रुमेटाइड आर्थराइटिस

डिस्क्रिप्सन

परिभाषा

रूमेटिक अर्थराइटिस (आरए) या गठिया, एक दीर्घकालिक स्वप्रतिरक्षी विकार है जो मुख्य रूप से जोड़ों को प्रभावित करता है। यह एक चिरकालिक रोग है जो समय के साथ धीरे-धीरे बद से बदतर होता जाता है जिससे जोड़ों में सूजन होने लगता है और दर्दनाक विकृति और स्थिरता आने लगती है। यह मुख्य रूप से अँगुलियों, कलाइयों, पाँव और टखनों के छोटे-छोटे जोड़ों को प्रभावित करता है।

कारण और जोखिम कारक
 
इसका सटीक कारण अभी भी अज्ञात होने के बावजूद ऐसा माना जाता है कि यह इन कारकों के मिलने से होता है:    
1.आनुवंशिक कारक: आरए स्वभाव से वंशानुगत होता है। कुछ ऐसे जींस की पहचान हुई है जो गठिया के जोखिम को बढ़ा देते हैं।
2.पर्यावरणीय कारक: कुछ विशेष पर्यावरणीय कारक एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इनमें शामिल है धूम्रपान, सिलिका के संपर्क में आना, कीटनाशक और वायु प्रदूषण
3.इन्फेक्शन: ऐसा माना जाता है कि कुछ ख़ास बैक्टीरिया, वायरस और फंगस, गठिया के जोखिम को बढ़ा देते हैं।
4. गठिया एक स्वप्रतिरक्षी विकार है जहाँ प्रतिरक्षा तंत्र हमारे ही शरीर पर हमला करने लगता है। रक्त की धारा में मौजूद एंटीबॉडीज शरीर के ऊतकों को ही निशाना बनाने लगते हैं और इसके परिणामस्वरूप सूजन हो जाता है।
5.गठिया, आम तौर पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 3 गुना ज्यादा होता है। प्रचलित दर 40 साल के बाद बढ़ जाती है। 
6.गठिया का एक मजबूत पारिवारिक इतिहास एक व्यक्ति के इसके होने की सम्भावना को बढ़ा देता है। 
 
संकेत और लक्षण
 
1.गठिया एक प्रणालीगत बीमारी है जिसका मतलब है कि सूजन, जोड़ों के अलावा अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
2.गठिया रोग आम तौर पर दायीं और बायीं दोनों तरफ एक साथ छोटे-छोटे जोड़ों में कोमलता और दर्द के साथ शुरू होता है और उसके बाद कड़ापन या सूजन होने लगता है जिससे जोड़ों का आन्दोलन सीमित हो जाता है।  
3.हाथ, पैर और गर्दन के छोटे-छोटे जोड़ आम तौर पर शामिल होते हैं। कुछ लोगों को भूख न लगने, बुखार, चकत्ते और थकान का अनुभव भी हो सकता है। 
आम तौर पर, पहले कम हो जाते हैं और कुछ हफ्ते से महीने में वैकल्पिक रूप से फिर से भड़क उठते हैं। इसलिए अचानक उद्वेग के बाद कुछ महीने तक लक्षण मुक्त अवधि देखने को मिल सकती है।  
 
जाँच-पड़ताल
 
1.गठिया का निदान मुख्य रूप से संकेतों और लक्षणों के विस्तृत इतिहास, परीक्षा उसके बाद एक्स-रे, और पुष्टिकारक खून की जांच के माध्यम से किया जाता है।
2.खून की जांच में, रूमेटॉयड फैक्टर (आरएफ) और एंटी-सिट्रुलिनेटेड प्रोटीन एंटीबॉडी (एंटी-सीसीपीएबी) की मौजूदगी की जांच की जाती है। 
3.ईएसआर, सी-रिएक्टिव प्रोटीन, किडनी फंक्शन, लीवर टेस्ट, फुल ब्लड काउंट जैसे अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं।
 
इलाज
 
गठिया के इलाज में लक्षणों की गंभीरता के आधार पर निम्नलिखित में से एक या एक से अधिक दवाइयाँ शामिल होती हैं
1.दवाइयाँ: दर्द और सूजन का इलाज करने के लिए और जोड़ों के नुकसान को कम करने के लिए एनएसएआईडीएस (नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लामेटरी ड्रग्स) और डीएमएआरडी (डिजीज मोडिफाइंग एंटी-रूमेटिक ड्रग्स) जैसी दर्दनाशक दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है।
2.सर्जरी: राहत दिलाने के लिए सिनोवेक्टोमी की जाती है यानी जोड़ों की क्षतिग्रस्त परत को निकाल दिया जाता है। बाद के चरण में, जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करनी पड़ सकती है।
3.फिजियोथेरपी या भौतिक चिकित्सा: जोड़ों को कोमल और लचीला रखने के लिए फिजियोथेरपी करवाने का सुझाव दिया जाता है। समग्र शारीरिक क्रिया को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना जरूरी है। रोजमर्रा के आधार पर जोड़ों के दर्द और सूजन से अस्थायी रूप से राहत दिलाने के लिए गर्म पानी की थैली या इलेक्ट्रिक हीटिंग बैग का इस्तेमाल किया जा सकता है।  
4.आहार: ओमेगा-3 वसीय अम्ल और गामा-लिनोलेनिक अम्ल युक्त आहार, जोड़ों के दर्द, कोमलता, और कड़ापन को कम करने में कारगर साबित हुआ है। 
 
जटिलताएं और आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए
 
बाद के चरण में सूजन, हमारे शरीर में अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। गठिया के कारण अन्य अंगों से संबंधित संकेत और लक्षण::
1.फेफड़े: फेफड़े के चारों तरफ स्थित झिल्ली में सूजन होने से सांस की तकलीफ हो सकती है।
2.हृदय: हृदय के आसपास सूजन होने से छाती में दर्द हो सकता है।
3.आँखें: आँखों की ग्रंथियों में सूजन होने से दर्द, लालिमा और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता आ सकती है।
4.खून: लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है और एनीमिया यानी रक्ताल्पता नामक बीमारी हो जाती है।
5. त्वचा: रूमेटॉयड गांठें (सख्त गांठें जो प्रभावित जोड़ों के निकट त्वचा के नीचे बन सकती हैं। आकार मटर के आकार से अखरोट के आकार तक हो सकता है, ऐसा माना जाता है कि गठिया के कारण रोगियों को त्वचा का कैंसर होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है।
 
 
Content Details
Last updated on:
28 Dec 2016 | 12:02 AM (IST)
editorial-image
Want to know more?
Read Our Editorial Policy

ज़्यादा पूछे जाने वाले प्रश्‍न

अभी उपलब्ध नही है, जल्द ही अपडेट होगा