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Kapas: कपास के हैं अनेक अनसुने फायदे- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

कपास का परिचय (Introduction of Kapas)

कपास, व्यापार की दृष्टि से सफेद सोना नाम से जाना जाता है, यानि कपास का नाम सुनते ही एक ही बात दिमाग में आता है वह यह है कि इससे उम्दा क्वालिटी के कपड़े बनते हैं जो त्वचा के दृष्टि से सबसे ज्यादा सुरक्षित होते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि कपास के औषधीय दृष्टि से भी बहुत गुण है।

कपास, सदाबहार बहुवर्षीय झाड़ी होता है जिसके पत्ते हरे, फूल हल्के सफेद या पीले रंग के होते हैं। कपास बेचकर हजारों लोगों का जैसा पेट भरता है वैसे ही कपास को कई बीमारियों के लिए इलाज स्वरुप इस्तेमाल भी किया जाता है।

कपास क्या होता है? (What is Kapas in Hindi?)

आयुर्वेद की प्राचीन संहिताओं एवं निघण्टुओं में कपास का वर्णन प्राप्त होता है।कपास के पौधे बाग बगीचों में, घरों या देवालयों के प्रांगणों में शोभा तथा रूई के लिए लगाए जाते हैं। इसका 0.60-2.5 सेमी ऊँचा, झाड़ीदार क्षुप (shurb) होता है। कपास की रूई का प्रयोग वस्त्र या कपड़े बनाने में किया जाता है।

कपास प्रकृति से मधुर, थोड़ी गर्म तासीर की होती है। इसके अलावा यह पित्त को बढ़ाने वाली, वातकफ दूर करने वाली, रुचिकारक; प्यास, जलन, थकान, बेहोशी, कान में दर्द, कान से पीब निकलना, व्रण या घाव, कटने-छिलने जैसे शारीरिक समस्याओं के लिए औषधि के रुप में काम करती है। इसके बीज मधुर, गर्म, स्निग्ध, वात दूर करने वाले,स्तन का आकार बढ़ाने वाले तथा कफ को बढ़ाने वाले होते हैं। कपास का अर्क या काढ़ा सिर और कान दर्द को कम करने के साथ-साथ शंखक रोग नाशक होता है। कपास के फल कड़वे, मधुर, गर्म, रुचिकारक तथा वातकफ कम करने वाले होते हैं।

अन्य भाषाओं में कपास के नाम (Name of Kapas in Different Languages)

कपास का वानास्पतिक नाम Gossypium herbaceum L. (गॉसिपिअम् हर्बेसिअम्) Syn-Gossypium album Buch.-Ham. होता है। कपास Malvaceae (मालवेसी) कुल का होता है। कपास को अंग्रेजी में Cotton plant (कॉटन प्लान्ट) कहते हैं लेकिन भारत के विभिन्न प्रांतों में  भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। जैसे-

Sanskrit-तुण्डकेशी, समुद्रान्ता, कार्पास, कार्पासी;

Hindi-कपास, रूई, बिनौला;

Urdu-रूई (Rui);

Odia-कार्पासो (Karpaso), कोपा (Kopa);

Kannadaहत्ति (Hatti);

Gujrati-गुंवाडीयो (Gunwadio), कपासिया (Kapasiya);

Tamil-परुत्ति (Parutti), कार्पासम (Karpasam);

Telegu-पत्तिचेट्टु (Pattichettu), कार्पासमु (Karpasamu), प्रात्ति (Praati);

Bengali-कपास (Kapas), तुला (Tula);

Nepali-कपास (Kapas);

Punjabi-रूई (Rui);

Marathi-कापसी (Kapasi), कापूस (Kapus), सरकी (Sarki);

Malayalamकारूपरूत्ति (Karupparutti)।

English-इण्डियन कॉटन (Indian cotton), एशियाटिक कॉटन (Asiatic cotton);

Arbi-फिटन (Fitan), कफर्तुमुस्सफल (Kurtumussul);

Persian-पम्बाह (Pambah)।

कपास के फायदे (Kapas Uses and Benefits in Hindi)

आयुर्वेद में कपास के बहुत सारे फायदे दृष्टिगोचर होते हैं। कपास न सिर्फ दस्त, खांसी, रूसी, सिर दर्द जैसे बीमारियों के फायदेमंद बल्कि कई गंभीर बीमारियों से राहत दिलाने में  भी बहुत मदद करती है। चलिये कपास के फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं कि कैसे और किन-किन बीमारियों के उपचार करती है।

रूसी में फायदेमंद कपास (Kapas Benefits in Dandruff in Hindi)

आजकल प्रदूषण और तरह-तरह के शैंपू और हेयर लोशन, क्रीम आदि लगाने कारण रूसी की परेशानी बढ़ गई है। कपास का तेल रूसी के समस्या से निजात दिलाने में  बहुत मदद करता है। कपास से बने तेल को सिर में लगाने से अरुंषिका (रूसी) नष्ट होती है।

और पढ़ेंखादिर के प्रयोग से रुसी का इलाज

सिरदर्द करे कम कपास (Benefits of Kapas to Get Relief from Headache in Hindi)

अगर सिरदर्द से आप आए दिन परेशान रहते हैं तो कपास का घरेलू इलाज बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। कपास की मींगी को पीसकर मस्तक में लेप करने से सिरदर्द की परेशानी कम होती है।

और पढ़े: सिरदर्द में पुत्रजीवक के फायदे

आँखों के दर्द से दिलाये राहत कपास (Kapas for Eye Disease in Hindi)

आजकल देर तक कंप्यूटर पर काम करने या दिन भर काम करने के बाद आँखों में दर्द होने लगता है इससे राहत पाने में कपास बहुत काम आती है। कपास के पत्तों को पीसकर उसमें दही मिलाकर आँखों के बाहर लगाने से आँखों का दर्द कम होता है।

और पढ़े: आंखों के दर्द के घरेलू इलाज

कान का बहना कम करे कपास (Kapas to Treat Ear Discharge in Hindi)

कपास का औषधीय गुण कान अगर पानी या पीब निकल रहा है तो उसको ठीक करने में मदद करता है।

सर्ज छालचूर्ण में कपास-फल-का रस तथा मधु मिलाकर, 1-2 बूंद कान में डालने से कर्णस्राव (कान का बहना) कम होता है।

जामुन पत्ते का रस, आम पत्ते का रस, कपित्थ तथा कपास फल के रस को समान मात्रा में लेकर, मधु मिलाकर 1-2 बूंद कान में डालने से कर्ण स्राव कम होता है।

कान दर्द से दिलाये आराम कपास (Kapas Beneficial in Ear Pain in Hindi)

अगर ठंड लगने पर या किसी दूसरे कारण से कान में दर्द हो रहा है तो कपास का घरेलू इलाज काम आ सकता है। 1-2 बूंद कपास पत्ते के रस को कान में डालने से कान का दर्द कम होता है।

खाँसी में फायदेमंद कपास (Kapas to Treat Cough in Hindi)

मौसम के बदलने के साथ अगर आपको हर बार खाँसी होती है तो कपास का इस्तेमाल ऐसे करने से जल्दी आराम मिलता है। इंगुदी फल की त्वचा, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी, मूसली, मनशिला, कपास की गुठली तथा अश्वगंधा को समान मात्रा में लेकर पीसकर उसकी बत्ती बनाकर, घी में डुबाकर धूम्रपान करने से खाँसी से राहत मिलती है।

सांस की नली में सूजन करे कम कपास (Kapas for Bronchitis in Hindi)

कपास का औषधीय गुण सांस की नली के सूजन को कम करने में बहुत मदद करती है। इसके लिए 5 मिली फल के रस में मधु मिलाकर पीने से श्वासनलिका का सूजन कम होता है।

प्यास लगने की परेशानी करे दूर कपास (Kapas Beneficial in Thirst Feeling in Hindi)

अगर किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण आपको बार-बार प्यास लग रही है तो कपास का इस तरह से सेवन करने पर जल्दी आराम मिलता है। वन्य एवं गाँव दोनों तरह के कपास के 1-2 ग्राम फल पेस्ट को जल में घोलकर पीने से प्यास लगने की परेशानी में लाभ होता है।

दस्त रोके कपास (Kapas to Fight Diarrhoea in Hindi)

अगर ज्यादा मसालेदार खाना, पैकेज़्ड फूड या बाहर का खाना खा लेने के कारण दस्त है कि रूकने का  नाम ही नहीं ले रहा तो कपास का घरेलू उपाय बहुत काम आयेगा।

-समान मात्रा में कपास तथा प्लक्ष रस (5 मिली) को मधु के साथ सेवन करने से कफज अतिसार में  लाभ होता है।

-1-2 ग्राम कपास पत्ते के चूर्ण का सेवन करने से पेट की गड़बड़ी, अतिसार तथा प्रवाहिका (पेचिश) में लाभ होता है।

-5 मिली कपास पत्ते के रस में नींबू रस को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करने से प्रवाहिका तथा अतिसार से छुटकारा मिलता है।

-1 या 2 कपास मींगी को पीसकर छानकर पिलाने से अथवा कपास के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से अतिसार या दस्त में लाभ होता है।

और पढ़ें: अतिसार में काली मूसली के लाभ

खाने की इच्छा बढ़ाये कपास (Benefits of Kapas in Dyspepsia in Hindi)

अगर लंबे समय तक बीमार रहने के कारण या किसी बीमारी के वजह से खाने की इच्छा नहीं होती तो कपास का घरेलू उपाय बहुत काम का साबित होता है। 2-4 ग्राम कपास फूल के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से जठराग्नि यानि खाने की इच्छा बढ़ती है।

पाइल्स (बवासीर)  में फायदेमंद कपास (Kapas Treats Piles in Hindi)

अगर ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने के आदि है तो पाइल्स के बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। उसमें  कपास का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। कपास पत्ते का रस और नींबू का रस  दोनों को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करने से अर्श (बवासीर) में लाभ होता है।

और पढ़े: पाइल्स में अस्थिसंहार के फायदे

मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभकारी कपास (Kapas  Benefits in Dysuria in Hindi)

मूत्र संबंधी बीमारी में बहुत तरह की समस्याएं आती हैं, जैसे- मूत्र करते वक्त दर्द या जलन होना, मूत्र रुक-रुक कर आना, मूत्र कम होना आदि। कपास इस बीमारी में बहुत ही लाभकारी साबित होता है।

-कार्पास, वासा, पाषाण भेद, बला तथा गवेधुक आदि के जड़  का काढ़ा बनाकर, 10-20 मिली की मात्रा में सेवन करने से अश्मरीजन्य मूत्रकृच्छ्र (मूत्र संबंधी समस्या) में लाभ होता है।

-1-2 ग्राम कपास फूल एवं पत्ते के चूर्ण का सेवन करने से मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है।

5 ग्राम कपास जड़ का काढ़ा बनाकर पिलाने से मूत्र में जलन तथा वेदना दूर होती है।

और पढ़ें: मूत्र संबंधी रोग में सफेद मूसली के फायदे

लिकोरिया या प्रदर से दिलाये राहत कपास (Kapas Beneficial to Leucorrhoea in Hindi)

महिलाओं के आम बीमारियों में से योनि से सफेद पानी निकलना एक बीमारी है। कपास इस बीमारी से राहत दिलाने में मदद करती है। 1-2 ग्राम कपास के जड़ के काढ़े को चावल के धोवन के साथ पीने से पाण्डु (खून की कमी) तथा प्रदर में लाभ होता है।

गुह्य रोगों में लाभकारी कपास (Kapas to Treat Syphilis in Hindi)

गुह्य रोग यौन रोग होता है। सेक्स संबंध स्थापित करने के दौरान इस रोग के होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। कार्पास (बिनौला) से सिद्ध तेल को लगाने से गुह्य रोगों में लाभ होता है।

और पढ़ेंयौन रोग में प्याज के फायदे

अनार्तव में फायदेमंद कपास (Kapas Beneficial in Ammenorrhea in Hindi)

जब किसी महिला को मासिक धर्म तीन महीने से ज्यादा महीनों तक नहीं हो रहा है तो इसको अनार्तव कहते हैं। पीरियड तीन बार न होने की वजह ये सारे हो सकते हैं, जैसे- गर्भवती, मेनोपॉज , बर्थ कंट्रोल पिल्स का इस्तेमाल, दवा का साइड इफेक्ट, प्यूबर्टी या तनाव। इस समस्या से निजात पाने में कपास कुछ हद तक मदद कर सकती है। 1-2 ग्राम कपास फूल के चूर्ण का सेवन करने से अनार्तव तथा कष्टार्तव आदि आर्तव रोगों में लाभ होता है।

स्तनों का आकार बढ़ाये कपास (Kapas Benefits to Increase Breast Size in Hindi)

कपास का औषधीय गुण स्तनों का आकार बढ़ाने में मदद करती है।

-1-2 ग्राम कपास के बीज के चूर्ण में दूध एवं चीनी मिलाकर, सेवन करने से स्तन्य की वृद्धि होती है।

-1-2 ग्राम कपास जड़ की छाल के चूर्ण में इक्षु जड़ का रस तथा मधु मिलाकर पीने से स्तन्य या स्तन (दुग्ध) की वृद्धि होती है।

-कपास की मींगी को जल के साथ पीसकर, चावलों के साथ मिलाकर खीर बनाकर खाने से स्त्रियों में स्तन्य की वृद्धि होती है।

योनिशूल से दिलाये राहत कपास (Kapas to Treats Vaginodynia in Hindi)

अगर किसी बीमारी के कारण वैजाइना यानि योनि में दर्द की समस्या है तो कपास का इस तरह से इस्तेमाल करने पर जल्दी आराम मिलता है।

कपास के पेस्ट से बने घी को योनि में लेप करने से अथवा कार्पासास्थि चूर्ण से योनि का मसाज करने से योनि का दर्द कम होता है।

अण्डकोष सूजन में फायदेमंद कपास (Kapas Beneficial in Testicle Inflammation in Hindi)

अंडकोष या टेस्टिकल में सूजन होने पर कपास से ऐसे करना चाहिए उपचार-

-कपास की मीगीं और सोंठ को जल के साथ पीसकर अण्डकोष या टेस्टिकल में लेप करने से अण्डकोष का सूजन कम होता है।

-कपास की गुठली तथा कुलथी के काढ़े में तिल तेल मिलाकर, पकाकर, छानकर सुरक्षित रख लें। इस तेल की मालिश करने से वात की बीमारी कम होती है।

-कपास पत्ते तथा बीजों को पीसकर जोड़ों में लेप करने से जोड़ो का दर्द कम होता है।

और पढ़ें: तिल के औषधीय गुण

गठिया के दर्द से दिलाये राहत कपास (Kapas Beneficial in Gout in Hindi)

अक्सर उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द होने की परेशानी शुरू हो जाती है लेकिन कपास का इस्तेमाल करने से इससे आराम मिलता है।

कपास पत्ते को पीसकर संधियों में लगाने से दर्द और सूजन दोनों कम होता है।

-कपास के पत्तों में तेल चुपड़कर हल्का गर्म करके जोड़ों में बांधने से जोड़ों की वेदना कम होती है।

-कपास की मींगी के तेल की मालिश करने से गठिया में लाभ होता है।

और पढ़े: जोड़ों के दर्द में अजमोदादि चूर्ण के फायदे

कुष्ठ में फायदेमंद कपास (Kapas to Treat Leprosy in Hindi)

कपास का औषधीय गुण कुष्ट के कष्ट से आराम दिलाने में  बहुत मदद करती है।

कपास फूल के पेस्ट को लगाने से अथवा कपास पञ्चाङ्ग रस में पकाए हुए तेल को लगाने से कपाल कुष्ठ में लाभ होता है।

लिम्फ नॉड में सूजन से दिलाये राहत कपास (Benefits of Kapas for Lymphadenitis in Hindi)

कपास का इस तरह से इस्तेमाल करने पर लिम्फ नॉड में सूजन होने पर लाभ होता है। वनकपास मूल तथा चावल को पीसकर, पुपुलिका (पूड़ी) बनाकर सेवन करने से अपची (गले की गांठ) में लाभ होता है।

आग से जलने पर दिलाये राहत कपास (Benefits of Kapas to Get Relief from Burn in Hindi)

रसोईघर में काम करते वक्त किसी न किसी वजह से हाथ जलना आम बात होती है, उस दौरान कपास का घरेलू उपाय बहुत ही लाभकारी होता है।

कपास फूल के चूर्ण तथा बीज तेल को मिलाकर अग्निदग्ध (आग से जलने), तप्तद्रवदग्ध (गर्म द्रव पदार्थ से जलने) तथा पामा या खुजली में लगाने से लाभ होता है।

पानात्यय के करे इलाज कपास (Kapas help to treat Excessive alcoholism in hindi)

कपास, नागबला या सुवर्चला को पीसकर कल्क बना लें 1-2 ग्राम कल्क को पानी में घोलकर पीने से पानात्यय में लाभ होता है।

उन्माद के प्रकोप को करे कम कपास (Kapas to Fight Insanity in Hindi)

उन्माद के प्रकोप को कम करने में कपास इस तरह से काम करती है-

-कपास मज्जा, गुग्गुलु तथा गंधक से बने वटी का धूपन करने से उन्माद या पागलपन से राहत मिलने में फायदा पहुँचता है।

-5 ग्राम कपास के फूल को जल के साथ पीसकर, उसका शर्बत बनाकर पिलाने से मनोविभम (विक्षिप्तता) में लाभ होता है तथा मन प्रसन्न होता है।

और पढ़ें: गुग्गुल के फायदे

विष के प्रभाव कम करने में  फायदेमंद कपास (Kapas for Poison in Hindi)

किसी भी कीट-पतंग, सांप, बिच्छू के विष के असर को कम करने में कपास का औषधीय गुण काम करती है।

-कपास फल को पीसकर, उसमें घी मिलाकर बिच्छू के कटे हुए जगह पर लेप करने से दंशजन्य दाह एवं वेदना कम होती है।

-500 मिग्रा से 1 ग्राम कपास की मींगी को दूध के साथ पीसकर पिलाने से समस्त प्रकार के विषों का प्रभाव कम होता है।

कपास का उपयोगी भाग (Useful Parts of Kapas)

आयुर्वेद में कपास के जड़, जड़ की त्वचा, तने की छाल, पत्ता, फूल तथा बीज का प्रयोग औषधि के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है।

कपास का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? (How to Use Kapas in Hindi?)

बीमारी के लिए कपास के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए कपास का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

चिकित्सक के परामर्श के अनुसार-

– 20-50 मिली कपास का काढ़ा

–  3-6 ग्राम चूर्ण, तथा

-10-25 मिली तेल का सेवन कर सकते हैं।

कपास कहां पाई और उगाई जाती है? (Where is Kapas Found or Grown in Hindi?)

विश्व में यह मिस्र, अमेरिका तथा अन्य उष्ण प्रदेशों में भी पाया जाता है। भारतवर्ष के अनेक भागों मुख्यत गुजरात, महाराष्ट्र, पं. बंगाल, उत्तर-प्रदेश, आसाम एवं तमिलनाडू में बहुलता से इसकी कृषि की जाती है। प्रतिवर्ष प्राय: वर्षा ऋतु के शुरू होते ही खेतों में इसके बीज बोए जाते हैं, तथा कार्तिक से चैत माह तक रूई को संग्रह कर पौधों को काट दिया जाता है या वे पौधे स्वयं ही सूख जाते हैं। 

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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