पिलोकार्पिन का उपयोग
Pilocarpine का इस्तेमाल सिर और गर्दन के कैंसर की रेडियोथेरेपी के बाद सूखा मुँह में किया जाता है
पिलोकार्पिन कैसे काम करता है
पाइलोकार्पाइन, कोलाइनर्जिक एगोनिस्ट नामक दवाओं की एक श्रेणी से सम्बन्ध रखता है जो रासायनिक एसिटाइलकोलाइन की गतिविधि को बढ़ाने का काम करता है जिससे लार ग्रंथि और आंसू ग्रंथि नामक विभिन्न ग्रंथियों से होने वाले स्राव में वृद्धि हो जाती है। अपने कोलाइनर्जिक प्रभाव के कारण, यह आँखों की पुतली को संकुचित भी कर देता है और जलीय ह्यूमर (आँख के भीतर द्रव) के बहिर्प्रवाह में सुधार भी करता है जिससे नेत्रगोलक के दबाव में कमी आती है।
पिलोकार्पिन के सामान्य दुष्प्रभाव
पसीना आना, बार-बार पेशाब करने की इच्छा , ठंड लगना
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Read Our Editorial Policyपिलोकार्पिन के लिए उपलब्ध दवा
पिलोकार्पिन के लिए विशेषज्ञ की सलाह
- यदि आप आंखों में सूजन, दमा, लिवर, गुर्दे या हृदय की बीमारी, पार्किंसंस बीमारी, पेट में अल्सर, मूत्र विसर्जन में तकलीफ, उच्च रक्तचाप, नैरो एंगल ग्लॉकोमा (तरल पदार्थ के बाहर बहाव के बीच रुकावट के चलते आंखों की पुतली में दबाव बढ़ना) से ग्रस्त हों तो डॉक्टर को जानकारी दें।
- पिलोकार्पाइन से अत्यधिक पसीना आने के कारण होने वाले निर्जलीकरण से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
- पिलोकार्पाइन से उपचार के पहले आपकी आंखों की काली परत (बुध्न) की जांच की जाएगी।
- ग्लॉकोमा के लिए पिलोकार्पाइनसे लंबी अवधि के लिए उपचार के दौरान आपकी दृष्टि क्षेत्र और इंट्राऑक्युलर दबाव की नियमित जांच की जाएगी।
- पिलोकार्पाइन से उपचार के समय चक्कर या धुंधली दृष्टि का एहसास हो सकता है, इसलिए ड्राइव या भारी मशीन संचालित न करें, खासतौर से रात के समय।।
- यदि आप गर्भवती होने वाली हैं या स्तनपान करा रही हैं तो इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें।



