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Dhatura: धतूरा के हैं अनेक अनसुने फायदे- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

  • March 15,2019
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धतूरा का परिचय (Introduction of Dhatura)

वैसे तो धतूरे का इस्तेमाल सबसे ज्यादा सावन के महीने में पूजा में चढ़ाने के लिए किया जाता है। ये माना जाता है कि भगवान शिव को चढ़ावे के रूप में धतूरे का फल पसंद है। लेकिन शायद आपको पता नहीं कि धतूरे के फूल, पत्ते, फल, बीज,जड़ का प्रयोग औषधी के लिए आयुर्वेद में किया जाता है।

लेकिन ध्यान देने की बात ये है कि धतूरा को यदि ज्यादा मात्रा में लिया जाय तो वह विष की तरह काम करता है। धतूरा को औषधि के  रुप में सिरदर्द, कान दर्द, आँख दर्द से राहत पाने से लेकर काम शक्ति बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। चलिये जानते हैं कि धतूरा किन-किन बीमारियों के लिए औषधि के रुप में काम करता है और कब ये विष की तरह काम करता है।

धतूरा क्या होता है? (What is Dhatura in Hindi?)

चरक-संहिता में कनक नाम से तथा सुश्रुत-संहिता में उन्मत्त नाम से धतूरा का उल्लेख मिलता है। धतूरा शिव का प्रिय होता है। इसके फल और पुष्प शिव पर चढ़ाये जाते हैं। रस-ग्रन्थों में इसकी गणना विष वर्ग में की गयी है तथा रस चिकित्सा में धतूरा बीज अनेक योगों में पड़ता है। कृष्ण धतूरा के पौधे कहीं-कहीं पाए जाते हैं। अन्य प्रजातियों की अपेक्षा यह अधिक वीर्यवान् होता है।  राजनिघण्टु में सफेद, लाल, नील तथा पीले रंग के पुष्पों के आधार पर धतूरे के पाँच प्रकारों का वर्णन किया है।

धतूरा नशीला, घाव के लिए लाभकारी, वात को कम करने वाला, कड़वा, मधुर, जूं-लीख को नष्ट करने वाला और ज्वर, कोढ़, व्रण, कफ, खुजली, कृमि तथा विषनाशक होता है। धतूरा कड़ुवा, रूखा, घावों को भरने वाला, दिमाग का असंतुलित भी कर सकता  है।

धतूरे का बीज शक्ति बढ़ाने वाला, बुखार में लाभदायक, कृमिनाशक तथा नशीला होता है।

धतूरे के पत्ते एवं बीज वेदना को कम करने वाले, खांसी और सूजन को कम करने वाले तथा बुखार के लक्षणों से  राहत दिलाने में फायदेमंद होते हैं।

अन्य भाषाओं में धतूरा के नाम (Name of Dhatura in Different Languages)

धतूरा का वानस्पतिक नाम Datura metel Linn. (डटूरा मीटल) Syn-Datura alba Rumph. ex Nees,  Datura fastuosa Linn है। धतुरा Solanaceae (सोलैनेसी) कुल का है। धतुरा को अंग्रेजी में Thorn apple (थॉर्न एप्पल) कहते हैं। भारत के विभिन्न प्रांतों में धतूरा भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे-

Sanskrit-धत्तूर, धूत्त, धुत्तुर, उन्मत्त, कनकाह्वय, देवता, कितव, तूरी, महामोही, शिवप्रिय, मातुल, मदन, धुस्तुर, मातुलपुत्रक, कनक;

Hindi-धतूर,धतूरा;

Odia-धोतुरा (Dhatura);

Kannada-बिलियूम्मटा (Biliyummatta), मदुगुणिके (Maddugunike);

Gujrati-केलोधतूरा(Kelodhatura), धंतूरो (Dhanturo);

Telegu-तेला उम्मेत (Tella ummetha), धत्तुरम् (Dhuturam);

Tamil-उम्मतई (Ummattai), करुमट्टाई (Karumttai);

Bengali-धतूरा (Dhatura), धूत्तूरो (Dhuturo);

Nepali-कालो धतुरो (Kalo dhaturo);

Punjabi-धत्तूर (Dhatur), धत्तूरा (Dhattura);

Marathi-धोत्रा (Dhotra);

Malayalam-केरीयमट्टा (Keriymatta), उन्मत्त (Unmatta), उम्मम (Ummam) ।

English-डॉउनी धतूरा (Downy datura), डेविल्स् ट्रम्पेट (Devil’s trumpet);

Arbi-तुख्मे धतूरा (Thukhme dhatura);

Persian-तातुराहे-सफेद (Taturahe-safed)

धतूरा के फायदे (Dhatura Uses and Benefits in Hindi)

धतूरा जहरीला फल होता है लेकिन इसको सही मात्रा में सेवन किया जाय तो कई बीमारियों के लिए ये औषधी के रूप में काम करता है। चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-

धतूरा सिर दर्द में फायदेमंद (Benefits of Dhatura to Get Rid from Headache in Hindi)

धतूरा के 2-3 बीजों को रोज निगलने से पुरानी मस्तक की पीड़ा दूर हो जाती है।

धतूरा सिर के जूंओं से दिलाये छुटकारा (Dhatura to Get Rid from Headlice in Hindi)

बच्चे ही सबसे ज्यादा जूंओं से परेशान रहते हैं। उनके बालों में धतूरे का प्रयोग इस तरह से करने पर जूएं भी निकल जाते हैं और बाल भी काले और घने हो जाते हैं। सरसों का तेल 400 मिली, धतूरे के पत्तों का रस 1.6 लीटर तथा धतूरे के पत्तों का काढ़ा 1.6 किग्रा, इन सबको धीमी आंच पर पकाकर जब तेल मात्र शेष रह जाय तो छानकर बोतल में भरकर रख लें। इस तेल को बालों में लगाने से सिर की जुंए नष्ट हो जाती हैं।

आँखों के दर्द से दिलाये राहत धतूरा (Datura for Eye Pain in Hindi)

अक्सर देर तक काम करने के बाद या पढ़ने पर आँखों में  दर्द होता है तब धतूरे का इस्तेमाल इस तरह से करने पर दर्द से आराम मिलता है। धतूरा के पत्ते के रस को आंखों के बाहर चारों तरफ लगाने से आंख का दर्द कम होता है।

पीनस के लिए लाभकारी धतूरा (Dhatura Seeds Beneficial in Rhinitis in Hindi)

सर्दी-खांसी होने पर संक्रमण के कारण नाक के म्यूकस मेमब्रेन में सूजन होता है, इसको पीनस कहते हैं। धतूरे का घरेलू उपाय इससे राहत दिलाने में  लाभकारी होता है।

शुद्ध किए हुए कृष्ण धतूरे जे बीज को कूठ के काढ़ा में डालने के बाद 30-30 मिग्रा की गोलियाँ बना कर आठ दिन तक सेवन करें, यह पीनस के परेशानी से राहत दिलाने में मदद करता है। 

कान के दर्द से राहत दिलाये धतूरा (Dhatura Benefits in Ear Pain in Hindi)

अगर सर्दी-खांसी या  किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के तौर पर कान में दर्द होता है तो बांस से इस तरह से इलाज करने पर आराम मिलता है।

धत्तूर के पत्ते के रस को गाढ़ा करके, कान पर लेप करने से सूजन कम होती है।

कान से अगर मवाद निकलता हो तो 8 भाग सरसों का तेल, 1 भाग गंधक तथा 32 भाग धतूरे के पत्ते का रस मिलाकर विधिपूर्वक तेल बना लें।   इस तेल की 1 बूंद कान में सुबह-शाम डालनी चाहिए।

-50-50 ग्राम हल्दी, गंधक तथा 1.6 किग्रा धत्तूर पत्ते के रस से 400 मिली सरसों के तेल को पकाकर छानकर रख लें। इस तेल को कान में डालने से कान के नाड़ी का घाव जल्दी ठीक हो जाता है।

सांस संबंधी में लाभकारी धतूरा (Dhatura to Treat Dysponea in Hindi)

अगर किसी कारणवश सांस लेने में  समस्या हो रही है तो तुरन्त आराम पाने के लिए धतूरा का सेवन ऐसे करने से लाभ मिलता है।धतूरा के फल, शाखा तथा पत्तों को कूटकर और सुखाकर उसके चूर्ण का धूम्रपान करने से सांस संबंधी रोग में लाभ होता है।

अस्थमा में फायेमंद धतूरा (Dhatura Tree Benefits in Asthma in Hindi)

अस्थमा या दमे के रोग से परेशान है तो धतूरा का इस तरह से उपयोग करने से थोड़ा आराम मिल सकता है। धतूरा, तम्बाकू, अपामार्ग और जवासा इन चारों चीजों को समान भाग लेकर चूर्ण बना ले। इसमें से 2 चुटकी चिलम में रखकर पीने से दमे का दौरा बंद हो जाता है।

हैजा से दिलाये राहत धतूरा (Dhatura Flower to Treat Cholera in Hindi)

अगर किसी कारणवश हैजा हो गया है तो धतूरे का सेवन करने से जल्दी आराम मिलता है। धतूरे के फूल के केसर को बताशे में रखकर सेवन करने से विसूचिका या हैजा में लाभ होता है।

स्तन या ब्रेस्ट के सूजन को करे कम धतूरा (Datura leaves Beneficial in Breast Inflammation in Hindi)

अगर किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण ब्रेस्ट में सूजन हुआ है तो धतूरे का उपयोग लाभकारी सिद्ध होता है। धतूरा के पत्तों को गर्म कर स्तनों में बांधने से स्तन के सूजन में लाभ होता है।

प्रीमैच्युर इजाक्युलेशन में फायदेमंद धतूरा (Datura Seeds to Treat Premature Ejaculation in Hindi)

आजकल तनाव भरे जिंदगी में पुरुषों  को प्रीमैच्युर इजाक्युलेशन की समस्या होती है, ऐसे में धतूरा से बना घरेलू इलाज बहुत ही लाभकारी होता है।

-धतूरा के बीज, अकरकरा और लौंग इन तीनों चीजों की गोलियां बनाकर खिलाने से कामशक्ति बढ़ जाती है।

-धतूरा के बीज के तेल को (पुरुषों) पैरों के तलुवे पर मालिश करने के बाद, सेक्स करने से प्रीमैच्युर इजाक्युलेशन की समस्या कम होती है।

-धतूरा के 1 फल को बीज सहित लेकर, पीसकर, 1.5 ली दूध में डालकर दही जमा दें। अगले दिन दही को बिलोकर (मथकर) घी निकाल लें। इस घी की 125 मिग्रा की मात्रा को पान में रखकर खाने से वीर्य संबंधी समस्या ठीक होने के साथ-साथ कामेन्द्रिय पर मलने से उसकी शिथिलता दूर हो जाती है।

गर्भपात के खतरे को करे कम धतूरा ( Dhatura to Treat Abortion in Hindi)

अगर बार-बार गर्भपात होने की समस्या हो रही है तो धतूरे का प्रयोग गर्भपात को रोकने  में लाभकारी होता है। धतूरा की जड़ को 3-4 इंच के टुकड़ों में काटकर एक ऊनी धागे में बाँधकर कमर में पहनने से गर्भस्राव या गर्भपात नहीं होता। जबतक गर्भस्राव की आशंका हो तब तक इसे कमर में धारण किए रहें।

गठिया में फायदेमंद धतूरा (Datura Leaves to Get Relief from Gout in Hindi)

अक्सर उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द होने की परेशानी शुरू हो जाती है लेकिन धतूरे का घरेलू उपचार करने से आराम मिलता है।

-धतूरा पञ्चाङ्ग का रस निकालकर उसको तिल के तेल में पकाकर, (जब तेल शेष रह जाय) छानकर रख लें। इस तेल की मालिश करके ऊपर धतूरा के पत्ते बांध देने से गठिया का दर्द मिट जाता है। इस तेल का लेप करने से सूखी खुजली में भी लाभ होता है।

-धतूरे के पत्ते को पीसकर संधियों पर लेप करने से दर्द कम होता है।

हाथीपांव को दर्द करे कम धतूरा (Datura Seeds Beneficial in Filaria in Hindi)

धतूरा का औषधिय गुण हाथीपांव (पैर सूज कर हाथी के पैर जैसा हो जाता है) के परेशानी को कम करने में  सहायक होता है।

-धतूरे के बीजों का शीतल जल के साथ निश्चित क्रम में सेवन करने से कफज-श्लीपद या हाथीपांव का शमन होता है। इसका प्रयोग चिकित्सक की देखरेख में करें।

-समान मात्रा में धतूरे के पत्ते, अरंडी की जड़, निर्गुण्डी पत्ता, पुनर्नवा, सहिजन की छाल तथा सरसों को पीसकर प्रभावित स्थान पर लेप करने से श्लीपद रोग या हाथीपांव में भी लाभ होता है।

नारू या गिनी कृमि रोग से दिलाये राहत धतूरा (Datura leaves help to cure Dracunculiasis in hindi)

संक्रमित जल का सेवन करने से ये कृमि शरीर के अंदर चला जाता है और कुछ दिनों के  बाद लार्वा के रुप में शरीर से बाहर निकलने  लगता है। नारू की बीमारी में इसके पत्तों से बनी पोटली बांधने से बहुत लाभ मिलता है।

अल्सर में फायदेमंद धतूरा (Datura leaves to Treat Ulcer in Hindi)

कभी-कभी अल्सर का घाव सूखने में बहुत देर लगता है या फिर सूखने पर पास ही दूसरा घाव निकल आता है, ऐसे में धतूरा का घरेलू इलाज बहुत ही फायदेमंद होता है। जिस व्रण या घाव पर मवाद या पीब जम जाता है, उसको गुनगुने पानी की धार से धो कर दिन में  3-4 बार धतूरा के पत्तों की पुल्टिस बांधनी चाहिए।

सूजन से दिलाये राहत धतूरा (Dhatura Beneficial in Inflammation in Hindi)

अगर किसी चोट के कारण या बीमारी के वजह से किसी अंग में हुए सूजन से परेशान है तो धतूरे के द्वारा किया गया घरेलू इलाज बहुत ही फायदेमंद होता है।

धतूरा के पिसे हुए पत्तों में शिलाजीत मिश्रित कर, लेप करने से अंडकोष (testicle), उदर या पेट, फुफ्फुस तथा जोड़ो के दर्द से राहत मिलती है।

बुखार के लक्षणों से दिलाये राहत धतूरा (Datura Seeds to Treat Fever in Hindi)

अगर मौसम के बदलने के साथ बुखार आता है तो धतूरे का इस तरह से सेवन करने में जल्दी आराम मिलता है। 

-125 मिग्रा धतूरा के बीजों की भस्म को सुबह शाम सेवन करने से विषमज्वर में लाभ होता है।

-65 मिग्रा धत्तूर बीज चूर्ण का सेवन करने से बुखार से राहत मिलती है।

-धतूरा के पत्ते, पान और काली मिर्च को बराबर गिनती में लेकर, पीसकर 65 मिग्रा की गोलियां बना लें।  दिन में दो बार एक-एक गोली का सेवन करने से ज्वर या बुखार में लाभ होता है। इसको सौंफ के अर्क के साथ लेने से प्रमेह या डायबिटीज में भी लाभ होता है।

-5 मिली धत्तूर पत्ते के रस को दही के साथ पिलाने से 1 दिन के अंतर से आने वाले ज्वर से छुटकारा मिलता है।

बिच्छु के काटने पर धतूरे का प्रयोग (Dhatura for Scorpion poison in Hindi)

बिच्छू के काटने पर उसके असर को कम करने में धतूरा मदद करता है। धतूरा के पत्तों को पीसकर, दंशस्थान पर लगाने से दर्द, दाह तथा सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

धतूरे का उपयोगी भाग (Useful Parts of Dhatura)

आयुर्वेद में धतूरा पञ्चाङ्ग, जड़, पत्ता, फूल एवं बीज का औषधि के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल  किया जाता है।

धतूरा का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? (How to Use Dhatura in Hindi?)

बीमारी के लिए धतूरे के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए धतूरे का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

धतूरा कैसे बनाया जाता है-

400 मिली, धतूरा के रस में चटनी की तरह पिसी हुई हल्दी 25 ग्राम और तिल का तेल 100 मिली लेकर मंद आंच पर पकाएं। तेल शेष रहने पर उबाल कर छान लें।

दर्पनाशक  :कपास के फूल और पत्ते का निर्यास देने से धतूरे के विष का असर कम हो जाता है।

धतूरा के सेवन के दुष्परिणाम (Side effects of Dhatura in hindi)

धतूरे के बीज विषाक्त होते हैं इनका सेवन करने से उन्मत्त्ता या पागल होने की नौबत आ सकती है। अत: सेवन से पहले इनका शोधन आवश्यक है। धतूरे के बीजों को पोटली में रखकर 1 पहर तक गाय के दूध में डालकर दोला यंत्र में घुमायें। फिर निकालकर गर्म जल से धो लें। इससे इनका शोधन हो जाता है। 

अधिक मात्रा में धतूरे का सेवन विष के समान होता है। यह अपनी खुश्की की वजह से शरीर को सुन्न कर देता है।  इसके सेवन से सिर में दर्द होता है तथा उन्माद और बेहोशी के कारण मनुष्य की जान भी जा सकती है। अत: इसका प्रयोग सावधानी से करना चाहिए।

नोट: धत्तूर का प्रयोग चिकित्सकीय परामर्शानुसार ही करना चाहिए। 

धतूरा कहां पाया और उगाया जाता है? (Where is Dhatura Found or Grown in Hindi?)

 धतूरा के पौधे समस्त भारत में पाए जाते हैं।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्श...

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