Categories: आयुर्वेदिक दवाएं

Saubhagya Vati: अमृत के सामान है सौभाग्य वटी- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

सौभाग्यामृतजीरपञ्चलवणव्योषाभया।

क्षामलानिश्चन्द्राभकशुद्धगन्धकरसानेकीकृतान भावयेत्

निर्गुण्डीयुगभृङ्गराजकवृषापामार्गपत्रोल्लसत्प्रत्येकस्वरसेन सिद्धवटिका हन्ति त्रिदोषोदयम् ।।

येषां शीतमतीव दाहमखिलं स्वेदद्रावार्द्रीकृंनिद्रं घोरतरां समस्तकरणव्यामोहमूढं मन

शूलं श्वासबलासकाससहितं मूर्च्छा।

रुचितृड्ज्वरं तेषां वै परिहृत्य जीतिवमसौ गृह्णारति मृत्योर्मुखात् ।।

भै..5/603-604,

क्र.सं. घटक द्रव्य प्रयोज्यांग अनुपात

  1. शुद्ध टंकण 1 भाग
  2. अमृत शुद्ध (वत्सनाभ) (Aconitum ferrox Wallex Seringe) कन्द 1 भाग
  3. श्वेत जीरा (Cuminum cyminum Linn.) फल 1 भाग
  4. सैंधव लवण 1 भाग
  5. सौवर्चल लवण 1 भाग
  6. विड् लवण 1 भाग
  7. सामुद्र लवण 1 भाग
  8. औद्भिद् लवण 1 भाग
  9. शुण्ठी (Zingiber officinale Rosc.) कन्द 1 भाग
  10. मरिच (Piper nigrum Linn.) फल 1 भाग
  11. पिप्पली (Piper longum Linn.) फल 1 भाग
  12. हरीतकी (Terminalia chebula Retz.) फल मज्जा 1 भाग
  13. विभीतकी (Terminalia bellirica Roxb.) फल मज्जा 1 भाग
  14. आमलकी (Emblica officinalis Gaertn.) फल मज्जा 1 भाग
  15. अभ्रक भस्म 1 भाग
  16. शुद्ध गंधक (Sulphur) 1 भाग
  17. शुद्ध पारद (Mercury) 1 भाग
  18. श्वेत निर्गुण्डी रस (Vitex negundo Linn.) पत्र Q.S मर्दनार्थ
  19. नील निर्गुण्डी रस ( Vitex negundo Linn.) पत्र Q.S मर्दनार्थ
  20. भृङ्गराज रस (Eclipta alba Hassk.) पंचांग Q.S मर्दनार्थ
  21. वृष रस (वासा) (Adhatoda vasica Nees.) पत्र Q.S मर्दनार्थ
  22. अपामार्ग पत्र स्वरस (Achyranthes aspera Linn.) पत्र Q.S मर्दनार्थ

मात्रा 250 मिली ग्राम

अनुपान आर्द्रक स्वरस, उष्ण जल

गुण और उपयोगयह समस्त प्रकार के सन्निपात रोगें की सर्वोत्तम दवा है, अत्यंत शीतज्वर, दाहज्वर, प्रलेपक ज्वर, घोर मूर्च्छा युक्त ज्वर, तन्द्रा, समस्त इन्द्रियों का मूर्च्छित होना, मन का खोए रहना, साँस चढ़ना, घोर कफयुक्त खाँसी, बेहोशी, भोजन के प्रति अनिच्छा, प्यास की अधिकता, पसलियों में दर्द इन सब से युक्त ज्वर को यह नष्ट करती है।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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आचार्य श्री बालकृष्ण

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