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Baheda: बहेड़ा के हैं बहुत अनोखे फायदे – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

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बहेड़ा का परिचय (Introduction of Baheda)

क्या आप जानते हैं कि बहेड़ा (Baheda) क्या है या बहेड़ा का उपयोग किस चीज में किया जाता है? अगर आप नहीं जानते हैं तो यह जान लीजिए कि बहेड़ा (Bibhitaki) का तेल बालों को काला करने के लिए उपयोगी माना जाता है। आग से जलने के कारण हुए घाव पर भी बहेड़ा का तेल लाभकारी है। बहेड़ा (terminalia bellerica) वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को दूर करता है, लेकिन इसका मुख्य प्रयोग कफ-प्रधान विकारों में होता है। यह आँखों के लिए हितकारी, बालों के लिए पोषक होता है।

इतना ही नहीं बहेड़ा terminalia bellerica असमय बाल पकने, गला बैठने, नाक सम्बन्धी रोग, रक्त विकार, कंठ रोग (लैरियेंगोट्राकियोब्रॉन्काइटिस) तथा हृदय रोगों में फायदेमंद होता है। बहेड़ा कीड़ों को मारने वाली औषधि है। बहेड़े के फल की मींगी मोतियाबिन्द को दूर करती है। इसकी छाल खून की कमी, पीलिया और सफेद कुष्ठ में लाभदायक है। इसके बीज कड़वे, नशा लाने वाले, अत्यधिक प्यास, उल्टी, तथा दमा रोग का नाश करने वाले हैं।

बहेड़ा क्या है? (What is Baheda?)

बहेड़ा (bibhitaki) त्रिफला (triphala) का एक अंग है। वसंत ऋतु में इसके पत्ते झड़ जाने के बाद इस पर ताम्बे के रंग के नई टहनी या शाखा निकलते हैं। गर्मी के मौसम के आगमन तक इसी टहनी या शाका के साथ फूल खिलते हैं। वसंत के पहले तक इसके फल पक जाते हैं। बहेड़ा के फलों का छिलका कफनाशक होता है। यह कंठ और सांस की नली से जुड़ी बीमारी पर बहुत असर करती है। इसके बीजों की गिरी दर्द और सूजन ख़त्म करती है।

बहेड़ा, आंवला, हरीतकी यह सब कफनाशक, योनिदोषनाशक, दूध को शुद्ध करने वाले और पाचक हैं। बहेड़ा विरेचक (Laxative) भी होता है। यह आमाशय को शक्ति देता है। आमाशय को ताकत देने वाली कोई भी दूसरी औषधि इससे बढ़कर नहीं है। इसका आधा पका फल रेशेदार और पाचक होता है। बहेड़ा बालों के लिए लाभकारी तथा मज्जा मदकारी होती है।

अनेक भाषाओं में बहेड़ा के नाम (Baheda Called in Different Languages)

बहेड़ा का वानस्पतिक नाम Terminalia bellirica (Gaertn.) Roxb. (टर्मिनेलिया बेलेरिका) Syn-Myrobalanus bellirica Gaertn. है और यह Combretaceae (कॉम्ब्रेटेसी) कुल का है। इसका लैटिन नाम Belleric myrobalan (बेलेरिक मॉयरोबालान) है। इसे अन्य इन नामों से भी जाना जाता हैः-

Baheda in –

  • Hindi (baheda in hindi) हल्ला, बहेड़ा, फिनास, भैरा, बहेरा;
  • English (baheda in english) सियामीस टर्मिनेलिआ (Siamese terminalia), बास्टर्ड मायरोबालान (Bastard myrobalan)
  • Arabic – बलीलाज  (Balilaj), बतीलाज (Batilaj), बेलेयूज (Beleyuj);
  • Persian – बेलेला (Belela), बेलेयाह (Beleyah)
  • Sanskrit – भूतवासा, विभीतक, अक्ष, कर्षफल, कलिद्रुम;
  • Urdu – बहेरा (Bahera);
  • Assamese – बौरी (Bauri);
  • Konkani – गोटिन्ग (Goting);
  • Kannada तोड़े (Tode), तोरै (Torei);
  • Gujarati – बेहेड़ा (Beheda), बेड़ा (Beda);
  • Tamil (terminalia belerica in tamil) – तन्री (Tanri), तनितांडी (Tanitandi);
  • Telugu – धीन्डी (Dhindi), तडिचेटटु (Tadichettu);
  • Bengali – साग (Saag), बयड़ा (Bayada);
  • Nepali – बर्रो (Barro);
  • Marathi – बेहड़ा (Behada), बेहेड़ा (Beheda);
  • Punjabi – बहिरा (Bahira), बहेड़ा (Baheda);
  • Manipuri – बहेड़ा (Bahera);
  • Malayalam – थाअन्नी (Tanni)

बहेड़ा के फायदे (Baheda Benefits and Uses)

अब तक आपने जाना कि बहेड़ा (bibhitaki) के कितने नाम हैं। आइए अब जानते हैं कि बहेड़ा का औषधीय प्रयोग कैसे और किन बीमारियों में किया जा सकता हैः-

बहेड़ा के प्रयोग से बालों की बीमारी का इलाज  (Baheda is Beneficial for Hair Problem in Hindi)

बहेड़ा फल की मींगी का तेल बालों के लिए अत्यन्त पौष्टिक है। इससे बाल स्वस्थ हो जाते हैं।

आँखों के रोग में बहेड़ा के इस्तेमाल से लाभ (Baheda Benefits to Cure Eye Disease in Hindi)

  • बहेड़ा (belleric myrobalan)  और शक्कर के बराबर मात्रा में मिश्रण का सेवन आँखों की ज्योति को बढ़ाता है।
  • तिल का तेल, बहेड़ा का तैल, भांगरा का रस तथा विजयसार का काढ़ा लें। इनको लोहे के बर्तन में तेल में पकाएं। इसका रोज प्रयोग करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
  • बहेड़ा की छाल को पीसकर मधु के साथ मिलाकर लेप करने से आँख के दर्द का नाश होता है।
  • बहेडे की मींगी के चूर्ण को मधु के साथ मिलाकर काजल की तरह लगाने से आँख के दर्द तथा सूजन आदि में लाभ होता है।
  • इसके बीज के मज्जा के चूर्ण (baheda churna) को शहद के साथ मिलाकर महीन पेस्ट बना लें। इसे रोज सुबह काजल की तरह लगाने से आँख का रोग नष्ट होता है।

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ज्यादा लार बहने की समस्या में करें बहेड़ा का उपयोग (Baheda Uses for Excessive Saliva in Hindi)

1½ ग्राम बहेड़ा में समान मात्रा में शक्कर मिला लें। इसे कुछ दिन तक खाने से अधिक लार बहने की परेशानी ठीक होती है।

दमा में फायदेमंद बहेड़ा का इस्तेमाल (Baheda Treats Respiratory Problems in Hindi)

  • बहेड़ा और हरड़ की छाल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसे 4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से दमा और खांसी में लाभ होता है।
  • बहेड़ा (belleric myrobalan) के बीज रहित फल के 3 से 6 ग्राम छिलके (जिन्हें पुटपाक करके निकाला है) को मुंह में रखकर चूसने से खांसी एवं दमा रोग में लाभ होता है।
  • बहेड़ के फल की छाल के चूर्ण (10 ग्राम) में अधिक मात्रा में मधु मिला लें। इसे चाटने से दमा की गंभीर बीमारी तथा हिचकी में भी शीघ्र लाभ होता है।

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गुर्दे की पथरी में करें बहेड़ा का उपयोग (Benefits of Baheda in Kidney Stone Disease in Hindi)

बहेड़ा के फल के मज्जा के 3-4 ग्राम चूर्ण में मधु मिला लें। इसे सुबह-शाम चाटने से गुर्दे की पथरी की बीमारी में लाभ होता है।

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खाँसी में बहेड़ा से लाभ (Uses of Baheda in Fighting with Cough in Hindi)

  • बहेड़ा के छिलके को चूसने से खांसी में लाभ होता है।
  • बकरी के दूध में अडूसा, काला नमक और बहेड़ा डालकर पकाकर खाने से हर प्रकार की खांसी में लाभ होता है।
  • बहेड़ा के 10 ग्राम चूर्ण (baheda churna) में शहद मिला लें। इसे सुबह और शाम भोजन के बाद चाटने से सूखी खाँसी तथा पुराने दमा रोग में बहुत लाभ होता है।
  • बहेड़ा फल में घी चुपड़ लें। इसके ऊपर आटे का एक अंगुल मोटा लेप लगाकर पका लें। त्वचा के ताप के बराबर ठंडा होने पर इसके ऊपर का आटा निकाल लें। इसके बाद बहेड़ा के छिलके को चूसें। इससे खांसी, जुकाम, दमा तथा गला बैठने की समस्या में लाभ होता है।
  • बहेड़ा के एक फल को घी में डुबाकर, घास से लपेटें। इसे गाय के गोबर में बंद करके आग में पका लें। इसे बीजरहित कर मुंह में रख कर चूसें। इससे खांसी, जुकाम, दमा तथा गला बैठने जैसे रोगों का नाश होता है।

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बहेड़ा के प्रयोग से हृदय रोग में लाभ (Baheda is Beneficial for Heart in Hindi)

बहेड़ा के फल के चूर्ण तथा अश्वगंधा चूर्ण को समान मात्रा में मिला लें। इसे 5 ग्राम की मात्रा में लेकर गुड़ मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता है।

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दस्त को रोकता है बहेड़ा (Baheda Stops Diarrhea in Hindi)

  • बहेड़ा फल के 3-6 ग्राम चूर्ण (baheda churna) को खाने के बाद सेवन करने से पाचनशक्ति ठीक होती है।
  • बहेड़ा के पेड़ (baheda tree) की 2-5 ग्राम छाल और 1-2 नग लौंग को पीसकर 1 चम्मच शहद में मिला लें। इसे दिन में 3-4 बार चटाने से दस्त में लाभ होता है।
  • बहेड़ा के 2-3 भुने हुए फल का सेवन करने से दस्त की गंभीर बीमारी भी ठीक हो जाती है।

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पेशाब में जलन की बीमारी में बहेड़ा से लाभ (Baheda Benefits in Urinary Disease in Hindi)

बहेड़ा (vibhitaki) के फल के मज्जा के 3-4 ग्राम चूर्ण में मधु मिला लें। इसे सुबह-शाम चाटने से पेशाब में जलन की समस्या में लाभ होता है।

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डायबिटीज में बहेड़ा से फायदा (Uses of Baheda for Controlling Diabetes in Hindi)

बहेड़ा, रोहिणी, कुटज, कैथ, सर्ज, सप्तपर्ण तथा कबीला के फूलों का चूर्ण बना लें। इसे 2 से 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 1 चम्मच मधु के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे पित्त विकार के कारण हुए डायबिटीज में लाभ होता है।

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बहेड़ा से नपुंसकता का उपचार (Baheda Helps in Impotence in Hindi)

3 ग्राम बहेड़ा के चूर्ण में 6 ग्राम गुड़ मिला लें। इसे रोज सुबह-शाम सेवन करने से नपुंसकता मिटती है और काम भावना बढ़ती है।

त्वचा रोग में बहेड़ा से लाभ (Benefits of Baheda for Skin Disease in Hindi)

बहेड़ा (vibhitaki) फल की मींगी का तेल खाज, खुजली आदि त्वचा रोग में लाभकारी है तथा जलन कम करने वाला है। इसकी मालिश से खुजली और जलन की परेशानी ठीक हो जाती है।

बुखार उतारने के लिए करें बहेड़ा का प्रयोग (Uses of Baheda in Fighting with Fever in Hindi)

बहेड़ा और जवासे के 40-60 मिली काढ़े में 1 चम्मच घी मिला लें। इसे दिन में तीन बार पीने से पित्त और कफ विकार से हुए बुखार में लाभ होता है।

बहेड़ा के मज्जा को पीसकर शरीर पर लेप करने से पित्तज बुखार से होने वाली जलन कम होती है।

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सूजन को कम करता है बहेड़ा (Baheda Helps in Reducing Swelling in Hindi)

बहेड़ा के बीजों को पीस कर लेप करने से सभी प्रकार की सूजन, जलन और दर्द  का नाश होता है।

बहेड़ा की मींगी का लेप करने से पित्त विकार के कारण आयी सूजन का ठीक होती है।

बहेड़ा के नुकसान (Side Effects of Baheda)

बहेड़ा (vibhitaki) का अधिक मात्रा में सेवन करने से उलटी हो सकती है।

बहेड़ा के उपयोगी हिस्से (Useful Parts of Baheda)

छाल

फल

सूखे फलों के बीज

मज्जा

बहेड़ा के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Baheda)

3-6 ग्राम

अधिक लाभ के लिए चिकित्सक के परामर्शानुसार बहेड़ा का प्रयोग करें।

बहेड़ा कहां पाया या उगाया जाता है (Where is Baheda Found or Grown?)

बहेड़ा के वृक्ष (baheda tree) लगभग पूरे भारत में पाये जाते हैं। ये मुख्य रूप से मैदानी एवं पहाड़ी क्षेत्रों के पर्णपाती वनों में लगभग 1000 मीटर की ऊँचाई तक पाए जाते हैं।

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पतंजलि के बहेड़ा उत्पाद कहां से खरीदें (Where to Buy Patanjali Baheda Product?)

पतंजलि दिव्य बहेड़ा चूर्ण (Patanjali Divya Baheda Churna) खरीदने के लिए यहां क्लिक करें।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्तंभ हैं। चार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

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आचार्य श्री बालकृष्ण

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