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Danti: दन्ती के हैं बहुत चमत्कारिक लाभ- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

दंती के पौधे को आयुर्वेद में औषधीय पौधा माना गया है. चरक संहिता और सुश्रुत-संहिता में दंती के फायदों का विस्तृत उल्लेख मिलता है.  बाजार में दंती की जड़े (दंतीमूल) लकड़ी के टुकड़ों के रूप में मिलती हैं. इस पौधे की जड़ें, तना, फूल और फल सब सेहत के लिए उपयोगी है. दांतों और पेट से जुड़े रोगों के इलाज में दंती बहुत लाभदायक है. इस लेख में हम आपको दंती के फायदे, औषधीय गुणों और उपयोग के तरीकों के बारे में बता रहे हैं.

Contents

दंती क्या है? (What is Danti? )

दंती का पौधा 90-180 सेमी ऊँचा होता है और इसकी शाखाएं सफेद, हरे रंग की होती हैं. इसकी पत्तियां 5-8 सेमी लम्बी गोल आकर में होती हैं. इसके फुल गुच्छों में उगते हैं जो हरे और पीले रंग के होते हैं. इसके फल रोयेंदार और लगभग एक सेमी लम्बे, अंडाकार में होते हैं. अक्टूबर से मार्च के बीच में इसमें फूल उगते हैं.

अन्य भाषाओं में दंती के नाम (Name of Wild croton in Different Languages)

दंती का वानस्पतिक नाम Baliospermum solanifolium (Burm.) Suresh (बैलिओस्पर्मम् सोलेनिफोलियम) Syn-Baliospermum montanum (Willd.) Muell.- Arg., Baliospermum axillare Blume है. यह Euphorbiaceae (यूफॉर्बिएसी) कुल का पौधा है. आइये जानते हैं कि विभिन्न भाषाओं में इसे किन नामों से पुकारा जाता है.

Wild croton in :

  • English : Wild croton (वाइल्ड क्रोटोन)
  • Sanskrit : दंती, उदुम्बरपर्णी, निकुम्भ, एरण्डफला, शीघ्रा, प्रत्यश्रेणी
  • Hindi : दन्ती, छोटीदन्ती, ताम्बा;
  • Udia : दोन्ती (Donti)
  • Kannad : दन्ती (Danti), कदूहारालू (Kaduharalu)
  • Gujrati : दन्ती (Danti), दन्तीमूल (Dantimul), जमालगोटा (Jamalgota)
  • Tamil : नाकदन्ती (Nakadanti), निरादिमुट्टु (Niradimuttu)
  • Telugu : कोंदाआमुदमू (Kondamudamu)
  • Bengali : दन्ती (Danti), हाकुन (Hakun)
  • Nepali : अजयफल (Ajayphal)
  • Marathi : दन्ती (Danti), लघुदन्ती (Lagudanti)
  • Malyalam : दन्तिका (Dantika), कटालवनक्कू (Katalavanakku), नकदन्ती (Nakadanti)
  • Arabi : हब्बुस्सलातीनेबाररी (Habbussalatine-barri), हब्बुस्सलातीनेसहराई (Habbussalatinesahrai); Persian : बेदानजीरेखटाइ (Bedanjirekhatai)

दंती के औषधीय गुण (Medicinal Properties of Danti in Hindi)

  • दन्ती कटु, तिक्त, उष्ण, लघु, तीक्ष्ण, कफपित्तशामक, दीपन, शोधक, रेचक, विकासी, सर, पाचक तथा व्रणशोधक होती है।
  • यह शोथ, उदररोग, कृमि, अर्श, अश्मरी, शूल, कण्डू, कुष्ठ, दाह, आनाह, शिरोरोग, सन्यास, आमवात, धनुस्तम्भ, ज्वर, उन्माद, कास, प्लीहा रोग, गुल्म तथा पामा नाशक है।
  • दन्ती तैल/बीज तिक्त, कटु, कषाय, अधोभाग-दोषहर, अतिरेचक तथा दुष्टव्रणशोधक है।
  • यह आनाह, उदररोग, आमवात, शिरोरोग, कास, ज्वर, उन्माद तथा धनुस्तम्भ-नाशक होती है।
  • इसकी मूल तापजनन, विरेचक, शोथघ्न, पाचक, कृमिघ्न, मूत्रल, रक्तिमाकर, ज्वरघ्न तथा बलकारक होती है।
  • इसके पत्र विरेचक होते हैं।
  • इसके बीज विरेचक, रक्तिमाकर तथा उत्तेजक होते हैं।

दंती के फायदे और उपयोग (Uses and Benefits of Danti in Hindi)

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार साँसों से जुड़ी समस्याएं और पेट से जुड़े रोगों के लिए दंती बहुत उपयोगी है. आइये जानते हैं कि अलग अलग बीमारियों में दंती का उपयोग कैसे करें.

आंखों के दर्द को कम करता है दंती (Benefits of Danti for Eye Pain in Hindi)

दंती के जड़ के रस में शहद मिलाकर आंखों में काजल के रूप में लगाने से आंखों के दर्द से आराम मिलता है. बेहतर होगा कि आंखों में दर्द होने पर किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बाद ही इसका उपयोग करें.

दांतों के कीड़ों को खत्म करता है दंती (Uses of Danti for Tooth Related Problems in Hindi)

दंती की जड़, सत्यानाशी मूल, कासीस, वायविडंग और इन्द्रयव को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण से दांतों की मालिश करें. दांतों पर यह चूर्ण मलने से कीड़े खत्म होते हैं और दांतों की सड़न से छुटकारा मिलता है.

साँसों से जुड़ी समस्याओं के इलाज में उपयोगी है दंती (Uses of Danti in Treatment of Respiratory Diseases in Hindi)

सांस लेने में तकलीफ,  फेफड़ों में सूजन आदि समस्याओं से परेशान हैं तो दंती आपके लिए एक उपयोगी औषधि है.  10-15 मिली दंती की पत्तियों का काढ़ा बनाकर सेवन करें. इससे सांसो से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिलता है.

पेट में गैस इकठ्ठा होने की समस्या दूर करता है दंती (Benefits of Danti for Gas Problem in Hindi)

कई बार पेट में गैस इकठ्ठा हो जाने से पेट फूलने लगता है, ऐसा महसूस होता है जैसे पेट में गैस का गोला बन गया है. आयुर्वेद में इस समस्या को गुल्म नाम दिया गया है. 5-10 ग्राम दंती, द्रवन्ती की जड़ के पेस्ट को दधि, छाछ, मद्य, मण्ड तथा सीधु के साथ सेवन करने से गुल्म रोग और पेट के रोगों में लाभ मिलता है।

सेंधानमक तथा अजमोदा के साथ दंती के तेल का सेवन करने से पेट से जुड़े रोगों में लाभ मिलता है।

पेट साफ़ करने में मदद करता है दंती (Uses of Danti as Laxative in Hindi)

पेट ठीक से साफ़ ना होना, कई बीमारी की जड़ है. जबकि कई लोग इसे सामान्य समस्या समझ कर अनदेखा कर देते हैं. दंती का इस्तेमाल आप लैक्सेटिव (विरेचक या पेट साफ़ करने की दवा) के रूप में कर सकते हैं. इसके लिए दंती तथा द्रवन्ती के पेस्ट से लिप्त गन्ने के टुकड़ों को पुटपाक-विधि से पका कर, फिर इसका रस निकालकर 10-15 मिली मात्रा में पिएं. इसे पीने से पेट आसानी से साफ़ होता है।

गेहूँ का आटा, गुड़ और सेंधानमक में दंती की जड़ का काढ़ा मिलाकर गूंथ लें. फिर दन्ती के तेल में तलकर पूड़ी बनाकर इसका सेवन करें. इसे खाने से भी पेट साफ़ होता है।

पेचिश में फायदेमंद है दंती ( Benefits of Danti in Dysentery in Hindi)

दन्ती, चित्रक तथा पिप्पली को बराबर मात्रा में मिलाकर पानी के साथ पीसकर, गुनगुने पानी के साथ पीने से पेचिश में जल्दी फायदा मिलता है।

बवासीर के इलाज में दंती के फायदे (Benefits of Danti in Treatment of Piles in Hindi)

निशोथ, दंती, पलाश, चांगेरी तथा चित्रक के पत्तियों की घी और तेल में पकाकर सब्जी बना लें. इसे दही के साथ सेवन करने से बवासीर में फायदा मिलता है. खुराक संबंधी अधिक जानकारी के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें।

5-10 मिली दन्त्यारिष्ट का सेवन करने से पाचक अग्नि बढ़ती है , इससे दोषों का असंतुलन ठीक होता है. इसके नियमित सेवन से गृहणी और बवासीर में लाभ मिलता है।

दंती के उपयोगी भाग (Useful Parts of Danti)

आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार दंती के निम्न भागों का उपयोग करना चाहिए.

  • जड़
  • बीज
  • पत्तियां

दंती का उपयोग कैसे करें ? (How to Use Danti in Hindi)

दंती का उपयोग कितनी मात्रा में करना चाहिए इसकी जानकारी के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें.

दंती कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Danti Found or Grown in Hindi)

भारत में यह पौधा हिमालय में कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश में 600-1000 मी की ऊँचाई तक पाया जाता है. इसके अलावा असम, दक्कन प्रायद्वीप, बंगाल, बिहार, कोंकण, कर्नाटक, पश्चिमी घाटों एवं केरल के पहाड़ी क्षेत्रों में 1800 मी की ऊँचाई तक दंती का पौधा पाया जाता है। विश्व में इण्डो-मलेशिया क्षेत्रों, चीन, जावा, थाईलैंड, म्यान्मार, मलय प्रायद्वीप, बांग्लादेश में यह मिलता है।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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