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Sanshamani Vati: संशमनी वटी रोगों की काट है- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

  • नवम्बर 08,2018
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संशमनी वटी क्या है? (What is Sanshamani Vati?)

गिलोय की छाल से बनी संशमनी वटी (Shanshamani Vati) सभी प्रकार के ज्वरों में विशेष लाभदायक होती है। साथ ही इसके अन्य कई लाभ हैं। पित्त नियंत्रण और दुर्बलता निवारण में भी यह बहुत काम आती है।

 

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संशमनी वटी का उपयोग और फायदे (Uses and Benefits of Sanshamani Vati in Hindi)

संशमनी वटी का प्रयोग सभी प्रकार के ज्वर (Fever) में किया जाता है। ज्वरों के उपचार के लिए यह पतंजलि Patanjali की सबसे महत्वपूर्ण दवाओं में से एक है।

1. हर प्रकार के ज्वर में उपयोगी है संशमनी वटी – Fights Fever

यह वटी सभी प्रकार के ज्वरों में लाभदायक है। विशेषतः पुराने बुखार एवं राजयक्ष्मा के ज्वर में शीघ्र ही लाभ मिलता है।

2. विषम ज्वर यानी टॉयफॉयड में बहुत उपयोगी है संशमनी वटी – Effective remedy for Typhoid

इस घन में एक चौथाई अतिविषा का चूर्ण मिला कर दोदो रत्ती की गोलियाँ बना 5-10 गोली जल के साथ देने से विषम ज्वर में बहुत आराम मिलता है

3. पित्त को नियंत्रित करती है संशमनी वटी – Sanshamani Vati helps in controlling Pita

शरीर में पित्त के बढ़ जाने से गर्मी, अन्तर्दाह, प्यास की अधिकता, मन्दमन्द ज्वर सा मालूम पड़ना, आँखो और हाथपैरों में जलन, पसीना आना आदि में इसको ठण्डे जल, खस के अर्क, गन्ने का रस आदि सौम्य तरल पदार्थों के साथ लेना चाहिए।

4. संशमनी वटी के अन्य लाभ – Other benefits of Sanshamani Vati

बलवर्धक एवं रसायन गुणों से भरपूर इस वटी के सेवन से श्वेत प्रदर, मन्दाग्नि, दुर्बलता और पाण्डु रोग (जौंडिस) में भी आराम मिलता है।

 

संशमनी वटी के घटक Composition

क्र.सं. घटकद्रव्य प्रयोज्यांग अनुपात

  1. गिलोय (गुडुची) छाल 1 भाग
  2. जल क्वाथार्थ 4 भाग

मात्रा एवं सेवन विधि

2 गोली जल से या चिकित्सक के परामर्श के अनुसार

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्श...

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