स्वस्थ भोजन

Saunf: गुणों से भरपूर है सौंफ – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

  • नवम्बर 06,2018
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परिचय

सौंफ Sounf का उपयोग प्राचीन काल से मुखशुद्धि (Mouth Freshner) और घरेलू औषधि के रूप में होता आ रहा है। समस्त भारत में समुद्र तल से 1800 मीटर की ऊँचाई तक के स्थानों पर इसकी खेती की जाती है। सौंफ जैसा उपयोगी पदार्थ हर गृहस्थ के घर में होना चाहिए। इसका पौधा लगभग एक मीटर ऊंचा तथा सुगन्धित होता है। इसके पत्तों का प्रयोग सब्जी के रूप में भी किया जाता है। भूमध्यसागरीय इलाके में सौंफ की ही प्रकार का एक पौधा पाया जाता है जिसे एनीसीड (aniseed) कहते हैं। इसका उपयोग इटालवी भोजन में किया जाता है।

 

Table of Contents

  • Introduction
  • Names in Different Languages
  • Sounf in Ayurveda
  • Uses of Sounf
  • Uses of Sounf for Headache
  • Uses of Sounf for Eyes
  • Uses of Sounf in Cold
  • Uses of Sounf in Mouth Ulcer & Smell
  • Uses of Sounf in Stutter
  • Uses of Sounf in Asthma & Cough
  • Uses of Sounf in Loss of Apetite
  • Uses of Sounf in Dysentery
  • Uses of Sounf in Constipation & Gastritis
  • Uses of Sounf in  Urine Trouble
  • Uses of Sounf in Menstruation  Problems
  • Uses of Sounf in Increasing Breast Milk
  • Uses of Sounf in Gout
  • Uses of Sounf in Acne
  • Uses of Sounf in Mania
  • Uses of Sounf in Fever
  • Uses of Sounf Body Ache
  • Uses of Sounf in Sleeping Disorder
  • Uses of Sounf in Swelling
  • Uses of Sounf in Pediatric Problems
  • Uses of Sounf in Swelling of Penis
  • Maatra aur sewan ka tareeka (Dosage and Use of Sounf)

 

विविध भाषाओं में नाम

वानस्पतिक नाम : Foeniculum vulgare Mill. (फीनीकुलम वलगैरि) Syn-Foeniculum officinale All.  Anethum foeniculum Linn.

कुल : Apiaceae (एपिएसी)

अंग्रेज़ी में नाम : Fennel fruit (फेन्नेल फ्रूट)

हिन्दी (fennel seeds in hindi) – सौंफ, बड़ी सौंफ;

मराठी (fennel seeds in Marathi) – बड़ी सेपू (Badi sepu), सौंफ (Saunf);

संस्कृत – छत्रा, शालेय, शालीन, मिश्रेया, मधुरिका, मिसि; उर्दु – पनमधुरी (Panamadhuri); कन्नड़ – बड़ी सोपु (Badisopu), सब्बसिगे (Sabbsige); गुजराती – वरीयाली (Variyaali), वलीआरी (Valiaari);  तेलुगु – सोपु (Sopu), पेद्दजिलकुर्रा (Pedhyajilkurra); तमिल – सोहिकिरे (Sohikire), सोम्बु (Shoumbu); बंगाली – मौरी (Mouri), पान मौरी (Pan mori); पंजाबी – सोम्पू (Sompu), सोंफ (Saunf); मलयालम – पेरूमजीकम (Perumjikam), कट्टुसत्कुप्पा (Kattusatkuppa);  नेपाली – मदेशी सौंफ (Madesi saunf)।

अंग्रेजी – बिटर फेनेल (Bitter fennel), कॉमन फेनेल (Common fennel), इण्डियन स्वीट फेनेल (Indian sweet fennel); अरबी – एजियानज (Ejiyanaj), असलुल एजियानज (Aslul ejiyanaj); फारसी – राजीयानज (Razianaj), राजयाना (Rajyana)।

 

आयुर्वेद में सौंफ

चरक संहिता के मधुरस्कन्ध में छत्रा व सुश्रुत संहिता में मिशि नाम से इसका वर्णन प्राप्त होता है। सौंफ वात तथा पित्त को शांत करता है, भूख बढ़ाता है, भोजन को पचाता है, वीर्य की वृद्धि करता है और हृदय, मस्तिष्क तथा शरीर के लिए लाभकारी होत है। यह बुखार, गठिया आदि वात रोग, घावों, दर्द, आँखों के रोग, योनि में दर्द, अपच, कब्ज, पेट में कीड़े, प्यास, उल्टी, पेचिश, आँव, प्लीहा रोग, बवासीर, क्षय, क्षतक्षीण तथा जलन आदि रोगों को समाप्त करता है। इसके फल मल को बांधने वाले, विष को नष्ट करने वाले, कफ निकालने वाले, खून बढ़ाने वाले और माताओं में दूध बढ़ाने वाले होते हैं। वे पेट को सक्रिय करते हैं, कीड़ों को नष्ट करते हैं, वात को नियंत्रित करते हैं और पौष्टिक होते हैं। इसके पत्ते पेशाब बढ़ाते हैं और आँखों के लिए लाभदायक होते हैं। इसकी जड़ विरेचक होती है।

 

औषधीय प्रयोग विधि Benefits Of Saunf

सिरदर्द : सौंफ को पानी के साथ पीसकर ललाट पर लगाने से सिरदर्द शांत होता है।

आँखों के रोग : सौंफ के पत्ते के स्वरस में रूई को भिगोकर आँखों पर रखने से आँखों की जलन, दर्द तथा लालिमा ठीक होती है। 1-2 ग्राम सौंफ चूर्ण में 65 मि.ग्रा. खसखस यानी पोस्त के दानों का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन करने से आँख के रोग ठीक होते हैं तथा आँखों की रोशनी बढ़ती है। 2-4 ग्राम सौंफ चूर्ण में बराबर भाग खाँड मिलाकर सेवन करने से संभ्रम रोग तथा गाय के दूध के साथ सेवन करने से आँख के रोग ठीक होते हैं।

जुकाम : 15-30 मिली सौंफ के क्वाथ में खांड मिलाकर पिलाने से जुकाम में लाभ होता है।

मुँह के रोग : सौंफ का क्वाथ बनाकर उसमें फिटकरी मिलाकर गरारा करने से मुँह के छालों में लाभ होता है। सौंफ में समभाग मिश्री मिलाकर सेवन करने से मुँह की दुर्गंध तथा अरुचि समाप्त होती है।

हकलाना : 15-30 मिली सौंफ क्वाथ में मिश्री तथा गाय का दूध मिलाकर पिलाने से हकलाना घटता है।

दमा, खाँसी : अंजीर के साथ सौंफ का सेवन करने से सूखी खाँसी, गले की सूजन तथा लंग कैंसर में लाभ होता है। 5 मिली सौंफ के पत्तों के स्वरस का सेवन करने से तमक-श्वास यानी ब्राँकियल अस्थमा में लाभ होता है।

भूख की कमी : समभाग सौंफ, बिडंग, बनायं तथा काली मिर्च के चूर्ण को 2-5 ग्राम की मात्रा में गुनगुने जल के साथ सेवन करने से भूख खुल कर लगती है।

पेचिश : समभाग बेल, नागरमोथा, सौंफ तथा स्थलपद्म के क्वाथ (10-30 मिली) में मिश्री मिलाकर पीने से आँवयुक्त पेचिश और खूनी पेचिश में लाभ होता है। गेहूँ के आटे में सौंफ मिलाकर उसकी बाटियाँ बनाकर अंगारों पर सेंकें। पकने के बाद उसे कूटकर मिश्री तथा घी मिलाकर सेवन करने से आँवयुक्त पेचिश के दर्द में आराम मिलता है। चार भाग सौंफ चूर्ण में एक भाग इलायची चूर्ण तथा पाँच भाग मिश्री चूर्ण मिलाकर उपयुक्त मात्रा में सेवन करने से पेचिश में शीघ्र लाभ होता है।

सौंफ बीज क्वाथ 25-50 मिली में मधु मिलाकर नियमित भोजनोपरांत सेवन करने से अपच, एसिडिटी, गैस, कब्ज, प्यास, बुखार तथा पेशाब की कमी आदि रोग ठीक होते हैं। 3-6 ग्राम बीजों को चबाने से या बीज चूर्ण का सेवन करने से पेट में मरोड़, उल्टी, कृमिरोग आदि में लाभ होता है। 2 ग्राम भुनी हुई सौंफ में 2 ग्राम बिना भुनी सौंफ तथा 4 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेचिश ठीक होता है। 5-10 मिली सौंफ के पत्तों के स्वरस का सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।

कब्ज व गैस : 1-2 ग्राम सौंफ की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है। सौंफ के बीज के क्वाथ को 5-10 मिली मात्रा में भोजन के प्रत्येक ग्रास के साथ छोटे बच्चों को पिलाने से बच्चों का कब्ज नष्ट होता है। आयु के अनुसार मात्रा में सौंफ के बीजों की चटनी का सेवन करने से डकार और गैस समाप्त होते हैं।

पेशाब की जलन : सौंफ के फलों को पीसकर शर्बत बनाकर पीने से पेशाब की जलन शांत होती है।

मासिक धर्म : सौंफ के बीज के 10-20 मिली क्वाथ में मधु मिलाकर नियमित सेवन करने से मासिक का न आना, कष्ट से होना और बन्ध्यत्व आदि में लाभ होता है।

माताओं का दूध बढ़ाना : सौंफ पत्तों के 5 मिली स्वरस को 100 मिली दूध में मिलाकर पीने से माताओं का दूध बढ़ता है

गठिया : सौंफ, वच, सहिजन, गोक्षुर, वरुण, सहदेवी, वर्षाभू, शटी, गंधप्रसारिणी, अग्निमंथ फल तथा हींग की बराबर मात्रा को कांजी से पीसकर, थोड़ा गरम करके लेप करने से गठिया रोग में दर्द और सूजन दोनों ही ठीक होते हैं।

मुँहासे : सौंफ को पीसकर मुंह पर लगाने से मुँहासे समाप्त होते हैं, चेहरे की चमक बढ़ती है और रंग निखरता है।

उन्माद (पागलपन) : 15-30 मिली सौंफ क्वाथ में मिश्री मिलाकर पीने से पागलपन रोग में लाभ होता है। 5-10 ग्राम सौंफ को पीसकर उसमें समभाग खाँड मिलाकर पिलाने से पित्त के कारण होने वाले उन्माद रोग में लाभ होता है।

बुखार : सौंफ, वच, कूठ, देवदारु, रेणुका, धनिया, खस तथा नागरमोथा बराबर मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बना लें। इसमें मधु तथा मिश्री मिलाकर 25-50 मिली की मात्रा में प्रातःसायं पीने से वात दोष के कारण होने वाला बुखार समाप्त हो जाता है।

शरीर दर्द : 5-10 मिली सौंफ पत्तों के स्वरस को पीने से पूरे शरीर का दर्द ठीक होता है।

नींद की समस्या : 10-30 मिली सौंफ क्वाथ में नमक मिलाकर पीने से अधिक नींद आना दूर होता है। 10-30 मिली सौंफ क्वाथ में 100 मिली गाय का दूध तथा घी मिलाकर पिलाने से नींद अच्छी आती है।

वृद्धि रोग (मोटापा) : 6-12 ग्राम शतपुष्पादि घृत को गुनगुने दूध अथवा जल के साथ सेवन करने से वात, पित्त, मेद, मूत्र आदि के कारण होने वाली वृद्धि (मोटापा), हाथीपाँव तथा लीवर और तिल्ली के वृद्धि के रोगों में लाभ होता है।

बच्चों के रोग : शतपुष्पादि क्वाथ में काला नमक मिलाकर बालकों को पिलाने से बाल रोगों में लाभ होता है।

मूत्राशय में सूजन : सौंफ के पत्तों का स्वरस 5 मिली का सेवन करने से मूत्राशय की सूजन ठीक होती है।

 

मात्रा एवं सेवन विधि

स्वरस 5 मिली। क्वाथ 15-30 मिली। चूर्ण 2 ग्राम। चिकित्सक के परामर्शानुसार।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्श...

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