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Palak: बहुत गुणकारी है पालक – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

  • नवम्बर 07,2018
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पालक का परिचय (Introduction of Palak)

पालक (palak) के पौष्टिकता की बखान जितनी करेंगे उतना कम होगा। क्योंकि पालक एक ऐसी सब्जी है जिसको हर कोई खाना पसंद करता है। पालक (spinach in hindi) में मिनरल्स और विटामिन्स पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। पालक सब्जी की खास बात ये है कि ये पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है और महंगी भी नहीं होती।

Palak

 

 

आयुर्वेद के अनुसार पालक (palak ki sabji)  मृदु, थोड़ा फिसलने वाला यानि पिच्छल, वात,कफ और पित्त को कम करने वाला और एसिड को कम करने वाला यानि क्षारिय गुणों वाला होती है। पालक में विटामिन, मिनरल ,फाइटोन्यूट्रिएन्ट्स, प्रोटीन, फाइबर आदि भरपूर मात्रा में होने के साथ-साथ कैलोरी ना के बराबर होती है। तो चलिये अब हम पालक के गुणों और फायदों को आयुर्वेद के दृष्टि से विश्लेषण करके देखते हैं-

पालक क्या है (What is spinach in hindi)

पालक (palak)  एक ऐसा सब्जी है जो अपने पौष्टिकता के कारण सूपरफूड माना जा सकता है। शाकाहारी हो या मांसाहारी वह इस  सूपरफूड को कई तरह से बनाकर खा सकते हैं, जैसे- सूप, दलिया, सब्जी, साग, सलाद, दाल, खिचड़ी और बहुत कुछ। पालक के पत्ते का विरेचक गुण मलाशय को साफ करने में मदद करता है, मूत्र के द्वारा शरीर का विषाक्त पदार्थ बाहर निकालने में और खाना को हजम करवाने में सहायता करता है। पालक (palak benefits)  का फल शोधक और मूत्रल गुण वाला होता है। इसके बीज शीत गुण वाला, विष को कम करने वाला और रूक्ष गुण शरीर के कफ और पित्त को कम करने वाला होता है। और पालक के पत्ते में लिपिड होता है जो जीवाणुरोधी होता है।

 

अन्य भाषाओं में पालक का नाम (Name of palak in Different languages) :

पालक का वानस्पतिक नाम : Spinacia  oleracea Linn. (स्पाइनेसिया ओलेरेसिया) Syn-Spinaciainermis Moench कुल : Chenopodiaceae (कीनोपोडिएसी) अंग्रेज़ी नाम : Spinach (स्पिनच) है। लेकिन हर भाषा में पालक का नाम अलग-अलग है।

Palak in –

  • Sanskrit-पालक्या, मधुरा, पलक्या, वास्तुकाकारा, छुरिका;
  • Hindi-पालक, पालक शाक, पला;
  • Urdu-पालक (Palak);
  • Oriya-पालक साग (Palaksaag), मीठा पलंग (Meetha palang);
  • Kannada-स्पीनेच सोप्पु (Spinech soppu);
  • Gujrati-पालखनी भाजी (Palkhani bhaji);
  • Tamil-वसैयीलैकीराई (Vasyelkariya);
  • Telugu-मट्टरवच्चलि (Mattarvachchli), दमपाबाछली (Dumpabachhali);
  • Bengali-पालंग (Palang);
  • Marathi-पालक (Palak);
  • Nepali-पालुङ्गो (Palungo);
  • Panjabi-पालक (Palak), ईसफनक (Isphanak)
  • English-गार्डन स्पिनच (Garden spinach);
  • Arbi-एस्पनाख (Isfanakh);
  • Persian-इस्पनाख (Ispanakh)।

Palak benefits

 

पालक के फायदे एवं सेवन का तरीका (Palak benefits and uses in hindi) :

पालक साग के रूप में सब खाते हैं। लेकिन ये कितने रोगों के लिए फायदेमंद है चलिये इसके बारे में जानते हैं-

 

सिर के दर्द से दिलाये राहत पालक (Benefits of palak for headache in hindi):

आजकल तो सिर दर्द आम समस्या बन गई है। दिन भर धूप में काम करने से ,कंप्यूटर पर काम करने के वजह से ,खान-पान में बदलाव के कारण या सर्दी-खांसी बुखार के वजह से सिर दर्द होना आम बात है। पालक का साग रूप में सेवन करने से सिर दर्द और सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है।

 

मोतियाबिंद में लाभकारी पालक (Spinach health benefit for cataract in hindi)

उम्र के एक दहलीज के बाद मोतियाबिंद ज्यादातर लोगों को हो जाता है। मोतियाबिंद होने से लोगों को देखने में परेशानी होने लगती है। पंतजली आयुर्वेद के अनुसार पालक का सेवन इस तरह से करने पर कैटारेक्ट या मोतियाबिंद से छुटकारा मिलता है।  

पालक का जड़, पीपल, शंख और अश्वगंधा को अलग-अलग 4-4 मासा (0.97 ग्राम) लेकर जम्बीरी नींबू के रस से पीसकर इनकी गोलियाँ बना लें, इन गोलियों को पीसकर नेत्रों में लगाने से नेत्ररोग दूर होता है।

 

आंख की पुतलियों के सूजन (अक्षिकूट शोथ) को करें दूर पालक  (Palak benefits for Akshikut Inflammation in hindi)

पालक (spinach in hindi)  के गुण के कारण आँख संबंधी किसी भी समस्या में फायदा पहुँचता है। पालक पञ्चाङ्ग स्वरस को आँखों में लगाने से अक्षिकूट शोथ में लाभ मिलता है।

 

गले में दर्द को करे कम पालक (Benefits of palak for throat swelling in hindi)

अक्सर मौसम के बदलने पर गले में खराश या गले में दर्द की शिकायत सबको होती है। इस परेशान को दूर करने में पालक मदद करता है।

पालक के पत्तों को उबालने पर प्राप्त थोड़ा गुनगुने स्वरस का सेवन करने से कण्ठ शोथ (गले की सूजन) में आराम मिलता है।

 

फेफड़े में सूजन में फायदेमंद पालक (Palak ke fayde for lungs swelling in hindi)

कभी-कभी श्वसन तंत्र में असुविधा, किसी प्रकार के संक्रमण के कारण फूस्फूस या लंग्स में सूजन आ जाती है। इसमें पालक के पत्ते का रस बनाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।

5 मिली पालक पत्र-स्वरस का सेवन करने से फुफ्फुमस में सूजन व ज्वर कम होता है।

 

ग्रहणी के समस्याओं में फायदेमंद पालक (Benefits of palak for Irritable Bowel Syndrome in hindi)

इरेटेब्ल बॉवेल सिंड्रोम या ग्रहणी एक ऐसी अवस्था होती है जहां आंत में सूजन हो जाती है जिसके कारण खाना हजम नहीं होती या उल्टी जैसे कई लक्षण नजर आने लगते हैं। पालक इस अवस्था को सुधारने में मदद करता है।

पालक का साग बनाकर खाने से ग्रहणी और डायबिटीज में लाभ मिलता है।

 

गुदशोथ या गुदा मार्ग में सूजन में फायदेमंद पालक (Spinach benefits for Anus Swelling in hindi)

जिनको पाइल्स या बवासीर होता है उनको गुदा में सूजन होता है। इस हालत में पालक लाभकारी रूप से काम करता है। पालक के पत्ते का साग या उसके फल का चूर्ण बनाकर सेवन करने से गुदा का सूजन कम होता है।

 

यकृत शोध या लीवर में सूजन कम करें पालक (Palak benefits for Liver Swelling in hindi)

अक्सर पीलिया या जॉन्डिश होने पर लीवर या यकृत सूज जाता है। पालक के बीज का या पालक का पेस्ट बनाकर खाने से लाभ मिलता है।

1-2 ग्राम पालक बीज का चूर्ण या 1-2 ग्राम पालक पेस्ट का सेवन करने से यकृत् शोथ (यकृत् की सूजन) तथा पाण्डु या एनीमिया रोग में लाभ मिलता है।

 

मूत्रकृच्छ में फायदेमंद पालक (Benefits of palak for Dysuria in hindi)

मूत्रकृच्छ में पेशाब करते वक्त दर्द होना आम लक्षण होता है। इस अवस्था से आराम पाने के लिए पालक का इस्तेमाल इस तरह से करना चाहिए।

5-10 मिली पालक बीज का काढ़ा बनाकर सेवन करने से मूत्रकृच्छ्र में लाभ मिलता है।

 

गठिया के दर्द से दिलाये आराम पालक (Palak benefits for Arthritis in hindi)

गठिया का दर्द आजकल हर उम्र में लोगों को परेशानी में डालने लगी है। हाथ-पैर, कमर में गठिया के कारण तेज दर्द होता है। पालक के बीज और पत्ते का इस्तेमाल इस तरह कर सकते हैं।

पालक के बीजों तथा पत्रों को पीसकर संधियों (जोड़ों) में लगाने से वेदना एवं कटिशूल का शमन होता है।

 

श्वित्र में लाभदायक पालक (Palak sabji benefits for Leucoderma in hindi)

ल्यूकोडर्मा या श्वित्र में त्वचा में मेलानीन पिगमेंट के कमी के कारण कहीं-कहीं सफेद दाग हो जाते हैं। पालक के पत्ते का पेस्ट बनाकर लगाने से दाग कम होते हैं।

 

पामा या एग्जिमा में फायदेमंद पालक (Benefits of palak to Scabies in hindi)

अक्सर त्वचा के शुष्क हो जाने या किसी एलर्जी के कारण खुजली या लाल-लाल दाने आते हैं। वहां पालक के बीजों में समान मात्रा में खसखस के बीजों को मिलाकर पीसने के बाद उसको उस जगह पर अच्छे तरह लगाकर नीम के पत्ते के पानी से नहाने से पामा में लाभ मिलता है।

 

कमजोरी दूर करे पालक (Palak ke fayde for Weakness in hindi)

कभी-कभी बहुत दिनों तक कठीन रोग से ग्रस्त रहने के कारण या शरीर में विटामिन, आयरन, मिनरल की कमी होने के कारण शरीर कमजोर हो जाता है।

इसके लिए 5-10 मिली पालक पत्ते के स्वरस का नियमित सेवन करने से शरीर में खून की कमी  एवं दुर्बलता में लाभ मिलता है।

 

उच्च रक्त चाप या हाई ब्लड प्रेशर में फायदेमंद पालक (Spinach benefits for High Blood Pressure in hindi)

आजकल तो तनाव और खान-पान के कारण ज्यादातर लोगों को उच्च रक्तचाप की बीमारी होने लगी है। इसके लिए 5-10 मिली पालक-स्वरस में समान भाग का नारियल जल मिलाकर सेवन करने से उच्च रक्तचाप में फायदा पहुँचता है।

 

Summary:

 

पालक का सेवन कैसे करें   (How to consume palak in hindi)

हर बीमारी के लिए पालक का सेवन और इस्तेमाल कैसे करना चाहिए, इसके बारे में पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए पालक का उपयोग कर रहें हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

पालक के पत्ते और बीज का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है।

 

पालक कहां पायी या उगाई जाती है (Where is palak sabji found or grown in hindi):

पालक (spinach in hindi) लगभग 2100 मी तक की ऊँचाई पर होता है। वैसे तो प्राय सर्वत्र ऊँचे स्थानों के खेतों में तथा बागों में यह भाद्रपद मास में बोई जाती है तथा मार्गशीर्ष से चैत्र मास तक इसके पत्र साग के लिए काटे जाते हैं। इसके पत्र जितने काटे जाते हैं उतने ही शीघ्र बढ़कर फिर से आ जाते हैं। इसकी जड़ गुच्छेदार होती है। यह छोटा, सीधा, लगभग 30-60 सेमी ऊँचा होता है। इसका काण्ड या तना गोलाकार, चिकना, नलिकाकार, मांसल और रक्ताभ वर्ण का होता हैं। इसके पत्ते सरल, एकांतर, बीच का भाग बड़ा, मांसल, दोनों सतह पर चिकने, त्रिकोणाकार-अण्डाकार होते हैं। इसके पुष्प हरे-पीले रंग के होते हैं।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्श...

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