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Tulsi Barbari: तुलसी बर्बरी (जंगली तुलसी) के फायदे- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

Contents

तुलसी बर्बरी का परिचय (Introduction of Tulsi Barbari)

तुलसी (Tulsi Barbari) के पौधे के बारे में कौन नहीं जानता होगा। हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत पवित्र पौधा माना गया है। लगभग हर घर में तुलसी की पूजा भी की जाती है। आमतौर पर लोगों को तुलसी के पौधे के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है। शायद आप भी नहीं जानते होंगे कि तुलसी एक नहीं बल्कि कई प्रकार की होती हैं। बर्बरी तुलसी भी तुलसी के पौधे का एक प्रकार है, जिसके बारे में आप नहीं जानते होंगे। बर्बरी तुलसी को जंगली तुलसी भी कहा जाता है, जो एक बहुत ही गुणी औषधी है। आप कई रोगों को ठीक करने में बर्बरी तुलसी के फायदे ले सकते हैं।

आयुर्वेदिक किताबों के अनुसार, तुलसी बर्बरी के फायदे वात-पित्त-कफ विकार दोषों को दूर करने, भूख को बढ़ाने और ह्रदय को स्वस्थ बनाने में मिलते हैं। आप खुजली, रक्तविकार, कुष्ठ रोग, विसर्प और मूत्र संबंधित बीमारियों में भी तुलसी बर्बरी से लाभ ले सकते हैं। आइए जानते हैं कि तुलसी बर्बरी के औषधीय गुण (Tulsi Barbari Benefits) क्या-क्या हैं।

तुलसी बर्बरी क्या है? (What is Tulsi Barbari in Hindi?)

तुलसी बर्बरी 60-90 सेमी ऊंचा, सीधा और अनेक शाखाओं वाला होता है। इसके तने बैंगनी रंग के होते हैं, जो हमेशा रहते हैंं। इसके पत्ते सीधे, विपरीत, 2.5-5 सेमी लम्बे होते हैं। इसके फूल सुगन्धित, सफेद-गुलाबी अथवा बैंगनी होते हैं। इसके फल 2 मिमी लम्बे, थोड़े नुकीले, श्यामले रंग के, चिकने अथवा लगभग झुर्रीदार होते हैं। इसके बीज श्यामले रंग वर्ण के, अंडाकार तथा आयताकार होते हैं। तुलसी बर्बरी के पौधे में फूल और फल सालों भर होते हैं।

अनेक भाषाओं में तुलसी बर्बरी के नाम (Tulsi Barbari Called in Different Languages)

तुलसी बर्बरी का वानस्पतिक नाम Ocimum basilicum Linn. (ओसीमम बेसिलीकम) Syn-Ocimum caryophyllatum Roxb. है, और यह Lamiaceae (लेमिएसी) कुल की है। इसे अन्य इन नामों से भी जानते हैंः-

Tulsi Barbari in –

  • Hindi – बर्बरी, बबुई तुलसी, गुलाल तुलसी, काली तुलसी, वन तुलसी, बार्बर, सबजा
  • Sanskrit – बर्बरी, क्षुद्रतुलसी, पर्णास, तुंगी (बड़ी होने से), खरपुष्पा
  • English – कॉमन बैसिल (Common basil), लेमन बैसिल (Lemon basil), मॉन्वस बैसिल (Maunvus basil), Common sweet-basil (कॉमन स्वीट बैसिल)
  • Urdu – जंगली तुलसी (Baburi tulasi)
  • Oriya – धालातुलसी (Dhalatulsi)
  • Kannada – कामकस्तूरी (Kamkasturi), रामकस्तूरी (Ramkasturi)
  • Gujarati – डमरो (Damaro), रन तुलसी (Ran tulsi)
  • Telugu – भू तुलसी (Bhu tulasi), विबूतिपत्ते (Vibuti patra)
  • Tami – तिरनुत्पतची (Tirnutpatchi)
  • Bengali – बाबुई तुलसी (Babui tulsi)
  • Nepali – बामरी (Bamri)
  • Punjabi – बबरि (Babri)
  • Marathi – सबजा (Sabza), मारवा (Marva)
  • Malayalam – पाच्चा (Pachcha)
  • Arabic – अलरिहान (Alrihan), हबाक (Habaq), रेहान (Rihan)
  • Persian – नाजबू (Nazbu), फिरंज मुश्क (Firanj mushk)

तुलसी बर्बरी के औषधीय गुण (Tulsi Barbari Benefits and Uses in Hindi)

तुलसी बर्बरी का औषधीय प्रयोग (kali tulsi ke fayde), प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

सिर के रोग में तुलसी बर्बरी के प्रयोग से लाभ (Benefits of Kali Tulsi in Relief from Headache in Hindi)

वनतुलसी के पत्ते के रस को नाक से देने से बेहोशी, सिर के दर्द, साइनस में फायदा होता है।

आंखों की बीमारी में तुलसी बर्बरी का उपयोग लाभदायक (Kali Tulsi Benefits for Eye Disease in Hindi)

वन तुलसी के पत्ते के रस को आंखों में लगाने से आंखों की बीमारी (नेत्राभिष्यंद) में लाभ होता है।

और पढ़े: आंखों के दर्द के घरेलू इलाज

नाक की बीमारी में तुलसी बर्बरी का इस्तेमाल फायदेमंद (Uses of Kali Tulsi in Nasal Disease Treatment in Hindi)

वनतुलसी पत्ते के रस को नाक से लेने से नाक से बहने वाला खून रुक जाता है।

कान की बीमारी में तुलसी बर्बरी के औषधीय गुण से फायदा (Benefits of Kali Tulsi to Treat Ear Disease in Hindi)

  • वनतुलसी के काढ़ा में बकरी का मूत्र, सैंधव, सुवर्चल, विड्नमक तथा दही को मिला लें। इसे तिल के तेल में पका लें। इसे छानकर 1-2 बूंद तेल में डालने से कान के बहने की बीमारी ठीक होती है।
  • बर्बरी तुलसी के पत्ते के 1-2 बूंद रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।

कंठ रोग में तुलसी बर्बरी का औषधीय गुण लाभदायक (Kali Tulsi Benefits in Throat Disease Treatment in Hindi)

5-10 मिली वन तुलसी के पत्ते के रस में शहद मिलाकर चाटें। इससे कण्ठ विकार तथा कुक्कुर कास ठीक होते हैं।

दस्त को रोकने के लिए तुलसी बर्बरी का प्रयोग फायदेमंद (Uses of Kali Tulsi to Stop Diarrhea in Hindi)

  • वनतुलसी के 10-15 मिली काढ़ा में 500 मिग्रा जायफल चूर्ण डालकर पिलाने से दस्त पर रोक लगती है।
  • 2 ग्राम सौंफ के चूर्ण को घी में भूनें। इसमें मिश्री मिलाकर सेवन करें। इसके बाद 10-15 मिली वनतुलसी का काढ़ा पिलाएं। इससे दस्त में लाभ होता है।

पेट दर्द में तुलसी बर्बरी के प्रयोग से लाभ (Benefits of Kali Tulsi in Relief from Abdominal Pain in Hindi)

वन तुलसी के पत्ते के 5-10 मिली रस में शर्करा मिलाकर  सेवन करने से पेट दर्द ठीक होता है।

मूत्र रोग में तुलसी बर्बरी के उपयोग से फायदा (Kali Tulsi Benefits for Urinal Disease in Hindi)

वनतुलसी के 10 मिली पत्ते के रस में मिश्री मिलाकर पिलाने से मूत्र रोग में लाभ होता है।

किडनी रोग में तुलसी बर्बरी का इस्तेमाल (Uses of Kali Tulsi for Kidney Disease in Hindi)

वनतुलसी के बीजों का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली की मात्रा में पिएं। इससे किडनी से संबंधित विकारों में लाभ होता है।

गठिया में तुलसी बर्बरी का औषधीय गुण लाभदायक (Kali Tulsi Uses for Arthritis in Hindi)

वन तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बना लें। 15-30 मिली काढ़ा में 1 ग्राम सोंठ चूर्ण तथा 500 मिग्रा मरिच चूर्ण मिला लें। इसे पिलाने गठिया का दर्द ठीक होता है।

और पढ़ें: गठिया के दर्द में फायदेमंद कपास

मोच में तुलसी बर्बरी के औषधीय गुण से फायदा (Kali Tulsi Uses in Relief from Sprain in Hindi)

वन तुलसी पत्ते के रस को लगाने से मोच ठीक होता है।

तुलसी बर्बरी का औषधीय गुण त्वचा रोग में फायदेमंद (Kali Tulsi Uses to Treat Skin Disease in Hindi)

  • बकरी के दूध में वनतुलसी की जड़ को पीसें। इसे मुंह पर लेप करें। इससे मुंहासे सहित अन्य त्वचा-विकार ठीक (kali tulsi ke fayde) होते हैं।
  • वनतुलसी पत्ते के रस को लगाने से दाद, सूजन, विसर्प तथा खुजली में लाभ होता है।

घाव सुखाने के लिए तुलसी बर्बरी का प्रयोग (Benefits of Barbari Tulsi in Wound Healing in Hindi)

वनतुलसी के पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव तुरंत भर जाता है।

और पढ़ें: घाव सुखाने में भुई-आंवला का प्रयोग

साइनस में तुलसी बर्बरी का उपयोग (Barbari Tulsi Benefits in Treating Sinus in Hindi)

वन तुलसी के पत्तों को पीसकर लगाने से साइनस में फायदा होता है।

वात-कफज विकार में तुलसी बर्बरी का इस्तेमाल (Benefits of Barbari Tulsi for Vata-Kafaj Disorder in Hindi)

वात-कफज बुखार में यदि अधिक ठंड महसूस हो रहा हो तो पलाश, तुलसी, सफेद बर्बरी तथा सहिजन के पत्तों का पेस्ट का लेप करें।

बुखार ठीक करने के लिए तुलसी बर्बरी का प्रयोग (Barbari Tulsi Benefits for Fever in Hindi)

  • कृष्णतुलसी के 21 पत्ते, तथा 21 काली मिर्च को पीसें। इसकी 125 मिग्रा की वटी बना लें। 1-1 वटी को सुबह-शाम प्रयोग करने से बुखार (वेलाज्वर) ठीक होता है।
  • वनतुलसी 5 ग्राम बीजों को पीसकर उसका शर्बत बना लें। इसे पिलाने से बुखार ठीक होता है।

शरीर की जलन में तुलसी बर्बरी का उपयोग (Tulsi Barbari Benefits to Treat Body Irritation in Hindi)

वनतुलसी को पीसकर लगाने से बुखार के कारण होने वाली शरीर की जलन ठीक होती है।

सूजन की समस्या में तुलसी बर्बरी के प्रयोग से लाभ (Barbari Tulsi Benefits in Reducing Inflammation in Hindi)

वन तुलसी के पत्तों को पीसकर सूजन वाले स्थान पर लेप करें। इससे सूजन और दर्द ठीक होता है।

बिच्छु के काटने पर तुलसी बर्बरी से लाभ (Barbari Tulsi Helps in Scorpion Bite in Hindi)

बर्बरी तुलसी के बीज के चूर्ण को बकरी के दूध से पीस लें। इसे बिच्छू के डंक मारने वाले स्थान पर लेप करें। इससे बिच्छू के डंक मारने से होने वाला दर्द, जलन औस सूजन में लाभ होता है।

तुलसी बर्बरी के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Tulsi Barbari in Hindi)

  • पंचांग
  • जड़
  • पत्ते
  • बीज

तुलसी बर्बरी का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Tulsi Barbari in Hindi?)

पत्ते का रस – 5-10 मिली

काढ़ा – 10-15 मिली

बेहतर लाभ पाने के लिए तुलसी बर्बरी का उपयोग चिकित्सक के परामर्शानुसार करें।

तुलसी बर्बरी कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Tulsi Barbari Found or Grown?)

भारत के गर्म प्रदेशों में तुलसी बर्बरी (Tulsi Barbari) की खेती होती है। यह प्रायः सभी जगह जैसे-  बाग-बगीचों में मिलती है। सिंध, पंजाब, उत्तराखण्ड आदि प्रदेशों के पहाड़ी भागों पर यह अपने आप उत्पन्न होती है।

और पढ़ेंमुँह के छालों में तुलसी फायदेमंद

और पढ़ेंचेहरे से अनचाहे बालों को हटाए तुलसी से

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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