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भांग के फायदे, नुकसान और उपयोग (Bhaang Ke Fayde, Nukshan aur Upyog)

भांग (Bhaang) के बारे में आप जानते ही होंगे। कई लोग भांग का शर्बत पीते हैं। अनेक लोग भांग का उपयोग नशा करने के लिए करते हैं। सच यह है कि अधिकांश लोग भांग के बारे में केवल यही जानते हैं कि भांग का सेवन सिर्फ नशे के लिए होता है, लेकिन अगर आप भी यही सोचते हैं तो आपका सोचना सही नहीं है। भांग में कई सारे औषधीय गुण होते हैं, और भांग के फायदे कई रोगों में मिलते हैं। 

भांग के फायदे | Bhaang benefits
भांग के फायदे | Bhaang benefits

आयुर्वेद के अनुसार, भांग एक जड़ी-बूटी है, और भांग के गुण से एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों रोगों का उपचार किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि आप भांग का उपयोग कर कितनी बीमारियों का इलाज कर सकते हैं।

 

Contents

भांग क्या है? (What is Bhaang in Hindi?)

भांग के पौधे से जुड़ी ऐसी कई जानकारियां हैं, जिनके बारे में लोगों को पता नहीं है, जो ये हैंः-

  • भांग के पौधे (bhang tree) जब सूख जाते हैं तो इन्हीं सूखे हुए पत्तों को भांग कहा जाता है।
  • भांग दो तरह का होता है। इन्हें स्त्री और पुरुष जाति में विभाजित किया गया है। 
  • स्त्री जाति की भांग (bhang), पुरुष जाति के पौधे की तुलना में कुछ अधिक लंबे होते हैं। इसमें पत्ते अधिक संख्या में होते हैं। पत्तों का रंग गहरा होता हैं।
  • स्त्री जाति की भांग 5 से 6 सप्ताह में उपयोग करने लायक हो जाता है।
  • स्त्री जाति के पौधे के फूल, पुरुष जाति के पौधों की तुलना में अधिक नशीला (bhang ka nasha) होता है।
  • जून या जुलाई के महीनों में भांग के क्षुपों को इकट्ठा करके छोटे-छोटे टुकड़ों में काट जाता है। इसे ओस व धूप में बार-बार सुखाया जाता हैं।
  • स्त्री जाति के क्षुप की सूखी हुई रालदार फूल मंजरी को ही गांजा कहते हैं। इसका रंग मटमैला होता है। इसका स्वाद हरा और गन्ध मादक तथा कुछ विशिष्ट प्रकार की होती है।
  • गांजा के पौधे से लसदार राल के समान रस निकलकर जम जाता है। इसी को चरस कहते हैं।
  • ओस पड़ने के बाद सुबह चमड़े का कपड़ा पहनकर वृक्षों में रगड़ने से यह चरस कपड़े पर लग जाता है। इसी को चमड़े से अलग कर गोले या ढेले जैसा बना लिया जाता है।
  • हाथ और पैरों से पौधों (bhang tree) से पुष्पमञ्जरियों को रगड़ा जाता है। हाथ-पैरों में चिपके हुए भाग को खुरचकर जमा कर चरस जमा किया जाता है।

अन्य भाषाओं में भांग के नाम (Bhaang Called in Different Languages)

भांग का वानस्पतिक नाम कैनेबिस सैटाइवा  (Cannabis sativa Linn.) Syn-Cannabis indica Lam., है, और यह कैनेबिनेसी (Cannabinaceae) कुल से है। इसे और भी अनेक नामों से जाना जाता है, जो ये हैंः-

Name of Bhaang in other Languages:

  • Name of Bhaang in Hindi – भांग, भंग, बूटी
  • Name of Bhaang in Assamese – भांग (Bhang);
  • Name of Bhaang in Sanskrit – भङ्गा, गञ्जा, मातुलानी, मादिनी, विजया, जया;
  • Name of Bhaang in English (bhang in english) – अमेरिकन हेम्प (American hemp), हसीस (Hashish), मेरीजुआना (Marijuana), डेग्गा कैनोपी (Dagga canopy), इंडियन हेम्प (Indian hemp)
  • Name of Bhaang in Konkani – भांग (Bhang)
  • Name of Bhaang in Kannada – भंगी (Bhangi)  
  • Name of Bhaang in Gujarati – भांग (Bhang)
  • Name of Bhaang in Telugu (cannabis meaning in telugu) – गंजायि (Ganjayi), गंजाचेट्टु (Gangachettu)
  • Name of Bhaang in Tamil (weed meaning in tamil) – गन्जा (Ganja); बंगाली-सिद्धि (Sidhi)
  • Name of Bhaang in Nepali – भांग (Bhang)
  • Name of Bhaang in Punjabi – भांग (Bhang);
  • Name of Bhaang in Marathi – भांग (Bhang);  
  • Name of Bhaang in Malayalam – भांग (Bhang), चेरूकंचवा (Cherukanchava);
  • Name of Bhaang in Manipuri – गन्जा (Ganja)
  • Name of Bhaang in Arabic – इशीश (Ishish), बर्कुल ख्याल (Barkul khayal), हिनाब (Hinab), किनाब (Kinnab)
  • Name of Bhaang in Persian – नब (Nab), बंग (Bang)

भांग के फायदे (Bhaang Benefits and Uses in Hindi)

भांग के औषधीय प्रयोग का तरीका, प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

भांग के फायदे चेहरे की झाई में (Weed Leaf Benefits for Face Freckle in Hindi)

चेहरे की झाइयों की पेरशानी में भांग, स्थावर (विधारा अथवा देवदारु) की जड़ लें। इनके साथ शीशम को पीस लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे की झाइयां ठीक हो जाती हैं[Go to: Bhaang Benefits]

सिर दर्द में भांग के फायदे (Bhang Benefits in Relief from Headache in Hindi)

  • सिर के दर्द को ठीक करने के लिए भांग का प्रयोग लाभ देता है। भांग के पत्तों को महीन पीस लें। इसे सूंघने से सिर का दर्द ठीक (bhang effects) हो जाती है।
  • भांग के पत्ते के रस को गर्म कर कान में 2-3 बूँद डालने से भी सिर दर्द में लाभ होता है। [Go to: Bhaang Benefits]

सिर की खुजली में भांग के फायदे (Weed Leaf Uses in Itching Treatment in Hindi)

सिर की फुंसियां (खुजली की बीमारी) का इलाज करने के लिए भांग के पत्ते के रस को सिर पर लेप के रूप में लगाएं। इससे सिर की खुजली ठीक हो जाती है। [Go to: Bhaang Benefits]

कान के दर्द में भांग का उपयोग लाभदायक (Bhang Drink Benefits to Treat Ear Pain in Hindi)

कान के दर्द के लिए भांग के पत्ते का रस निकाललें। 8-10 बूँद रस को कान में डालें। इससे कान दर्द में फायदा होता है। [Go to: Bhaang Benefits]

दमा रोग में भांग के फायदे (Bhang Health Benefits in Fighting witih Asthma in Hindi)

दमा एक गंभीर बीमारी है। इसके लिए भुनी हुई 125 मिग्रा भांग में 2 ग्राम काली मिर्च और 2 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रयोग करें। इससे अस्थमा में आराम (bhang effects) मिलता है। प्रयोग की जानकारी किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर लें। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के फायदे भूख की कमी में (Cannabis Indica Benefits for Appetite Problem in Hindi)

  • भूख कम हो गई हो तो काली मिर्च और भांग के 500 मिग्रा चूर्ण को शहद के साथ मिला लें। इसे सुबह और शाम चाटने से भूख बढ़ती है।
  • भांग तथा अजमोदा का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से मुंह का जायका ठीक हो जाता है। [Go to: Bhaang Benefits]

और पढ़ें: भूख को बढ़ाने के लिए जायफल के फायदे 

पाचनतंत्र रोग में भांग का प्रयोग लाभदायक (Benefits fo Bhaang in Indigestion in Hindi)

पाचन-तंत्र रोग में 100 ग्राम भांग, 200 ग्राम शुंठी और 400 ग्राम जीरा लें। तीनों चीजों को अच्छी तरह एक साथ पीसकर छान लें। इसे भोजन से आधा घण्टे पहले 1-2 चम्मच दही में मिलाकर चाट लें। यह प्रयोग 40 दिन तक सुबह-शाम करें। इससे पाचनंतत्र संबंधी पुरानी बीमारी में भी लाभ (bhang ke fayde) मिलता है। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के औषधीय गुण से पेट दर्द का इलाज (Benefits of Bhaang to Treat Abdominal Pain in Hindi)

पेट के दर्द को ठीक करने के लिए भांग और मिर्च के चूर्ण को समान मात्रा में लें। इसमें गुड़ मिलाकर 500 मिग्रा की वटी बना लें। इसका सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के औषधीय गुण से मूत्र रोग का इलाज (Benefits of Cannabis Indica uses for Urinary Disease in Hindi)

पेशाब करते समय दर्द होना, पेशाब का रुक-रुक कर आने जैसी परेशानी में भांग और खीरा, या फिर ककड़ी की मज्जा को पानी में घोटकर छान लें। इसे ठंडाई (bhang lassi) की तरह पिलाने से मूत्र रोग में लाभ होता है। [Go to: Bhaang Benefits]

अंडकोष के दर्द में भांग का प्रयोग (Bhang Health Benefits to Treat Testicle Pain in Hindi)

  • अंडकोष विकार को ठीक करने के लिए पानी में भांग को थोड़ी देर भिगोकर रखें। इस पानी से अंडकोष को धोएं। 
  • भांग को पीसकर अंडकोष पर बाँधने से भी अंडकोष का दर्द ठीक हो जाता है।
  • भांग के गीले पत्तों का हल्का गाढ़ा काढ़ा बना लें। इसे अंडकोषों पर बाँधने से अंडकोष का दर्द ठीक होता है।
  • सूखी भांग को पानी में उबालकर बफारा देने से अंडकोष का दर्द ठीक हो जाता है। [Go to: Bhaang Benefits]

योनि के ढीलेपन में भांग का गुण लाभदायक (Benefits of Bhang Goli in Vaginal Laxity in Hindi)

बराबर-बराबर भाग में जायफल, अफीम, दारुहल्दी लें। इन सबके बराबर भांग लें। इन्हें पीसकर गोली बनाकर योनि में रखें। इससे योनि के ढीलेपन की समस्या में लाभ होता है।

हिस्टीरिया के इलाज में भांग का औषधीय गुण लाभदायक (Bhang Health Benefits for Hysteria in Hindi)

हिस्टीरिया के उपचार के लिए 250 मिग्रा भांग को 65 मिग्रा हींग के साथ प्रयोग करें। इससे हिस्टीरिया में लाभ होता है। इसके लिए प्रयोग की जानकारी किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर लें। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के सेवन से दस्त पर रोक (Benefits of Bhang Powder to Stop Diarrhea in Hindi)

दस्त को रोकने के लिए बराबर-बराबर मात्रा में भांग तथा जायफल लें। इनका चूर्ण (1-2 ग्राम) बना लें। इसमें दोगुना कुटज बीज चूर्ण मिला लें। इसे शहद के साथ सेवन करने से दस्त ठीक हो जाता है।

इसी तरह गूलर वृक्ष का क्षीर तथा भांग को मिलाकर गुटिका बना लें। इसका सेवन करने से दस्त पर रोक लगती है। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के उपयोग से उल्टी पर रोक (Uses of Bhang to Stop Vomiting in Hindi)

  • उल्टी और दस्त की परेशानी में भांग के 125 मिग्रा चूर्ण को सौंफ के 4-6 बूँद अर्क के साथ दिन में दो बार लें। इससे लाभ (bhang benefits) होता है।
  • भुनी भांग को धोकर, महीन पीस लें। इस 125 मिग्रा चूर्ण को मधु के साथ दिन में दो बार चाटने से दस्त और उल्टी में लाभ होता है।
  • उल्टी और दस्त के उपचार के लिए भांग के 100 मिग्रा चूर्ण में 50 मिग्रा पोश्त दाने का चूर्ण मिला लें। इसे सुबह-शाम खाने से बीमारी ठीक हो जाती है।
  • भांग की सूखी कोमल टहनियों और फूलों को चीनी तथा काली मिर्च के साथ देने से उल्टी और दस्त पर रोक लगती है। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के औषधीय गुण से हैजा का उपचार (Uses of Bhang in Cholera in  Hindi)

हैजा के इलाज के लिए 250 मिग्रा गांजा या भांग लें। इसके साथ 250-250 मिग्रा छोटी इलायची, काली मिर्च तथा कपूर लें। सभी को मिला लें। इसे 100 मिली पानी में उबालकर ठंडा (bhang lassi) कर लें। इसका सेवन करें। इससे हैजा ठीक हो जाता है। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के गुण से बुखार का इलाज (Bhang Goli Uses in Fighting with Fever in Hindi)

  • भांग का सेवन बुखार को भी ठीक करता है। शुद्ध भांग का चूर्ण एक ग्राम तथा दो ग्राम गुड़ लें। दोनों को मिलाकर 4 गोलियाँ बना लें। ठंड के बुखार को ठीक करने के लिए 1-1 गोली 2-2 घण्टे में दें।
  • शुद्ध भांग की 1 ग्राम की गोली बुखार के एक घण्टा पूर्व देने से बुखार नहीं बढ़ता है। [Go to: Bhaang Benefits]

भांग के गुण से घाव का इलाज (Uses of Bhaang in Healing Wound in Hindi)

घाव में भांग के पत्तों के चूर्ण को जख्म पर डालें। इससे घाव तुरंत ठीक होता है। [Go to: Bhaang Benefits]

कुष्ठ रोग में भांग के फायदे (Bhang benefits in Leprosy in Hindi)

कुष्ठ रोग में भी भांग का उपयोग लाभ पहुंचाता है। लंबे समय तक भांग के चूर्ण को मधु तथा घी के साथ मात्रापूर्वक सेवन करें। इससे कुष्ठ रोग खत्म होता है। [Go to: Bhaang Benefits]

गठिया की बीमारी में भांग के फायदे (Bhang Powder Uses in Arthritis in Hindi)

  • गठिया के इलाज के लिए भांग (baang) के बीज के तेल से मालिश करें। इससे गठिया में लाभ होता है।
  • 125 मिग्रा भांग को घी में भून लें। इसमें 2 ग्राम काली मिर्च व 2 ग्राम मिश्री मिला लें। इसे दिन में 3-4 बार सेवन करने से गठिया में लाभ (bhang ke fayde) होता है। [Go to: Bhaang Benefits]

Summary of Bhaang ke fayde by Acharya Balkrishna Ji (Patanjali):

भांग के पौधे के उपयोगी भाग (Useful Parts of Bhaang)

भांग का इस्तेमाल इस तरह किया जा सकता हैः-

  • सूखे पत्ते (bhang leaves)
  • पुष्पित प्ररोह (Flowering shoot)
  • फूल के आगे वाला भाग
  • रालीय पदार्थ

भांग का इस्तेमाल कैसे करें(How to Use Bhaang?)

भांग का उपयोग कर अधिक लाभ पाने के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

 

भांग के साइड इफेक्ट (Bhang Side Effects in Hindi)

गांजा और भांग के नुकसान के रूप में ये परिणाम सामने आ सकते हैंः-

  • शरीर में कमजोरी आ सकती है।
  • पुरुष को नपुंसकता की बीमारी हो सकती है।
  • भांग के अधिक सेवन से मस्तिष्क संबंधी परेशानी (सोचने की शक्ति की कमी) भी उभर सकती है।
  • इसलिए इसका प्रयोग काम उत्तेजना के लिए या नशे के लिए नहीं (bhang goli side effects) करना चाहिए।
  • भांग (bhang) के नशे को उतारने के लिए नारंगी, अनार का रस, दूध, घी, अमरूद व अमरूद के पत्तों का रस को उपयोग में लाया जा सकता है।

भांग कहां पाया या उगाया जाता है(Where is Bhaang Found or Grown?)

भांग (bhang) की खेती पूरे भारत में की जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में भांग की खेती बहुतायत की जाती है।