स्वस्थ भोजन

करेला के फायदे और नुकसान (Karela ke fayde aur nuksaan)

  • November 03,2018
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करेला की सब्जी (karele ki sabji) भले ही सभी लोग नहीं खाते हों क्योंकि इसका स्वाद थोड़ा कड़वा होता है लेकिन करेला के बारे में सब लोग जानते जरूर होंगे। करेला हर सब्जी की दुकान में मिलता है। वैसे लोग, जो जानते हैं कि करेला का सेवन डायबिटीज (मधुमेह) में फायदेमंद (karele ke fayde) होता है वे करेला को बड़े चाव से खाते हैं लेकिन कई ऐसे लोग भी हैं जो करेला खाना पसंद नहीं करते।

Karela

वास्तव में, करेला  एक ऐसा आहार है जिसमें मौजूद पोषक तत्वों (karela nutrition) की जानकारी अधिकांश लोगों को है ही नहीं। इस कारण भी अनेक लोग इसका सेवन नहीं करते। आयुर्वेद के अनुसार, करेला का उपयोग केवल मधुमेह (डायबिटीज) में ही फायदेमंद नहीं होता बल्कि कई और रोगों में भी करेला (bitter gaurd) का सेवन लाभ पहुंचाता है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अगर आप करेला नहीं खाते हैं तो करेला से होने वाले ढेर सारे फायदे के बारे में जानने के बाद करेला खाना शुरू कर देंगे।

Contents

करेला क्या है (What is karela or bitter gourd)

करेला (karela in hindi) एक सब्जी है। जो स्वाद में कड़वा और थोड़ा सा तीखा होता है। मधुमेह के रोगी विशेषतः करेला के रस और सब्जी का सेवन करते हैं। करेला का सेवन अनेक बीमारियों जैसे- पाचनतंत्र की खराबी, भोजन से रुचि की कमी, पेट दर्द, बुखार, आंख, योनि या गर्भाशय रोग सहित कुष्ठ रोगों तथा अन्य बीमारियों में फायदेमंद (karele ke fayde) होता है।

करेले का फल स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए तो लाभ पहुंचाता ही है साथ ही इससे कमजोरी दूर होती है और जलन, कफ, सांस से संबंधित विकार, चिड़चिड़ाहट, वात रोग, गोनोरिया, बवासीर आदि में भी फायदा मिलता है। इतना ही नहीं करेला (bitter gaurd) की बीज घाव, आहार नलिका, तिल्ली से संबंधित विकार और लिवर से संबंधित समस्याओं में लाभदायक (karele ke fayde in hindi) साबित होता है।

अन्य भाषाओं में करेला के नाम (Karela name in different languages)

आमतौर पर करेला (karela in hindi) को पूरे भारत में करेला ही बोला जाता है, लेकिन इसके और भी अनेक नाम हैं। ये नाम भारत सहित विदेशों में काफी लोकप्रिय हैंः-

करेला (karaila) का वानस्पतिक नाम- मोमोर्डिका चरांशिया (Momordica charantia L, Syn-Momordicachinensis Spreng, Momordica indica Linn) और कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) हैं जबकि अन्य भाषाओं में करेला के नाम ये हैंः-

Karela in-

  • Hindi- करेला, करैला, करइला, करेली
  • Urdu- करेला (Karela)
  • English (karela in english)- बिटर स्क्वैश (Bitter squash), बालसम पियर (Balsam pear), वाईल्ड कुकम्बर (Wild cucumber), बिटर गॉर्ड (Bitter gourd)
  • Sanskrit- कारवेल्ली, वारिवल्ली, बृहद्वल्ली, पीतफला, पीतपुष्पा, सूक्ष्मवल्ली, कण्टफला, अम्बुवल्लिका, कारवेल्लक, कटिल्लक
  • Oriya- करेना (Karena), कालरा (Kalara), सलारा (Salara)
  • Assamese- काकीरल (Kakiral), काकरल (Kakral)
  • Kannada- हगलाकायी (Haglakayi), करंट (Karant)
  • Gujarati- करेला (Karela), करेलु (Karelu)
  • Telugu- काकरा (Kakra), उरकाकरा (Urkakara), पाकल (Pakal)
  • Tamil- पावक्काचेडी (Pavakkachedi), पावक्कयी (Pavakkayi), पावल (Paval)
  • Bengali- करला (Karala), बड़मसिया (Baramasiya), उच्छे (Uchchhe), जेटुआ (Jethuya)
  • Punjabi- करेला (Karela), करीला (Karila)
  • Marathi- करेले (Karale), कारली (Karli)
  • Malayam- कायप्पावल्ली (Kaippavalli), पावक्काचेटी (Pavakkacheti)।    
  • Nepali- करेला (Karela)
  • Persian- करेलाह (Karelah), सिमहेंग (Simhang)
  • Arabic- क्यीसाउलबर्री (Qisaulbarri), उल्हीमर (Ulhimar), खयार करिल्ला (Khyar karilla)

Karela benefits

करेला के फायदे (karela benefits and uses)

करेला पोषक तत्वों (karela nutrition) का भंडार है. इसका औषधीय प्रयोग किस तरह किया जा सकता है या करेला के इस्तेमाल की मात्रा क्या होनी चाहिए या फिर करेला के उपयोग की विधियां क्या-क्या हैं? यहां विस्तार से बताया गया हैः-

करेला के इस्तेमाल से डैंड्रफ या रूसी की परेशानी खत्म  (Bitter gourd benefits for lice)

बहुत सारी महिलाएं या पुरुष डैंड्रफ से परेशान रहते हैं। डैंड्रफ को हटाने के लिए बहुत उपाय भी करते हैं लेकिन फिर भी कई बार रूसी की परेशानी खत्म नहीं होती। आप ये उपाय कर सकती है। करेले के पत्ते के रस को सिर में लगाने से रूसी की समस्या खत्म (karele ke juice ke fayde) होती है। करेला के पत्ते के रस में हल्दी मिलाकर प्रयोग करने से डैंड्रफ में बहुत ही लाभ होता है।

पैरों के तलवों की जलन में करें करेला का इस्तेमाल (Uses of karela for soles irritation)

कई लोग तलवे में जलन की परेशानी से ग्रस्त रहते हैं। इसमें करेला के पत्ते के रस को तलवे पर लगाएं। इससे आराम मिलता है।

करेला के इस्तेमाल से होते हैं मुंह के छाले ठीक (Karela health benefits for mouth ulcer)

मुंह में छाले होने पर करेले के रस में सुहागा की खील मिलाकर लगाने से लाभ होता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व (karela nutrition) छालों को जल्दी ठीक करते हैं.                               

 करेला के प्रयोग फुंसी ठीक होती है (Bitter gourd benefits for pimples)

कई लोग फुन्सी से परेशान रहते हैं। वे लोग करेला के पत्ते के रस (karele ka juice for skin) को फुंसी पर लगाएं। इससे फुन्सी ठीक होती है।

आवाज बैठना या गला बैठा है तो करेला के उपयोग से फायदा (Uses of karela in throat problem)

ज्यादा जोर से बोलने या चिल्लाने से आपका गला बैठ गया है आवाज सही से निकल पा रही है तो 5 ग्राम करेला के जड़ के पेस्ट को मधु या 5 मिली तुलसी के रस के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे आवाज बैठने की परेशानी ठीक होती है।

गले की सूजन में करें करेला का प्रयोग (Karela health benefits in throat inflammation)

गले की सूजन की परेशानी में सूखे करेला को सिरके में पीसकर गर्म करके लेप के रूप में लगाएं। इससे गले की सूजन ठीक हो जाती है।

सांस के रोग, जुकाम और कफ में फायदेमंद करेला का सेवन (Bitter gourd benefits for breathing, cold and cough problems)

करेला (karaila) का लाभ अनेक बीमारियों में लिया जा सकता है। अगर आप 5 ग्राम करेले के जड़ के पेस्ट को मधु या 5 मिली तुलसी के रस के साथ मिलाकर सेवन करेंगे तो इससे आपकी सांस संबंधी परेशानी, जुकाम और कफ की बीमारी ठीक (karele ke juice ke fayde) हो सकती है।

कान दर्द में करेला से फायदा (Benefits of karela in ear pain)

कान के दर्द में भी करेला का इस्तेमाल लाभदायक होता है। करेले के ताजे फलों या पत्तों को कूटकर रस (karela juice benefits in hindi) निकाल लें। इसे गुनगुना करके 1-2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।

सिर दर्द में करेला के प्रयोग से लाभ (Karela benefits in headache)

सिर दर्द में भी करेला से फायदा होता है। करेला के पत्ते के रस में थोड़ा गाय का घी और पित्तपापड़े का रस मिलाकर लेप करने से सिर दर्द में आराम मिलता है।

करेला के उपयोग से बच्चों के आमाशय विकार में फायदा (Karela health benefits for children’s stomach problem)

कई  बार छोटे बच्चों को अमाशय की बीमारी हो जाती है। ऐसे में 6 मिली करेला (bitter guard) के पत्ते के रस में थोड़ा-सा हल्दी के चूर्ण को मिलाकर पिलाने से बीमारी ठीक होती है।

पेट में कीड़े हैं तो करें करेला का सेवन (Karela benefits in stomach bug)

  • पेट में कीड़े हैं तो 10-12 मिली करेला के पत्ते के रस पिलाएं। इससे पेट के कीड़े मर (karele ke juice ke fayde) जाते हैं।
  • इसी तरह 2-3 ग्राम करेला के बीजों को पीसकर सेवन करने से लाभ होता है।

हैजा में फायदेमंद करेला का प्रयोग (Benefits of karela for cholera)

हैजा में भी करेले से फायदा हो सकता है। 20-30 मिली करेला के जड़ का काढञा बनाकर इसे तिल के तेल में मिलाकर पिलाने से हैजा में लाभ होता है।

5 मिली करेला के पत्ते के रस में तेल मिलाकर सेवन करने से हैजा में लाभ होता है।

जलोदर (पेट फूलना) रोग में करेला के उपयोग से फायदा (Karela benefits for jalodar rog)

जलोदर रोग पेट की बीमारी है जिसमें पेट के अंदर पानी भर जाता है। इसमें रोगी का पेट फूल जाता है। इसमें 10-15 मिली करेला के पत्ते के रस (karela ka juice) में मधु मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

स्तनों में दूध को बढ़ाता है करेला का सेवन (Karela uses for breast milk)

प्रायः अनेक महिलाएं यह शिकायत करती हैं कि मां बनने के बाद शिशु के पीने लायक दूध नहीं हो रहा है। ये महिलाएं करेले के 20 ग्राम पत्तों को पानी में उबाल लें  और इसे छानकर पीएं। इससे स्तनपान कराने वाली महिलाएं (प्रसूता स्त्री) के स्तन में दूध की वृद्धि होती है।

करेला के उपयोग से मासिक धर्म के विकार में लाभ (Benefits of karela in menstrual problem)

मासिक धर्म के विकार में भी करेला का उपयोग फायदेमंद (karele ke fayde) हो सकता है। 10-15 मिली करेला के पत्ते के रस (karele ka juice) में 1 ग्राम सोंठ, 500 मिग्रा काली मिर्च और 500 मिग्रा पीपल का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से मासिक विकारों में लाभ होता है।

दाद को ठीक करता है करेला (Karela uses for ringworm)

करेला का प्रयोग कर दाद को ठीक किया जा सकता है। करेले के पत्ते के रस को दाद वाले स्थान पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

त्वचा विकार या चर्म रोग में फायदेमंद करेला का इस्तेमाल (Benefits of karela in skin disease)

करेला के उपयोग (karela nutrition) से चर्म रोग में भी लाभ मिल सकता है। चर्म रोग में करेला के पौधे, दालचीनी, पीपर और चावलों को जंगली बादाम के तेल में मिलाकर लगाने से त्वचा विकारों या चर्म रोग में फायदा होता है।

वायरल फीवर या ठंड वाले बुखार में करें करेला का प्रयोग (Karela uses for viral fever or cold fever)

आप करेले का फायदा वायरल फीवर या ठंड वाले बुखार में ले सकते हैं। इसके लिए करेले के 10-15 मिली रस (karele ka juice) में जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से राहत मिलती है।

निमोनिया में फायदेमंद करेला का उपयोग (Karela uses for Pneumonia)

करेला का प्रयोग निमोनिया में लाभदायक होता है। आप 5-10 मिली करेला के पत्ते के रस (karela ka juice) को गुनगुना कर उसमें थोड़ी केसर मिला लें। इसे दिन में तीन बार पिलाने से निमोनिया में लाभ होता है।

आंख के रोग में फायदेमंद करेला का इस्तेमाल (Karela benefits for eye disease)

आंखों से संबंधित कई विकारों में करेला का उपयोग बेहतर परिणाम देता है। आंख के रोग से पीड़ित लोग लोहे के बरतन में करेले के पत्तों का रस (karele ka juice) लें और इसमें एक काली मिर्च घिस लें। इसका सूरमा लगाने से आंखों की पीड़ा, आंखों की जलन, रतौंधी में फायदा होता है।

मोतियाबिंद में फायदेमंद करेला का इस्तेमाल (Karela nutrition benefits for cataracts)

करेले (karela nutrition) से मोतियाबिंद में फायदा पहुंचाता है। मोतियाबिंद से ग्रस्त लोग करेले की जड़ को घोड़े के मूत्र (अश्वमूत्र) में घिस लें। इसे 1-2 बूंद की मात्रा में आंखों में डालने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।

रात के अंधेपन में लाभदायक करेला का प्रयोग (Karela benefits for night blindness)

कुछ लोगों को रात में अंधेपन की समस्या होती है। इस बीमारी में लोगों को दिन की तुलना में रात के समय ठीक से दिखाई नहीं देता है। इसमें करेला के पत्ते के पेस्ट को आँखों के चारों तरफ लेप करने से रात्रि अन्धता में लाभ होता है।

करेला से डायबिटीज में फायदा (Karela nutrition for diabetes)

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिससे भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अनेक लोग पीड़ित हैं। करेला से डायबिटीज में फायदा मिल सकता है। करेला के फलों को सुखाकर महीन चूर्ण बना लें। इसे 3-6 ग्राम की मात्रा में जल या शहद के साथ सेवन करने मधुमेह में लाभ (karele ke fayde in hindi) होता है। यह अग्नाशय को स्वस्थ बनाकर इंसुलिन के उत्पादन को सही करने में मदद पहुंचाता है।

इसी तरह ताजे करेले के फलों के रस में अनेक पोषक तत्व (karela nutrition) होते हैं. इसकी  10-15 मिली मात्रा पीने से भी मधुमेह में लाभ होता है।

इसके अलावा 20 मिली करेला के फल के रस में, 20 मिली आँवला के रस को मिला लें। इसे रोज सुबह-सुबह 4-6 माह तक नियमित सेवन करें। इससे मधुमेह में तुरंत लाभ होता है।

बवासीर में फायदेमंद करेला का प्रयोग (Karela benefits for hemorrhoids)

करेला (bitter guard) का सेवन करना बवासीर में लाभदायक होता है। बवासीर से परेशान लोग करेले की जड़ को घिसकर मस्सों पर लेप करेंगे तो इससे बवासीर में लाभ मिलता है।

इसी तरह 15-20 मिली करेला के पत्ते के रस को 200-300 मिली छाछ के साथ रोजाना सुबह-सुबह एक माह तक सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होता है।

करेला से खूनी बवासीर में फायदा (Karela nutrition benefits for piles)

करेला में मौजूद पोषक तत्व (karela nutrition) खूनी बवासीर में लाभ पहुंचाते हैं। खूनी बवासीर वाले लोग 20-30 मिली करेले के काढ़े में चीनी मिलाकर सुबह-शाम पीएं। इससे खूनी बवासीर में लाभ होता है।

करेला के उपयोग से पीलिया में फायदा (Bitter gourd benefits for jaundice)

पीलिया से ग्रस्त लोग करेले (bitter guard) के इस्तेमाल से लाभ ले सकते हैं। 10-15 मिली करेला के पत्ते के रस में बड़ी हरड़ को घिसकर पिलाने से पीलिया रोग में लाभ होता हैं।

गठिया में फायदेमंद करेला का इस्तेमाल (Karela uses for arthritis)

गठिया रोग में व्यक्ति को बहुत अधिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। इस रोग के कारण रोगी का शरीर सामान्य रूप से गतिशील नहीं रह पाता है। ऐसे में करेले के कच्चे हरे फलों के रस को गर्म करके लेप करने से गठिया में लाभ होता है।

  1. इसी तरह करेले के पेस्ट और काढ़ा को घी में पका कर दर्द वाले स्थान पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।   
  2. इसके अलावा 10-15 मिली करेला के फल के रस या पत्ते के रस में राई और स्वादानुसार नमक मिलाकर पीने से गठिया में फायदा होता है।

आप करेले  के फल में भी कई पोषक तत्व (karela nutrition) होते हैं. इसे निकालकर शेष भाग को आग पर 10 मिनट रखकर भुर्ता बना लें। इसमें शक्कर मिलाकर रोगी को गुनगुना कर खिला दें। इसे करीब 125 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम रोगी को गर्म-गर्म खिलाने से गठिया में आराम होता है। पीड़ा वाले स्थान पर फलों के रस का बार-बार लेप करने से भी गठिया में आराम होता है।

लिवर विकार में होता है फायदेमंद करेला का प्रयोग (Bitter gourd benefits for liver disease)

जो लोग शराब का अधिक सेवन करते हैं और इससे होने वाली बीमारी से परेशान हैं तो वे लोग छाछ के साथ 15-20 मिली करेला के पत्ते के रस का सेवन करें। इससे अधिक शराब पीने के कारण होने वाली लिवर की बीमारी में लाभ मिलता है।

Summary:

करेला के इस्तेमाल की मात्रा (How much to consume karela)

आप करेला (bittergourd) का सेवन इतनी मात्रा में कर सकते हैंः-

  • करेला का रस- 10-20 मिली
  • करेला का चूर्ण- 5 ग्राम

करेला के इस्तेमाल का तरीका (How to consume karela)

करेला का इस्तेमाल इस तरह किया जा सकता हैः-

  • जड़
  • पत्ते
  • फल
  • पौधा

करेला का सेवन किसे नहीं करना चाहिए (Who should not consume karela)

अब तक आपने जाना कि करेला (karuvoolam ecs) कैसे और कितने तरीके से शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। अब यह जानना भी बहुत जरूरी है कि किन लोगों को करेला का सेवन नहीं करना चाहिएः-

1.लो ब्लड शुगर लेवल से पीड़ित रोगियों एवं बच्चों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

2.करेला के बीज में कुछ नुकसानदेह पदार्थ भी होते हैं जिससे गर्भपात होने की संभावना रहती है। इसलिए इसका लगातार प्रयोग नहीं करना चाहिए।

करेला का साइड इफेक्ट (Side effect of Karela in excess)

बहुत अधिक मात्रा में करेला का सेवन करने से पेट में दर्द और दस्त की समस्या उभर सकती है। अगर ऐसी परेशानी हो रही है तो चावल और घी खिलाना अच्छा होता है।

करेला की खेती कहां होती है (Where is karela found or grown )

चूंकि करेला (karuvoolam ecs) एक सब्जी है इसलिए इसकी खेती पूरे भारत में की जाती है। यह सब्जी मार्केट में यह आसानी से मिल जाता है।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्श...

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