश्रुत ने गूलर की कोंपलों को दूध के साथ सेवन करने की सलाह दी है।

 

गूलर के सेवन से बुखार में लाभ (Benefits of Gular in Fighting with Fever in Hindi)

गूलर (Gridhranakhi) की ताजी जड़ के 5-10 मिली रस में या जड़ की छाल के 20-30 मिली हिम (10 गुणा पानी में भिगो लें। इसे तीन घंटे बाद छानकर चीनी में मिलाकर सुबह और शाम पीने से बुखार में लगने वाली प्यास की परेशानी में लाभ होता है।

1 ग्राम गूलर की गोंद तथा 3 ग्राम चीनी को मिलाकर सेवन करने से पित्त के कारण होने वाला बुखार और जलन ठीक होते हैं।

 

पित्त-विकार में लाभकारी है गूलर का इस्तेमाल (Gular Cures Pitta Disorders in Hindi)

गूलर के पत्ते (gular ka patta) शरीर से किसी भी प्रकार की गर्मी यानी पित्त को दूर करते हैं। गूलर के पत्तों को पीसकर शहद के साथ चाटने से पित्त विकारों का शमन होता है।

 

शारीरिक कमजोरी और यौनशक्ति बढ़ाता है गूलर फल का चूर्ण (Gular for Healthy Body & Sexual Power in Hindi)

गूलर का फल काफी पौष्टिक होता है। गूलर के सूखे फल के चूर्ण का (10-20 ग्राम) सेवन करने से सामान्य दुर्बलता दूर होती है।

गूलर (goolar) फल के चूर्ण तथा विदारीकन्द चूर्ण को बराबर मात्रा (4-6 ग्राम) में लें। इसे मिश्री और घी मिले हुए दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करने से यौन शक्ति की वृद्धि होती है।

स्त्रियां यदि सेवन करें तो समस्त स्त्री रोग दूर होकर शरीर स्वस्थ रहता है। कहा जाता है कि इस प्रयोग को करने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान हो जाता है।

 

गूलर के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Gular?)

चूर्ण – 3-5 ग्राम

आक्षीर – 4-5 बूंद

अधिक लाभ के लिए गूलर का इस्तेमाल चिकित्सक के परामर्शानुसार करें।

 

गूलर के सेवन का तरीका (How to Use Gular?)

पत्ते (gular ke patte)

छाल

फल

तना

जड़

जड़ की छाल

आक्षीर

 

गूलर से नुकसान (Side Effects of Gular)

गूलर (goolar) के इस्तेमाल से ये नुकसान हो सकते हैंः-

  • गूलर का अधिक मात्रा में सेवन करने से बुखार पैदा हो सकता है।
  • पके हुए फलों को अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि यह आंतों के कीड़ों को बढ़ा सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं (Pregnant women) को इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।

 

गूलर कहाँ पाया या उगाया जाता है (Where is Gular Tree Found in Hindi)

गूलर (goolar) के वृक्ष खेतों और जंगलों में पाए जाते हैं। दोनों स्थानों में 2000 मीटर की ऊंचाई तक गूलर के पेड़ (gular tree) मिलते हैं। जंगलों एवं नदी-नालों के किनारे इसके वृक्ष अधिक पाए जाते हैं।