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दूध : आयुर्वेदिक नज़रिया

दूध को अमृत सामान माना गया है। भारत समेत विश्व के कई देशों में लोग रोजाना दूध पीते हैं। आयुर्वेद में भी दूध के कई गुणों का वर्णन मिलता है। शिशुओं के लिए दूध को सर्वोतम आहार माना गया है। अलग अलग जगहों पर लोग अलग अलग जानवरों के दूध का सेवन करते हैं। जैसे कि गाय, भैंस, बकरी या कहीं कहीं ऊंटनी के दूध का भी उपयोग किया जाता है। भारतीय नस्ल की गाय के दूध को गुणों की दृष्टि से सबसे अच्छा माना गया है।

 

आमतौर पर सभी प्रकार के दूध का स्वाद प्राकृतिक रूप से मीठा ही होता है। बकरी के दूध को आरोग्य की दृष्टि से सर्वदोषहर कहा गया है, अर्थात इसके सेवन से सभी तरह के दोष ठीक हो जाते हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी दूध बहुत उपयोगी है।

 

दूध में प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट, विटामिन और मिनरल अधिक मात्रा में होते हैं जो अच्छी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं। इस लेख में हम आपको दूध कब और कैसे पिएं व कौन सा दूध ज्यादा फायदेमंद है, इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं। आइये जानते हैं :

आयुर्वेदिक दृष्टि से दूध के फायदे 

आयुर्वेद में दूध को जीवन शक्ति बढ़ाने वाला आहार बताया गया है। उनके अनुसार दूध में बुद्धि, ताकत और धातुओं को बढ़ाने वाला रसायन होता है। दूध में ओज बढ़ाने वाले द्रव्य के सभी गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से ओज बढ़ता है। इसके अलावा दूध में निम्लिखित गुण होते हैं।

  • कब्ज़ दूर करने वाला
  • शरीर में स्निग्धता लाने वाला
  • गर्भ की स्थापना में सहायक
  • घावों को भरने में उपयोगी
  • रंग को निखारने वाला
  • स्वर में वृद्धि करने वाला
  • जलन को शांत करने वाला

 

इन रोगों में दूध का सेवन करना है फायदेमंद

वैसे तो स्वस्थ रहने के लिए रोजाना दूध का सेवन करना ज़रूरी है। कुछ ऐसी समस्याएं भी हैं जिनसे पीड़ित होने पर दूध का सेवन करने से जल्दी आराम मिलता है। आइये उन बीमारियों पर एक नजर डालते हैं :

  • टीबी
  • पुराना बुखार
  • एसिडिटी
  • खाने के बाद पेट में होने वाला दर्द
  • कब्ज़
  • शुक्र की कमजोरी
  • शरीर का सूखना

अगर आप ऊपर बताई गई इन बीमारियों के शिकार हैं तो चिकित्सक की सलाह के अनुसार दूध का सेवन करें।

आइये गाय, भैंस और बकरी के दूध के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

गाय का दूध

अन्य जानवरों के दूध की तुलना में गाय के दूध को सबसे ज्यादा पौष्टिक माना गया है। वतर्मान समय में भारत में गाय की 40 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। गाय के दूध के इन फायदों के कारण ही गावों के अधिकांश घरों में आज भी लोग गाय पालते हैं। जो गायें जंगल में चरती हैं और जड़ी बूटियां व तमाम किस्म की वनस्पतियाँ खाती हैं। उन गायों का दूध सबसे ज्यादा पौष्टिक होता है। आयुर्वेद में इन गायों के दूध को दिव्य अमृत कहा गया है।

 

गाय का दूध हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। मां के दूध के बाद गाय के दूध को ही शिशुओं के लिए सबसे लाभकारी आहार बताया गया है।

 

गाय का दूध इन रोगों में है फायदेमंद 

आयुर्वेद के अनुसार गाय का दूध वात और पित्त दोष को शांत करता है। इसमें जीवन शक्ति बढ़ाने वाले और बुढ़ापे में होने वाले रोगों को दूर करने की शक्ति होती है। गाय के दूध के नियमित सेवन से निम्न समस्याओं में लाभ मिलता है।

  • थक कर चक्कर आना
  • अधिक प्यास
  • पुराना बुखार
  • शरीर के किसी अंग से रक्तस्राव होना
  • मूत्र त्याग में कठिनाई

 

किस नस्ल की गाय का दूध है ज्यादा फायदेमंद

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि किस नस्ल की गाय का दूध पीना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय नस्ल की गाय के रंग और संतति के अन्तर से भी इसके दूध के गुणों में अन्तर हो जाता है। जैसे-तरुणी (युवा) गाय का दूध मधुर, रसायन और तीनों दोषों को दूर करने वाला है। वहीं वृद्ध गाय का दूध दुर्बल माना गया है। इसी प्रकार काली गाय का दूध वात दोष को दूर करने वाला अधिक गुणकारी हो जाता है, तो पीली गाय का दूध पित्त और वात को दूर करने वाला होता है। जर्सी गायों के दूध को सब से कम गुणकारी माना गया है।

 

भैंस का दूध

भैंस का दूध गाय के दूध की अपेक्षा अधिक शीतल, चिकना, भारी,  वायुकारक और स्रोतों में रुकावट पैदा करने वाला होता है। जिन लोगों की पाचक अग्नि बहुत तीक्ष्ण होती है उनके लिए भैंस का दूध काफी फायदेमंद रहता है। इसके अलावा अनिद्रा के रोगियों के लिए भी गाय का दूध अधिक फायदेमंद होता है।

 

भैंस का दूध पीने से अच्छी नींद आती है। इसलिए इसे नींद लाने की औषधि के रुप में प्रयोग किया जाता है। भैंस के दूध में गाय के दूध की तुलना में ज्यादा घी पाया जाता है। हालांकि अगर फायदों की बात की जाए तो गाय के दूध से तैयार घी, भैंस के घी से ज्यादा गुणकारी होता है।

 

भैंस का दूध हड्डियों की मजबूती, दांतों को स्वस्थ रखने और शरीर की ताकत बढ़ाने वाला माना जाता है। यह दूध देरी से पचता है यही वजह है कि शिशुओं को भैंस का दूध पिलाने से मना किया जाता है।

 

बकरी का दूध 

गाय और भैंस के अलावा अपने देश में बकरी का दूध का भी उपयोग किया जाता है। हालांकि गाय और भैंस के दूध की तुलना में बकरी के दूध का कम उपयोग किया जाता है। लेकिन यह दूध आसानी से पच जाता है इसी वजह से रोगियों और शिशुओं के लिए यह खासतौर पर उपयोगी होता है।

 

बकरी का दूध कसैला और मधुर (मीठा) होता है। इसे अनेक प्रकार के रोगों में लाभकारी माना गया है, जैसे टीबी, बुखार, श्वास, रक्तस्राव, खांसी, शोष, विष नाशक आदि। बकरी का दूध पीने से पाचक अग्नि बढ़ती है। जिन लोगों की पाचक अग्नि मंद होती है उन्हें बकरी का दूध पीने की सलाह दी जाती है।

 

दूध के सन्दर्भ में विशेष तथ्य

दूध को बिना पानी डाले जितना अधिक पकाया जाता है वह उतना ही अधिक भारी और चिकना होता जाता है। यदि दूध में कुछ पानी डाल कर पानी जलने तक उबाला जाए, तो यह हल्का हो जाता है। आमतौर पर दूध को कफ बढ़ाने वाला आहार माना जाता है लेकिन अगर उबालते समय दूध में पिप्पली, सोंठ (सूखा अदरक), मुलेठी व हल्दी डाल दें तो यह कफकारी नहीं रहता है।

 

आयुर्वेद के अनुसार जो व्यक्ति सुबह पानी का, दिन में भोजन के बाद छाछ या लस्सी का और रात को सोने से पहले दूध का सेवन करते हैं वे हमेशा निरोग रहते हैं।

 

कैसा दूध नहीं पीना चाहिए

आयुर्वेद में खासतौर पर पुराने या बासी दूध को पीने से मना किया गया है। बासी दूध को पीने से अपच व पेट से जुड़ी अन्य कई समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा जिस दूध का रंग, स्वाद व गंध बदल गया हो या दूध फट गया हो उस दूध का सेवन कभी नहीं करना चाहिए।

 

आमतौर पर कच्चा दूध भारी और कफ बढ़ाने वाला माना जाता है और आसानी से पचता नहीं है। इसीलिए दूध को उबालकर पीना चाहिए। बिना उबाले देर तक रखने से दूध खराब हो जाता है और ऐसे दूध का कभी भी सेवन नहीं करना चाहिए।

 

दूध कब पीना चाहिए

प्रातःकाल का दूध सायंकाल के दूध की अपेक्षा भारी व शीतल होता है। आमतौर पर लोग दिन के समय पाचन में जलन पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। इसलिए उन्हें रात में सोने से पहले दूध पीना चाहिए। रात में दूध पीने से पेट की जलन शांत होती है और अच्छी नींद आती है।

 

वैसे गाय का दूध निकालते ही तुरन्त प्राकृतिक-रूप से गर्म अवस्था में ही अच्छा माना जाता है।  भैंस का दूध धाराशीत अर्थात दूध दोहने के बाद ठण्डा किया हुआ और बकरी का दूध शृतशीत (उबालकर ठण्डा किया गया) अच्छा माना जाता है।

 

दूध के साथ क्या ना खाएं

कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें दूध के साथ खाने पर आपको नुकसान झेलने पड़ सकते हैं. आयुर्वेद में इन्हें विरूद्ध आहार कहा जाता है. दूध के विरुद्ध संयोग निम्न है अर्थात दूध के साथ कभी भी निम्नलिखित चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए :

 

  • नमक
  • दही
  • मछली
  • मूली या मूली के पत्ते व अन्य कच्चे सलाद
  • इमली
  • खरबूजा
  • नारियल
  • नींबू व अन्य खट्टे फल
  • जामुन
  • अनार
  • आंवला
  • कुलथी व उड़द

दूध से बनी चीजों के फायदे

दूध तो फायदेमंद है ही इसके साथ ही साथ दूध से बनी चीजों में भी उतने ही लाभकारी गुण मिलते हैं। आइये दूध से बने कुछ ख़ास खाद्य पदार्थों के फायदों के बारे में जानते हैं।

 

  • दूध की मलाई :  स्निग्ध, वात और पित्त को शान्त करने वाली और वृष्य (शुक्र को बढ़ाने वाली) होती है।
  • नई ब्याई गाय का दूध : पीयूष (खीस) गुरु, अभिष्यन्दी और कफ बढ़ाने वाला होता है तथा इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।
  • खोया : भारी, चिकनाई युक्त, ताकत और शुक्र बढ़ाने वाला होता है।
  • छेना या पनीर :  बलकारक और खोये से हल्का होता है।
  • छेना का पानी– बलकारक और मन्दाग्नि में लाभकारी है।

आजकल बाज़ार में पैकेट वाले दूध अधिक मात्रा में बिकते हैं और बड़े शहरों में लोग इन्ही दूध पर आश्रित हैं। पैकेट वाले दूध, प्रकृतिक दूध की तुलना में कम पौष्टिक माने जाते हैं। इसलिए अगर संभव हो तो देसी गाय का या भैंस का दूध ही पीएं।