Categories: जड़ी बूटी

Kuri: करिश्माई ढंग से फायदा करता है कुरी- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

वानस्पतिक नाम : Bidens pilosa Linn.

(बिडेन्स पाइलोसा) Syn-Bidens africana klatt

कुल : Asteraceae (एस्टरेसी)

अंग्रेज़ी में नाम : Beggar tick (बेगर टिक)

हिन्दी-कुरी; नेपाली-कालो कुरो (Kaalo kuro); गुजराती- फूटियम, समारा कोदकी; उड़िया-मघा लटेंगा। अंग्रजी-स्पेनिश निडल (Spanish needle)।

परिचय

यह सर्वत्र उष्णकटिबंधीय भागों में सड़क के किनारे पर परती भूमि पर पाया जाता है। भारत में यह साधारणतया 2000 मी की ऊँचाई पर खरपतवार के रूप में पाया जाता है।

यह लगभग 60- 90 सेमी0 तक ऊचा शाकीय पौधा है। इसके पुष्प पीत वर्ण के होते हैं।

आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव

इसकी जड़ एवं बीज आर्तवजनक, कफनिस्सारक, उत्तेजक एवं उद्वेष्टनरोधी होती है।

यह सूक्ष्मजीवाणुरोधी, शोथरोधी, यकृत्रक्षात्मक, व्रणरोधी तथा प्रमेहरोधी होता है।

इसके अतिरिक्त इसमें स्कन्दरोधी, जीवाणुरोधी, कवकरोधी, रक्तकैंसररोधी, मलेरियारोधी, अनाक्सीकारक, अर्बुदरोधी तथा विषाणुरोधी होता है।

यह गर्भस्रावक, प्रमेहरोधी, रक्तस्तम्भक, परजीवीरोधी, पूयरोधी, आक्षेपरोधी, स्तम्भक, तिक्त, वातानुलोमक, स्वेदजनन, मूत्रल, मृदुकारी, ज्वरघ्न, उत्तेजक, कृमिनिसारक, व्रणरोपक तथा आर्तवस्राववर्धक होता है।

औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधि

  1. कर्णशूल-ताजे पौधे से प्राप्त स्वरस को 1-2 बूंद कान में डालने से कर्णशूल में लाभ होता है।
  2. श्वासकष्ट-इसके मूल एवं बीज का प्रयोग श्वासकष्ट में किया जाता है।
  3. 2-5 ग्राम मूल का क्वाथ बनाकर पीने से श्वास तथा कास में लाभ होता है।
  4. 1-2 चम्मच पत्र स्वरस को नियमित रूप से कुछ समय तक पिलाने से प्रमेह में लाभ होता है तथा उदरकृमियों का शमन होता है।
  5. 5 ग्राम बीज तथा मूल का क्वाथ बनाकर, इसमें अजवायन मिलाकर पिलाने से मासिक-विकारों में लाभ होता है।
  6. व्रण-पञ्चाङ्ग को पीसकर व्रण में लगाने से व्रण का रोपण होता है।
  7. इसके पत्रों को पीसकर रस निकालकर अंगुलियों के मध्य में होने वाले व्रणों पर लगाने से व्रण का रोपण होता है।
  8. पत्रों को पीसकर लगाने से कण्डू का शमन होता है।
  9. 5 ग्राम पञ्चाङ्ग का क्वाथ बनाकर पीने से जीर्ण ज्वर तथा रक्तार्बुद में लाभ होता है।

प्रयोज्याङ्ग  : पञ्चाङ्ग।

मात्रा  : चिकित्सक के परामर्शानुसार।

निषेध  :

इसका प्रयोग गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए।

इस पौधे में अनेक कौमेरिन डेरीवेटिव्स (Coumarin derivatives) पाए जाते है। इसलिए यह रक्त को पतला कर सकता है।

जिन रोगियों में कैफीन के प्रति एलर्जी हो, उन्हें इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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आचार्य श्री बालकृष्ण

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