हाइपरटेंशन

डिस्क्रिप्सन

परिभाषा

बढ़ा हुआ रक्तदाब या हाई ब्लड प्रेशर  हाइपरटेंशन यानी उच्चरक्तचाप के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। यह आपकी रक्त वाहिनियों से होकर बहने वाले खून के   लगातार बहुत ज्यादा होने के परिणामस्वरूप होता है। 
 
हाइपरटेंशन के कारण

हाइपरटेंशन दो प्रकार के होते हैं, आवश्यक हाइपरटेंशन (प्राथमिक हाइपरटेंशन) और माध्यमिक हाइपरटेंशन। आवश्यक हाइपरटेंशन एक ऐसी अवस्था है जिसमे हाइपरटेंशन का सटीक कारण मालूम नहीं होता है। इसके कई कारण होते हैं:
1.आनुवंशिक कारक: हाइपरटेंशन, परिवारों में मौजूद रहता है और हाइपरटेंशन वाले माता-पिता के बच्चों का बल्ड प्रेशर बढ़ने की सम्भावना रहती है।
2. जन्म के समय मौजूद रहने वाले कारक: जन्म के समय कम वजन होने से आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर होने की सम्भावना रहती है।
माध्यमिक हाइपरटेंशन एक ख़ास और संभवतः इलाज से ठीक होने वाले कारण के कारण होता है जैसे:
1. किडनी विकार  
2. एन्डोक्राइन कारण: कोन का सिंड्रोम, एड्रेनल हाइपरप्लेसिया, फियोक्रोमोसाइटोमा, कुशिंग का सिंड्रोम, और एक्रोमेगली।
3.जन्मजात कार्डियोवैस्कुलर दोष
4.दवा: मौखिक गर्भ निरोधक, एनएसएआईडी, स्टेरॉयड, हाइपरटेंशन रोधी दवा और गैरकानूनी दवा जैसे कोकीन और एम्फेटेमिन।
 
हाइपरटेंशन के जोखिम कारक

कुछ आम कारक निम्नलिखित हैं जो हाई ब्लड प्रेशर होने की सम्भावना को बढ़ाते हैं:
1)ज्यादा उम्र: 35 साल से ज्यादा उम्र के वयस्क लोगों को हाई ब्लड प्रेशर होने का ज्यादा खतरा रहता है।
2)पारिवारिक इतिहास: यदि आपके माता-पिता या दादा-दादी को हाई ब्लड प्रेशर था तो आपको भी हाई ब्लड प्रेशर होने की ज्यादा सम्भावना है।
3) ज्यादा वजन / मोटापा: यदि आप मोटे/मोटी हैं या आपका वजन ज्यादा है तो आपको हाइपरटेंशन होने का ज्यादा खतरा है। 
4)आहार: यदि आपके आहार में नियमित रूप से ऐसे भोजन शामिल हैं जिनमें चीनी या वसा का परिमाण अधिक होता है और खनिज पदार्थों और फाइबर का परिमाण कम होता है तो इसका मतलब है कि आप अपने शरीर को हाइपरटेंशन होने के ज्यादा जोखिम में डाल रहे हैं। ज्यादा सोडियम का सेवन करने से (जो नमक से आता है) हाइपरटेंशन का जोखिम बढ़ जाता है।
5)व्यायाम का अभाव: कम शारीरिक क्रियाकलाप करने से वजन बढ़ जाता है जिससे हाइपरटेंशन होने का खतरा बढ़ जाता है।
6)नियमित रूप से बहुत ज्यादा शराब पीना: रोज दिन भर में दो बार से ज्यादा शराब पीने से हाई ब्लड प्रेशर होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
 
संकेत और लक्षण

हाइपटेंशन वाले अधिकांश लोगों में ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा होने के बावजूद उनमें इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। कुछ लोगों को सिरदर्द, नाक से खून बहने या धकधकी की समस्या हो सकती है। इसलिए, आम तौर पर एक रूटीन चेकअप के दौरान अचानक से इसका पता चलता है। 
 
जांच-पड़ताल

आपको 35 साल का होने के बाद, ख़ास तौर पर यदि आप अन्य जोखिम कारकों के अधीन हैं, अपने ब्लड प्रेशर की जांच करवानी चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर के घटते-बढ़ते रहने की सम्भावना के कारण, आपको दिन के अलग-अलग समय पर या विशेष ट्रिगर जैसे व्यायाम, परिश्रम इत्यादि के बाद इसकी माप करवानी चाहिए। लगभग 3-4 अपॉइंटमेंट तक प्रत्येक मुलाक़ात के दौरान दो से तीन ब्लड प्रेशर की रीडिंग लेना बहुत जरूरी है  ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रोगी वास्तव में हाइपरटेंशन से पीड़ित है।  माध्यमिक हाइपरटेंशन से छुटकारा पाने के लिए कम्प्लीट ब्लड काउंट, किडनी फंक्शन टेस्ट, सीरम लिपिड प्रोफाइल और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) जैसे अन्य जांच-पड़ताल करने पड़ सकते हैं। 
 
इलाज  

ऐसी कई दवाइयाँ हैं जैसे बेटा ब्लॉकर, अल्फा ब्लॉकर, एसीई इन्हिबिटर, और मूत्रवर्धक इत्यादि जो हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। हाइपरटेंशन, अवस्था की गंभीरता और अन्य सहवर्ती बीमारियों की मौजूदगी या गैर मौजूदगी के कारण के आधार पर, आपका डॉक्टर ऐसी दवा का चयन करेगा जो आपके हाइपरटेंशन का इलाज करने के लिए सर्वोत्तम है।  
 
 
जटिलताएं और आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? 

ऊपर उल्लिखित जोखिम कारकों पर विचार करने के बाद, यदि आपको संदेह है कि आपका प्रेशर बढ़ सकता है तो आपको कुछ दिन तक नियमित रूप से इसकी जांच करवाने के लिए किसी दोकोटर के पास जाना चाहिए ताकि रोग की पहचान की जा सके और उसके अनुसार आपके लिए इलाज का निर्धारण किया जा सके। अनुपचारित हाइपरटेंशन की जटिलताओं में शामिल है:  चिरकालिक किडनी विफलता, हृदय रोग जैसे दिल का दौरा, और स्ट्रोक का जोखिम। मस्तिष्क में आतंरिक रक्तस्राव के कारण अचानक मौत भी हो सकती है। 
 
 
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Last updated on:
28 Dec 2016 | 12:02 AM (IST)
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