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घी : आयुर्वेदिक नज़रिया

अच्छी सेहत के लिए घी का सेवन करना बहुत फायदेमंद माना जाता है। बुजुर्ग लोग भी इसीलिए घी खाने की सलाह देते रहते हैं। दरअसल घी के अनगिनत फायदे होने के कारण ही इसे इतना महत्व दिया जाता है। घी का सेवन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए ही अच्छा है। इस लेख में हम आपको घी के फायदे, नुकसान और घी खाने के सही तरीके के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। आइये जानते हैं :

 

घी क्या है 

जब मक्खन को अच्छी तरह पकाते हैं, तब पकने के बाद छाछ के अंश को अलग करने से जो पदार्थ तैयार होता है, उसे घी कहते हैं। सभी प्रकार के तैलीय व चिकने पदार्थों में घी सबसे अच्छा माना गया है क्योंकि अन्य औषधियों के साथ पकाने से यह उनके बल को बढ़ा देता है। अन्य किसी भी चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ में ऐसे गुण नहीं मिलते हैं।

सभी प्रकार के घी में गाय का घी सबसे अच्छा माना गया हैं।

 

घी के गुण

घी भारी, चिकनाई युक्त मधुरविपाक व शीतवीर्य होता है। यह बुद्धि, याददाश्त, बल, शुक्र, चमक और स्वर में वृद्धि करने वाला अच्छा रसायन है। घी से ह्रदय को ताकत मिलती है और यह वृद्धों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

 

घी के प्रकार 

आयुर्वेद के अनुसार दस सालों तक संरक्षित करके रखा गया घी “पुराना घी” कहलाता है। इसी तरह 100 साल तक रखे गए घी को “कुम्भघृत” और 100 साल से भी ज्यादा वक्त से रखे गए घी को “महाघृत” कहा जाता है।

 

पुराने घी की महक काफी तीव्र होती है इसके बावजूद यह मिरगी, बेहोशी, मलेरिया एवं सिर, कान, आंख व योनि से जुड़े रोगों में फायदेमंद होता है।

 

इसी तरह गाय और भैंस के दूध से तैयार घी का भी अपना अलग अलग महत्व है। हालांकि भैंस के घी की तुलना में गाय का घी ज्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट माना जाता है।

कैसा घी नहीं खाना चाहिए

कांसे के बर्तन में दस दिन या इससे ज्यादा समय से रखा हुआ घी नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह विषैला हो जाता है। इसी तरह अगर घी से किसी तरह की दुर्गंध आ रही है तो उस घी का सेवन ना करें।

 

घी के फायदे 

बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी के लिए घी का सेवन काफी फायदेमंद होता है। शरीर को ताकत देने के अलावा यह शरीर की इम्युनिटी क्षमता को भी बढ़ाता है। जिससे कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। आइये ऐसे ही घी के कुछ प्रमुख फायदों के बारे में जानते हैं :

मानसिक रोगों में फायदेमंद

घी के सेवन से याददाश्त और तार्किक क्षमता बढ़ती है। इसी तरह यह कई मानसिक रोगों में भी गुणकारी माना जाता है। हालांकि इसका सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सही खुराक के बारे में ज़रूर पूछ लें।

 

बुखार में लाभदायक

कई आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि बुखार में घी का सेवन करने से राहत मिलती है।

 

वात के प्रभाव को कम करने में मदद 

वात के असंतुलित होने से शरीर के अनेक प्रकार के रोग होने लगते हैं। घी के सेवन से वात के प्रभाव को कम किया जा सकता है। जिससे वात के प्रकोप से होने वाले रोगों से बचाव होता है।

 

पाचन में सुधार

पाचन शक्ति कमजोर होने का सीधा मतलब है कई तरह की बीमारियों को न्यौता देना। अगर आपकी पाचन शक्ति कमजोर है जो कुछ भी गलत खाने से तुरंत हाजमा बिगड़ सकता है। आयुर्वेद में बताया गया है कि घी का सेवन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। हालांकि हमेशा घी का सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।

 

कमजोरी दूर करने में सहायक

घी के सेवन से शरीर की ताकत बढ़ती है। इसलिए कमजोर लोगों को घी खाने की सलाह दी जाती है। जो लोग बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं या जिम जाते हैं उन्हें भी घी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। शिशुओं के आहार में घी ज़रूर शामिल करें इससे उनका मानसिक और शारीरिक दोनों तरह का विकास सुचारु रूप से होता है।

खांसी में फायदेमंद

खांसी होना एक आम समस्या है लेकिन अगर यह लम्बे समय तक रहे तो इसका इलाज करना ज़रुरी है। खांसी होने के कई कारण है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार खांसी होने पर घी का सेवन करना लाभकारी होता है। आप भी खांसी दूर करने का यह घरेलू नुस्खा ज़रूर आजमायें।

 

शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार

शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी का असर जन्म लेने वाली बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है। घी के सेवन से शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार होता है। शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए घी का सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

 

टीबी में लाभदायक

टीबी एक गंभीर बीमारी है और इसका सही समय पर इलाज कराना बेहद ज़रूरी है। आयुर्वेद के अनुसार टीबी के मरीजों के लिए घी का सेवन करना फायदेमंद रहता है। हालांकि टीबी के इलाज के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर ना रहें बल्कि नियमित अंतराल पर चिकित्सक के पास जाकर अपनी जांच कराएँ।

 

घी के विभिन्न प्रयोग 

घी का इस्तेमाल सिर्फ खाने में ही नहीं होता है बल्कि प्राचीन काल से ही घी को कई अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है। उनमें से कुछ प्रमुख तरीके निम्न हैं :

 

  • घी का सेवन
  • किसी औषधि में मिला कर व पका कर सेवन करना
  • घी से मालिश
  • नस्य ( नाक में डालने की प्रक्रिया)
  • अनुवासन बस्ति (एनिमा) के रूप में इस्तेमाल

 

विशेष

कभी भी घी का सेवन बहुत अधिक मात्रा में ना करें. ज्यादा मात्रा में घी के सेवन से आपका हाजमा बिगड़ सकता है। अगर आप किसी बीमारी के घरेलू इलाज के रूप में घी का उपयोग करना चाहते हैं तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।