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Marich: मरिच के हैं अनेक अनसुने फायदे- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

Contents

मरिच का परिचय (Introduction of Black Pepper)

भारत में ऐसा कोई घर नहीं होगा जहाँ काली मरिच का प्रयोग (kali mirch ke fayde in hindi) नहीं होता हो। यह मसालों (Spice) की रानी मानी जाती है। चाहे हम कोई भी सब्जी बनाएं। सब्जी सूखी हो या रसेदार या फिर नमकीन से लेकर सूप आदि तक, हरेक व्यंजन में काली मरिच का प्रयोग जरूर होता है। भोजन में काली मरिच का इस्तेमाल (kali mirch uses)केवल स्वाद के लिए नहीं किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक (Black Pepper Health Benefits) है। काली मरिच एक अच्छी औषधि भी है। लंबे समय से आयुर्वेद में इसका औषधीय प्रयोग होता रहा है। वास्तव में काली मरिच के औषधीय गुणों के कारण ही इसे भोजन में शामिल किया जाता है। काली मरिच का प्रयोग रोगों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

Black pepper benefits

    काली मरिच के काफी अधिक औषधीय लाभ (Kali Mirch Ke Fayde In Hindi) हैं। यह वात और कफ को नष्ट करती है और कफ तथा वायु को निकालती है। यह भूख बढ़ाती है, भोजन को पचाती है, लीवर को स्वस्थ बनाती है और दर्द तथा पेट के कीड़ों को खत्म करती है। यह पेशाब बढ़ाती है और दमे को नष्ट करती है। तीखा और गरम होने के कारण यह मुँह में लार पैदा करती है और शरीर के समस्त स्रोतों से मलों को बाहर निकाल कर स्रोतों को शुद्ध करती है। इसे प्रमाथी द्रव्यों में प्रधान माना गया है। आइए जानते हैं कि आप बीमारियों को ठीक करने के लिए काली मरिच का उपयोग कैसे कर सकते हैं।

    क्या है काली मरिच (What is Black Pepper in Hindi?)

    काली मरिच (Marich Herb) एक औषधीय मसाला (Spice) है। इसे काली मिर्च (gol mirch)भी कहते हैं। यह दिखने में थोड़ी छोटी, गोल और काले रंग की होती है। इसका स्वाद काफी तीखा होता है। इसकी लता बहुत समय तक जीवित रहने वाली होती है। यह पान के जैसे पत्तों वाली, बहुत तेजी से फैलने वाली और कोमल लता होती है। इसकी लता मजबूत सहारे से लिपट कर ऊपर बढ़ती है। 

    एक वर्ष में इसकी लगभग दो उपज प्राप्त होती हैं। पहली उपज अगस्त-सितम्बर में और दूसरी मार्च-अप्रैल में। बाजारों में दो प्रकार की मरिच बिकती है – सफेद मरिच और काली मरिच। कालीमिर्च की तासीर आयुर्वेद के अनुसार न शीत है और न उष्ण, लेकिन कहीं-कहीं पर इसको उष्ण तासीर का भी बताया गया है।  

    कुछ लोग सफेद मरिच को काली मरिच की एक विशेष जाति मानते हैं। कोई सहिजन (Moringa) के बीजों को ही सफेद मरिच मान लेते हैं। सफेद मरिच काली मरिच (Marich Herb) का ही एक अलग रूप है। आधे पके फलों की काली मरिच बनती है तथा पूरे पके फलों को पानी में भिगोकर, हाथ से मसल कर ऊपर का छिल्का उतार देने से वह सफेद मरिच बन जाती है। छिल्का हट जाने से इसकी गरम तासीर कुछ कम हो जाती है तथा गुणों में कुछ सौम्यता आ जाती है।

    अनेक भाषाओं में मरिच के नाम (Name of Black Pepper in Different Languages)

    काली मरिच (Marich Herb) का वानस्पतिक यानी लैटिन भाषा में नाम पाइपर नाइग्रम् (Piper nigrum Linn.) है। यह पाइपरेसी (Piperaceae) कुल का पौधा है। अंग्रेजी और विविध भारतीय भाषाओं में इसके नाम निम्नानुसार हैं-

    Black Pepper in –

    • Hindi – मरिच, मिरच, गोल मरिच, काली मरिच, दक्षिणी मरिच, चोखा मिरच
    • English – ब्लैक पेपर (Black Pepper), कॉमन पेपर (Common pepper), पेपर (Pepper)
    • Sanskrit – मरिच, वेल्लज, उष्ण, ऊषण, कृष्ण, पवित्र, श्याम, वेणुज, यवनप्रिय, शुद्ध, कोलक, वरिष्ठ, वृत्तफल, शाकाङ्ग,वेणुक, कटुक, शिरावृत्त, सर्वहित
    • Oriya – कान्चा गोट मिर्चा (Kancha-got-mircha)
    • Urdu – काली मरिच (Kali mirch)
    • Konkani – मिरीअम (Miriam)
    • Kannada – ओल्ले मोणसु (Olle monasu)
    • Gujarati – मरितीखा (Maritikha), मिरी (Miri) 
    • Telugu- मरिचमु (Marichamu), षव्यमु (Shavyamu), मीरीयालू (Miriyalu)
    • Tamil – मिलागु (Milagu), मोलह शेव्वियम् (Molah shevviyam)
    • Bengali – मरिच (Marich), गोल मोरिच (Gol morich)
    • Punjabi – काली मरिच (Kali marich), गोल मिरिच (Gol mirich)
    • Marathi – मिरे (Mire), काली मिरीं (Kali mirin)
    • Malayalam – लह (Lah), कुरू मुलक (Kuru mulak)
    • Arabic – फूलफिल असवद (Fulfil aswad), बाबेरी (Babary)
    • Persian – फूलफूल् अस्वद (Phulphul asvad)

    काली मरिच के औषधीय प्रयोग से लाभ (Black Pepper Benefits and Uses in Hindi)

    काली मरिच का भोजन में प्रयोग (Kali Mirch Ke Fayde In Hindi) करने से भी आपको बहुत लाभ मिलता है। उदाहरण के लिए, ठंड के दिनों में बनाए जाने वाले सभी पकवानों में काली मिर्च का उपयोग किया जाता है ताकि ठंड और गले की बीमारियों से रक्षा हो सके। काली मरिच नपुंसकता, रजोरोध यानी मासिक धर्म के न आने, चर्म रोग, बुखार तथा कुष्ठ रोग आदि में लाभकारी है। आँखों के लिए यह विशेष हितकारी होती है। जोड़ों का दर्द, गठिया, लकवा एवं खुजली आदि में काली मरिच में पकाए तेल की मालिश करने से बहुत लाभ होता है। विभिन्न रोगों में इसका उपयोग (Kali Mirch Ke Fayde In Hindi) करने की विधि यहाँ प्रस्तुत हैः-

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    सिर दर्द दूर करे काली मरिच का सेवन (Benefits of Black Pepper Get Relief from Headache in Hindi)

    headache relief

    एक काली मरिच (Marich Herb) को सुई की नोंक पर लगाकर उसे दीपक में जला लें। उसमें से निकलने वाले धुएं को सूंघने से सिरदर्द में आराम होता है। इससे हिचकी भी बंद होती है। सिर दर्द में काली मिर्च के फायदे बहुत लाभकारी साबित होते हैं।

    भृंगराज के रस अथवा चावलों के पानी के साथ काली मरिच को पीसकर माथे पर लेप करने से आधासीसी का दर्द यानी माइग्रेन भी ठीक होता है।

    सिर के जुंए (डैंड्रफ या रूसी) भगाए काली मरिच का प्रयोग (Benefits of Black Pepper in Cure Head Lice in Hindi)

    बालों में जूँ हो जाने पर 10-12 सीताफल के बीज और 5-6 काली मिर्चों (black pepper in hindi) को पीस कर सरसों के तेल में मिला लें। इसे रात में सोने से पहले बालों की जड़ों में लगा लें। सुबह बाल धोकर साफ कर लें। जूं नष्ट हो जाएगी।

    सिर के बाल यदि झड़तें हो तो काली मरिच को प्याज व नमक के साथ पीसकर लगाने से लाभ (uses of black pepper) होता है।

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    खाँसी-जुकाम दूर करे काली मरिच का सेवन (Benefits of Black Pepper in Fighting with Cough & Cold in Hindi)

    काली मरिच (black pepper in hindi)के 2 ग्राम चूर्ण को गर्म दूध तथा मिश्री के साथ पी लेने अथवा इसके 7 दाने निगलने से जुकाम तथा खाँसी में लाभ होता है।

    50 ग्राम दही, 15-20 ग्राम गुड़ और एक-डेढ़ ग्राम काली मरिच चूर्ण (Marich Herb) को मिला लें। इसे दिन में 3-4 बार सेवन करने से जुकाम में लाभ होता है।

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    आँखों की बीमारी में फायदेमंद काली मरिच का उपयोग (Black Pepper Benefits in Cure Eye Problems in Hindi)

    • काली मरिच (black pepper in hindi)को दही के साथ पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी में लाभ होता है। इसे अत्यन्त सावधानीपूर्वक बाहर-बाहर ही लगाएं।
    • आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए रोजाना सुबह आधा से 1 ग्राम तक काली-मरिच (black pepper benefits in hindi) में 1 चम्मच घी तथा आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर चाटें। बाद में दूध पीएं। इससे आंखों की बीमारी में लाभ होता है।
    • आँखों की पलकों पर अगर फुंसी हो जाए तो काली मरिच को पानी में घिसकर लेप करने से फुंसी पककर फूट जाती है।
    • काली मरिच के आधे ग्राम चूर्ण को एक चम्मच देशी घी में मिलाकर खाने से अनेक प्रकार के नेत्र रोगों का खात्मा होता है।

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    दांत दर्द में आराम दिलाये काली मरिच का इस्तेमाल (Black Pepper Benefits in Cure Toothache & Mouth Ulcer in Hindi)

    tooth ache

    • काली मरिच (black pepper in hindi)के 1-2 ग्राम चूर्ण को 3-4 जामुन या अमरूद के पत्तों या पोस्तदानों के साथ पीस लें। इससे कुल्ला करने से दांत दर्द ठीक होता है।
    • गले के रोग व आवाज बैठ जाने पर भी यह प्रयोग लाभप्रद है।
    • सेंधा नमक, काली मरिच (Marich Herb), शहद तथा नींबू के रस को मिला कर तालू पर लेप करने से मुँह के छाले में लाभ होता है।

    और पढ़े: दांत दर्द के लिए घरेलू इलाज

    काली मरिच का सेवन से दमा-खाँसी का इलाज (Black Pepper Benefits in Fighting with Bronchitis in Hindi)

    • 2-3 ग्राम काली मरिच चूर्ण को शहद और घी (असमान मात्रा में) में मिला लें। इसे सुबह-शाम चाटने से सर्दी, सामान्य खाँसी, दमा और सीने का दर्द मिटता है। इससे फेफड़ों में जमा कफ निकल जाता है।
    • 200 मिली गाय के दूध में 2 ग्राम काली मरिच चूर्ण को पकाकर पिलाने से दमा-खाँसी में लाभ होता है।
    • यदि खाँसी बार-बार उठती हो, भोजन निगलने में कष्ट हो तो दिन में 2-3 बार काली मिर्च के हल्के काढ़े से कुल्ला करें।
    • काली मरिच (Marich Herb) चूर्ण 2 भाग, पीपली चूर्ण 2 भाग, अनार की छाल 4 भाग तथा जौ एक भाग का चूर्ण बना लें। इसमें 8 भाग गुड़ मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलियाँ बना लें। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से गले का दर्द (कष्टदायक खाँसी) में लाभ होता है।
    • गले की खराश व खाँसी में 2-3 काली मरिच (black pepper in hindi)मुंह में रखकर चूसने मात्र से लाभ होता है।

    दस्त रोकने के लिए करें काली मरिच का प्रयोग (Kali Mirch Benefits to Stop Dysentery in Hindi)

    • एक भाग काली मरिच की चूर्ण तथा एक भाग भुनी हींग को अच्छी तरह खरल कर लें। इसमें दो भाग शुद्ध देशी कपूर मिलाकर 125 मि.ग्राम की गोलियाँ बना लें। इसे आधे घंटे के अंतर से 1-1 गोली देने से हैजे की शुरुआती (प्रथम) अवस्था में लाभ (black pepper benefits in hindi)होता है।
    • काली मरिच की चूर्ण 1 ग्राम तथा भुनी हींग 1 ग्राम को अच्छी तरह खरल कर लें। इसमें 3 ग्राम अफीम मिलाकर शहद में घोटकर 12 गोलियाँ बना लें। कर 1-1 गोली 1 घंटे के अंतर से दें। बहुत समय तक न दें। इससे पेचिश में भी अत्यन्त लाभ होता है। अफीम मिले होने के कारण इसका प्रयोग सावधानी से करें।
    • काली मरिच चूर्ण 1/2 ग्राम, हींग 1/4 ग्राम तथा अफीम 100 मिग्रा को मिला लें। इसे जल या शहद के साथ सुबह, दोपहर तथा सायं सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।

    पेट के रोगों में फायदेमंद काली मरिच का उपयोग (Kali Mirch Benefits in Cure Stomach Problems in Hindi)

    • 2-3 ग्राम काली मरिच चूर्ण को 1 कप छाछ के साथ सुबह (Benefits Of Black Pepper In Morning) खाली पेट लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।
    • 8-10 काली मरिच  (black pepper in hindi) को 5-7 ग्राम शिरीष के पत्तों के साथ पीसकर छान लें। इसे पीने से गैस के कारण होने वाले पेट दर्द और पेट फूलने में आराम (black pepper benefits in hindi)मिलता है।
    • एक कप पानी में आधा नींबू निचोड़ लें। इसमें 5-6 काली मरिच का चूर्ण मिलाकर भोजन के बाद सुबह-शाम पीने से पैट की गैस, भूख का घटना-बढ़ना आदि में लाभ होता है।
    • काली मरिच के चूर्ण के साथ बराबर भाग सोंठ, पीपली, जीरा और सेंधा नमक मिला लें। 1-1 ग्राम की मात्रा में, भोजन के बाद गर्म जल के साथ लेने से अपच तथा बदहजमी में लाभ होता है।
    • काली मरिच, सोंठ, पीपल तथा हरड़ चूर्ण मिलाकर शहद के साथ देने से अथवा इसके काढ़े को पीने से अपच तथा पैट की गैस में लाभ (black pepper benefits in hindi)होता है।

    काली मरिच के सेवन से बवासीर में फायदा (Kali Mirch Benefits in Piles in Hindi)

    • दो ग्राम काली मरिच चूर्ण, 1 ग्राम भुना जीरा, 15 ग्राम शहद या शक्कर को मिला लें। दो बार छाछ के साथ या गर्म जल के साथ सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
    • काली मरिच चूर्ण 25 ग्राम, भुना जीरा चूर्ण 35 ग्राम और शुद्ध शहद 180 ग्राम को मिला लें। इसे अवलेह (चटनी) बनाकर रखें। इस अवलेह को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा (health benefits of kali mirch) होता है।
    • काली मरिच (Marich Herb) और जीरे के मिश्रण में सेंधा नमक मिला लें। इसे दिन में दो बार छाछ के साथ 3-4 मास तक सेवन करते रहने से बवासीर में आराम मिलता है। इससे कमजोरी या वृद्धावस्था के कारण हुए बवासीर या गुदभ्रंश (काँच निकलना) ठीक होते हैं। इससे पाचन व जठराग्नि ठीक रहती है। कब्ज और पैट की गैस में भी यह प्रयोग लाभप्रद है।
    • एक ग्राम काली मरिच चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार प्रयोग करें। इससे गुदा का बाहर निकलना बंद हो जाता है।

    मूत्र रोग (पेशाब संबंधी बीमारी) में फायदेमंद मरिच का इस्तेाल (Black Pepper Health Benefits in Cure Urine Problems in Hindi)

    urine infection

    एक ग्राम काली मरिच (Marich Herb) और बराबर मात्रा में खीरा या ककड़ी के बीज को 10-15 मिली पानी के साथ पीस लें। इसमें मिश्री मिलाकर छानकर पिलाएं। इससे पेशाब में जलन तथा पेशाब में दर्द आदि की परेशानी में लाभ होता है।

    नपुंसकता दूर करे काली मरिच का सेवन (Black Pepper Health Benefits in Impotency in Hindi)

    एक गिलास दूध में 8-10 काली मरिच को डाल लें। इसे अच्छी तरह उबालकर, सुबह-शाम नियमपूर्वक सेवन करने से वीर्य विकार ठीक होता है। गर्मी के मौसम में मात्रा कम की जा सकती है।

    घाव सुखाने के लिए करें मरिच का उपयोग (Benefits of Kali Mirch in Wounds Healing in Hindi)

    काली मरिच को पानी में पीसकर फोड़े-फुंसियों व सूजन पर लेप करने से घाव सुख जाता है। इससे घाव जल्दी भर जाते हैं और सूजन दूर होती है।

    हिस्टीरिया में फायदेमद मरिच का प्रयोग (Benefits of Kali Mirch in Hysteria in Hindi)

    3 ग्राम वच चूर्ण में 1 ग्राम काली मरिच का चूर्ण मिला लें। इसे खट्टी दही के साथ सुबह खाली पेट सेवन करने से हिस्टीरिया में लाभ होता है।

    चेहरे के लकवा में लाभकारी है मरिच का प्रयोग (Benefits of Kali Mirch in Facial Paralysis in Hindi)

    अर्दित रोग यानी फेशियल पैरालिसिस में चेहरे के अंगों में लकवा मार देता है। यदि जीभ में जकड़न हो तो मरिच (Marich Herb) के चूर्ण को जीभ पर घिसने से लाभ होता है।

    काली मरिच चूर्ण को किसी भी वातशामक तेल में मिला लें। इसे लकवाग्रस्त अंग पर मालिश करने से बहुत लाभ होता है। काली मिर्च खाने के फायदे चेहरे पर लकवा मारने में बहुत फायदेमंद होता है।

    और पढ़े: लकवा की समस्या में कूठ के फायदे 

    कमजोरी दूर कर शारीरिक ताकत बढ़ाए काली मरिच का सेवन (Uses of Black Pepper in Treating Body Weakness in Hindi)

    कमजोरी आलस्य, उदासीनता आदि दूर करने के लिए काली मरिच (Marich Herb) के 4-5 दाने, सोंठ, दालचीनी, लौंग और इलायची थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिला लें। इसे चाय की तरह उबाल लें। इसमें दूध और शक्कर मिलाकर पीने से लाभ होता है। कमजोरी दूर करने में काली मिर्च के औषधीय गुण बहुत फायदेमंद (kali mirch in hindi) साबित होते हैं।

    बुखार उतारे काली मरिच का प्रयोग (Uses of Black Pepper in Fighting with Fever in Hindi)

    Fever

    • 1-3 ग्राम काली मरिच चूर्ण में आधा लीटर पानी और 20 ग्राम मिश्री मिलाकर आठवाँ भाग शेष रहने तक उबाल कर काढ़ा बना लें। इसे सुबह, दोपहर तथा शाम पिलाने से साधारण बुखार यानी वायरल फीवर में लाभ होता है।
    • 5 दाने काली मरिच, अजवायन एक ग्राम और हरी गिलोय 10 ग्राम, सबको 250 मिली पानी में पीस, छानकर पिलाने से तेज बुखार में लाभ होता है।
    • एक ग्राम काली मरिच चूर्ण (Marich Herb)को शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से गैस के कारण होने वाला बुखार तथा पेट दर्द दूर होता है ।

    और पढ़ें: बुखार में गिलोय का उपयोग

    शरीर का पोषण बढ़ाने में फायदेमंद काली मरिच (Black Pepper Beneficial to Boost Nutrition of Body in Hindi)

    कालीमिर्च में आयुर्वेद के अनुसार ऐसे गुण होते है जो कि शरीर के पोषण को बढ़ावा देते है विशेष रूप से दीपन का गुण जो कि पाचकाग्नि का बढ़ा कर शरीर को पोषण देने में मदद कर करता है। 

    वजन कम करने में फायदेमंद काली मरिच (Black Pepper Beneficial for Weight Loss in Health)

    अगर आप बढ़े हुए वजन से परेशान है तो, कालीमिर्च का सेवन आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है। क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार कालीमिर्च में पाये जाने वाला एक तत्व चर्बी यानि फैट को कम करने में मदद करता है। 

    गठिया का दर्द कम करे काली मरिच का औषधीय गुण (Benefit of Black Pepper to Get Relief from Gout in Hindi)

    गठिया दर्द को कम करने में कालीमिर्च एक अच्छा उपाय है, क्योंकि कालीमिर्च में आयुर्वेद के अनुसार वात को कम करने का गुण होता है। जिसके वजह से गठिया का दर्द को कम होने में मदद मिलती  है। आयुर्वेद में गठिया को वात प्रधान रोग माना जाता है। 

    कैंसर के इलाज में काली मरिच फायदेमंद (Black Pepper Beneficial to Treat Cancer in Hindi)

    कालीमिर्च का सेवन कैंसर को फैलने से रोकने में आपकी मदद कर सकता है, क्योंकि कालीमिर्च में एंटी- कैंसर का गुण पाया जाता है जो कि कैंसर को फैलने से रोकने में मदद करता है। 

    अवसाद या डिप्रेशन को कम करने में उपयोगी काली मरिच का सेवन (Black Pepper Beneficial to Treat Depression in Hindi)

    कालीमिर्च का सेवन आपको डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है क्योंकि रिसर्च के अनुसार इसमें पाये जाने वाले एल्कलॉइड में एंटी -डिप्रेशन का गुण पाया जाता है।  

    विटिलिगो के इलाज में काली मरिच का औषधिय गुण फायदेमंद (Black Pepper Beneficial in Vitiligo in Hindi)

    विटिलिगो की समस्या में कालीमिर्च का उपयोग फ़ायदेमंद हो सकता है, क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार कालीमिर्च का जब बाहरी रूप से प्रयोग किया जाता है तो ये पिगमेंटेशन को बढ़ाकर रोगों के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

    इस्तेमाल के लिए काली मरिच के उपयोगी हिस्से (Beneficial Parts of Kali Marich)

    फल 

    काली मरिच के सेवन की मात्रा (Uses & Doses of Kali Marich)

    चूर्ण – 1-2 ग्राम

    औषधि के रूप में काली मरिच (Marich Herb) का इस्तेमाल (kali mirch uses)से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।

    काली मरिच से नुकसान (Black Pepper Side Effects in Hindi)

    इन रोगों की अवस्था में काली मरिच का उपयोग नहीं करना चाहिएः-

    • घाव
    • एसिडिटी
    • खूनी बवासीर
    • गर्भावस्था की अवस्था

    काली मरिच कहाँ पाई या उगाई जाती है (Where is Kali March Found or Grown?)

    काली मरिच (Marich Herb) के पौधे का मूल स्थान दक्षिण भारत ही माना जाता है। पूरी दुनिया में काली मरिच की पैदावार सबसे ज्यादा भारत में हीं होती है। भारत से बाहर इंडोनेशिया, बोर्नियो, इंडोचीन, मलय, लंका और स्याम इत्यादि देशों में भी इसकी खेती (kali mirch ki kheti) की जाती है। कुछ वन प्रदेशों में यह स्वयं उत्पन्न होती है, लेकिन दक्षिणी भारत के उष्ण और आर्द्र भागों में काली मरिच की बेलें बोई जाती हैं। काली मरिच (Marich Herb) के कारण ही एक समय भारत विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति था।

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