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Coffee: ईश्वर का वरदान है कॉफ़ी – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

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कॉफ़ी का परिचय (Introduction of Coffee)

आज की जेनरेशन कॉफ़ी पीना ज्यादा पसंद करती है, लेकिन कॉफ़ी पीने के पहले एक बात का ध्यान रखना होगा कि कॉफ़ी पीने के फायदे जितने हैं उतने ही नुकसान भी हैं। संतुलित मात्रा में कॉफ़ी के सेवन से न सिर्फ हृदय स्वस्थ रहता है बल्कि कई रोगों के लिए औषधि के रुप में भी काम आती है।

कॉफ़ी का कड़वा और गर्म प्रकृति कफ और वात को कम करने में मदद करने के साथ-साथ मस्तिष्क को ऊर्जा भी प्रदान करती है। इसके सेवन से नींद और खुमारी भी कम होती है। चलिये ऐसे ही और स्वास्थ्यवर्द्धक गुणों (coffee peene ke fayde in hindi) के अलावा कॉफ़ी के बारे में और विशेष जानकारियां भी प्राप्त करते हैं।

कॉफ़ी क्या है? (What is Coffee?)

कॉफ़ी कड़वी और गर्म तासीर की होती है। कॉफ़ी कफ और वात को कम करने वाली; हृदय को स्वस्थ रखने वाली, दुर्गन्धनाशक और स्फूर्ति प्रदान करने वाला होती है। यह  पाइल्स, दस्त, सिरदर्द, संधिवात, आमवात, निद्रा तथा शारीरिक जड़ता नाशक होती है।

कॉफ़ी को अल्प मात्रा में सेवन करने से सांस संबंधी समस्या में लाभ मिलता है। कॉफ़ी में उपस्थित रस कैफीन के कारण यह मूत्र संबंधी बीमारी, मस्तिष्क तथा हृदय को उत्तेजित करने में मदद करती है।

कॉफ़ी के रस का प्रयोग हृदय संबंधी बीमारी तथा किडनी के सूजन को कम करने में भी सहायता करती है।

इसका मस्तिष्क को उत्तेजित करने वाली या केंद्रीय नाड़ी संस्थान पर उत्तेजक प्रभाव होने के कारण सेवन के बाद व्यक्ति अपने को प्रसन्न महसूस करता है। कॉफ़ी का संतुलित मात्रा में  सेवन करने से थकान तथा तंद्रा दूर होती है। वैसे प्राचीन आयुर्वेदीय निघण्टुओं में इसका वर्णन नहीं मिलता है। इसके बीजों में कैफीन नामक तत्व पाया जाता है। इसलिए इसका प्रयोग कम मात्रा में करना चाहिए।

और पढ़े: सांस की बीमारी में अशोक वृक्ष के फायदे

अन्य भाषाओं में कॉफी के नाम (Name of Coffee in Different Languages)

कॉफ़ी का वानास्पतिक नाम : Coffea arabica Linn. (कॉफिया अरेबिका) Syn-Coffea laurifolia Salisb., Coffea vulgaris Moench होता है। कॉफ़ी Rubiaceae (रूबिएसी) कुल का होता है। कॉफ़ी को अंग्रेजी में Arabian Coffee (अरेबियन कॉफी) कहते हैं। वैसे तो कॉफ़ी भारत में विभिन्न नामों से जाना जाता है।

Coffee in-

  • Sanskrit-राजपीलु, म्लेच्छ-फल, काफी;
  • Hindi-कॉफी, बुन;
  • Kannada-काफी (Coffee), कापिबीजा (Kapibija);
  • Gujrati-बुंद (Bund), बुंददाणा (Bunddana);
  • Tamil-काप्पिकोट्टई (Capiecottay), कप्पी (Kappi), सिलापकम (Cilapakam);
  • Telugu-काप्पिविट्टलु (Kappivittalu), कप्पी (Kappi );
  • Bengali-काफी (Coffee);
  • Nepali-कफी (Cafee);
  • Marathi-बुंद (Bund), काफे (Kaphe), बुंददाणा (Bunddana);
  • Malayalam-बन्नू(Bannu), कप्पी (Kappi);
  • Manipuri-कोफी (Kophi)।
  • English-कॉफी (Coffee), कॉमन कॉफी (Common coffee);
  • Arbi-कहवा (Quahwah), कावा (Kawa);
  • Persian-तोकैमकेवह (Tochemkeweh), कहवा (Kahwa)

कॉफ़ी के फायदे (Coffee Benefits and Uses in Hindi)

ब्लैक कॉफ़ी पीने से न सिर्फ हृदय की दुर्बलता कम होती है बल्कि ये सिर दर्द, उल्टी, थकान, खाने में अरुची जैसे समस्याओं के लिए दवा जैसा काम करती है।

माइग्रेन में फायदेमंद कॉफ़ी (Coffee for Hemicrania or Migraine in Hindi)

आजकल के जीवनशैली के कारण माइग्रेन की समस्या बहुत लोग परेशान रहते हैं।  कॉफ़ी के अपरिपक्व बीजों का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पीने से आधासीसी (आधे कपाल में वेदना) में दर्द, आमवात, संधिवात तथा सिर दर्द कम होता है।

और पढ़े: माइग्रेन में गुलदाउदी का फायदेमंद

कॉफ़ी मुँह की बदबू करे दूर (Benefit of Coffee to Get rid of Bad Breath in Hindi)

अक्सर पेट में गड़बड़ी होने के कारन मुँह में बदबू की समस्या होती है। कॉफ़ी का काढ़ा बनाकर, गरारा करने से मुँह की दुर्गंध कम होती है।

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उल्टी से राहत दिलाये कॉफ़ी (Benefits of Coffee in Vomiting in Hindi)

एसिडिटी या अपच के कारण उल्टी महसूस हो रहा है तो कॉफ़ी के बीज तथा पत्ते का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से खाने में अरुची, उल्टी, प्यास, हृदय की दुर्बलता तथा थकान में लाभ होता है।

कॉफ़ी के सेवन से दस्त पर रोक (Coffee Beneficial in Diarrhoea in Hindi)

पेट में इंफेक्शन होने के कारण या असंतुलित आहार योजना से दस्त की बीमारी हो जाती है। कॉफ़ी का प्रयोग दस्त तथा अग्निमांद्य की चिकित्सा में फायदेमंद होता है।

नाड़ी शिथिलता में फायदेमंद कॉफ़ी (Benefit of Coffee for Nerve Weakness in Hindi)

घी में भूना हुआ कॉफ़ी के चूर्ण से बनाया काढ़े में दूध तथा चीनी मिलाकर पिलाने से नाड़ी की शिथिलता मिटती है।

दिल के लिए फायदेमंद कॉफ़ी (Benefits of Coffee for Healthy Heart in Hindi)

संतुलित मात्रा में कॉफ़ी का इस तरह से सेवन करने से दिल स्वस्थ रहता है।  घी में भूना हुआ कॉफ़ी के चूर्ण से बनाया काढ़ा दिल  के लिये फायदेमंद होता है।

बुखार से दिलाये राहत कॉफ़ी (Coffee help to get relief from symptoms of Fever in Hindi)

मौसम के बदलने के साथ बुखार अपने चपेट में किसी न किसी को ले ही लेती है। कॉफ़ी बुखार के राहत दिलाने में गुणकारी होता है।  घी में भूना हुआ कॉफ़ी के चूर्ण से बनाया काढ़े में दूध तथा चीनी 10 मिली मिलाकर पिलाने से बुखार से राहत मिलती है।

और पढ़े: बुखार के लिए डाइट चार्ट

कॉफी का उपयोगी भाग (Useful Parts of Coffee)

आयुर्वेद में कॉफी के बीज का औषधि के रुप में ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

कॉफी का सेवन कैसे करना चाहिए? (How to Consume Coffee in hindi?)

बीमारी के लिए कॉफी के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए कॉफी का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें। इसके अलावा चिकित्सक के परामर्श के अनुसार –

-10-20 मिली कॉफी के काढ़े का सेवन करना चाहिए।

कॉफी पीने के साइड इफेक्ट (Side effects of Coffee)

कॉफी पीने के फायदे जैसे है वैसे ही अंसतुलित मात्रा में कॉफी पीने के बहुत सारे साइड इफेक्ट्स भी होते हैं।

-बच्चों के लिए कैफीन की 5.3 ग्राम मात्रा का सेवन प्राण-घातक साबित हो सकती है। इसके अलावा गर्भावस्था में इसके प्रयोग से बचना चाहिये।

-इसका प्रयोग स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नहीं करना चाहिए और यदि कोई करता है तो कैफीन के प्रभाव से अनिद्रा की बीमारी हो सकती है।

-प्रतिदिन 5 कप कॉफी (500 मिग्रा कैफीन) का प्रयोग सुरक्षित होता है।  मानसिक, किडनी और थायराइड ग्रंथियों के रोगियों को कॉफी का प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए। इसका लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में सेवन करने पर दस्त, सिरदर्द, अरुचि, हृदय में बेचैनी,अनिद्रा, उल्टी एवं आमाशय की समस्या हो सकती हैं।

और पढ़े- थायरॉइड रोग का घरेलू इलाज

-कॉफी के अत्यधिक प्रयोग से कब्ज, अनिद्रा, बेचैनी, तनाव, उल्टी जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।

कॉफ़ी कहां पाया और उगाया जाता है? (Where is Coffee found or grown in Hindi?)

कॉफी का क्षुप (shurb) मूलत: इथोपिया तथा सूडान में प्राप्त होता है। दक्षिण भारत में कर्नाटक, केरल, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश एवं पश्चिमीघाट में इसकी खेती की जाती है। प्राचीन आयुर्वेदीय निघण्टुओं में इसका वर्णन नहीं है। इसके बीजों में कैफीन नामक तत्व पाया जाता है।  अत इसका प्रयोग कम मात्रा में करना चाहिए।

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आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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