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ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) के मरीजों के लिए डाइट प्लान (Diet Plan for Leucorrhoea Patient)

ल्यूकोरिया रोग के कई नाम हैं। कई लोग ल्यूकोरिया को सफेद पानी की समस्या कहते हैं तो कुछ श्वेत प्रदर रोग कहते हैं। यह महिलाओं और युवतियों में होने वाली एक आम बीमारी है। ल्यूकोरिया में योनि के रास्ते सफेद और गाढ़ा चिपचिपा पानी का स्राव होता है। ल्यूकोरिया के कारण महिलाओं को योनि मार्ग में खुजली होती है, कमर में दर्द आदि जैसी शिकायतें होती हैं। अगर आप भी इस बीमारी से ग्रस्त हैं, और ल्यूकोरिया का इलाज भी करा रही हैं तो सबसे पहले आपको अपने खान-पान को बदलना होगा, क्योंकि सही खान-पान से रोगों का इलाज करने में आसानी होती है। इसलिए यहां ल्यूकोरिया के लिए डाइट चार्ट की जानकारी दी जा रही है।

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ल्यूकोरिया के मरीजों के लिए इस डाइट प्लान को अपनाकर आप ना सिर्फ बीमारी पर नियंत्रण पा सकेंगे, बल्कि ल्यूकोरिया का सफल इलाज करने में भी कामयाबी पा सकेंगी।

ल्यूकोरिया रोग में क्या खाएं (Your Diet During Leucorrhoea Disease)

ल्यूकोरिया का इलाज करने के लिए आपका आहार ऐसा होना चाहिएः-

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ल्यूकोरिया की बीमारी में क्या ना खाएं (Food to Avoid in Leucorrhoea Disease)

सफेद पानी की समस्या में इनका सेवन नहीं करना चाहिएः-

  • अनाज: नया चावल, मैदा
  • दाल: काला चना
  • फल एवं सब्जियां: प्याज, बैंगन
  • अन्य: मदिरा, अचार, सिरका, फास्टफूड, खट्टी चीजेंदही, देर से पचने वाला आहार, पित्त आहार, लहसुन, पेट को फुलाने वाला भोजन, जलन उत्पन करने वाला भोजन, खट्टे पदार्थ, एसिडिटी बढ़ाने वाले भोज्य पदार्थ।

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ल्यूकोरिया रोग के इलाज के लिए आपका डाइट प्लान (Diet Plan for Leucorrhoea Treatment)

सफेद पानी की समस्या के दौरान सुबह उठकर दांतों को साफ करने (बिना कुल्ला किये) से पहले खाली पेट 1-2 गिलास गुनगुना पानी पिएं। इसके साथ ही इन बातों का पालन करेंः-

 

समय संतुलित आहार योजना (शाकाहार)
नाश्ता (8 :30 AM ) 1 कप पतंजलि दिव्य पेय + 1-2 पतंजलि आरोग्य बिस्कुट / 1/2 गिलास दूध / 2-3 इडली /उत्पम /उपमा /कम नमकीन दलिया (पतंजलि) / मूंग दाल खिचड़ी / पतंजलि कन्फ़्लेक्स /अंकुरित अनाज /1-2 पतली रोटी +1 कटोरी सब्जी + 1 कटोरी दाल/ 1 प्लेट फलों का सलाद (आम,  पपीता, सेब, अनार, अंगूर, केला)
दिन का भोजन   (12:30-01:30 PM 1 कप चावल (मांड रहित) +1-2 पतली रोटियां (पतंजलि मिश्रित अनाज आटा ), 1 कटोरी सब्जी (पत्तेदार, रेशेदार, ताजी)+1 कटोरी दाल + मट्ठा  + एक कटोरी सब्जियों की सलाद
शाम का नाश्ता (05:30- 06:00) pm 1 कप हर्बल (दिव्य पेय ) + 1 कटोरी पतंजलि कार्नफ्लेक्स / सब्जियों का सूप
रात का भोजन         (7: 00 – 8:00 Pm) 1 कप चावल (मांड रहित ) + 1-2 पतली रोटियां (पतंजलि मिश्रित अनाज आटा ) + 1 कटोरी सब्जी (पत्तेदार, रेशेदार,ताजी) + एक कटोरी दाल + मठ्ठा
सोने के समय (10:00 PM) 1 कप दूध + पावर वीटा /बादाम पाक(पतंजलि)  के साथ

सलाह: यदि मरीज को चाय की आदत है तो इसके स्थान पर 1 कप पतंजलि दिव्य पेय दे सकते हैं |

 

ल्यूकोरिया रोग के इलाज लिए आपकी जीवनशैली (Your Lifestyle for Leucorrhoea Treatment)

ल्यूकोरिया का उपचार करने के दौरान आपकी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-

 

  • हर 4-6 घण्टे में पैड बदलते रहें।
  • स्टरलाइज पैड्स का इस्तेमाल करें।
  • शरीर को साफ रखें। योनिमार्ग को अच्छी प्रकार से पानी से साफ करें।
  • अंडरगार्मेंट (अंतवस्त्र) सूती कपड़ों को पहनें। दिन में दो बार इन्हें बदलें।
  • गर्भपात के लिए अधिक दवाइयों का सेवन ना करें।
  • मासिक धर्म के समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • पहले वाले भोजन पचने के बाद ही दूसरी बार भोजन करें।
  • मूत्र और शौच को ना रोंके।

ल्यूकोरिया की बीमारी में ध्यान रखने वाली बातें (Points to be Remember in Leucorrhoea Disease)

ल्यूकोरिया के इलाज के दौरान आपको इन बातों का ध्यान रखना जरूरी हैः-

(1) ध्यान एवं योग का अभ्यास रोज करें।

(2) ताजा एवं हल्का गर्म भोजन अवश्य करें।

(3) भोजन धीरे-धीरे शांत स्थान में शांतिपूर्वक, सकारात्मक एवं खुश मन से करें।

(4) तीन से चार बार भोजन अवश्य करें।

(5) किसी भी समय का भोजन नहीं त्यागें एवं अत्यधिक भोजन से परहेज करें।

(6) हफ्ते में एक बार उपवास करें।

(7) अमाशय का 1/3rd / 1/4th भाग रिक्त छोड़ें।

(8) भोजन को अच्छी प्रकार से चबाकर एवं धीरेधीरे खायें।

(9) भोजन लेने के बाद 3-5 मिनट टहलें।

(10) सूर्यादय से पहले [5:30 – 6:30 am] जाग जायें।

(11) रोज दो बार दांतों को साफ करें।

(12) रोज जिव्हा करें।

(13) भोजन लेने के बाद थोड़ा टहलें।

(14) रात में सही समय  [9- 10 PM] पर नींद लें।

ल्यूकोरिया की बीमारी के दौरान योग और आसन (Yoga and Asana for Leucorrhoea Treatment)

ल्यूकोरिया का उपचार करने के दौरान आपको ये योग और आसन करना चाहिएः-

  • योग प्राणायाम एवं ध्यान: भस्त्रिका, बाह्यप्राणायाम, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उदगीथ, उज्जायी, प्रनव जप।
  • योग प्राणायाम एवं ध्यानकपालभाति (मासिक धर्म के समय ना करें) वैद्यानिर्देशानुसार।
  • आसन: बज्रासन, नौकासन, गोमुखासन, उत्तानपादासन, कन्धरासन, सर्वांगासन।

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