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Piles treatment : बवासीर पाइल्स में बहुत उपयोगी हैं यह घरेलू नुस्खे

  • नवम्बर 12,2018
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बवासीर क्या है? (What is Piles)

बवासीर एक ऐसी बीमारी है जिसमें गुदा (Anus) के अंदर और बाहर तथा मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते हैं। मस्से कभी अन्दर रहते हैं तो कभी बाहर आ जाते हैं।  करीब 60 फीसदी लोगों को उम्र को किसी न किसी पड़ाव में बवासीर की समस्या होती है। सही समय पर बवासीर का इलाज (Piles Treatment) कराना बेहद ज़रूरी होता है, नहीं तो आगे चलकर तकलीफ काफी बढ़ जाती है। यह एक अनुवांशिक समस्या भी है। यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो तो इससे दूसरे व्यक्ति को होने की आशंका रहती है।

 

Piles Treatment in Hindi

 

 

बवासीर को Piles या Hemmorhoids भी कहा जाता है। यह बेहद तकलीफदेह होता है। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह बीमारी बड़ी बन जाती है। बहुत पुराना होने पर यह भगन्दर का रूप धारण कर लेता है जिसे Fistula भी कहते हैं। इसमें असहाय जलन एवं पीड़ा होती है।

 

बवासीर कितनी तरह का होती है? (Types of  Piles)

बवासीर दो प्रकार की होती है। आमतौर पर इसे खूनी और बादी बवासीर कहते है।

 

खूनी बवासीर

खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है। इसमें मलत्याग करते समय खून आता है। इसमें गुदा के अन्दर मस्से हो जाते है। मलत्याग के समय खून मल में लग कर या टपक कर या पिचकारी के रूप में आने लगता है।

मलत्याग के बाद यह मस्से अपने से ही अन्दर चले जाते है लेकिन गंभीर अवस्था में यह हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाते।

 

बादी बवासीर

बादी बवासीर में पेट की समस्या अधिक रहती है। कब्ज एवं गैस की समस्या बनी ही रहती है। इसके मस्सों में रक्तस्राव नहीं होता तथा यह मस्से बाहर आसानी से देखें जा सकते है।

इनमें बार-बार खुजली एवं जलन होती है। शुरुआती अवस्था में यह तकलीफ नहीं देते लेकिन लगातार अस्वस्थ खान-पान और कब्ज रहने से यह फूल जाते हैं। इनमें खून जमा हो जाता है और सूजन हो जाती है।

इनमें असहनीय पीड़ा होती है और रोगी दर्द से छटपटाने लगता है। मलत्याग करते समय और उसके बाद भी रोगी को दर्द बना रहता है। वह सुगमता से चल-फिर नहीं पाता और बैठने में भी तकलीफ महसूस करता है।

 

बवासीर एवं भगन्दर में अन्तर (Difference Between Piles and Fistula)

बवासीर में गुदा एवं मलाशय के निचले भाग की रक्तवाहिनियों में सूजन आ जाती है। ऐसा लम्बे समय तक कब्ज रहना और शौच में अत्यधिक समय तक बैठे रहने से हो जाता है।

इसके अलावा मोटापा या गर्भवती महिलाओं में भी यह होने का खतरा रहता है। इसमें गुदा या मलाशय में मस्से बन जाते हैं जिनके फूटने पर इनसे खून निकलता है और दर्द होता है।

भगन्दर में मस्से नहीं होते हैं। भगन्दर रोग में एक घावयुक्त नली बन जाती है जो internal opening गुदा नलिका तथा external opening गुदा के बाहर की त्वचा में होती है।

भगन्दर उन लोगों में होता है जिनके मलद्वार के पास कोई फोड़ा हो जाता है और उसमें कई मुंह बन जाते है। ऐसे में यदि रोगी व्यक्ति उससे छेड़छाड़ करता है तो भगन्दर हो जाता है।

इसमें से खून और मवाद लगातार निकलता रहता है। शुरुआती अवस्था में इसमें मवाद और खून की मात्रा कम होती है। इसलिए इससे रोगी के वस्त्रों में केवल दाग मात्र लगता है लेकिन धीरे-धीरे इसमें रिसाव बढ़ता जाता है और रोगी को खुजली, बेचैनी और दर्द रहता है।

 

बवासीर क्यों होता है? (Causes of Piles Disease)

आयुर्वेद में बवासीर को ‘अर्श’ कहा गया है और इसे जीवन को खतरा होने की बात बताई गई है। यह वात, पित्त एवं कफ तीनों दोषों के दूषित होने से होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग कहा गया है।

इसमें गुदवलियों में मांसाकुर उत्पन्न हो जाते हैं जिनमें कई बार रक्तस्राव होता है या कई बार नहीं होता है। ये पीड़ायुक्त होते है। इसमें दो प्रकार के अर्श बताए गए है, शुष्क अर्श एवं आर्द्र अर्श।

जिस बवासीर में वात या कफ या वातकफ की प्रधानता होती है वे अर्श शुष्क होते हैं। इसलिए मांसांकुरों में से स्राव नहीं होता है। जिस अर्श में रक्त या पित्त या रक्तपित्त की प्रधानता होती है वे आर्द्र अर्श होते है। इनमें रक्तस्राव होता है। शुष्क अर्श में पीड़ा अधिक होती है।

कुछ लोगों में यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी या यूं कहें कि अनुवांशिक तौर पर पाया जाता है लेकिन कुछ में अन्य कारणों से भी होता है, जो ये हैंः-

  • कुछ व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटे खड़े रहना पड़ता है जैसे- बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस इत्यादि। जिन्हें भारी वजन उठाना पड़ता है, उनमें इस बीमारी से पीड़ित होने की अधिक संभावना रहती है।
  • कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा एवं कठोर होता है जिसकी वजह से व्यक्ति को मलत्याग करने में कठिनाई होती है। काफी देर तक उकड़ू बैठे रहना पड़ता है। इस कारण से वहां की रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है और वह फूलकर लटक जाती है, जिन्हें हम मस्से कहते हैं।
  • अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना।
  • शौच जाने पर पेट ठीक से साफ न होना।
  • फाइबर युक्त भोजन का सेवन न करना।
  • महिलाओं में प्रसव के दौरान गुदा क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहता है।
  • आलस्य या शारीरिक गतिविधि कम करना।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन।
  • अवसाद

 

बवासीर होने के लक्षण (Symptoms of Piles Problem)

कई बार बवासीर यदि गंभीर अवस्था में न हो तो यह 4-5 दिनों में अपने आप की ठीक हो जाता है, लेकिन रोग बढ़ने पर यह लक्षण देखे जा सकते हैंः-

  • गुदा के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होती है। इसमें दर्द रहता है तथा खून भी आ सकता है।
  • शौच के बाद भी पेट साफ न हेने का आभास होना।
  • शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना।
  • शौच के वक्त अत्यधिक पीड़ा होना।
  • गुदा के आस-पास खुजली रहना एवं लालीपन व सूजन रहना।
  • शौच के वक्त म्यूकस का आना।
  • बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना लेकिन त्यागते समय मल न निकलना।

 

बवासीर के कारण होने वाली बीमारियां (Diseases Caused by Piles)

बवासीर में अत्यधिक खून बहने के कारण शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोरी महसूस करने लगता है, समय पर इलाज न करने से यह समस्या रोग का रूप धारण कर लेती है। इसी तरह लम्बे समय तक इसके बने रहने से और इलाज की कमी के कारण यह कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) भी बन सकता है।

 

बवासीर के इलाज के लिए घरेलु नुस्खे (Home Remedy for Piles Treatment)

आयुर्वेदीय चिकित्सा तीनों दोषों को ठीक बनाए रखने के सिद्धान्त पर काम करती है। इसलिए घरेलू उपचार तथा आयुर्वेदीय चिकित्सा रोगों को शान्त करने में सफल सिद्ध होते हैं।

यह बढ़े हुए दोषों को कम कर उन्हें समान अवस्था में लाता है और विषाक्त तत्वों को शरीर से बाहर निकालता है। जब तीनों दोष संतुलित अवस्था में आ जाते हैं तब रोग उत्पन्न होने का प्रश्न ही नहीं उठता और बीमारी ठीक हो जाती है।

आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति इस प्रकार बताई गई है, जैसे- वातज, पित्तज, कफज और द्वन्दज प्रकृति। यदि वातज प्रकृति का व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में वातवर्धक आहार का सेवन करता है और अपनी जीवनशैली में वात को दूषित करने वाला काम करता है तो वह वातज रोगों से पीड़ित रहता है। ऐसा ही पित्तज एवं कफज प्रकृति में भी होता है। इसलिए दोषों को समान अवस्था में बनाएं रखने वाले आहार-विहार का पालन करना चाहिए। आप बवासीर रोग का उपचार इन उपायों द्वारा कर सकते हैंः-

 

एलोवेरा के प्रयोग से बवासीर का इलाज (Use Aloe vera for Piles Treatment in Hindi)

एलोवेरा बवासीर के लिए प्रकृति की देन है। इसके शोथरोधक और चिकित्सकीय गुणों से बवासीर की जलन कम हो जाती है और कब्ज नहीं होती। यह आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार के बवासीर के लिए लाभदायक है।

गुदा के बाहर हुए मस्सों में एलोवेरा जेल लगाए। यह जलन और खुजली को शांत करता है। एलोवेरा के 200-250 ग्राम गूदे को खाएं। इससे कब्ज नहीं होगी और मलत्याग आसानी से होगा।

 

बवासीर में फायदेमंद सेब का सिरका (Use Apple vinegar for Curing Piles in Hindi)

सेब का सिरका अपने कषाय गुणों के कारण रक्तवाहिनियों को सिकोड़ने में मदद करता है। खूनी बवासीर में एक गिलास पानी में सेब के सिरके का एक चम्मच डालकर दिन में दो बार पिएं। बादी बवासीर में सेब के सिरके में रुई भिगाकर गुदा में रखें। इससे जलन और खुजली से राहत मिलेगी।

 

बवासीर के उपचार के लिए करें जैतून के तेल का इस्तेमाल (Olive Oils : Home Remedy for Piles Treatment in Hindi)

जैतून के तेल में सूजन ठीक करने वाले गुण होते है। यह रक्तवाहिकाओं में आई सूजन को कम करता है। जैतून के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाएं।

 

बवासीर में लाभदायक है बादाम का तेल (Badam oil : Home Remedy for Piles Treatment in Hindi)

शुद्ध बादाम के तेल को रुई के टुकड़े में डुबोएं तथा बादी बवासीर में मस्सों पर लगाएं। यह सूजन और जलन को कम करता है।

 

नारियल के उपयोग से बवासीर में लाभ (Coconut : Home Remedy for Piles Treatment in Hindi)

नारियल की जटाओं को जलाकर राख या भस्म बना लें। इसे ताजे मट्ठे में मिलाकर सुबह खाली पेट नियमित रूप से पिएं।

 

अंजीर खाने से बवासीर रोग में लाभ (Ajneer : Home Remedy to Cure Piles in Hindi)

तीन अंजीर एक गिलास पानी में भिगों दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन कर इस पानी को भी पिएं।

 

बवासीर में करें जीरे का प्रयोग (Jeera : Home Remedy for Piles Treatment in Hindi)

बादी बवासीर में दर्द और जलन होने पर जीरे के दानों को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें और इसे मस्सों वाली जगह पर लगाएं।

खूनी बवासीर में जीरे को भूनकर मिश्री के साथ पीस लें और इसे दिन में 2-3 बार 1-2 ग्राम की मात्रा में मट्ठे के साथ लें।

 

नींबू के इस्तेमाल से बवासीर का इलाज (Use of Lemon in Piles Treatment in Hindi)

नींबू के रस में अदरक और शहद मिलाकर इसका सेवन करें।

 

मट्ठा और अजवायन के सेवन से बवासीर का उपचार (Whey and Oregano : Home Remedy for  Treatment of Haemorrhoids in Hindi)

मट्ठा बवासीर रोग में अमृत के समान है। एक गिलास छाछ में एक चौथाई अजवायन पाउडर और एक चम्मच ग्राम काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने में इसका सेवन करें।

 

बवासीर रोग को ठीक करता है पपीता का सेवन (Benefits of Papaya in Piles Disease in Hindi)

रात के भोजन में पपीता खाएं, इससे कब्ज नहीं होगी। मल त्याने के समय होने वाली पीड़ा नहीं होगी।

 

बवासीर रोग के इलाज के लिए खाएं पका केला (Banana Benefits in Piles Treatment in Hindi)

पके केलों को उबालें और उनका दिन में दो बार सेवन करें। यह Laxaine का काम करता है।

 

गर्म पानी का प्रयोग दिलाता है बवासीर के दर्द में तुरंत राहत (Uses of Hot Water in Piles Treatment in Hindi)

Sitz bath बाथ टब में गर्म पानी डालकर उसमें 10-15 मिनट तक बैठें।

 

बवासीर के बारे में प्रचलित भ्रांतियां (Misconceptions About Piles of Haemorrhoids)

बवासीर को लेकर समाज में कई तरह की भ्रान्तियां देखी जाती है, जैसे कि बवासीर का इलाज केवल सर्जरी ही है, लेकिन यह सच नहीं है। समय पर किए गए उपचार एवं बेहतर जीवनशैली से इस रोग को ठीक किया जा सकता है।

वैसे तो बवासीर एक ऐसी समस्या है जो लगभग 60 प्रतिशत लोगों को अपने जीवन के किसी न किसी चरण में हो जाती है। कई बार बिना लक्षण दिखाए ही ठीक भी हो जाती है। जब यह लम्बे समय तक बनी रहती है एवं इसमें अत्यधिक दर्द एवं रक्तस्राव होने लगता है तब उपचार की जरूरत होती है।

आयुर्वेदीय उपचार प्राकृतिक चिकित्सा है इसलिए यह आवश्यक है कि उपचार के साथ स्वस्थ आहार एवं जीवनशैली का भी पालन किया जाए। इससे रोग ठीक हो जाता है।

 

सर्जरी के बाद बवासीर दोबारा होने की संभावना (Piles After Surgery)

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में सर्जरी ही इसका एकमात्र समाधान है और सर्जरी के बाद भी यह रोग दुबारा हो जाता है। इसलिए घरेलु उपचार और बेहतर जीवनशैली अपनाना चाहिए। इससे बवासीर दोबारा की संभावना बहुत कम हो जाती है।

 

बवासीर के लिए जीवनशैली या खान-पान में बदलाव (Diet and Lifestyle in Piles of Haemorrhoids)

अधिक फाइबरयुक्त आहार का सेवन करें जैसे- रेशेदार फल एवं सब्जियाँ।

  • नियमित रूप से व्यायाम एवं प्राणायाम करें।
  • रोजाना 7-8 गिलास पानी पिएं।
  • भोजन में नियमित रूप से छाछ का सेवन करें।

 

बवासीर में इन चीजों से करें परहेज (What to Not Eat in Piles of Haemorrhoids)

बवासीर में इन चीजों का परहेज करना बहुत जरूरी हैः-

  • जंक-फूड
  • तला-भुना एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
  • अधिक देर तक एक ही जगह पर बैठें न रहें।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्श...

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