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फ्लुड्रोकोर्टिसोन

Written By Dr. Sakshi JainReviewed By Dr. Rajeev Sharma

फ्लुड्रोकोर्टिसोन कैसे काम करता है

यह अपूर्ण प्राकृतिक हॉरमोन प्रतिस्थापित करता है और ऐडिसंस रोग के लक्षणों और संकेतों को दूर करता है। यह शरीर में ऐल्डोस्टेरोन रिसेप्टरों से चिपककर ऐड्रीनोजेनिटल सिड्रोम के संकेतों तथा लक्षणों को दूर करता है। इस चिपकाव से शरीर में लवण तथा जल की मात्रा बनी रहती है, रक्त चाप में इजाफा होता है तथा पोटैशियम के स्तरों में गिरावट आती है। फ्लूड्रोकोर्टिसोन कई सूजनकारी जीनों (एंकोडिंग साइटोकाइंस, केमोकाइंस, ऐडहेशन मॉलेक्यूल्स , सूजनकारी एंजाइम्स, रिसेप्टर्स तथा प्रोटींस) को निष्क्रिय कर सूजन को कम करता है, जो दरअसल जीर्ण सूजनकारी प्रक्रिया के दौरान सक्रिय हुए होते हैं।
फ्लुड्रोकोर्टिसोन, कोर्टिकोस्टेरॉयड नामक दवाओं की एक श्रेणी से सम्बन्ध रखता है। यह अपूर्ण प्राकृतिक हारमोन की जगह लेता है और एडिसन के रोग के चिन्हों और लक्षणों से राहत दिलाता है। यह शरीर में एल्डोस्टेरोन रिसेप्टरों से आबद्ध होकर एड्रेनोजेनितल सिंड्रोम के चिन्हों और लक्षणों से राहत दिलाता है। बदले में इस बंधन के कारण शरीर में लवण और जल का प्रतिधारण होता है, रक्तदाब बढ़ता है और पोटेशियम का स्तर कम होता है। फ्लुड्रोकोर्टिसोन, मल्टीपल इन्फ्लामेटरी जींस (एन्कोडिंग साइटोकिन, केमोकिन, आसंजन अणु, सूजन वाले एंजाइम, रिसेप्टर और प्रोटीन) को बंद करके सूजन को कम करता है जो जीर्ण सूजन प्रक्रिया के दौरान सक्रिय हो गए थे।

फ्लुड्रोकोर्टिसोन के सामान्य दुष्प्रभाव

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, शरीर में वसा का पुनर्वितरण / संचय, अस्थि अवनति , संक्रमण का बढ़ा हुआ खतरा , स्नायु विकार, शोफ, नमक प्रतिधारण, पानी प्रतिधारण, बढ़ा रक्तचाप, हड्डी का बदला हुआ विकास , त्वचा पर निशान, व्यवहार में परिवर्तन, रक्त में ग्लूकोज के स्तर में वृद्धि , मोतियाबिंद
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फ्लुड्रोकोर्टिसोन के लिए उपलब्ध दवा

फ्लुड्रोकोर्टिसोन के लिए विशेषज्ञ की सलाह

  • फ्लूड्रोकॉर्टिसोन को उन बच्चों को सावधानीपूर्वक देना चाहिए जो चेचक, खसरा या अन्य संचारित होनी वाली बीमारियां हो या ऐसे बच्चे जो इन संचारित बीमारी वाले बच्चों के संपर्क में आएं।
  • जब अधिक ग्लुकोकॉर्टिकॉइड का प्रभाव वांछनीय हो (जैसे शरीरिक आघात, बड़ी सर्जरी या गंभीर बीमारी) तब डॉक्टर फ्लूड्रोकॉर्टिसोन के साथ कॉर्टिसोन और हाइड्रोकॉर्टिसोन लेने की सलाह दे सकते हैं।(
  • यदि इन तकलीफों से ग्रस्त हों तो डॉक्टर को जानकारी दें: आंत या अंतड़ियों का विकार या पेट में अल्सर, लिवर,गुर्दा या थायरॉइड की बीमारी, पैरों में संक्रमण या नसों में सूजन, मासिक विकार (खासतौर से अवसाद) स्वयं में परिवार के किसी सदस्य में, लगातार आते दौरे, किसी पकार का कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस (पतली या भंगुर हड्डी), मांसपेशियों की सामयिक कमजोरी (खासतौर से माय्सथेनिया ग्रेविस), उच्च रक्तचाप, हार्ट फेलियर, आंखों में बढ़ा हुआ दबाव (ग्लॉकोमा), मधुमेह या आंत्र की कोई सर्जरी हुए हो।
  • 65वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को फ्लूड्रोकॉर्टिसोन के दुष्प्रभावों का अधिक अनुभव हो सकता है।
  • 18वर्ष से कम आयु के बच्चों को में फ्लूड्रोकॉर्टिसोन देने पर मंद विकास हो सकता है।