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Aak: करिश्माई ढंग से फायदा करता है आक – Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)

Contents

आक का परिचय (Introduction of Aak)  

कई लोग ऐसा सोचते हैं कि आक का पौधा (aak plant) विषैला होता है तथा यह मनुष्‍य के लिए घातक होता है। इसमें थोड़ी सच्‍चाई जरूर है लेकिन क्‍या आपको मालूम है आक का इस्तेमाल औषधि के रूप में भी किया जाता है। यह सूर्य की तरह ही उत्‍तम तथा दिव्‍य रसायन गुणों वाला है, जिससे आप कई रोगों को ठीक कर सकते हैंं।

 

वनों में पाई जाने वाली आक (मदार) नामक (calotropis in hindi) यह दिव्य औषधि भारतीय चिकित्सा विज्ञान में बहुत ही प्राचीन काल से प्रचलित है। वैदिक काल में आक का प्रयोग सूर्य उपासना के लिए किया जाता था। इसीलिए इसे अर्क, भास्‍कर, रवि आदि सूर्य के सभी नाम दिए गए हैं, तो आइए जानते हैं इसके गुणों और सेवन विधि के बारे में।  

 

आक क्या है? (What is Aak?)

शुष्‍क, ऊसर तथा ऊंची भूमि पर हर तरफ दिखाई देने वाले आक के पौधे ((madar plant)) का गुण काफी हद तक सूर्य की तरह है। सूर्य के दक्षिणायन होने पर जब उसका तेज घटता जाता है, वैसे-वैसे ही आक का पौधा (aak plant) भी समाप्‍त होने लगता है। बारिश के दिनों में यह पूरी तरह से गायब हो जाता है। उत्‍तरायण में सूर्य की किरणें तेज होने के साथ ही यह पेड़ भी हरा भरा, हृष्‍ट-पुष्‍ट होकर फूलने-फलने लग जाता है।

आयुर्वेद-संहिताओं में इसका उल्‍लेख उपविष के रूप में किया गया है। इसकी तीन प्रजातियाँ पाई जाती हैं:-

लाल आक (Calotropis procera (Ait.) Dryand.) 

आक (calotropis in hindi) के फूल सफेद रंग के छोटे, कटोरीनुमा और भीतर लाल और बैंगनी रंग की चित्ती वाले होते हैं। इसमें दूध कम होता है।

सफेद आक (Calotropis gigantea (Linn.) Dryand., Syn-Asclepias gigantea Lin)

इसका फूल लाल आक के फूल से थोड़ बड़ा और हल्की पीली चमक लिए सफेद कनेर के फूल जैसा होता है। इसकी केसर भी बिल्कुल सफेद होती है। इसे मदार भी कहते हैं। इस आक का इस्तेमाल प्रायः मंदिरों में किया जाता है। इसमें दूध अधिक होता है।

चांदी आक

आगे के पौधे (madar plant) में एक ही शाखा होती है, जिस पर केवल चार पत्‍ते लगते हैं। इसके फूल चांदी के रंग जैसे सफेद होते हैं। यह बहुत दुर्लभ जाति है।

इसके अलावा आक की एक और प्रजाति पाई जाती है, जिसमें पिस्तई रंग के फूल लगते हैं।

 

अनेक भाषाओं में आक के नाम (Aak Called in Different Languages)

आक (calotropis in hindi) का वानस्पतिक नाम कैलोट्रोपिस प्रोसेरा ( Calotropis procera (Ait.) Dryand.) Syn-Asclepias procera Ait. है। इसे देश-विदेश में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।  

Aak in:-

  • Hindi – आक, अकद, मदार, सफेदक
  • Uttarakhand – अक (Ak)
  • English – डेड सी एप्पल (Dead sea apple), स्वैलो वॉर्ट (Swallow wort), मिल्क वीड (Milk weed), सोडोम एप्पल (Sodom apple)
  • Sanskrit – अर्क, तूलफल, क्षीरपर्णी, वसुक, विकीरण, मंदार, प्रतापस, रवि
  • Oriya – ओर्को (Orko)
  • Urdu – आक (Akh)
  • Kannada – बिली येक्काडा गिडा (Bili yekkada gida)  
  • Gujarati – नानो अनकाडो (Nano ankado)
  • Tamil – वेल्लेरुकफ (Velleruku)
  • Telugu – नल्लाजील्लेदु (Nallajilledu)  
  • Nepali – सेतो आंक (Seto aank)
  • Punjabi – आक (Ak)
  • Marathi – मन्दार (Mandar)
  • Arabic – ओकर (Ochar), उशर (Osher)  

 

आक के फायदे (Aak Benefits and Uses)

अब तक आपने जाना कि आक क्या है और इसे कितने नामों से जाना जाता है। आइए जानते हैं कि आसानी से उपलब्ध होने वाले आक का उपयोग कैसे किया जा सकता है, आक का औषधीय गुण, सेवन की विधि और तरीका क्या हैः-

 

सिर की बीमारियों में लाभदायक आक का प्रयोग  (Benefits of Aak in Treating Head Disease in Hindi)

 

सिर की खुजली (Head Itching)-  आक के दूध को सिर पर लगाने से शरीर की जलन, दर्द, खुजली एवं फुंसियों का उपचार होता है।  

 

आधे सिर का दर्द या अधकपारी (Migraine) – जंगली कंडों की राख को आक के दूध में भिगोकर छाया में सुखा लेना चाहिए। इसे सुंघाने से छीकें आकर सिर का दर्द, जुकाम, आदि रोगों में लाभ होता है। ध्‍यान रखें कि गर्भवती स्‍त्री और बालक इसका प्रयोग न करें।

पीले पड़े हुए आक के 1-2 पत्तों के रस को नाक में डालने से आधे सिर का दर्द दूर होता है। यह बहुत तीखा होता है इसलिए इसका प्रयोग सावधानी से करें।

छाया में सुखाई हुई आक (मदार) के जड़ की छाल का चूर्ण 10 ग्राम, सात इलायची, 500 मिलीग्राम कपूर तथा 500 मिलीग्राम पिपरमेंट मिला लें। इसे ओखली में अच्‍छी तरह से कूट लें। इसे शीशी में भर कर रख लें। इसको सूंघने से छींकें आती है और कफ बाहर निकल कर आधे सिर के दर्द या अधकपारी में आराम होता है। इससे सिर का भारीपन भी दूर होता है।

 

आंखों के रोग में आक का इस्तेमाल लाभदायक (Calotropis Gigantea Uses in Eye Disease Treatment in hindi)

  • 1 ग्राम आक की जड़ को कूट लें। 20 मिलीग्राम गुलाब जल में 5 मिनट तक रखकर छान लें। बूंद- बूंद आंखों में डालने आंखों की लाली, भारीपन, दर्द और खुजली में राहत मिलता है।

ध्‍यान रहे कि 3 या 5 बूंद से अधिक नहीं डालना है।

  • आक के जड़ की छाल को जलाकर कोयला कर लें। इसे थोड़े पानी में घिसकर आंखों के चारों ओर तथा पलकों पर लेप करने से लाली, खुजली, पलकों की सूजन आदि का उपचार होता है।
  • यदि बांई ओर आंख आई हो और उसमें तेज दर्द हो तो दाहिने पैर के नाखूनों को आक के दूध से अच्‍छी तरह से भिगोएं। यदि दांई ओर आंख आई हो तो बांये पैर के नाखूनों को आक (मदार) के दूध से अच्‍छी तरह से भिगोएं।

सावधानी : आंख में दूध नहीं लगना चाहिए, नहीं तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

और पढ़ें: नेत्र रोग में एलोवेरा से लाभ

कान की समस्‍याओं में आक के प्रयोग से फायदा (Aak is Helpful in Treating Ear Problem in Hindi)

आक के पत्तों को गर्म कर लें। इस पर तेल तथा नमक मिलाकर उसका रस निकालें। इसे कान में डालें। इससे दर्द, कान का बहना और सूजन आदि कान की समस्‍याएं दूर होती हैं।

आक के पीले पड़े पत्‍ते में अच्‍छी तरह से घी चुपड़ लें। अब उसका रस निकालकर हल्‍क गर्म कर लें और उसे कान में डालें। इससे कान के तेज दर्द में आराम मिलता है।  

 

आक का उपयोग कर दाढ़ के दर्द से छुटकारा पाएं (Aak Helps in Getting Relief from Toothache in Hindi)

  • आग के दूध में रुई भिगोकर, घी में डालकर दाढ़ में रखें। इससे अक्ल दाढ़ दांत वाला दर्द ठीक होता है।  
  • आक के दूध में नमक मिलाकर दांत पर लगाने से दांत दर्द दूर होता है।  
  • अंगुली जितनी मोटी आक (मदार) की जड़ को आग में शकरकंदी की तरह भून लें। इसका दातुन करने से दांत में लगने वाली बीमारी ठीक होती है। दांत दर्द में लाभ पहुँचता है। कूची वाले भाग को काटकर पुन: उसका अगला भाग प्रयोग कर सकते हैं।
  • हिलते हुए दांत पर आक का दूध लगाकर उसे आसानी से निकाला जा सकता है।
  • 8-10 आक के पत्तों को 10 ग्राम काली मिर्च के साथ पीस लें। इसमें थोड़ी हल्दी व सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से दांत मजबूत रहते हैं।

 

खांसी में फायदेमंद आक का प्रयोग (Calotropis Gigantea Benefits in Fighting with Cough in Hindi)

  • आक के जड़ की छाल को आक के दूध में भिगोकर सुखा लें। इसे महीन चूर्ण बना लें। इसके 10 ग्राम चूर्ण में 25 ग्राम त्रिकटु चूर्ण, 5 ग्राम  शृंगभस्म और 10 ग्राम गोदंती-भस्म मिलाकर रखें। लगभग एक ग्राम सुबह और शाम शहद के साथ लेने से पुरानी खांसी और दमा में लाभ होता है।
  • आक की 2-3 कोमल शाखा और फूलों (aak ke phool) को पीसकर घी में भून लें। इसमें गुड़ मिलाकर पका लें। इसका हर दिन सुबह में सेवन करने से पुरानी खांसी जिसमें पीला या हरा दुर्गंध वाला कफ बाहर निकलता है। यह खांसी ठीक होती है।  
  • आक के फूलों की लौंग को निकालकर उसमें बराबर मात्रा में सेंधा नमक और पिप्‍प्‍ली मिलाकर खूब महीन पीस लें। इसकी 250 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। गाय के दूध के साथ वयस्‍कों को 2-4 गोली और बच्‍चों को 1-2 गोली खिलाने से खांसी की बीमारी ठीक होती है।  
  • आक के जड़ की छाल के 250 मिलीग्राम महीन चूर्ण में 500 मिलीग्राम शुंठी चूर्ण मिला लें। इसे 3 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से खांसी और दमा में लाभ होता है।
  • आक (मदार) के फूल में समान मात्र में त्रिकटु (सोंठ, पिप्‍प्‍ली और काली मिर्च) और जवाखार (यवक्षार) मिला लें। इसे अदरक के रस में ओखली में कूट लें। इसकी 250 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखाकर रख लें। सुबह और शाम में गोलियां मुंह में रखकर चूसते रहने से खांसी तथा दमा में बहुत ही लाभ होता है।
  • आक के दूध में चने डुबो कर मिट्टी के बर्तन में बंद कर दें। इसे उपलों की आग से भस्म कर लें। इस भस्‍म का 125 मिलीग्राम शहद के साथ दिन में 3 बार चाटने से पुरानी खांसी में भी तुरंत लाभ होता है।
  • आक के पत्‍तों पर छाई सफेदी को इकट्ठा कर बाजरे जैसी गोलियां बना लें। इसकी 1-1 गोली सुबह और शाम खाकर ऊपर से पान खाने से 2-4 दिन में पुरानी खांसी भी समाप्‍त हो जाती है।

 

सांसों के रोग में आक के उपयोग से लाभ (Aak Flower Benefits to Cure Respiratory Problem in Hindi)

  • 50 ग्राम आक के फूल की लौंग और 6 ग्राम मिर्च को मिला लें। इसे खूब महीन पीस लें। अब इससे 250 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। सुबह में एक या दो गोली गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से सांस के रोग जैसे सांसों के फूलने की समस्‍या में लाभ मिलता है।   
  • आक के पत्तों पर जो सफेद क्षार सा छाया रहता है, उसे निकालकर रख लें। 500 मिलीग्राम क्षार को गुड़ में लपेटकर गोली बनाकर खाने से खांसी की बीमारी, सांस फूलना आदि रोग में लाभ होता है।
  • आक के पत्‍तों पर छाई सफेदी को इकट्ठा कर बाजरे जैसी गोलियां बना लें। इसकी 1-1 गोली सुबह और शाम खाकर ऊपर से पान खाने से 2-4 दिन में सांसों की बीमारी में लाभ होता है।
  • पुरानी आक की जड़ को छाया में सुखा लें। इसे किसी एकांत जगह पर जलाकर राख  कर लें। इसमें से कोयले अलग कर दें। 125-250 मिलीग्राम भस्म को शहद में मिलाकर खाने से खांसी तथा सांसों के रोग का उपचार होता है।  
  • आक (मदार) के एक पत्ते पर पानी के साथ महीन पिसा हुआ कत्था और चूना लगाएं। दूसरे पत्ते पर गाय का घी चुपड़ लें। दोनों पत्तों को जोड़ लें। इस प्रकार पत्तों को तैयार कर मटकी में रखकर जलाकर भस्म बना लें। अब 125-250 मिलीग्राम भस्म में शहद मिलाकर सेवन करें। इससे सांस लेने की  परेशानी में लाभ होता है। सांस लेने की परेशानी में घी, गेहूं की रोटी या चावल के साथ खाने से कफ प्रकृति के पुरुषों में मैथुन-शक्ति को पैदा करता है। इससे कफ से पैदा होने वाले रोगों और आंत के कीड़े में लाभ होता है।

 

पेट दर्द में आक के इस्तेमाल से लाभ (Aak Benefits in Getting Relief from Abdominal Disease in Hindi)

  • आक की सूखी जड़ की छाल के महीन चूर्ण में बराबार भाग में त्रिफला, सेंधा नमक व महीन सौंफ चूर्ण मिलाएं। इसे 1 ग्राम की मात्रा में 2-3 बार जल के साथ सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
  • आक के फूलों (aak ke phool) को सुखाकर, चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को आक के पत्‍ते के रस में तीन दिन तक डूबाकर रखें। अब इसमें बराबर मात्रा में अजवायन और सौंफ मिलाकर गोलियां बना लें। इसकी 2 गोली गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट में हो रहे पेट के तेज दर्द में भी लाभ होता है।
  • 100 ग्राम आक के सूखे फूल और 50 ग्राम जड़ की छाल दोनों को खूब महीन पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में आक (मदार) के पत्तों का रस मिलाकर अच्‍छी तरह से फेंट लें। इसकी 65 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। 1 से 4 गोली सौंफ के अर्क या गुनगुने जल के साथ सेवन करने से पेट दर्द एवं वात से जुड़े रोगों का उपचार होता है।  
  • 125 मिलीग्राम आक की फूल (madar ka phool) की लौंग और 25 ग्राम मिश्री लें। इन्‍हें एक साथ महीन पीसकर गोली बना लें। इस गोली को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द ठीक होता है।
  • 1-1 ग्राम आक की जड़ की ताजी छाल और अदरक, 1/2-1/2 भाग काली मिर्च और सेंधा नमक लें। इन सबको महीन पीसकर मटर जैसी गोलियां तैयार करें। अब इसे छाया में सुखा लें। 1 या 2 गोली को पुदीना अर्क के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ होता है।
  • 2-3 आक के पत्तों पर पुराना घी चुपड़ लें। इसे गर्म कर पेट पर बांधने से पेट दर्द समाप्‍त होता है।

 

जलोदर रोग (पेट में पानी भर जाना) में आक के प्रयोग से फायदा (Aak is Helpful in Ascites Disease in Hindi)

  • आक के पत्‍तों के 1 लीटर रस में 20 ग्राम हल्‍दी चूर्ण मिलकार कम आंच पर पकाएं। जब यह गोली बनाने लायक रह जाए तो इसे नीचे उतारकर रख लें। अब इससे 125 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। इसकी 1-1 गोली सुबह और शाम को सौंप अर्क या कासनी अर्क के साथ दें और पानी के बदले इसी अर्क को पिलाएं। इससे जलोदर रोग (पेट में पानी भर जाना) में लाभ होता है।
  • 250 ग्राम आक के ताजे हरे पत्ते लें और इसके साथ 20 ग्राम हल्दी को महीन पीसकर 65 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। ताजे जल के साथ 2 गोली, सुबह शाम सेवन करने से जलोदर रोग (पेट में पानी भर जाना) में लाभ होता है। इस दौरान दूध, साबूदाना और जौ का जूस सेवन करें।  
  • 8-10 से आक के पत्तों को सेंधा नमक के साथ कूटकर  मिट्टी के बर्तन में बन्द कर जलाकर भस्म बना लें। 250 मिलीग्राम भस्म को सुबह, दोपहर, शाम छाछ के साथ सेवन करने से जलोदर (पेट में पानी भर जाना) में लाभ होता है।

 

पेट में गैस बनने पर करें आक का सेवन (Aak Uses to Cure Gastric Problem in Hindi)

20 ग्राम आक के फूलों (aak ke phool) की कलियां तथा 20 ग्राम अजवायन को खूब महीन पीस लें। उसमें 50 ग्राम खांड मिलाकर रखें। इसका 1-1 ग्राम तक सुबह शाम जल के साथ सेवन करने से वात से पेट की गैस का उपचार होता है।

 

अपच की समस्या में आक (मदार) से लाभ (Aak Benefits in Indigestion in Hindi)

आक के पत्‍ते के रस में बराबर भाग में एलोवेरा (घृतकुमारी) का गूदा व शक्कर मिलाकर पकाएं। शक्‍कर की चासनी बन जाने पर इसे ठंडा कर बोतल में भर लें। इसे जरूरत के मुताबिक 2-10 मिलीग्राम की मात्रा में सेवन कराने से अपच की समस्‍या से लाभ होता है।  

250-500 मिलीग्राम आक लवण का सेवन करने से अफारा, अरुचि, अपच, पेट का भारीपन आदि समस्‍याएं दूर होती हैं।

 

आंतों के कीड़ों को खत्म करने के लिए करें आक का इस्तेमाल (Calotropis Gigantea Uses to Cure Intestinal Worms in Hindi)

आक के एक पत्ते पर पानी के साथ महीन पिसा हुआ कत्था और चूना लगाएं। दूसरे पत्ते पर गाय का घी चुपड़ लें। दोनों पत्तों को जोड़ लें। इस प्रकार पत्तों को तैयार कर मटकी में रखकर जलाकर भस्म बना लें।

अब 125-250 मिलीग्राम भस्म में शहद मिलाकर सेवन करें। इससे सांस लेने की  परेशानी में लाभ होता है। सांस लेने की परेशानी में घी, गेहूं की रोटी या चावल के साथ खाने से कफ प्रकृति के पुरुषों में मैथुन-शक्ति को पैदा करता है। इससे कफ से पैदा होने वाले रोगों और आंत के कीड़े में लाभ होता है।  

 

पेचिश (खूनी दस्त) में आक (मदार) से लाभ (Aak Uses to Stop Dysentery in Hindi)

आक के जड़ की छाल को छाया में सुखाकर, पीसकर रख लें। इसे 125 मिलीग्राम मात्रा में ठंडे जल के साथ सेवन करने से खूनी दस्त (पेचिश) में लाभ होता है।

 

बवासीर की बीमारी में आक के सेवन से फायदा (Aak Cures Piles in Hindi)

  • 10 ग्राम आक के कोमल पत्‍तों के बराबर भाग में पांचों नमक लें। इसमें सबके वजन (भार) से चौथाई तिल का तेल और इतना ही नींबू का रस मिला लें। इस बर्तन के मुंह को कपड़ मिट्टी से बन्दकर आग पर चढ़ा दें। ठंडा होने पर सब चीजों को निकालकर, पीसकर रख लें। 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम मात्रा में गर्म जल, कांजी, छाछ या मद्य के साथ सेवन कराने से बादी बवासीर ठीक हो जाता है।
  • तीन बूंद आक के दूध को 1/2 ग्राम राई पर डालें। उस पर 250 मिलीग्राम जवाखार (यवक्षार) बुरक कर बताशे में रखकर खाने से बवासीर में लाभ होता है।
  • हल्दी चूर्ण को आक के दूध में सात बार भिगोकर सुखा लें। इसमें आक का दूध  मिलाकर उसकी लंबी-लंबी बाती बनाकर सुखा लें। इसे सुबह-शाम शौच के बाद जल में घिसकर मस्‍सों पर लेप करने से कुछ ही दिनों में बवासीर के मस्‍से सूखकर गिर जाते हैं।  
  • शौच जाने के बाद आक के दो-चार ताजे पत्ते तोड़कर गुदा पर इस प्रकार रगड़ें कि मस्सों पर दूध न लगे, केवल सफेदी ही लगे। इससे बवासीर में लाभ होता है।

 

आक के प्रयोग से भगन्दर का उपचार (Aak Cres Fistula in Hindi)

  • आक का 10 मिलीग्राम दूध (आक्षीर) और 2 ग्राम दारु हल्दी का महीन चूर्ण लें। दोनों को एक साथ मिलाकर बाती बना लें। इसे भगन्दर और साइनस के घावों पर लगाएं। इससे भगन्दर और साइनस में लाभ होता है।  
  • आक के दूध में कपास की रूई भिगोकर इसकी बाती को छाया में सुखा लें। इस बाती को सरसों के तेल में भिगोकर भगन्दर पर लगाने से लाभ होता है।
  • 50-50 ग्राम आक की छाल तथा आक की कोपलें या छोटी-छोटी कोमल पत्तियां को 200 मिलीग्राम आक के दूध में पीस लें। इसे मिट्टी के बर्तन में रखें। इसका मुंह बन्दकर रखकर 5 किलोग्राम उपलों की आंच पर पकाकर भस्म बना लें। अब निकाल कर मटर जैसी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसकी एक-दो गोली पानी के साथ लेने से भगंदर व नासूर में लाभ होता है।  

 

आक के उपयोग से हैजा में लाभ (Uses of Aak in Cholera in Hindi)

  • 2 भाग छाया में सूखी हुई आक की जड़ और 1 भाग काली मिर्च लें। दोनों को कूट-छानकर अदरक के रस में या प्‍याज के रस में मिलाकर 125 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। इसकी 1-1 गोली 2-2 घंटे में देने से हैजा (विसूचिका) में लाभ होता है।
  • आक के बिना खिले फूल 10 ग्राम तथा 5-5 ग्राम भुना सुहागा, लौंग, सोंठ, पिप्पली और काला नमक को कूट पीसकर रख लें। अब इसकी 125 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। इसे थोड़ी-थोड़ी देर में 1-1 गोली सेवन करें। विशेष अवस्था में 4-4 गोली एक साथ देने से हैजा में लाभ जल्दी होता है।
  • 10 ग्राम आक के फूल, 4 ग्राम भुना सुहागा, 6 ग्राम काली मिर्च लें। इनको ग्वारपाठा के गूदे में मिलाकर 125 मिग्रा की गोलियां बना लें। 1-1 गोली सुबह शाम देने से हैजा में फायदा होता है।
  • 10 ग्राम आक के फूलों की लौंग और 10 ग्राम काली मिर्च तथा 1 ग्राम शुद्ध हींग लें। इन्हें अदरक के रस की 10 भावना देकर (अदरक के रस में डुबोकर तीन दिन तक सुखाना) उड़द जैसी गोलियां बनाकर रखें। प्रत्येक उल्टी या दस्त के बाद 1-1 गोली अदरक, पोदीना या प्याज के रस के साथ सेवन कराने से दस्त और उल्टी में लाभ होता है।
  • 5 नग आक के पीले पत्ते (aak ka patta), जो झड़कर अपने से नीचे गिर गए हों, इसे लेकर आग में जला दें। जब यह जलकर कोयला हो जाए तो कलईदार बर्तन में 500 मिलीग्राम पानी में इन्हें बुझा दें। यह पानी रोगी को थोड़ा-थोड़ा करके पिलाएं। इसे हैजा में फायदा होता है।
  • आक के जड़ की सूखी छाल को बराबर भाग अदरक के रस में अच्‍छी तरह से कूट कर मिला लें। इसकी 125 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर धूप में सुखाकर रख लें। इसे शहर के साथ सेवन कराने से हैजा में फायदा होता है।

 

आक (मदार) के सेवन से एनीमिया में लाभ (Aak Benefits in Fighting with Anemia in Hindi)

  • आक के 24 पत्ते लेकर और 50 ग्राम मिश्री मिलाकर ओखली में घोटकर मिश्रण तैयार करें। इससे 125 मिग्रा की गोलियां बना लें। दिन में 3 बार दो गोली वयस्कों को सेवन कराने से सात दिन में एनीमिया में लाभ होता है। इस दौरान तेल, खटाई, मिर्च आदि से परहेज रखें।
  • अर्क के जड़ की छाल (1 ग्राम), काली मिर्च (12 नग) तथा पुननर्वा की जड़ (2-3 ग्राम) को पानी में घोट कर छान लें। इसे दिन में दो बार पिलाएं। गर्म और चिकनी वस्तुओं से परहेज रखें। यह एनीमिया में फायदेमंद है।
  • 1 नग आक का पका पत्‍ता पोंछकर साफ कर लें। उस पर 250 मिलीग्राम चूना लगा कर बारीक पीस लें। चने के आकार की (125 मिलीग्राम) गोलियां बना लें। सुबह के समय रोगी को दो गोली पानी से सेवन कराएं। इस दौरान दही तथा चावल लेना चाहिए। यह एनीमिया में फायदेमंद है।

 

आक के सेवन से पीलिया में लाभ (Aak benefits in Fighting with Jaundice in Hindi)

1 नग आक की कोपल को सुबह खाली पेट पान के पत्ते (aak ka patta) में रखकर चबाकर खाएं। इससे 3-5 दिन में पीलिया ठीक हो जाता है।

 


मूत्र रोग में आक के सेवन के लाभ (Benefits of Aak in Urinary Problems in Hindi)

आक के दूध में बबूल की छाल का थोड़ा रस मिलाएं। इसे नाभि के आस-पास और पेडु पर लेप करें। इसे रुक-रुक कर पेशाब आने की समस्‍या में लाभ होता है।

और पढ़ें: बबूल की छाल के औषधीय गुण

अंडकोष की सूजन में आक का उपयोग लाभदायक (Calotropis Gigantea Benefits in Reducing Testicle Swelling in Hindi)

8-10 ग्राम आक की छाल को छाया में सुखाकर रख लें। इस छाल को कांजी के साथ पीसकर लेप करने से अण्डकोष की सूजन ठीक होती है।

2-4 आक के पत्तों (aak ka patta) को तिल के तेल के साथ पत्थर पर पीसकर मलहम बना लें। इसका अंडकोष में लेप करने से अंडकोष के दर्द में लाभ होता है।

 

आक के प्रयोग से उपदंश या सिफलिस का इलाज (Uses of Aak in Treating Syphilis in Hindi)

  • 8-10 आक के पत्तों को आधा लीटर पानी में पका लें। इसे एक चौथाई रह जाने पर जो काढ़ा तैयार होगा उससे उपदंश या सिफलिस के घाव को धोएं। इससे सिफलिस में लाभ होता है।
  • आक के छाल को पानी में पीसकर लगाने व 1-2 ग्राम छाल का सेवन करें। इससे उपदंश या सिफलिस में लाभ होता है।
  • मलमल के डेढ़ फूट लम्बे और 4 अंगुल चौड़े कपड़े को आक के दूध में 21 बार भिगोकर सुखा लें। इसको मिट्टी के बर्तन में रखकर भस्म बना लें। 65 मिलीग्राम भस्म को पान में रखकर सेवन करने से उपदंश या सिफलिस में लाभ होता है। इस दौरान मिर्च-मसाले से परहेज रखें और घी का अधिक सेवन नहीं करें।  
  • 1 भाग आक के जड़ की छाल तथा आधा भाग काली मिर्च को महीन पीसकर उसमें 10 भाग गुड़ मिला लें। इसकी चने जैसी गोलियां बनाकर रख लें। 1 या दो गोली को पानी के साथ सुबह शाम सेवन कराएं। यह उपदंश या सिफलिस में लाभप्रद है। केवल छाल के चूर्ण में भी यह मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है।
  • आक के जड़ की छाल 2 ग्राम तथा डेढ़ भाग सत्यानाशी की छाल और चिरचिटा (अपामार्ग) जड़ की छाल को मिलाकर चूर्ण बना लें। इसके धुआं को उपदंश या सिफलिस के घाव पर लगाने से उपदंश या सिफलिस में लाभ होता है।

 

शीघ्रपतन में करें आक का प्रयोग (Benefits of Aak in Sex Related Problem (Premature Ejaculation) in Hindi)

छुहारों के अन्दर की गुठली निकाल कर उनमें आक का दूध भर दें। इसके बाद इनके ऊपर आटा लपेट कर पकाएं। ऊपर का आटा जल जाने पर छुआरों को पीसकर 125 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। रात के समय 1-2 गोली खाकर तथा दूध पीने से शीघ्रपतन की समस्या में लाभ मिलता है।  

 

आक के इस्तेमाल से नपुसंकता का उपचार (Calotropis Gigantea Benefits in Impotence in Hindi)

  • 20 ग्राम छाया में सुखाई हुई आक की जड़ के चूर्ण को आधा लीटर दूध में डालकर उबाल लें। इस दूध से दही जमाकर घी तैयार करें। इस घी के सेवन से नपुंसकता दूर होती है।
  • आक का दूध, शुद्ध शहद और गाय का घी को बराबर भाग में मिलाकर 4-5 घंटे फेंट कर कर शीशी में भरकर रख लें। लिंग की सीवन और सुपारी को बचाकर इसकी धीरे-धीरे मालिश करें। ऊपर से खाने का पान और अरंडी का पत्‍ता बांध दें। इस तरह से सात दिन मालिश करें। इसके बाद फिर 15 दिन छोड़कर फिर से मालिश करने से शिश्न के समस्त रोगों में लाभ होता है।
  • आक के एक पत्ते (aak ka patta) पर पानी के साथ महीन पिसा हुआ कत्था और चूना लगाएं। दूसरे पत्ते पर गाय का घी चुपड़ लें। दोनों पत्तों को जोड़ लें। इस प्रकार पत्तों को तैयार कर मटकी में रखकर जलाकर भस्म बना लें। अब 125-250 मिलीग्राम भस्म में शहद मिलाकर सेवन करें। इसे घी, गेहूं की रोटी या चावल के साथ खाने से कफ प्रकृति के पुरुषों में मैथुन-शक्ति को पैदा करता है।

 

मासिक विकार या महिलाओं के रोग में करें आक का उपयोग (Benefits of Aak in Curing Menstrual or Women Problem in Hindi)

  • आक की जड़ के चूर्ण को भांगरे के रस (भृंगराज के रस) में 2-3 बार अच्छी तरह मिला लें। अब इसके मटर के बराबर गोलिया बनाकर 1-1 गोली सुबह शाम गर्म पानी या दूध के साथ सेवन करें। इससे योनि मजबूत होती है और मासिक धर्म भी ठीक से होने लगता है। जिन्‍हें माहवारी ज्‍यादा आती है उन्‍हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए।  
  • उड़द के 100 ग्राम आटे में थोड़ा सेंधा नमक मिला लें। इसमें आक के दूध में सात बार मिलाकर छोटी-छोटी बाती बना लें। इसको योनि मार्ग में रखने और उचित मात्रा में इसका सेवन करें। इससे सभी प्रकार के योनि संबंधी बीमारियां ठीक होंगी।  
  • सफेद आक की छाया में सूखी जड़ को पीसकर चूर्ण बना लें। इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में 250 मिली गाय के दूध के साथ सेवन कराएं। इस दौरान ठंडी चीजों को लेने से बचें। इससे बन्द ट्यूब (डिम्बवाहिनी) व नाड़ियां खुलती हैं तथा योनि रोग और मासिक विकारों ठीक होते हैं।  

 

आक के औषधीय गुण से मिलता है पीठ और बगल के दर्द से छुटकारा (Aak Uses in Getting Relief in Back and Waist Pain in Hindi)

आक के दूध में थोड़े से काले तिलों को खूब फेंट कर लेप बना लें। जब लेप बन जाए तो उसे गर्म कर दर्द वाले स्थान पर लेप कर और ऊपर से आक के पत्तों पर तिल का तेल चुपड़ कर तवे पर गर्म कर लें। इसे दर्द वाले स्थान पर पट्टी से बांधने पर शीघ्र लाभ होता है।

 

गठिया के उपचार में आक से लाभ (Uses of Aak in Arthritis Treatment in Hindi)

  • आक का फूल, सोंठ, काली मिर्च, हल्दी व नागरमोथा को बराबर भाग में लेकर जल के साथ पीसकर 65 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। 2-2 गोली सुबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से आमवात यानी गठिया में लाभ होता है।
  • 1 भाग आक की जड़ की छाल, 1-1 ग्राम काली मिर्च, कुटकी और काला नमक सबको मिलाकर जल के साथ महीन पीस लें। इसकी चने जैसी गोलियां बना लें। किसी भी अंग में वात से होने वाले दर्द में सुबह शाम 1-1 गोली गर्म पानी के साथ सेवन करें।
  • आक की छाए में सुखाई हुई एक किलो जड़ को कूट करके 8 लीटर पानी में उबालें। पानी जब 2 लीटर बच जाए तो उसमें 1 लीटर अरंडी का तेल मिलाकर पकाएं। जब बर्तन में केवल तेल रह जाए तो उसे छानकर शीशी में भरकर रख लें। इसकी मालिश से भी वात से होने वाली पीड़ा और गठिया में लाभ होता है।
  • वात रोगी को आक की रूई से भरे कपड़े पहनने तथा इसकी रूई की रजाई पर सोने से बहुत लाभ होता है।
  • वात रोग वाले किसी एक अंग पर वायुनाशक तेल की मालिश कर, ऊपर से इस आक की रूई को बाँधने से बहुत लाभ होता है।

 

पैरों के छाले ठीक करने में आक का औषधीय गुण उपयोगी (Aak Milk is Useful in Footsore in Hindi)

पैदल यात्रा करने से जो छाले आदि हो जाते हैं, उसमें आक के दूध को लगाने से अत्यन्त लाभ होता है।  

आक की जड़ को घिस कर लेप करने से उरुस्तम्भ में लाभ होता है।

 

आक का गुण करे हाथीपांव (फाइलेरिया) का उपचार (Benefits of Aak in Filariasis Treatment in Hindi)

10 ग्राम आक जड़ की छाल तथा 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण को मिलाकर आधा लीटर पानी में पकाएं। इसका आठवां हिस्‍सा रह जाने पर काढ़ा तैयार हो जाएगा। उस काढ़े को सुबह जल में 1 ग्राम शहद और 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन कराएं। इसके साथ ही आक के जड़ को छाछ में पीसकर हाथी पांव रोग पर गाढ़ा लेप करें। इससे हाथी पांव या फाइलेरिया (श्लीपद) में लाभ होता है।

आक के जड़ की छाल और अडूसा की छाल को कांजी के साथ पीसकर लेप करने से भी हाथी पांव में लाभ होता है।

 

घाव सुखाने के लिए करें आक का प्रयोग (Aak Helps in Healing Wound in Hindi)

  • जो चोट या घाव पुराना हो गया हो, और घाव के भरने में दिक्कत आ रही हो तो उसमें आक की रूई को रखकर बांध देना चाहिए। रोजाना घाव को साफ कर रूई को बदलते रहने से कुछ ही दिनों वह घाव भरने लगता है।
  • जिस चोट से खून बह रहा हो, उस पर आक की रूई को रखकर बांध देने से तुरंत खून का बहना रुक जाता है। ताजी रूई ज्‍याद लाभकारी होती है।  
  • 1 लीटर आक के पत्तों (aak ka patta) का रस, 125 मिलीग्राम कच्ची हल्दी का रस और 250 मिलीग्राम  तिल के तेल को एक साथ मिलाकर पकाएं। केवल तेल बच जाने पर इसे छानकर रख लें। इसको लगाने से घाव में लाभ होता है।
  • 2 ग्राम आक के जड़ की छाल के चूर्ण में 10 मिलीग्राम नारियल तेल या घी मिला लें। इस तरह तैयार पेस्‍ट को संक्रमण वाले घाव पर लगाने से घाव तुरंत ठीक होने लगता है।  

 

दाद, खाज और खुजली से मुक्ति दिलाए आक (Aak Cures Skin Diseases in Hindi))

  • आक के दूध में बराबर भाग में शहद मिलाकर लगाने से तुरंत दाद ठीक हो जाता है।
  • 2 ग्राम आक के जड़ के चूर्ण को 2 चम्मच दही में पीसकर लगाते रहने से भी दाद में लाभ होता है।
  • आक के फूल का गुच्छा तोड़ने पर जो दूध निकलता है, उसमें नारियल का तेल मिलाकर लगाने से तुरंत खुजली ठीक होती है।
  • 100 मिलीग्राम आक का दूध, 400 मिलीग्राम तिल या सरसों का तेल, 200 ग्राम हल्दी चूर्ण और 15 ग्राम मैनसिल लें। सबसे पहले मैनसिल और हल्दी को फेंट लें। इसमें दूध मिलाकर इसका लेप-सा बना लें। अब इसमें तेल और 2 लीटर पानी मिलाकर तेल को पका लें। इस तेल को लगाने से खाज, खुजली, पामा आदि चर्म रोग दूर होते हैं।
  • 1 लीटर आक के पत्‍तों का रस, 50 ग्राम हल्दी चूर्ण और आधा लीटर सरसों तेल को कम आंच पर पकाएं। केवल तेल बच जाने पर इसे छान कर शीशी में भर लें। इसकी मालिश से खाज, खुजली आदि नष्ट होते हैं।
  • 1 लीटर आक (calotropis) के ताजे पत्तों का रस, 2 लीटर गाय का दूध, 6-6 ग्राम सफेद चन्दन, लाल चन्दन, हल्दी, सोंठ और सफेद जीरा का पेस्‍ट बनाकर 1 किग्रा घी में पकाएं। बर्तन में केवल घी रह जाने पर इसे छानकर रख लें। इस घी की मालिश करने से खाज, खुजली आदि में लाभ होता है।
  • एक भाग आक का दूध ताजा व सुखाया हुआ तथा 100 बार पानी से धोया हुआ गाय का मक्खन को खूब फेंट लें। अब इससे मालिश करें और 2 घंटे तक ठंडे पानी और ठंडी हवा से रोगी को बचाए रखें। इसके प्रयोग से खाज, खुजली में तुरंत ही लाभ होता है।   
  • 5 ग्राम सफेद आक की जड़ को 20 मिली नींबू के रस में पीसकर, घाव पर लेप करने से घाव सुख हो जाता है।

 

बाला रोग (नारू) के उपचार के लिए करें आक का इस्तेमाल (Uses of Aak In Naroo Disease in Hindi)

आक के कोमल पत्‍ते 7 नग और 50 ग्राम गुड़ को कूट लें। इसकी 125 मिलीग्राम की गोलियां 0.5-1 ग्राम बना लें। 1-1 गोली दिन में तीन बार पानी के साथ सेवन कराएं। इससे बाला रोग या नारू रोग में लाभ होता है।

आक के 8-10 फूलों को पीसकर पुल्टिस बनाकर बांधने से या आक के दूध का लेप करने से नहरूवा निकल जाता है।

 

कुष्‍ठ रोग से निजात पाने के लिए करें आक की छाल का उपयोग (Aak Bark Treats Leprosy in Hindi)

  • 2 ग्राम आक (calotropis) की सूखी हुई जड़ को कुट कर 400 मिलीग्राम जल में पकाएं। 50 मिलीग्राम शेष रहने पर सेवन करने से कुष्ठ की बदबूदार बीमारी में लाभ होता है।
  • आक की छाया में सूखी हुई जड़ का चूर्ण 250 ग्राम, शुंठी का चूर्ण 250 ग्राम को शहद के साथ मिलाकर रोजाना तीन बार सेवन कराएं। इसके साथ ही छाल को सिरके में पीसकर पतला-पतला लेप करते रहें। यह प्रयोग लम्बे समय तक करें। इससे कुष्ठ में लाभ होता है।
  • छाया में सुखाकर आक के फूलों (madar ka phool) का महीन चूर्ण बना लें। आधा ग्राम सुबह शाम ताजे जल से सेवन करने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है। कोमल प्रकृति वालों को इसकी मात्रा कम लेनी चाहिए।
  • आक के 10-20 फलों को मिट्टी के बर्तन में भरकर, बर्तन का मुंह बंद कर उपलों की आग में पूंक दें। ठंडा होने पर अंदर से भस्म को निकाल कर सरसों के तेल में मिलाकर लगाएं। यह बदबूदार कुष्ठ रोग की शुरुआती अवस्था में उपयोगी होता है।
  • आक के दूध को ईख (गन्ना) के रस के साथ मिलाकर लेप करने से कपाल कुष्ठ में लाभ होता है।
  • 20 मिलीग्राम आक के दूध में 5 ग्राम बावची और आधा ग्राम हरताल के चूर्ण को मिलाकर पीस लें। इसे लेप करने से सफेद (श्‍वेत) कुष्‍ठ में लाभ होता है।

 

मुंह की झांई, चेहरे के दाग-धब्बे आदि दूर करने के लिए करें आक का इस्‍तेमाल (Aak Cures Freckle, Melasma and Sunspots in Hindi)

3 ग्राम हल्दी के चूर्ण को 5-7 बूंद आक (calotropis) के दुध व गुलाब जल में घोटकर आंख को बचाकर झांई वाले स्‍थान पर लगाएं। इससे लाभ होता है।

 

कोमल प्रकति वाले लोगों को आक के दूध की जगह आक का रस इस्‍तेमाल करना चाहिए।   

आक के पत्तों पर एरंड तेल चुपड़कर फोड़ों पर बांधने से पित्त से होने वाले सूजन ठीक होता है।

 

आक के उपयोग से करें मिरगी का उपचार (Calotropis Gigantea Benefits Epilepsy Treatment in Hindi)

1 भाग सफेद आक के फूल में 3 भाग पुराना गुड़ लेकर पीस लें। इसकी 125 मिग्रा की गोलियां बना लें। सुबह-शाम 1 या 2 गोली ताजे जल के साथ सेवन करें। इसके प्रयोग से मिरगी (अपस्मार) में लाभ होता है।

1 भाग आक के ताजे फूल (madar ka phool) में काली मिर्च 2 भाग तथा 3 भाग गुड़ मिला लें। इसे महीन पीसकर 125 मिग्रा की गोलियां बना लें। इसका दिन में 3-4 बार सेवन करने से अपस्मार में लाभ होता है।

 

संवेदन शून्यता के उपचार में लाभप्रद है आक (Calotropis Gigantea Uses in Getting Control Over Senselessness in Hindi)

आक के 8-10 पत्‍तों को 250 मिलीग्राम तेल में तलकर छान लें। इस तेल की मालिश करने से संवेदन शून्यता में लाभ होता है।

आक के दूध में मालकांगनी का तेल मिलाकर मालिश करने से आधे अंक का वात, अर्दित (Facial Paralysis) आदि वात से होने वाले रोगों में विशेष लाभ होता है।

 

आक के गुण से मिलती है बुखार उतारने में मदद (Aak Uses in Fighting with Fever in Hindi)

  • 1 भाग आक की नई कोपल, 1 नग तथा आक के फूल (madar ka phool) की बंद कली को गुड़ के साथ पीस लें। इसकी 125 मिलीग्राम की गोली बनाकर बुखार आने के 2 घंटे पहले सेवन करें। इससे बुखार दूर होता है।
  • छाए में सुखाए गए आक के जड़ की छाल 2 भाग का महीन चूर्ण और 1 भाग काली मिर्च का चूर्ण लें। दोनों को गाय के दूध या बड़ के दूध में घोट कर चने जैसी गोलियां बनाकर रखें। 1-2 गोली को पानी के साथ सेवन करने से बुखार ठीक होता है।
  • 1 भाग आक का दूध और 10 भाग मिश्री को घोट कर शीशी में भर कर रखें। 65 मिलीग्राम से 125 मिलीग्राम मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से विशेष लाभ होता है। यह मलेरिया बुखार के लिए कुनैन से भी बढ़कर लाभकारी है।
  • 1 भाग आक के जड़ की छाल की भस्म तथा 6 भाग शक्कर लें। दोनों को मिलाकर अच्‍छी तरह से घोंट लें। 125-250 मिलीग्राम की मात्रा में सेवन करने से बुखार का उपचार होता है।
  • आक (madar) के पत्‍तों की भस्म बनाकर 125 मिलीग्राम भाग में शहद मिलाकर सेवन करने से बुखार उतर जाता है।
  • 4 बूंद आक का दूध, 10 बूंद कच्चे पपीते का रस और 15 बूंद चिरायते का रस मिलाकर दिन में 3 बार गोमूत्र के साथ सेवन करें। इससे गंभीर बुखार उतर जाती है।
  • आक (मोटी कूटी हुई) की आधा किलोग्राम जडों को 4 लीटर पानी में उबालें। एक लीटर पानी बच जाने पर छान लें। उसमें बराबर भाग में मिश्री तथा 6-6 ग्राम पीपल, वंश लोचन, इलायची, काली मिर्च और मुलेठी का चूर्ण मिला लें। इसे हल्‍की आंच पर इसका शरबत तैयार कर लें। 5-10 मिलीग्राम मात्रा में सेवन करने से यह खांसी, कफ, वात रोग, हाथ-पैर का दर्द, पेट के रोग और पक्षाघात (लकवा) आदि रोगों को ठीक करता है।  

 

आक के प्रयोग से पारे की विषाक्‍तता दूर होती है (Aak helps Reduce Mercury Poisoning in Hindi)

आक की लकड़ी के कोयले को बराबर भाग में मिश्री के साथ पीस लें। इसे 6 ग्राम की मात्रा में रोज सेवन करने से शरीर में रुका हुआ कच्चा पारा पेशाब के रास्ते निकल जाता है।

 

बिच्छू के काटने पर करें आक का प्रयोग (Benefits of Calotropis Gigantea in Scorpion Biting in Hindi)

आक की जड़ तथा सोंठ के चूर्ण को आक के दूध में मिलाकर गोली बना लें। इस गोली को पीसकर दंश वाले स्थान पर लगाने से बिच्छू जलन और दर्द में आराम मिलता है।  

 

इस्तेमाल के लिए आक के उपयोगी हिस्से (Useful Parts of Aak)

आक के पौधे (madar plant) के इन भागों का चिकित्सा में प्रयोग किया जाता हैः-

पत्‍ता (aak ka patta)

फूल

जड़

छाल

पंचांग

 

आक लवण कैसे बनाएं (How to Make Aak Salt?)

आक के पत्तों में बराबर भाग में सेंधा नमक मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रखें। इस बर्तन का मुंह अच्छी तरह बंद कर दें। ऊपर से कपड़मिट्टी को आग में रख दें। इसके ठंडा होने पर आंच से प्राप्त भस्म को कांच के बर्तन में सुरक्षित रख लें।

 

आक के जड़ का चूर्ण कैसे बनाएं (How to Make Aak Root Powder)

रेत में पैदा हुए पुराने आक (madar) की जड़ को चैत्र-वैशाख (अप्रैल-मई) महीने में लें। उसे पानी से अच्‍छी तरह से साफ कर लें। उसे छाया में इतनी देर पड़ी रहने दें कि उसमें चीरा देने से दूध निकलना बंद हो जाए। अब इसके ऊपर के छिलके को चाकू से खुरच लें और अंदर की छाल को छाए में सुखाएं। इसका महीन चूर्ण बनाकर शीशियों में भरकर सुरक्षित रख लें।

प्रतिनिधि अंग :  अनन्त जड़ इसका प्रतिनिधि द्रव्य है।

 

आक के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Aak?)

चिकित्सकीय प्रयोग के लिए आक के पौधे (madar plant) का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

 

आक से नुकसान (Aak Side Effects)

आक का पौधा (madar plant) विषैला होता है। इसके दूध का अधिक मात्रा में सेवन करने से उल्टी व दस्‍त होकर मनुष्य की मृत्यु हो सकती है। इसलिए इसका उपयोग सावधानी पूर्वक चिकित्सक के देखरेख में करना चाहिए।

घी और दूध के प्रयोग से आक से होने वाले हानिकारक प्रभावों को दूर किया जा सकता है।  

 

आक के इस्तेमाल से संबंधित विशेष सावधानियां (Special Precaution about Aak Uses)

आक (madar) का दूध त्वचा के पामा, खुजली आदि बीमारियों पर तो ठीक से काम करता है लेकिन घाव या चोट पर गलत तरीके से लगाने पर यह तेज जलन को पैदा कर घाव को फैला देता है। मांस को गला और सड़ा कर असहनीय दर्द पैदा करता है। ऐसी स्थिति में रोगी को ढाक (पलास) की छाल का काढ़ा तथा हल्दी, तिल और दूब को बकरी के दूध के साथ पीसकर लेप करने से लाभ होता है।

आपको यह ध्यान रखना है कि आक का दूध विशेष तीखा होता है। इसे गलत तरीके से सेवन करने पर बहुत दस्त लगते हैं। पेट की आंते कट जाती हैं और अन्त में बेहोश होकर मृत्यु तक हो जाती है।

आंख के अंदर इसका थोड़ा भी स्पर्श हो तो आंख में असहनीय दर्द होकर आंख फटने लगती है। इसलिए भूलकर भी इसे आंख में नहीं लगने देना चाहिए। इसे शुद्ध करके प्रयोग में लाना जरूरी है।

दोनों प्रकार के आक (madar) द्रव्‍य की शुद्धि पंचगव्य में मिलाने से होती है। इसमें थूहर का दूध मिला लेने से इसकी तीव्र रेचकता दूर हो जाती है।

 

आग का पौधा कहां पाया या उगाया जाता है (Where is Aak Found or Grown?)

आग का पौधा (aak plant) अपने आप पैदा होता है और पूरे भारत में हर जगह पाया जाता है। यह जंगल, खेतों और घरों के आस-पास भी होता है।