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Todari: तोदरी के हैं ढेर सारे फायदे- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

वानस्पतिक नाम : Lepidium virginicum Linn. (लेपिडियम वर्जिनिकम) Syn-Lepidium iberis Linn.

कुल : Brassicaceae (ब्रेसीकेसी)

अंग्रेज़ी नाम : Pepper grass (पैपर ग्रास)

हिन्दी-तोदरी, सफेद तोदरी; उर्दू-तुदरी (Tudri)।

अंग्रजी-पेपरवीड (Pepperweed); अरबी-तुदारंज (Toodharanj), तुधारी (Toodharee); फारसी-तोदरी (Todaree)।

परिचय

यह विश्व में दक्षिण यूरोप से साईबेरिया तक तथा ईरान में प्राप्त होता है। भारत में मुख्यत हिमालय एवं पंजाब में प्राप्त होता है। श्वेत, लाल और पीले बीजों के आधार पर यह तीन प्रकार की होती है। पीले बीज वाली तोदरी गुणों में श्रेष्ठ मानी जाती है।

यह 30 सेमी ऊँचा, लघु आकारीय कंटक-युक्त, वर्षायु शाकीय पौधा होता है। इसके पत्र लंबे तथा संकीर्ण होते हैं। इसके पुष्प उभयलिंगी, छोटे, श्वेत वर्ण के सहपत्र रहित, बाह्यदल 0.7-1 मिमी लम्बे, दल 1-1.5 मिमी लम्बे होते हैं। इसके बीज मसूर के दाने के सदृश, किन्तु बहुत छोटे तथा चपटे, 2.5-3.5 मिमी लम्बे, शीर्ष पर पक्षयुक्त होते हैं। बीजों को पानी में भिगाने से लुआब उत्पन्न होता है। इसकी फलियां बहुत छोटी होती हैं। इसका पुष्पकाल अप्रैल से अगस्त तक होता है।

आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव

तोदरी कटु, उष्ण, गुरु, पिच्छिल, सर तथा कफवातशामक होती है।

यह कास, श्वास, दौर्बल्य तथा मूत्रकृच्छ्र में लाभप्रद है।

यह मूत्रल, मृदु, उत्तेजक, स्तम्भक, कफनिसारक, रक्तिमाकर, आमवातशामक तथा अत्यार्तव शामक होती है।

औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधि

  1. श्वसनिका-शोथ-तोदरी के बीजों का फाण्ट बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से श्वसनिका-शोथ में लाभ होता है।
  2. अतिसार-पञ्चाङ्ग का क्वाथ बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से जीर्ण अतिसार में लाभ होता है।
  3. रक्तमेह-तोदरी पञ्चाङ्ग का फाण्ट बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से रक्तमेह में लाभ होता है।
  4. मूत्रकृच्छ्र-तोदरी का क्वाथ बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है।
  5. पूयमेह-7-7 ग्राम शतावरी, मूसली, केवाँच, तोदरी, तालमखाना, प्रवाल पिष्टी तथा रजत भस्म, 6-6 ग्राम विदारीकंद, छोटी इलायची, गोखरू तथा मुस्ता, 3-3 ग्राम सालिम, शिलाजीत, 6-6 ग्राम कंकोल तथा मोचरस, 12 ग्राम वंग भस्म तथा लगभग 200 ग्राम मिश्री के सूक्ष्म चूर्ण को मिलाकर 2-4 ग्राम की मात्रा में दाड़िमी शर्करा के साथ सेवन करने से पूयमेह तथा पित्तज प्रमेह में लाभ होता है।
  6. स्तन्यवर्धनार्थ-2-3 ग्राम तोदरी चूर्ण में समभाग शतावरी चूर्ण तथा मिश्री मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से स्तन्य की वृद्धि होती है।
  7. आमवात-तोदरी पञ्चाङ्ग को पीसकर लगाने से आमवात में लाभ होता है।
  8. संधिवात-तोदरी के फूलों को जैतून या तिल तैल में पकाकर, छानकर तैल की मालिश करने से संधिवात में लाभ होता है।
  9. सामान्य दौर्बल्य-2-3 ग्राम तोदरी चूर्ण में समभाग मिश्री मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से दौर्बल्य का शमन होता है तथा शरीर की पुष्टि होती है।
  10. शोथ-तोदरी को पीसकर लेप करने से शोथ एवं व्रण का शमन होता है।

प्रयोज्याङ्ग  :पत्र, बीज तथा पुष्प।

मात्रा  :3-6 ग्राम या चिकित्सक के परामर्शानुसार।

और पढ़ें: तालमखाना के फायदे

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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