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एन्टेकाविर का उपयोग

Entecavir का इस्तेमाल क्रोनिक हेपेटाइटिस बी में किया जाता है

एन्टेकाविर कैसे काम करता है

यह विषाणुओं के गुणन को रोकते हुए संक्रमित रोगी के शरीर में उनके स्तर को घटाकर काम करता है।
एंटेकैविर एक वायरस विरोधी दवा है और सिंथेटिक न्यूक्लियोसाइड एनालॉग नामक दवाओं की श्रेणी से सम्बन्ध रखता है। यह हेपेटाइटिस बी वायरस में डीएनए के संश्लेषण को अवरुद्ध कर देता है जो कि वायरस की वृद्धि और वंश-वृद्धि के लिए आवश्यक एक प्रक्रिया है। इस प्रकार एंटेकैविर, वायरस को शरीर में फैलने से रोकता है। यह अन्य लोगों तक एचबीवी संक्रमणों के प्रसार को रोकता है।

एन्टेकाविर के सामान्य दुष्प्रभाव

सिर दर्द, उबकाई , चक्कर आना
Authenticity

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एन्टेकाविर के लिए उपलब्ध दवा

एन्टेकाविर के लिए विशेषज्ञ की सलाह

  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटेकैविर का सेवन बंद न करें।
  • एंटेकैविर को खाली पेट लेना चाहिए। कृपय अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।
  • यदि गर्भवती हों या होने वाली हों तो एंटेकैविर लेने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • यदि स्तनपान करा रही हों तो एंटेकैविर लेने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • यदि एंटेकैविर के सेवन के बाद चक्कर, थकान या नींद सी महसूस करें तो ड्राइव अथवा मशीन का संचालन न करें।
  • यदि गुर्दे की बीमारी, अन्य लिवर की बीमारी या लिवर का प्रत्यारोपण हुआ हो तो एंटेकैविर के सेवन से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • यदि आपको एड्स या एचआइवी (ह्युमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) संक्रमण हो तो डॉक्टर से सलाह लें। संदिग्ध व्यक्तियों में एंटेकैविर के सेवन से पहले एचआइवी की जांच कराना आवश्यक है।
  • यदि आपने सक्रिय दवा लैमिवुडाइन (एपिविर, एप्जिकॉम, ट्रिजिविर) या टेल्बिवुडाइन युक्त दवा का सेवन किया है तो अपने डॉक्टर को जानकारी दें। आपने पहले हेपाटाइटिस बी के उपचार के लिए जो भी दवाएं ली हैं उसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें।
  • एंटेकैविर लेते समय या बंद करने पर हेपाटाइटिस बीबदतर हो सकता है। उपचार ए समय या बंद करने के बाद लिवर के सही कार्य का परीक्षण करना आवश्यक है।
  • यदि मिचली, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हो तो डॉक्टर को तुरंत बताएं। ये एंटेकैविर से होने वाले घातक दुष्प्रभाव नामक लैक्टिक एसिडॉसिस (रक्त में अधिक मात्रा में लैक्टिक एसिड जमा होना) का संकेत हो सकता है। लैक्टिक एसिडॉसिस ज्यादा करके महिलाओं में होता है खासतौर से सीमा से अधिक वजन के कारण।