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Mandua: मंडुआ (रागी) के हैं अनेक अनसुने फायदे- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

मंडुआ का परिचय (Introduction of Mandua)

मंडुआ को मडुआ या रागी (ragi benefits and side effects) भी बोला जाता है। सामान्य तौर पर मंडुआ या रागी का उपयोग अनाज के रूप में होता है क्योंकि यह ना सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि बहुत ही पौष्टिक भी होता है। प्रायः मंडुआ के आटे (ragi ka atta) को गेहूं के आटे में मिलाकर प्रयोग में लाया जाता है और देश भर में इससे कई तरह के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। रागी से उपमा, सूप, बिस्किट्स, डोसा आदि बनाए जाते हैं और लोग बहुत चाव से इन्हें खाते हैं। आपने भी रागी या मंडुआ के आटे से तैयार रोटी (mandua ki roti) का सेवन किया होगा। लोग रागी या मंडुआ के बारे में इतनी ही जानकारी रखते हैं कि रागी का उपयोग केवल अनाज के रूप में किया जाता है, लेकिन सच यह है कि रागी एक बहुत ही गुणी औषधि भी है और इससे रोगों को भी ठीक किया जाता है।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में रागी (ragi) को लेकर कई फायदेमंद बातें बताई गई हैं। मंडुआ के सेवन से अत्यधिक प्यास लगने की समस्या खत्म होती है, शारीरिक कमजोरी दूर हो सकती है और कफ दोष को ठीक किया जा सकता है। आप मंडुआ का प्रयोग मूत्र रोग को ठीक करने, शरीर की गंदगी साफ करने के लिए भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं शरीर की जलन, त्वचा विकार, किडनी या पथरी की समस्या में भी मंडुआ का इस्तेमाल (benefits of mandua) होता है। आइए जानते हैं कि आप मंडुआ का इस्तेमाल किस-किस बीमारी में कर सकते हैं।

मंडुआ क्या है (What is Mandua?)

अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मंडुआ के बारे में जानकारी मिलती है। मंडुआ या रागी (ragi) का पौधा लगभग 1 मीटर तक ऊचाँ होता है। इसके फल गोलाकार अथवा चपटे तथा झुर्रीदार होते हैं। मंडुआ की बीज गोलाकार, गहरे-भूरे रंग के, चिकने होते हैं। इसकी बीज (ragi seeds) झुर्रीदार और एक ओर से चपटे होते हैं। इन्हें ही मड़वा या मंडुआ कहा जाता है। इससे बने आहार मोटापे तथा डायबिटीज से ग्रस्त रोगियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है।

मंडुआ के बारे में विशेष जानकारी – कई स्थानों पर मंडुआ का प्रयोग कोदो के नाम पर किया जाता है; लेकिन मुख्य कोदो इससे भिन्न प्रजाति है। कोदो का नाम कोद्रव (Paspalum scrobiculutum Linn.) है।

अनेक भाषाओं में मंडुआ के नाम (Mandua Called in Different Languages)

मंडुआ का वानस्पतिक नाम Eleusine coracana (Linn.) Gaertn. (एलुसाइनी कोराकैना) Syn-Cynosurus coracanus Linn. है और यह Poaceae (पोएसी) कुल का है। मंडुआ या रागी को अन्य अनेक नामों से जाना जाता है, जो ये हैंः-

Mandua in –

  • Hindi – मंडुआ, रागी, मकरा, मंडल, रोत्का
  • English – कोराकैन मिलेट (Coracan millet), इण्डियन मिलेट (Indian millet), अफ्राप्कन मिलेट (African millet), पोको ग्रास (Poko grass), Finger millet (फिंगर मिलेट)
  • Sanskrit – मधूलिका, नर्तक, नृत्यकुण्डल, बहुपत्रक, भूचरा, कठिन, कणिश
  • Oriya – मांडिया (Mandia);उर्दू-मंडवा (Mandwa)
  • Assamese – मरूबा धान (Maruba dhan)
  • Konkani – गोन्ड्डो (Gonddo), नाचणे (Nachne)
  • Kannada – रागी (Ragi)
  • Gujarati – पागली (Pagali), बावतोनागली (Bavtonagli), नावतोनागली (Navtonagli)
  • Bengali – मरुआ (Marua)
  • Tamil – केलवारागू (Kelvaragu), कयुर (Kayur)
  • Telugu – रागुलु (Ragulu)
  • Nepali – कोदो (Kodo)
  • Punjabi – चालोडरा (Chalodra), कोदा (Koda), कोदों (Kodon), मंधल (Mandhal)
  • Marathi (raagi in marathi) – नचीरी (Nachiri), नगली (Nagli), नाचणी (Nachini)
  • Malayalam – मुत्तरि (Muttari)
  • Rajasthani – रागी (Ragi)
  • Arabic – तैलाबौन (Tailabon)
  • Persian – मन्डवाह (Mandwah)

मंडुआ के औषधीय गुण (Mandua Benefits and Uses in Hindi)

मंडुआ के औषधीय प्रयोग (benefits of mandua), प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

उल्टी को रोकने के लिए मंडुआ का सेवन (Ragi Benefits in Vomiting Treatment in Hindi)

कई लोगों को उल्टी से संबंधित परेशानी होती रहती है। ऐसे में मंडुआ का प्रयोग लाभ पहुंचाता है। महुआ, हाऊबेर, नीलकमल तथा मधूलिका के चूर्ण को घी तथा शहद के साथ सेवन करें। इससे उल्टी रुक जाती है।

मंडुआ के प्रयोग से रूसी से छुटकारा (Uses of Ragi in Fighting with Dandruff in Hindi)

महुआ, हाऊबेर, नीलकमल तथा मधूलिका के चूर्ण को घी तथा शहद के साथ सेवन करें। इससे रूसी से छुटकारा मिलता है।

और पढ़ेंखादिर के प्रयोग से रुसी का इलाज

सर्दी-जुकाम में मंडुआ का प्रयोग लाभदायक (Benefits of Raagi in Cold and Cough in Hindi)

सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी में भी मंडुआ का उपयोग बहुत अधिक लाभ पहुंचाता है। इसके लिए आपको गुग्गुलु, राल, पतंग, प्रियंगु, मधु, शर्करा, मुनक्का,मधूलिका तथा मुलेठी लेना है। इनका काढ़ा बनाकर गरारा करना है। इससे रक्तज तथा पित्तज सर्दी-जुकाम की समस्या में लाभ (ragi ke fayde) होता है।

सांसों की बीमारी में मंडुआ का उपयोग फायदेमंद (Ragi Benefits in Cure Respiratory Disease in Hindi)

अनेक लोगों को सांसों की बीमारी हो जाती है। आप मंडुआ का विधिपूर्वक इस्तेमाल करेंगे तो सांसों के रोग में फायदा मिलता है। मंडुआ आदि द्रव्यों से विधिपूर्वक बनाए गए शृङ्गयादि घृत (मधूलिकायुक्त) का मात्रापूर्वक प्रयोग करें। इससे सांसों की बीमारी में लाभ होता है।

दस्त को रोकने के लिए मंडुआ का इस्तेमाल (Uses of Ragi to Stop Diarrhea in Hindi)

मंडुआ (ragi ka atta) का लाभ दस्त की समस्या में भी ले सकते हैं। इसका प्रयोग दस्त और पेट दर्द की चिकित्सा में किया जाता है। दस्त में मंडुआ के प्रयोग की जानकारी के बारे में किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।

और पढ़े: पेट दर्द में उस्तूखूदूस के फायदे

कब्ज में फायदेमंद मंडुआ का सेवन (Benefits of Raagi in Constipation in Hindi)

बहुत लोगों को कब्ज की समस्या रहती है। दरअसल कब्ज एक ऐसी बीमारी है जो कई रोगों का कारण बनती है। कब्ज के कारण व्यक्ति को हमेशा पेट की समस्या बनी रहती है और इसके लिए लोग व्यक्ति तरह-तरह के उपाय करते हैं। मंडुआ की बीजों में सेल्यूलोज अधिक मात्रा में होने के कारण इसका निरन्तर प्रयोग करने से कब्ज में लाभ दिलाता है। खास बात यह है कि यह कब्ज की पुरानी बीमारी में भी लाभ (ragi ke fayde) पहुंचाता है।

हिचकी की समस्या को ठीक करता है मंडुआ (Ragi Benefits in Hiccup Problem in Hindi Hindi)

मंडुआ आदि द्रव्यों से विधिपूर्वक सिद्ध  शृङ्गयादि घृत (मधूलिकायुक्त) का मात्रापूर्वक प्रयोग करने से हिक्का में लाभ होता है।

और पढ़ेंहिचकी के लिए घरेलू नुस्खे

कुष्ठ रोग में मंडुआ का प्रयोग (Uses of Ragi in Fighting with Leprosy Disease in Hindi)

  • मंडुआ को सफेद चित्रक के साथ मिलाकर सेवन करने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
  • महुआ, हाऊबेर, नीलकमल तथा मधूलिका के चूर्ण को घी तथा शहद के साथ सेवन करें। इससे उल्टी, कुष्ठ रोग, हिचकी और सांसों की बीमारी में लाभ (ragi ke fayde) मिलता है।
  • मधूलिका, तुगाक्षीरी, दूध, लघुपंच की जड़ तथा काकोल्यादि गण से पेस्ट और काढ़ा को घी में पका लें। इसके प्रयोग से मुखमण्डिका नामक बाल रोग में लाभ होता है।

मंडुआ से खांसी का इलाज (Benefits of Raagi in Cough Disease Treatment in Hindi)

मंडुआ आदि द्रव्यों से विधिपूर्वक पकाए गए शृङ्गयादि घी (मधूलिकायुक्त) का सेवन करने से खांसी ठीक (benefits of mandua) हो जाती है। इसका सेवन की जानकारी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर लें।

मंडुआ के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Mandua)

बीज (ragi seeds)

मंडुआ के प्रयोग की मात्रा (How Much to Consume Mandua?)

काढ़ा – 10-20 मिली

अधिक लाभ के लिए मंडुआ का प्रयोग चिकित्सक के परामर्शानुसार करें।

मंडुआ कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Mandua Found or Grown?)

मंडुआ या रागी (ragi) पूरे भारत में लगभग 2300 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। इसकी विशेषतः पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की जाती है। यह उच्चपर्वतीय प्रदेशों में भी पाया जाता है।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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