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Moulsiri: बेहद गुणकारी है मौलसिरी (बकुल)- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

मौलसिरी(बकुल) फूल का नाम लेते ही उसके सुंगध से दिल और मन दोनों सुगंधित हो जाता है, लेकिन इसके आयुर्वेदिक गुणों के बारे में शायद ही लोगों को पता है कि यह कितने बीमारियों के इलाज में काम आता है।नौलसिरी दांत और पेट संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। 

 

Contents

मौलसिरी क्या है? (What is Moulsiri in Hindi?)

मौलसिरी फूल की एक विशेष बात यह है कि फूलों के सूख जाने पर ही उसकी सुगंध नहीं जाती है। बकुल का फूल हर जगह मिलता है। इसका 12-15 मी तक ऊँचा, सीधा, बहुशाखित, छायादार, सदाहरित पेड़ होता है। इसके फूल छोटे,पीले सफेद रंग के, ताराकार, सुगन्धित, लगभग 2.5 सेमी व्यास के होते हैं।

 

अन्य भाषाओं में मौलसिरी के नाम (Names of Moulsiri in Different Languages)

मौलसिरी का वानास्पतिक नाम Mimusops elengi Linn.(मिमुसोप्स एलेन्गी) Syn-Kaukenia elengi (Linn.) Kuntze होता है। इसका कुल  Sapotaceae (सैपौटेसी) होता है और इसको अंग्रेजी में Bullet wood tree (बुलेट वुड ट्री) कहते हैं। चलिये अब जानते हैं कि मौलसिरी और किन-किन नामों से जानी जाती है। 

Sanskrit-बकुल, मधुगन्धि, चिरपुष्प, स्थिरपुष्प;

 Hindi-बकुल, मौलसीरी, मौलसिरी, चिरपुष्प, स्थिरपुष्प; 

Urdu-किराकुली (Kirakuli), मुलसारी (Mulsari); 

Odia-बोकुलो (Bokulo), बौला (Baula), बोउलो (Boulo); 

Konkani-वोनवोल (Vonvol); 

Kannada-पगडेमारा (Pagademara), बकुला (Bakula); 

Gujarati-बरसोली (Barsoli), बोलसारी (Bolsari); 

Tamil-मगीलम (Magilam), इलांची (Ilanchi); 

Telugu-पोगडा (Pogada), पोगड (Pogad); 

Bengali-बकुल (Bakul); 

Punjabi-मौलसारी (Maulsari); 

Malyalam-इन्नी (Inni), एलन्नी (Elanni); 

Marathi-ओवल्ली (Ovalli), बकुल (Bakul)।  

English-स्पेनिश चेरी (Spanish cherry), टेनजोंग ट्री (Tanjong tree); 

Persian-मौलसिरि (Moulsiry)।

मौलसिरी (बकुल) का औषधीय गुण (Medicinal Properties of Moulsiri in Hindi)

मौलसिरी के फायदो के बारे में जानने के लिए सबसे पहले उसके औषधीय गुणों के बारे में जानना जरूरी होता है, तभी इलाज के बारे में सही ज्ञान होगा।

मौलसिरी प्रकृति से पित्त-कफ से आराम दिलाने वाला, स्तम्भक (Styptic), कृमि को निकालने में मददगार, गर्भाशय की शिथिलता, सूजन एवं योनिस्राव को दूर करता है। इसके अलावा वस्ति (bladder) एवं मूत्र मार्ग के स्राव और सूजन को कम करता है। मौलसिरी के फूल हृदय और मेध्य (Brain tonic) के लिए फायदेमंद होते हैं। फल तथा छाल पौष्टिक, रक्त-स्तम्भक (Blood-Styptic),बुखार, विष और, कुष्ठ के कष्ट को कम करने तथा दांतों के लिए विशेष लाभकारी होता है।

यह स्तम्भक, ग्राही (absorbing), शीतल, कृमि के इलाज में मददगार , बलकारक, बुखार के कष्ट; सिरदर्द, मस्तिष्क की दुर्बलता, पूयदंत (Pyrrohoea), दांत की दुर्बलता, अतिसार या दस्त, प्रवाहिका या पेचिश, कृमि, रक्तप्रदर (metrorrhagia), श्वेतप्रदर (Leukorrhea), पूयमेह (सुजाक या गोनोरिया) तथा वस्ति या ब्लाडर के सूजन को कम करने में लाभप्रद होता है।

मौलसिरी  के फायदे और उपयोग (Uses and Benefits of Moulsiri in Hindi) 

मौलसिरी की मनमोहक सुगंध के अलावा यह किन-किन बीमारियों के लिए औषधी के रूप में काम करती है और कैसे करती है, इसके बारे में जानने के लिए आगे विस्तार से जानते हैं।

 

सिरदर्द से राहत दिलाने में फायदेमंद मौलसिरी (Moulsiri Beneficial to Treat Headache in Hindi)

headache relief

अगर आपको थकान या तनाव के कारण सिर में हमेशा दर्द होने की शिकायत रहती है तो बकुल के सूखे फल के चूर्ण को नाक से लेने से सिरदर्द से आराम मिलता है।

 

दांत संबंधी समस्याओं के इलाज में फायदेमंद मौलसिरी (Moulsiri Beneficial in Tooth or Dental related Diseases in Hindi)

दांत संबंधी विभिन्न समस्याओं जैसे कि असमय दांत का हिलना, चलदंत रोग, दांत दर्द से राहत दिलाने में मौलसिरी का इस तरह से इस्तेमाल करने पर राहत मिलता है और दांतों को मजबूती मिलती है-

-नियमित रूप से बकुल छाल के काढ़े क गण्डूष व बीज चूर्ण को चबा कर मुख में रखने से स्थान से हट जाने की समस्या तथा हिलते हुए दाँत भी दृढ़ हो जाते हैं।

-बकुल मूल के छाल का पेस्ट बना लें। उसको सुबह दूध के साथ तीन दिन तक सेवन करने से चलदंत में लाभ होता है।

-बकुल फल के चौथाई भाग खदिर-सार तथा आठवाँ भाग इलायची चूर्ण मिलाकर, सूक्ष्म चूर्ण कर, दाँतों का मर्दन करने से चलदंत रोग में शीघ्र लाभ होता है।

-बकुल चूर्ण से दांतों का मर्दन करने से दंतरोग, दंतमूलक्षय, चलदंत आदि व्याधियों में लाभ होता है।

-बकुल के 1-2 फलों को नियमित रूप से चबाने से भी दांत मजबूत हो जाते हैं।

-बकुल छाल चूर्ण का मंजन करने से दांत चट्टान की तरह मजबूत हो जाते हैं।

-मौलसिरी छाल के 100 मिली काढ़े में 2 ग्राम पीपल, 10 ग्राम शहद और 5 ग्राम घी मिलाकर गरारा करने से दांतों की वेदना का शमन होता है।

-मौलसिरी दातौन को ब्रश जैसा इस्तेमाल करने अथवा दांतों के नीचे रख कर चबाने से हिलते हुए दांत स्थिर व सख्त हो जाते हैं।

-इसकी शाखाओं के आगे के कोमल भाग का काढ़ा बनाकर, काढ़े में दूध या जल मिलाकर प्रतिदिन पीने से बुढ़ापे में भी दांत मजबूत रहते हैं।

-बकुल, आंवला और कत्था इन तीनों वृक्षों की छाल को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर दिन में दस-बीस बार कुल्ला करने से मुंह के छाले, मसूड़ों की सूजन और हर प्रकार के मुँह संबंधी रोगों से जल्दी लाभ मिलता है और दांत मजबूत हो जाते हैं।

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खांसी के कष्ट से दिलाये आराम मौलसिरी (Moulsiri Beneficial to Get Relief from Cough in Hindi)

20-25 ग्राम ताजा फूलों को रात भर आधा लीटर पानी में भिगोकर रखें और सुबह मरूलधान कर रख लें। 10-20 मिली की मात्रा में सुबह-शाम  3-6 दिन तक उस पानी को बच्चे को पिलाने से खांसी मिट जाती है।

हृदयरोगों में लाभकारी मौलसिरी (Benefit of Moulsiri in Heart Diseases in Hindi)

हृदय संबंधी रोगों के इलाज में मौलसिरी का औषधीय गुण फायदेमंद होता है। इसके लिए मौलसिरी के 5-10 बूंद फूल के अर्क का सेवन करने से हृदय रोगों में लाभ होता है।

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विबंध या कब्ज के इलाज में लाभकारी मौलसिरी (Moulsiri Beneficial to Treat Constipation in Hindi)

constipation

बच्चों का कब्ज दूर करने के लिए बकुल के बीजों की मींगी को पीसकर, पुराने घी के साथ मिलाकर वर्ति या बत्ती जैसा  बनाकर, बत्ती को गुदा में रखने से 15 मिनट में मल की कठोर गांठें अतिसार यानि दस्त के साथ निकल जाती हैं।

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अतिसार या दस्त को रोकने में मौलसिरी का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefit of Moulsiri to Get Relief from Diarrhea in Hindi)

दस्त की समस्या से जुझ रहे हैं तो मौलसिरी का इस तरह से प्रयोग करने पर जल्दी राहत मिलेगी-

-बकुल के 8-10 बीजों को ठंडे पानी में पीसकर देने से अतिसार में लाभ होता है। पुराने अतिसार में इसके पके हुए फल के गूदे को 10-20 ग्राम प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।

-5 बूँद बीज मज्जा तेल को बतासे में डालकर सेवन करने से आमातिसार में लाभ होता है।

 

प्रवाहिका या पेचिश के इलाज में फायदेमंद मौलसिरी (Moulsiri Beneficial in Dysentery in Hindi)

पके फलों से प्राप्त फलमज्जा का सेवन करने से प्रवाहिका तथा अतिसार के कष्ट से जल्दी राहत मिलने में मदद मिलती है।

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रक्तमूत्रता (मूत्र से खून आना) से राहत दिलाने में लाभकारी मौलसिरी (Moulsiri Beneficial in Hameturia in Hindi)

अगर मूत्र से खून निकलना बंद नहीं हो रहा है तो मौलसिरी का इस तरह से प्रयोग करने पर जल्दी आराम मिलता है।

-5 ग्राम मौलसिरी छाल का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम कुछ दिनों तक पीने से मूत्र में रक्त का जाना बंद हो जाता है।

 

योनिस्राव को नियंत्रित करने में लाभकारी मौलसिरी (Benefit of Moulsiri in Vaginal discharge in Hindi)

1-2 ग्राम बकुल छाल चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से पर योनिस्राव से आराम मिलता है। इस चूर्ण के सेवन से शुक्र प्रमेह और कमर के दर्द से भी आराम मिलता है।

 

प्रदर या श्वेतप्रदर में लाभकारी मौलसिरी (Moulsiri Beneficial in Leucorrhoea in Hindi)

Leucorrhea

मौलसिरी का औषधीय गुण महिलाओं के योनि से सफेद पानी निकलने की समस्या से राहत दिलाने में बहुत फायदेमंद होता है।

 5-10 ग्राम बकुल छाल चूर्ण या 10-20 मिली काढ़े में समान भाग शक्कर मिलाकर सेवन करने से प्रदर के इलाज में मदद मिलती है।

-बकुल तने की छाल के चूर्ण में शर्करा मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है।

 

व्रण या अल्सर के इलाज में लाभकारी मौलसिरी (Moulsiri Beneficial to Treat Ulcer in Hindi)

बकुल छाल का  बनाकर व्रणों को धोने से व्रणों का शोधन तथा जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।

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मौलसिरी का उपयोगी भाग (Useful Parts of Moulsiri)

आयुर्वेद के अनुसार मौलसिरी का औषधीय गुण इसके इन भागों को प्रयोग करने पर सबसे ज्यादा मिलता है-

-छाल

-पत्ता

-फूल 

-फल और

-बीज।

मौलसिरी का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए (How to Use Moulsiri in Hindi)

यदि आप किसी ख़ास बीमारी के घरेलू इलाज के लिए मौलसिरी का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही इसका उपयोग करें। चिकित्सक के सलाह के अनुसार 1-2 ग्राम चूर्ण, 50-100 मिली काढ़ा ले सकते हैं।

मौलसिरी कहां पाई या उगाई जाती है (Where is Moulsiri Found or Grown in Hindi)

चित्त को अति आनंद देने वाले मनोरम सुगंधित फूलों से युक्त बकुल के सदाहरित पेड़, सड़कों के किनारे, घर के बगीचे में यहां-वहां सर्वत्र लगाए हुए मिलते हैं।