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Ustukhudus: उस्तूखूदूस के ज़बरदस्त फायदे – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

  • February 11,2019
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उस्तूखूदूस नाम पढ़कर शायद आपको अजीब लग रहा होगा। असल में यह एक प्रकार का प्राचीन युनानी औषधी है। इसका उपयोग बहुत समय से कई तरह के बीमारियों के लिए किया जाता रहा है। इसलिए उस्तूखूदूस के औषधीय गुणों के आधार पर आयुर्वेद में भी इसका उपयोग रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। चलिये उस्तूखूदूस के बारे में विस्तार से जानते हैं।

उस्तूखूदूस क्या होता है  (What is Ustukhudus in hindi)

उस्तखुदूस कड़वा, गर्म, तीखा, कफ और वात कम करने वाला, दीपन, अनुलोमन, यकृदुत्तेजक, वेदनास्थापक, आक्षेपहर, शोथघ्न, मेध्य, वेदनाशामक, वातानुलोमक तथा आक्षेपरोधी होता है। यह मानसिक थकान, मानसिक उत्तेजना, मनोविभम, जीर्ण वायुविवर सूजन, अवसाद या डिप्रेशन, खाने की रूची बढ़ाने में मदद करने के साथ, मध्यकर्णपाली में सूजन, उदरशूल, यकृत्शोथ, जलोदर तथा हृदय रोग में लाभकारी होता है।

अन्य भाषाओं में उस्तूखूदूस का नाम (Name of Ustukhudus in different languages in hindi)

उस्तखुदूस का वानस्पतिक नाम Lavandula stoechas Linn. (लैवेन्डुला स्टूकस) Syn-Stoechas officinarum Mill होता है। उस्तखुदूस Lamiaceae (लेमिएसी) कुल का है। उस्तखुदूस का अंग्रेजी नाम  Arabian or French lavender (अरेबियन अथवा प्रैंच लेवेन्डर) है। लेकिन भारत के विभिन्न प्रांतों में भिन्न-भिन्न नामों से उस्तखुदूस को पुकारा जाता है, जैसे-

Ustukhudus in-

Hindi-धारू, फूल्लरी (उत्तराखण्ड);

Urdu-उस्तूखुदूस (Ustukhudusa), उल्फाजन (Ulfajan);

Kashmiri-काले वेओथ (Kale weouth);

Gujrati-लेवेन्डेरा–नो-फुल (Lavendra-no-phul);

Bengali-टुन्टुना (Tuntuna);

Tamil-पानिरप्पू (Pannirppu);

Marathi-उस्तूखुदूस (Ustukhudusa)।

English-हील ऑल (Heal-all);

Arbi-अनिसफल अरवाह (Anisul arwah), मुक्सिकुल् अखाह (Mukiskul akhah), उस्तूखूदूस (Ustookhuddus), हालहल (Halhal), मेहार्गा (Meharga);

Persian-अल्फाजान (Alfazaan), जारूब दिमागह (Jarub dimagh), उस्तखुदूस (Ustkhuddus)।

उस्तूखूदूस के फायदे (Ustukhudus benefits in hindi)

उस्तूखूदूस का पत्ता, तेल और फूल का उपयोग किन-किन बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है इसके बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।

सिरदर्द में फायदेमंद उस्तूखूदूस (Ustukhudus benefits in Headache in hindi)

उस्तूखूदूस के फूलों  से प्राप्त तेल को मस्तक पर लगाने से शिरशूल (सिरदर्द) कम होता है।

सांस लेने की परेशानी को दूर करने में करे मदद उस्तूखूदूस (Ustukhudus help to get relief from breathing issue in hindi)

उस्तूखूदूस के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से सांस संबंधी समस्या में लाभ होता है।

वक्षरोग में करे मदद उस्तूखूदूस (Ustukhudus helps to treat in Respiratory disease in hindi)

उस्तूखूदूस के फूलों को पीसकर छाती पर लगाने से वक्ष का दर्द कम होता है।

उदर-विकार से दिलाये राहत उस्तूखूदूस( Ustukhudus help to get relief from Abdominal problem in hindi)

-10 मिली उस्तूखूदूस पत्र स्वरस में समभाग मिश्री मिलाकर पिलाने से उदर-विकारों से राहत मिलती है।

-उस्तेखुद्दूस के पत्रों को पीसकर उदर पर लगाने से उदर विकार ठीक होता है।

बवासीर के कष्ट से दिलाये राहत उस्तूखूदूस  (Ustukhudus benefits in Hemorrhoid in hindi)

उस्तूखूदूस के पत्तों को एरण्ड तैल के साथ पीसकर अर्श के मस्सों पर लगाने से लाभ होता है।

आमवात का दर्द करे कम उस्तूखूदूस (Ustukhudus help to cure Rheumatoid Arthritis in hindi)

उस्तूखूदूस के फूलों को पीसकर जोड़ों में लगाने से आमवातजन्य-वेदना से राहत मिलने में मदद मिलती है।

अल्सर के घाव का करे इलाज उस्तूखूदूस (Ustukhudus help to deal with Ulcer in hindi)

उस्तूखूदूस पञ्चाङ्ग को पीसकर व्रण पर लगाने से अल्सर का घाव जल्दी भर जाता है।

अपस्मार से दिलाये राहत उस्तूखूदूस (Ustukhudus beneficial in Epilepsy in hindi)

उस्तूखूदूस को जल या शहद के साथ पीसकर छानकर रस निकालकर, 1-2 बूंद रस का नस्य लेने से कफवातज अपस्मार में लाभ होता है।

मूर्च्छा का करे इलाज उस्तूखूदूस (Ustukhudus beneficial in Syncope in hindi )

उस्तूखूदूस को पीसकर सिर पर लगाने से मूर्च्छा का शमन होता है।

उस्तूखूदूस का सेवन कैसे करना चाहिए (How to consume Ustukhudus in hindi)

आयुर्वेद में उस्तूखूदूस  के पत्र, तेल तथा पुष्प का प्रयोग औषधी के लिए किया जाता है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार 20-40 मिली उस्तूखूदूस के काढ़े का सेवन कर सकते हैं।

उस्तूखूदूस के सेवन के दुष्परिणाम (Side effects of Ustukhudus in hindi)

पित्त प्रधान व्यक्तियों को उस्तूखूदूस का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके सेवन से बेचैनी, मितली, वमन तथा अत्यधिक पिपासा आदि लक्षण मिलते हैं। यह फेफड़े को भी हानि पहुँचाता है। इन प्रभावों को कम करने के लिए शर्बत बनाकर उसमें नींबू डालकर पिएं। उस्तेखुद्दूस के प्रतिनिधि द्रव्य के रूप में Prunella vulgaris L. का प्रयोग किया जाता है।इसका प्रयोग नवजात शिशुओं, बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए निषिद्ध होता है।

उस्तूखूदूस  कहां पाया और उगाया जाता है (Where is Ustukhudus is found or grown in hindi)

यह औषधि हिमालय के समशीतोष्ण भागों में काश्मीर से भूटान तक, नीलगिरी तथा उत्तरी भारत में बहुतायत से पायी जाती है। इसका पौधा जाड़े के दिनों में पहाड़ों की तलहटी में उत्पन्न होता है और यह तीव्र गन्धयुक्त होता है। उस्तूखूदूस नाम से मुख्यत दो प्रजातियों 1. Lavandulastoechas Linn. तथा 2. Prunella vulgaris L. का प्रयोग किया जाता है।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्श...

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