हार्ट अटैक

डिस्क्रिप्सन

परिभाषा

हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा या मायोकार्डियल इन्फार्कशन का मतलब है हृदय की मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति के अभाव के कारण हृदय ऊतक की मृत्यु। यह तब हो सकता है जब फैट या कोलेस्ट्रॉल का जमाव होने लगता है जिससे कोरोनरी धमनियां संकुचित होने लगती हैं या जब अन्य पदार्थ जैसे खून का थक्का, खून के बहाव को अवरुद्ध कर रहा होता है।  इससे हृदय की मांसपेशी का एक हिस्सा स्थायी रूप से बर्बाद या नष्ट हो सकता है।

कारण और जोखिम कारक

A. कोरोनरी हृदय रोग- ज्यादातर दिल का दौरा तब पड़ता है जब कोरोनरी धमनियों की दीवारों के भीतर वसीय पदार्थों के जमाव अर्थात् एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण कोरोनरी धमनियां संकुचित हो जाती हैं। यदि इस वसीय पदार्थ का एक टुकड़ा अपनी जगह से अलग हो जाता है तो उसकी वजह से खून का थक्का बन सकता। यह थक्का धमनी को अवरुद्ध कर देता है और हृदय तक होने वाली रक्त की आपूर्ति को बंद कर देता है।
B. कोरोनरी धमनियों का ऐंठन- यदि एक कोरोनरी धमनी ऐंठ जाती है तो हृदय तक होने वाली रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। कोकीन दवा का उपयोग, कोरोनरी धमनियों में ऐंठन पैदा करने वाला एक ऐसा ही जाना-माना कारण है।

जोखिम कारकों में शामिल है:
1. उम्र- 45 साल से ज्यादा उम्र के पुरुष और 55 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने का ज्यादा जोखिम होता है।
2. तम्बाकू-लम्बे समय तक धूम्रपान करने से जोखिम में जबरदस्त वृद्धि हो सकती है।
3. हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप- हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तदाब धमनियों को नुकसान पहुंचाता है जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है।
4. उच्च कोलेस्ट्रॉल
5. डायबिटीज यानी मधुमेह
6. मोटापा
7. दिल के दौरे का पारिवारिक इतिहास
8. तनाव

संकेत और लक्षण

1. छाती या बांहों में बहुत ज्यादा दबाव या निचोड़ने की सनसनी जो गर्दन, जबड़ा या पीठ तक फ़ैल सकता है।
2. अपच, पेट की गैस और पेट दर्द।
3. सांस की कमी या सांस लेने में कठिनाई।
4. तीव्र या अनियमित दिल की धड़कन।
5. अत्यधिक ठण्ड में भी पसीना निकलना।
6. थकावट
7. हल्कापन या चक्कर आना

डायबिटीज के रोगियों को आम तौर पर काफी हद तक दर्द का अनुभव नहीं होता है और अक्सर एक ‘खामोश हमला’ होता है जो जानलेवा होता है क्योंकि अक्सर शीघ्र कोई कदम नहीं उठाया जाता है। 

जांच-पड़ताल
1. यह आम तौर पर एक चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति है जहाँ तुरंत आपकी हृदय दर और रक्तदाब पर नजर रखी जाएगी।
2. रोग की पहचान की पुष्टि करने के लिए तुरंत इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम किया जाएगा।
3. लक्षण इतिहास और पूर्व चिकित्सा इतिहास का आकलन किया जाएगा।
4. दर्द से राहत दिलाने वाली दवा जैसे सोर्बिट्रेट दिया जा सकता है और ऑक्सीजन दिया जाएगा। 
5. कुछ विशेष एंजाइमों की जांच करने के लिए खून की जांच की जाएगी जिससे हृदय की क्षति का पता चल सके जैसे ट्रोपिनिन I और सीपीके एमबी। अन्य अतिरिक्त जांच में शामिल है:
a. छाती का एक्स-रे
b. इकोकार्डियोग्राम
c. एंजियोग्राम या कार्डियक कैथेटराइजेशन
d. कार्डियक सीटी स्कैन

इलाज  

इलाज तुरंत शुरू हो जाता है क्योंकि दिल का दौरा एक चिकित्सीय आपातकालीन परिस्थिति है। 
A. चिकित्सीय इलाज: हृदय की क्षति के परिमाण को कम करने के लिए तुरंत दवा देनी चाहिए। दी जाने वाली दवाओं में शामिल है: 
1. कोई खून का थक्का होने पर उसे घुलाने के लिए थ्रोम्बोलाइटिक थेरपी
2. खून का थक्का बनने से रोकने के लिए एस्पिरिन और अन्य ब्लड थिनर जो किसी अन्य तरीके से दिल के दौरे को बढ़ा सकता है। 
 अन्य दवाओं में शामिल है:
1. एंटीप्लेटलेट एजेंट - नए थक्के बनने से रोकने के लिए।
2. दर्द निवारक
3. नाइट्रोग्लिसरीन - यह दवा, हृदय की मांसपेशी को विश्राम करने में और हृदय में खून के बहाव को बेहतर बनाने में मदद करती है।
 
B. सर्जिकल प्रक्रिया:
कोरोनरी एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग जहाँ धमनी को खुला रखने के लिए धमनी के भीतर एक धातु का जाल लगाया जाता है। 
कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी (सीएबीजी) जहाँ हृदय के प्रभावित क्षेत्र में खून के भाव के लिए एक नया मार्ग तैयार करने के लिए एक नस का इस्तेमाल किया जाता है।

जटिलताएं और आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

2 से 3 घंटे की समय सीमा में इलाज न करने पर हृदय को नुकसान पहुँच सकता है जैसे:
1. असामान्य हृदय लय जो जानलेवा भी हो सकता है।
2. हृदय विफलता या हार्ट फेल होना - दिल का दौरा पड़ने से हृदय ऊतक को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है जिससे कुशलतापूर्वक हृदय से खून पम्प नहीं हो पाता है।
3. हृदय भंग - हृदय मांसपेशी के हिस्से टूट सकते हैं जिससे नुकसान पहुँच सकता है।
4. हृदय कपाट सम्बन्धी समस्या- वे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और उनसे रिसाव भी हो सकता है जिससे गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
 
 
Content Details
Last updated on:
28 Dec 2016 | 12:02 AM (IST)
editorial-image
Want to know more?
Read Our Editorial Policy

ज़्यादा पूछे जाने वाले प्रश्‍न

अभी उपलब्ध नही है, जल्द ही अपडेट होगा