अस्थमा

डिस्क्रिप्सन

परिभाषा

अस्थमा या दमा, ब्रांकाई के गम्भीर संकुचन के द्वारा चिन्हित फेफड़ों के वायु मार्ग का एक दीर्घकालिक सूजन वाला रोग है। इसके कारण अस्थमा के क्लासिक लक्षण पैदा होते हैं जिसमें सांस लाने में अचानक कठिनाई की समस्या भी शामिल है। यह आम तौर पर एलर्जिक प्रतिक्रिया या अन्य प्रकार की अतिसंवेदनशीलता के परिणामस्वरूप होता है।
 
कारण और जोखिम कारक

शोधकर्ताओं के अनुसार, औसत रूप में, अस्थमा से पूरे विश्व में लगभग 300 मिलियन लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है। उनमें से 70 से 80 प्रतिशत प्रभावित लोगों की उम्र 18 साल से कम है। पर्यावरण और अनुवांशिक दोनों तरह के कारक, अस्थमा की समस्या उत्पन्न करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
1. पर्यावरणीय कारक: एलर्जेन जैसे धूलकण,तिलचट्टों के अवशेष, रोएंदार जानवर, भुकड़ी, पराग, वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन, तम्बाकू धूम्रपान, केमिकल, धुआं, ठंडी हवा, और अभ्यास के संपर्क में आने से चिरकालिक वायुमार्ग सूजन में प्रतिरक्षा- मध्यस्थता की घटनाओं का एक प्रपात पैदा होने से अस्थमा की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
2. आनुवंशिक कारक: अस्थमा संभवतः माता-पिता, दादा-दादी से विरासत में मिलता है।
3. बीटा-ब्लॉकर, एंजियोटेन्सिन को रूपांतरित करने वाला एंजाइम इन्हिबिटर, एस्पिरिन, और एनएसएआईडीएस जैसी दवाइयाँ अस्थमा की समस्या पैदा कर सकती हैं।
 
संकेत और लक्षण

अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देंगे जो एक दिन में कुछ बार से लेकर एक सप्ताह में कुछ बार तक दिखाई दे सकते हैं:
1. घरघराहट: घरघराहट एक सीटी बजने की आवाज जैसी होती है जो तब होती है जब आप साँस लेते हैं।
2. खांसी: खांसी अक्सर रात में और सुबह के समय बद से बदतर हो जाती है जिससे सोने में कठिनाई होती है। खांसी के साथ बलगम भी निकल सकता है।
3. छाती में जकड़न: आपको अपने छाती क्षेत्र में एक निचोड़ने / कुचलने की संवेदना का अनुभव होगा।
4. सांस की कमी: नियमित या मध्यम गतिविधि के बावजूद आपको सांस की कमी महसूस होगी।
 
जांच-पड़ताल

अस्थमा की पहचान लक्षणों के पैटर्न, चिकित्सीय इतिहास, पारिवारिक इतिहास, क्लिनिकल परीक्षा और जांच के आधार पर होती है।
चिकित्सीय इतिहास: आपका डॉक्टर आपसे अस्थमा के लक्षणों से संबंधित इतिहास के बारे में पूछेगा और यह कब और कैसे होता है।
पारिवारिक इतिहास:  अस्थमा का एक मजबूत पारिवारिक इतिहास एक व्यक्ति में इसके पाए जाने की सम्भावना को बढ़ा देता है।
टेस्ट में शामिल है
1. स्पाइरोमेट्री: इस जांच से इस बात का अनुमान मिलता है कि आप सांस लेते समय कितनी हवा अन्दर ले सकते हैं और सांस छोड़ते समय कितनी हवा छोड़ सकते हैं।
2. एलर्जी टेस्ट: यह पता लगाने के लिए यह अस्थमा संभवतः किस एलर्जेन के कारण हो रहा है।
3. पीक फ्लो: पीक फ्लो मीटर एक ऐसा उपकरण है जो यह मापता है कि आप कितनी जोर से सांस छोड़ सकते हैं। सामान्य पीक फ्लो रीडिंग से कम रीडिंग मिलने पर इस बात का संकेत मिलता है कि अस्थमा शायद बद से बदतर हो रहा है।
4. छाती का एक्स-रे: आपके फेफड़ों का स्कैन करने से पता चल सकता है कि बाहरी वस्तु या किसी अन्य रोग के कारण आपके अन्दर अस्थमा से संबंधित लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
5. अस्थमा की गंभीरता का आकलन करने के लिए ब्लड आईजीई लेवल टेस्ट किया जा सकता है। लेकिन, इससे अस्थमा की पहचान करने में मदद नहीं मिलती है।
 
इलाज

अस्थमा का कोई विशेष इलाज नहीं है। इलाज का लक्ष्य, इस रोग के लक्षणों को कम करना और नियंत्रित करना है। इलाज, अस्थमा की गम्ब्भिरता के आधार पर प्रदान किया जाता है जैसे आंतरायिक, कोमल, मध्यम, या गंभीर।

इसकी दवाइयों में जल्दी से राहत दिलाने वाली दवा और दीर्घकालिक दवा दोनों तरह की दवा शामिल है। 
1. जल्दी से राहत दिलाने वाली दवाइयाँ: अस्थमा के भड़क सकने वाले लक्षणों से जल्दी से राहत दिलाने के लिए ये दवाइयाँ लेने की सलाह दी जाती हैं। शॉर्ट-एक्टिंग बीटा-एड्रेनोसेप्टर एगोनिस्ट्स (एसएबीए) जैसे सैल्बुटामोल, एंटीकोलाइनर्जिक दवाइयाँ जैसे इप्राट्रोपियम ब्रोमाइड ऐसी दवाइयाँ हैं जो जल्दी से काम करके वायुमार्ग के आसपास की कसी हुई मांसपेशियों को शिथिल करती हैं जब आपका अस्थमा भड़क रहा होता है। यह वायुमार्ग को खुलने दे देता है ताकि हवा उनसे होकर बह सके। /div>
2. दीर्घकालिक दवा: आगे चलकर दीर्घकाल में इसकी तीव्रता को रोकने के लिए इस दवा को लेने का सुझाव दिया जाता है। अस्थमा को रोकने के लिए आम तौर पर कोर्टिकोस्टेरॉयड, लम्बे समय तक काम करने वाले बीटा-एड्रेनोसेप्टर एगोनिस्ट जैसे सैल्मेटेरोल और फ्रोमोटेरोल, ल्यूकोट्राइन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट का इस्तेमाल मिला-जुलाकर किया जाता है।
3. अस्थमा की समस्या से बचना: एलर्जेन जैसे कीड़े, पराग, वायु प्रदूषण, तम्बाकू धूम्रपान, जानवरों के रोएँ / रूसी, तेज गंध वाली शौच सामग्रियों के कम संपर्क में आने से अस्थमा के लक्षण कम हो सकते हैं।
4. अस्थमा के नियंत्रण के स्तर पर नजर: अस्थमा का इलाज एक चरणबद्ध चिकित्सा है। रोगी के लक्षणों की बारंबारता के आधार पर दवाइयों में फेरबदल करना पड़ता है। आगे चलकर सालों में अस्थमा को प्रबंधित करने में मदद करने के लिए एक डायरी में अपने अस्थमा के दौरों और संभावित ट्रिगरों का उल्लेख करते रहें।
 
जटिलताएं और आपको डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

इनमें से एक या एक से अधिक लक्षण दिखाई देने पर आपको एक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। ये लक्षण हैं लगातार खांसी, घरघराहट, छाती में कसाव और सांस की कमी, हांफना, चेहरे/होंठ का नीला पड़ना।
 
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Last updated on:
28 Dec 2016 | 12:02 AM (IST)
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