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Kateri: कटेरी के हैं अनेक अनसुने फायदे – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

कटेरी के पौधे का परिचय (Introduction of Kateri)

kateri benefits

कटेरी एक प्रकार का कांटेदार पौधा होता है जो जमीन में फैला होता है। कटेरी के पत्ते हरे रंग के, फूल नीले और बैंगनी रंग के और फल गोल और हरे रंग के सफेद धारीदार होते हैं। इस कांटेदार पौधे के इतने गुण हैं कि आयुर्वेद में इसका उपयोग औषधि के रुप में किया जाता है। चलिये इस अनजाने जड़ी-बूटी के बारे में विस्तार से जानते हैं कि ये कैसे और किन-किन बीमारियों के लिए उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कटेरी का पौधा क्या होता है? (What is Kateri in Hindi?)

कटेरी का पौधा (kateri plant) झाड़ी के रूप में जमीन पर फैला हुआ होता है। इसको देखने से ऐसा लगता है, जैसे कोई क्रोधित नागिन शरीर पर अनेकों कांटो का वत्र ओढ़े गर्जना करती हुई मानो कहती हो, मुझे कोई छूना मत। कटेरी में इतने कांटे होते हैं कि इसे छूना दुष्कर है, इसीलिए इसका एक नाम दुस्पर्शा है।

कटेरी की कई प्रजातियां होती है परन्तु मुख्यतया तीन प्रजातियों 1. छोटी कटेरी (Solanum virginiannumLinn.), 2. बड़ी कटेरी (Solanum anguivi Lam.) तथा 3. श्वेत कंटकारी (Solanum lasiocarpum Dunal) का प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है।

छोटी कटेरी के दो भेद होते हैं एक तो बैंगनी या नीले रंग के पुष्प वाली जो कि सभी जगह मिल जाती है। दूसरी सफेद पुष्पवाली जो हर जगह नहीं मिलती है। इस दूसरी प्रजाति को सफेद कण्टकारी (safed kateri) कहते हैं। इस प्रजाति को श्वेतचन्द्रपुष्पा, श्वेत लक्ष्मणा, दुर्लभा, चन्द्रहासा, गर्भदा आदि नामों से जाना जाता है। 

सफेद कांटा वाला  पौधा वर्षायू, छोटा एवं हल्के रंग का होता है। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं तथा फूलों के भीतर की केसर सफेद या पीले रंग के होते हैं। इसकी जड़ छोटी, पतली तथा शाखायुक्त होती है। यह पौधा शीत-ऋतु में पैदा होता है तथा वर्षा-ऋतु में गल जाता है।

गर्म प्रकृति की होने के कारण कटेरी पसीना पैदा करने वाली होती है तथा कफ वात को भी कम करने में मदद करती  है। कटेरी का पौधा (kateri plant)कटु, कड़वा और गर्म तासिर का होने के कारण खाना हजम करने में सहायता करता है। भूख कम लगने और पित्त संबंधी बीमारी को दूर करने के में यह औषधि बड़ी प्रभावशाली तरीके से काम करती है।  यह मूत्र संबंधी बीमारी और बुखार को कम करने में फायदेमंद होती है। मूत्रल होने के कारण शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाकर सूजन में, सूजाक या गोनोरिया, मूत्राघात और मूत्राशय की पथरी में भी यह औषधि लाभकारी सिद्ध हुई है। यह खून को साफ करने वाली, सूजन कम करने वाली और रक्तभार को कम करती है। यह सांस संंबंधी नलिकाओं तथा फेफड़ों से हिस्टेमीन को निकालती है। यह आवाज को बाघ या व्याघ्र के समान तेज करती है इसलिए इसको व्याघी कहते हैं।

श्वेत कंटकारी प्रकृति से कड़वी, गर्म, कफवात कम करने वाली, रुचि बढ़ाने वाली, नेत्र के लिए हितकर, भूख बढ़ाने वाली, पारद को बांधने वाली तथा गर्भस्थापक (conception promotor) होती है। इसके बीज भूख बढ़ाने में मदद करते हैं। इसकी जड़ भूख बढ़ाने तथा हजम शक्ति बढ़ाने में मदद करती है।

श्वेत कंटकारी के फल भूख बढ़ाने वाली, कृमिरोधी; सांस की तकलीफ, खांसी, बुखार या ज्वर, मूत्रकृच्छ्र या मूत्र संबंधी समस्या, अरुचि या खाने की कम इच्छा, कान में सूजन आदि बीमारियों के उपचार में हितकारी होती है। श्वेत कंटकारी के फल का काढ़ा बुखार से राहत दिलाती है।

कंटकारी की जड़ से प्राप्त रस में स्टेफीलोकोक्कस औरीयस (Staphylococcus aureus) एवं एस्चरीशिया कोलाई (Escherichia coli) रोधी गुण पाए जाते हैं।

अन्य भाषाओं में कटेरी के पौधे के नाम (Name of Kateri  in Different Languages in Hindi)

कटेरी का वानस्पतिक नाम Solanum virginiannum L. (सोलेनम वर्जिनीएनम) Syn-Solanum xanthocarpum Schrad. & Wendl., Solanum surattense Burm.f. होता है। कटेरी  Solanaceae (सोलैनेसी) कुल की होती है। कटेरी को अंग्रेजी में Yellow berried night shade (येलो बेरीड नाइट शेड) लेकिन भारत के विभिन्न प्रांतों में कटेरी भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। जैसे-

Kateri in-

Sanskrit-कण्टकारी, दुस्पर्शा, क्षुद्रा, व्याघी, निदिग्धिका, कण्टकिनी, धावनी;

Hindi-कटेरी, कंटकारी, छोटी कटाई, भटकटैया, रेंगनी, रिगणी, कटाली, कटयाली;

Urdu-कटीला (Katilla);

Odia-ओन्कोरान्ती (Onkoranti), रेगिंनी भेजिरी (Rengini bhejiri);

Kannada-नेलगुल्ला (Nelagulla), चिक्कासोण्डे (Chikkasonde);

Gujrati-भोयारिंगणी (Bhoyaringani);

Bengali-कंटकारी (Kantakari);

Marathi-रिङ्गणी (Ringani), भुईरिङ्गणी (Bhuiringani), पसरकटाई (Pasarkatai);

Telegu-नेलवाकफडु (Nelavakudu), वाकफडु (Vakudu);

Tamil-कांडनगट्टरी (Kandangattari), सुट्टुरम (Sutturam);

Malayalam-कण्टकारीचुण्टा (Kantakarichunta), पुट्टाचुंट(Puttachunta),कण्टकारीवलुटाना (Kantakarivalutana), कण्टकट्टारी (Kantakattari)।

English-थॉर्नी नाइट शेड (Thorny night shade);

Arbi-बादिंजन बर्री (Badinjan barri), शैकतुल्अकरब (Shaiktulakrab);

Persian-बदनगनेदश्ती (Badanganedashti), कटाई खुर्द (Katai khurd)।

कटेरी के पौधे के फायदे (Kateri Uses and Benefits in Hindi)

कटेरी के फायदों के बारे में बहुत कम जानकारी लोगों को पता है। लेकिन इस कंटीले पौधे के अनगिनत औषधीय गुणों के कारण कटेरी को कई बीमारियों के उपचार स्वरूप प्रयोग किया जाता है। चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-

सिरदर्द में फायदेमंद कटेरी (Kateri Benefits in Headache in Hindi)

headache relief

अगर आपको काम के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के वजह से सिरदर्द की शिकायत रहती है तो कटेरी का घरेलू उपाय बहुत लाभकारी सिद्ध होता है।

-कटेरी का काढ़ा, गोखरू का काढ़ा तथा लाल धान के चावल से बने ज्वरनाशक पेय का थोड़ी-थोड़ी  मात्रा में दिन में तीन-चार बार सेवन करने से बुखार होने पर जो सिर दर्द होता उसमें आराम मिलता है।

-कटेरी के फल के रस को माथे पर लेप करने से सिर दर्द कम होता है।

और पढ़े: सिरदर्द में पुत्रजीवक के फायदे

गंजापन करे दूर कटेरी (Kantkari for Alopecia in Hindi)

अक्सर किसी बीमारी के कारण बाल झड़कर गंजेपन की अवस्था आ गई है तो कटेरी (kateri plant) का इलाज फायदेमंद साबित हो सकता है-

-20-50 मिली कटेरी पत्ते के रस में थोड़ा शहद मिलाकर सिर में चंपी करने से इन्द्रलुप्त (गंजापन) में लाभ होता है।

-श्वेत कंटकारी के 5-10 मिली फल के रस में मधु मिलाकर सिर में लगाने से इन्द्रलुप्त में लाभ होता है।

और पढ़े: गंजेपन के लिए तंबाकू के फायदे

रूसी या दारूणक रोग से दिलाये छुटकारा कटेरी (Kateri Benefit to Treat Dandruff in Hindi)

दिन भर बाहर धूल मिट्टी या धूप में काम करने पर अक्सर बालों में रूसी की समस्या हो जाती है। इससे निजात पाने के लिए कटेरी फल के रस में समान मात्रा में मिलाकर सिर में लगा सकते है।

और पढ़ें – खादिर के प्रयोग से रुसी का इलाज

आँखों की बीमारी में फायदेमंद कटेरी (Benefit of Kalathgiri to Get Relief from Eye Disease in Hindi)

आँख संबंधी बीमारियों में बहुत कुछ आता है, जैसे- सामान्य आँख में दर्द, रतौंधी, आँख लाल होना आदि। इन सब तरह के समस्याओं में  कटेरी से बना घरेलू नुस्ख़ा बहुत काम आता है। कटेरी (kateri plant) के 20-30 ग्राम पत्तों को पीसकर उनकी लुगदी बनाकर आंखों पर बांधने से (आंखों का दर्द ) दर्द कम होता है।

और पढ़े: आंखों के दर्द के घरेलू इलाज

जुकाम से दिलाये राहत कटेरी (Kateri to Treat Cold in Hindi)

मौसम के बदलने पर नजला, जुकाम व बुखार हो जाता है, उसमें पित्तपापड़ा, गिलोय और छोटी कटेरी  सबको समान मात्रा में (20 ग्राम) लेकर आधा लीटर पानी में पकाकर एक चौथाई भाग का काढ़ा पिलाने से बहुत लाभ मिलता है।

दांत दर्द में फायदेमंद कटेरी ( Benefit of Kateri toRelieve Pain in Toothache in Hindi)

toothache

दांत दर्द की परेशानी दूर करने में कटेरी मदद करती है। 

-अगर दांत बहुत दुखती हो तो कटेरी के बीजों का धुआं लेने से तुरन्त आराम मिलता है। कटेरी की जड़ (kateri ki jad ke fayde), छाल, पत्ते और फल लेकर उनका काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से भी दांतों का दर्द दूर होता है।

-श्वेत कंटकारी के बीजों का धूम्रपान के रूप में प्रयोग करने से दाँतों का दर्द तथा दंतकृमि कम होता है।

और पढ़े: दांत दर्द के लिए घरेलू इलाज

खाँसी से दिलाये राहत कटेरी (Kantkari for Cough in Hindi)

अगर मौसम के बदलाव के कारण खांसी से परेशान है और कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है तो बांस से इसका इलाज किया जा सकता है।

-आधा से 1 ग्राम कटेरी के फूल के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चटाने से बालकों की सब प्रकार की खांसी दूर होती है।

-15-20 मिली पत्ते का रस या 20-30 मिली जड़ के काढ़े में 1 ग्राम छोटी पीपल चूर्ण एवं 250 मिग्रा सेंधानमक मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।

-छोटी कटेरी के रस से पकाए हुए घी को 5-10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से खाँसी में आराम मिलता है।

-25 से 50 मिली कटेरी काढ़े में 1-2 ग्राम पिप्पली चूर्ण मिलाकर सेवन करने से खांसी से राहत मिलती  है।

-20-40 मिली कण्टकारी का काढ़े का सेवन करने से सांस संबंधी समस्या, खांसी तथा छाती के दर्द में लाभ होता है।

-सफेद कंटकारी के 1-2 ग्राम फल चूर्ण में मक्खन मिलाकर सेवन करने से आराम मिलता है।

अस्थमा के कष्ट से दिलाये आराम कटेरी (Kateri Beneficial in Asthma in Hindi)

मौसम के बदलते ही दमा या अस्थमा के रोगी को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है लेकिन कटेरी का औषधीय गुण इस कष्ट से आराम दिलाने में लाभकारी होता है। 

-कटेरी की प्रसिद्धि कफ को नाश करने के सम्बन्ध में बहुत अधिक है। छाती का दर्द इत्यादि रोगों में इसका बहुत प्रयोग होता है। जब छाती में कफ भरा हुआ हो तब इसका 20-30 मिली काढ़ा देने से बहुत लाभ होता है। इसके फलों के 20-30 मिली काढ़े में 500 मिग्रा भुनी हुई हींग और 1 ग्राम सेंधा नमक डालकर पीने से जीर्ण अस्थमा में भी लाभ होता है।

-कटेरी पञ्चाङ्ग को यवकुट कर आठ गुना पानी मिलाकर गाढ़ा होने तक पकाएं, गाढ़ा होने पर कांच की शीशी में रखें। इसमें 1 ग्राम मधु मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से आराम मिलता है।

-छोटी कटेरी के 2-4 ग्राम कल्क में 500 मिग्रा हींग तथा 2 ग्राम मधु मिलाकर, सेवन करने से अस्थमा में लाभ होता है।

-छोटी कटेरी की जड़ (kateri ki jad ka powder), श्वेत जीरक और आंवला से बने चूर्णं (1-3 ग्राम) में, मधु मिलाकर प्रयोग करने से अस्थमा में लाभ होता है।

और पढ़े: दमा में कमरख से लाभ

उल्टी के परेशानी में फायदेमंद कटेरी (Kantkari Treats Vomiting in Hindi)

अगर मसालेदार खाना खाने या किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के वजह से उल्टी हो रही है तो कटेरी का सेवन इस तरह से करने पर फायदा मिलता है।

-10-20 मिली कटेरी के रस में 2 चम्मच मधु मिलाकर देने से उल्टी से राहत मिलती है।

-अडूसा, गिलोय तथा छोटी कटेरी से बने काढ़े ठंडा होने पर उसमें मधु मिलाकर, 10-20 मिली की मात्रा में पीने से सूजन और खाँसी  से आराम मिलता है।

अग्निमांद्द या अपच से दिलाये छुटकारा कटेरी (Kateri to Treat Dyspepsia in Hindi)

अगर खान-पान में गड़बड़ी होने पर बदहजमी की समस्या हो रही है तो उसमें कटेरी का इस तरह से सेवन करने पर आराम मिलता है। 

समान मात्रा में कटेरी और गिलोय के 1½ ली रस में 1 किग्रा घी डालकर पकाना चाहिए। जब केवल घी मात्र शेष रह जाए तब उसको उतार कर छान लें। इस घी को 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से अपच की समस्या तथा खांसी की समस्या से राहत मिलती है। कंटकारी के गुण अपच के समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं।

पेट दर्द में फायदेमंद कटेरी (Kateri Treat Stomachalgia  in Hindi)

अक्सर मसालेदार खाना खाने या असमय खाना खाने से पेट में गैस हो जाने पर पेट दर्द की समस्या होने लगती है। कटेरी के फलों के बीज निकाल कर उनको छाछ में डालें तथा उबालकर सुखा दें। फिर उनको रातभर मट्ठे में डुबोएं तथा दिन में सुखा लें। ऐसा  4-5 दिन तक करके उनको घी में तलकर खाने से पेट दर्द तथा पित्त संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।

मूत्रकृच्छ्र या मूत्र संबंधी समस्याओं में फायदेमंद कटेरी (Kateri  Benefits to Get Relief from Dysuria in Hindi)

मूत्र संबंधी बीमारी में बहुत तरह की समस्याएं आती हैं, जैसे- मूत्र करते वक्त दर्द या जलन होना, मूत्र रुक-रुक कर आना, मूत्र कम होना आदि। कटेरी इस बीमारी में बहुत ही लाभकारी साबित होता है।

-छोटी कटेरी के जड़ के चूर्ण में समान भाग में बड़ी कटेरी के जड़ का चूर्ण मिलाकर, 2 चम्मच दही के साथ, सात दिन तक खाने से पथरी, मूत्रकृच्छ्र (मूत्र त्याग में कठिनता) तथा जलोदर (पेट में जल की मात्रा अधिक होने के कारण सूजन) में लाभ होता है।

-कटेरी के 10-20 मिली रस को मट्ठे में मिलाकर, कपड़े से छानकर पिलाने से मूत्रकृच्छ्र (पेशाब की रुकावट) में लाभ होता है।

और पढ़े: जलोदर में केवांच के फायदे

स्तनों का ढीलापन करे कम कटेरी (Kantkari Beneficial in Laxity of Breast in Hindi)

अगर ब्रेस्ट या स्तन के ढीलेपन से परेशान हैं तो कटेरी की जड़ और अनार की जड़ को सामन मात्रा में  लें। उसको पीसकर  स्तनों पर लेप करने से स्तन कठोर हो जाते हैं और स्तन या ब्रेस्ट का ढीलापन कम होता है।

गर्भपात का खतरा करे कम कटेरी (Kateri Beneficial in Abortion in Hindi)

कटेरी (kateri plant in hindi) का औषधीय गुण गर्भपात के खतरे को कम करने में मदद करता है। छोटी कटेरी या बड़ी कटेरी की 10-20 ग्राम जड़ों को 2-4 ग्राम पिप्पली के साथ मिलाकर भैंस के दूध में पीस छानकर कुछ दिन तक रोज दो बार पिलाते रहने से गर्भपात का भय नहीं रहता और स्वस्थ शिशु का जन्म होता है।

बुखार से दिलाये राहत कटेरी (Kateri to Treat Fever in Hindi)

Fever

बुखार के लक्षणों से कष्ट से निजात दिलाने में कटेरी का घरेलू उपाय लाभकारी होता है-

-कटेरी की जड़ (kateri ki jad)और गिलोय को समान मात्रा में मिलाकर काढ़ा बना लें। 10-20 मिली काढ़ा को सुबह शाम पिलाने से बुखार तथा पूरे शरीर का दर्द कम होता है।

-कटेरी की जड़, सोंठ, बला-मूल, गोखरू तथा गुड़ को समभाग लेकर दूध में पकाकर, 20-40 मिली सुबह-शाम पीने से मल-मूत्र की रुकावट, बुखार और सूजन दूर होती है।

और पढ़ें: गोखरू बुखार में दिलाये राहत

हृदय की बीमारी में फायदेमंद कटेरी (Kateri Beneficial in Heart Disease in Hindi)

कटेरी (kateri plant in hindi))हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करती है इससे दिल की बीमारी होने की संभावना कम होती है। 1-2 ग्राम श्वेत कंटकारी के जड़ (kateri ki jad)की त्वचा के चूर्ण का सेवन करने से हृदय की बीमारी कम होती है।

और पढ़ें: हृदय को स्वस्थ रखने में अर्जुन के फायदे

दस्त रोके कटेरी (Kantkari to Fight Diarrhoea in Hindi)

अगर ज्यादा मसालेदार खाना, पैकेज़्ड फूड या बाहर का खाना खा लेने के कारण दस्त है कि रूकने का  नाम ही नहीं ले रहा तो कटेरी का घरेलू उपाय बहुत काम आयेगा।श्वेत कंटकारी के 1-2 ग्राम फल चूर्ण का सेवन तक्र (छाछ) के साथ करने से अतिसार में लाभ होता है।

और पढ़ें: दस्त रोकने में फायदेमंद गोखरू

बवासीर या पाइल्स में फायदेमंद कटेरी (Kateri  to Treat in Piles in Hindi)

अगर ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने के आदि है तो पाइल्स के बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। उसमें  बवासीर का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। श्वेत कंटकारी के फलों को कोशातकी के काढ़े में पकाकर प्रयोग करने से अर्श या पाइल्स में लाभ होता है।

और पढ़े: पाइल्स में अस्थिसंहार के फायदे

प्रसव-पीड़ा या लेबर पेन में लाभकारी कटेरी (Kateri Beneficial in Labour pain in Hindi)

कटेरी का औषधीय गुण लेबर पेन को कम करने में मदद करती है। 10-20 मिली श्वेत कंटकारी के जड़ (kateri ki jad) का सेवन करने से प्रसव पीड़ा कम होता है।

त्वचा संबंधी समस्याओं में फायदेमंद कटेरी (Kantkari  to Treat Skin Diseases  in Hindi)

आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण में त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। हर कोई किसी न किसी त्वचा संबंधी परेशानी से ग्रस्त हैं। कटेरी इन सब परेशानियों को कम करने में मदद करती है।

श्वेत कंटकारी के जड़ को पीसकर लेप करने से कण्डू या खुजली, क्षत (कटना या छिलना) तथा अल्सर के घाव में लाभकारी होता है।

कटेरी का उपयोगी भाग (Useful Parts of Kateri)

आयुर्वेद में कटेरी के पञ्चाङ्ग, जड़, पत्ते, पुष्प, फल तथा बीज का प्रयोग औषधि के लिए किया जाता है।

कटेरी के पौधे का इस्तेमाल कैसे  करना चाहिए? (How to Use Kateri  in Hindi?)

बीमारी के लिए कटेरी के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए कटेरी का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

चिकित्सक के परामर्श के अनुसार कटेरी का 20-50 मिली काढ़े का सेवन कर सकते हैं।

कटेरी कहां पाया और उगाया जाता है? (Where is Kateri Found or Grown  in Hindi?)

 भारत के गर्म प्रदेशों में यह खरपतवार के रूप में सड़कों के किनारे एवं रिक्त स्थानों पर तथा हिमालय पर 2200 मी की ऊँचाई तक पाया जाता है।