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Stone Flower (Yellow lichen): कई बिमारियों की काट है छरीला- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

क्या आप जानते हैं कि छरीला (dagad phool) क्या है, और छरीला का प्रयोग किस काम में किया जाता है? आमतौर पर लोग छरीला का इस्तेमाल मसालों के रूप में ही करते हैं, लेकिन छरीला के और भी फायदे हैं। कई लोगों को छरीला से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी ही नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार, छरीला एक उपयोगी औषधि है। बालों की समस्या, आंखों के रोग में छरीला के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं। इसी तरह विसर्प रोग, सिर दर्द, मूत्र रोग में भी छरीला से लाभ मिलता है। यह कई बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। आइए छरीला के फायदे के बारे में जानते हैं।

Contents

छरीला क्या है? (What is Stone Flower in Hindi?)

छरीला (dagad phool) एक प्रकार की वनस्पति (लाइकेन) है जो चट्टानों, वृक्षों तथा दीवारों पर जमता है। पथरीले पहाड़ों पर पैदा होने से यह शैलेय और चट्टानों पर फूल जैसा दिखाई देता है। इसके कारण इसे शिलापुष्प भी कहा जाता है। इसके पीछे वाला भाग श्यामला रंग का और नीचला भाग सफेद रंग का होता है। इसमें एक विशिष्ट गन्ध होती है।

अन्य भाषाओं में छरीला के नाम (Name of Stone Flower in Different Languages)

छरीला (dagad phool) का वानस्पतिक नाम Parmelia perlata (Huds.) Ach. (पारमेलिया परलेटा) है, और यह Parmeliaceae (पार्मेलिएसी) कुल का है। छरीला को देश या विदेशों में अन्य कई नामों से भी जाना जाता है, जो ये हैंः-

Stone Flower in –

  • Hindi (stone flower in hindi) – छरीला, भूरिछरीला, पत्थरफूल

  • Sanskrit – शैलेय, शिलापुष्प, वृद्ध, कालानुसार्यक, अश्मपुष्प, शीतशिव

  • English (dagad phool in english) – येलो लाइकेन (Yellow lichen), लिथो लाइकेन (Litho lichen), लाइकेन (Lichens), Stone flowers (स्टोन फ्लावर)

  • Urdu – हबाक्कारमनी (Habakkarmani), रीहानकरमनी (Rihankarmani)

  • Kannada – कल्लूहूवु (Kalluhavu)

  • Gujarati – घबीलो (Ghabilo), पत्थरफूला (Patharphula), छडीलो (Chadilo)

  • Tamil – कलपसी (Kalpasi), कलापु (Kalapu)

  • Telugu – शैलेय मनेद्रव्यमु (Shelayamanedravayamu), रतिपंचे (Ratipanche)

  • Bengali – शैलज (Shelaj)

  • Nepali – भन्याऊ (Bhanyau)

  • Punjabi – चालचालीरा (Chalchalira)

  • Marathi – दगडफूल (Dagadaphula)

  • Malayalam – सेलेयाम (Celeyam), कलपुवु (Kalppuvu)

  • Arabic – आशीना (Ashina), उसनाह (Ushnah)

  • Persian – दवाला (Davala), दोवालह (Dowalah), उशनह (Ushnah), गुलेसंग (Gulesang)

छरीला के फायदे और औषधीय गुण (Chhareela Benefits and Uses in Hindi)

आप छरीला (dagad phool) के औषधीय गुण से इन रोगों में लाभ पा सकते हैंः-

बालों की समस्या में छरीला के फायदे (Benefits of Chhareela in Grey Hair Problem in Hindi)

बालों की समस्या आज लोगों की आम परेशानी बन चुकी है। छोटे बच्चे हों या वयस्क, सभी के बाल सफेद होने लगे हैं। ऐसे में छरीला का प्रयोग बहुत लाभ (kalpasi health benefits) पहुंचाता है। आप छरीला, कर्चूर, हल्दी, काली तुलसी, तगर तथा गुड़ को समान मात्रा में मिला लें। इसे पीसकर सिर में लेप करने से बालों का पकना कम होने लगता है।

और पढ़ेंः बालों को झड़ने से रोकने के उपाय

सिर दर्द में छरीला के औषधीय गुण से लाभ (Chhareela Uses in Relief from Headache in Hindi)

अगर आप बराबर सिर के दर्द से परेशान रहते हैं तो आपको छरीला का इस्तेमाल करना चाहिए। छरीला (dagad phool) को पीसकर मस्तक पर लगाएं। इससे सिर दर्द से राहत मिलती है।

और पढ़ेंः सिर दर्द के लिए घरेलू उपाय

आंखों के रोग में छरीला के फायदे (Chhareela Benefits to Cure Eye Disease in Hindi)

  • आंखों की कई बीमारियों में छरीला का उपयोग फायदेमंद होता है। हरीतकी, बहेड़ा, आँवला, सोंठ, मरिच, पिप्पली, समुद्रफेन, छरीला तथा राल की बराबर-बराबर मात्रा लें। इसकी बत्ती बनाकर जल में घिस लें। इसे आंखों में काजल की तरह लगाएं। इससे कफज विकार के कारण होने वाली आंखों की बीमारी में लाभ होता है।
  • इसी तरह छरीला (dagad phool) चूर्ण का भी अगर आप आंखों में काजल की तरह लगाएंंगे तो बहुत लाभ मिलता है।

और पढ़ेंः आंखों के रोग में करेला के फायदे

मूत्र रोग में छरीला के सेवन से लाभ (Benefits of Chhareela for Urinary Disease in Hindi)

  • छरीला को पीसकर गुनगुना कर लें। इसका सेवन करने और पेट, कमर, किडनी, कमर के आस-पास लेप करने से मूत्र रोग में लाभ होता है।
  • छरीला का काढ़ बना लें। इसे 10-30 मिली की मात्रा में 1 ग्राम जीरा का चूर्ण मिला लें। इसमें 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से रुक-रुक कर पेशाब आने की परेशानी ठीक (kalpasi health benefits) होती है।
  • छरीला को पीसकर नाभि के नीचे बांधने से पेशाब के रुक-रुक कर आने की परेशानी में लाभ होता है।

और पढ़ें: मूत्र रोग में लाभ दिलाता है भुई-आंवला का सेवन

विसर्प रोग में छरीला के औषधीय गुण से फायदा (Chhareela Benefits to Cure Erysipelas in Hindi)

सज्जीक्षार (सर्जिकादि चूर्ण), नीलाथोथा, कासीस, छरीला, रसाञ्जन तथा मैनसिल (मन शिला) का चूर्ण बना लें। इसे त्वचा पर लगाने से घाव और विसर्प रोग में लाभ होता है।

और पढ़ेंः विसर्प रोग में चिरायता के फायदे

छरीला के औषधीय गुण से घाव का इलाज (Chhareela Uses in Wound Healing in Hindi)

छरीला के चूर्ण को घाव पर लगाएं। इससे घाव ठीक हो जाता है। बेहतर उपाय के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

और पढ़ेंः घाव के इलाज में निर्गुण्डी के फायदे

कुष्ठ रोग में फायदेमंद छरीला के फायदे (Uses of Chhareela for Leprosy in Hindi)

आप कुष्ठ रोग में भी छरीला का प्रयोग कर लाभ पा सकते हैं। छरीला को पीसकर मक्खन में मिला लें। इसे लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ (kalpasi health benefits) होता है।

और पढ़ेंः कुष्ठ रोग में करंज के फायदे

खुजली की बीमारी में छरीला का औषधीयु गण फायदेमंद (Uses of Chhareela in Itching Problem in Hindi)

  • छरीला (dagadful)  खुजली में लाभ पहुंचाता है। छरीला को पीसकर खुजली वाले प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ होता है।
  • छरीला, छोटी इलायची, अगरु, कूठ, चोरपुष्पी, तगर, दालचीनी, देवदारु और रास्ना की घी या जल के साथ पीस लें। इससे त्वचा विकार जैसे पित्ती निकलने की परेशानी में लाभ (kalpasi health benefits) होता है।

और पढ़ेंः दाद-खाज-खुजली का घरेलू इलाज

छरीला के औषधीय गुण से सूजन की समस्या का इलाज (Benefits of Chhareela in Reduce Inflammation in Hindi)

  • छरीला आदि द्रव्यों को तेल में पका लें। इससे मालिश करने से या छरीला आदि द्रव्यों का लेप लगाने से सूजन कम हो जाती है।
  • छरीला को पीसकर गुनगुना करके लेप करने से सूजन की परेशानी से आराम मिलता है।

और पढ़ेंः सूजन को कम करने के लिए प्रभावशाली घरेलू उपचार

छरीला के उपयोगी भाग (Usesful Part of Chhareela in Hindi)

पंचांग

औषधि उपयोग के लिए नए ताजे तथा सुगन्धित क्षुप (dagadful) का प्रयोग करना चाहिए।

छरीला का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Chhareela in Hindi?)

काढ़ा – 10-30 मिली

अधिक लाभ के लिए छरीला का प्रयोग चिकित्सक के परामर्शानुसार करें।

छरीला कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Stone Flower Found or Grown?)

छरीला (dagadful) भारत में प्रायः उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, नीलगिरी के पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थरों के ऊपर एवं पुराने वृक्षों पर मिलता है।

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आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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